टिहरी बांध विस्थापितों की समस्या सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज के नेतृत्व में सार्थक पहल में प्रतापनगर का प्रतिपूर्ति एंव जिला बनाने का मुद्दा रहगया-जीतमणि पैन्यूली

Pahado Ki Goonj

प्रतापनगर को प्रतिपूर्ति देते हुए जिला बनाया जाय

टिहरी गढ़वाल के सांसद विजय बहुगुणा औऱ प्रदेश में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने जिला बनाने की पहल की है।

हमारी मांग की पहल विधायक विजय पंवार 2 फरवरी2002विधानसभा चुनाव से करते रहें हैं ।

देश में गोवा को 5लाख आवादी पर राज्य का दर्जा दिया जा सकता है तो प्रतापनगर को जिला क्यों नहीं बनाया जासकता है।भारत में मानव अधिकार की रक्षा के लिए काम करने वाले लोगों को भी पहल करनी चाहिए।

मेरी दृष्टि में टिहरी बांध देश के विकास का जहां प्रतीक है वहीं सरकार की इच्छा शक्ति के अभाव में प्रतापनगर की जनता के लिए विनास का प्रतीक होरहा है।

 

नई दिल्ली (पहाडोंकीगूँज )नई दिल्ली स्थित श्रम शक्ति भवन में राजकुमार सिंह, ऊर्जा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)भारत सरकार की अध्यक्षता में

टिहरी बांध परियोजना से प्रभावित 415 विस्थापित परिवारों के पुनर्वास संबंधित समस्याओं के निराकरण हेतु राजकुमार सिंह, ऊर्जा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)भारत सरकार के साथ प्रदेश के सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज के नेतृत्व में हुई बैठक के परिणाम दिखाई देंगें। तय किया गया कि टिहरी बांध विस्थापितों की सभी समस्याओं का समाधान न्यायालय की परिधि के बाहर किया जाएगा।

नई दिल्ली स्थित श्रम शक्ति भवन में राजकुमार सिंह, ऊर्जा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)भारत सरकार की अध्यक्षता एवं

उत्तराखंड के सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज के नेतृत्व में टिहरी बांध परियोजना से प्रभावित लोगों के विस्थापन एवं पुनर्वास के संबंध में हुई बैठक काफी सकारात्मक रहने की उम्मीद है। इतना ही नहीं इस बैठक में टिहरी बांध विस्थापितों से संबंधित तमाम मुद्दों पर सहमति बनने के साथ-साथ टिहरी बांध के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी राज्य के सिंचाई मंत्री के नेतृत्व में बैठक होने के अलावा विस्थापितों की सभी समस्याओं का समाधान होने की उम्मीद जगी है। उत्तराखंड के सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज के नेतृत्व में गए प्रतिनिधिमंडल में शामिल टिहरी सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह,प्रताप नगर विधायक विजय सिंह पंवार ,टिहरी विधायक धन सिंह नेगी, घनसाली विधायक शक्ति लाल शाह, के साथ श्रम शक्ति भवन नई दिल्ली में ऊर्जा राज्य मंत्री(स्वतंत्र प्रभार) भारत सरकार राजकुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक मे टिहरी बांध के 415 पात्र विस्थापित परिवारों को जमीन या धनराशि दिए जाने का निर्णय लेने के साथ ही लगभग सभी मुद्दों पर सहमति बनने के साथ-साथ 2 माह के अंदर समस्याओं के निस्तारण का भी निर्णय लिया गया। विस्थापितों की भूमि की वैल्यूएशन के लिए ऊर्जा सचिव भारत सरकार और सिंचाई सचिव उत्तराखंड सरकार को निर्देशित किया गया है।

 

टीएचडीसी मुख्यालय के स्थानांतरण को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए ऊर्जा मंत्री ने स्पष्ट किया कि टीएचडीसी का मुख्यालय ऋषिकेश में ही रहेगा। इसके साथ ही बैठक में निर्णय लिया गया कि टीएचडीसी के अधिकारियों और कर्मचारियों के समय-समय पर ट्रांसफर और प्रमोशन के लिए एक पॉलिसी बनाई जाएगी। टिहरी बांध विस्थापितों के लिए निःशुल्क सीवर और पानी की व्यवस्था के साथ ही आधे दाम पर बिजली देने के लिए जल्दी ही एक कमेटी गठित कर निर्णय लिया जायेगा। इसके साथ ही टिहरी बांध प्रभावित प्रताप नगर क्षेत्र के लिए 7 वोट एवं 2 बसों को चलाए जाने का निर्णय हुआ है। सर्वोच्च न्यायालय में प्रति शपथ पत्र पुनर्वास विभाग द्वारा टिहरी बांध परियोजना एवं समपार्श्विक क्षति नीति से प्रभावित होने वाले लगभग 415 परिवारों को पुनर्वास हेतु वन भूमि ना मिलने की दशा में प्रभावितों हेतु निजी भूमि क्रय करने का निर्णय लिया गया था। इस भूमि को टीएचडीसी द्वारा उपलब्ध कराया जाना था।बैठक में तय किया गया कि टीएचडीसी के पास उपलब्ध 21 हेक्टेयर भूमि को वह पात्र विस्थापितों को वापस करेगा। निर्णय लिया गया कि इस संबंध में न्यायालय में दायर सभी वादों को टीएचडीसी वापस लेगा। टिहरी बांध विस्थापितों की सभी समस्याओं का समाधान करने के साथ-साथ टिहरी बांध विस्थापितों जिन्हें पूर्व में ट्रेनिंग एवं फीस में छूट दी जाती थी, उसे भी यथावत रखने का भी निर्णय लिया गया है। सेदुल के घनसाली महाविद्यालय के भवन निर्माण के लिए सीएसआर फंड से धनराशि दिए जाने का निर्णय लिए जाने के साथ-साथ घाटों के लिए भी पैसा दिए जाने की बात कही गई है। प्रदेश के सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि आज की बैठक के परिणाम काफी सार्थक रहे हैं। विस्थापितों की समस्याओं को ऊर्जा राज्य मंत्री द्वारा सुना गया और न्यायालय की परिधि से बाहर उनका समाधान करने की बात भी कही। टिहरी विधायक धन सिंह नेगी ने कहा कि विस्थापितों की सभी समस्याओं का निदान 2 महीने की समय सीमा के भीतर किए जाने का निर्णय लिया गया है जो कि काफी सकारात्मक है निश्चित रूप से हम कह सकते हैं कि अब टिहरी बांध विस्थापितों की समस्याओं का निस्तारण शीघ्र ही संभव हो पाएगा।

टिहरी बांध से सबसे ज्यादा प्रवाभित प्रतापनगर को प्रतिपूर्ति के लिए संलग्न पत्र एवं जिला बनाने की टिहरी गढ़वाल के सांसद विजय बहुगुणा ने अखलेश व्यास द्वारा लिए गये पहाडोंकीगूँज मासिक पत्रिका के इंटरव्यू में दिया

औऱ 8 नवम्बर 2020 को प्रदेश में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने जिला बनाने की दोबरा चांठी पुल के उद्धघाटन के समय जनता के दर्द को महसूस करते हुए अपने भाषण से पहल की है।

जीतमणि पैन्यूली संयोजक टिहरी बांध प्रभावित संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तराखंड सरकार ने प्रतापनगर प्रभावित छेत्र में बांध निर्माण से होने वाली असुविधा के कारण सरकार की इच्छा शक्ति के अभाव में काला पानी बनाने जारहे हैं।

इलाके को होने वाले नुकसान को देखते हुए 22 फरवरी1996 में लम्बगांव बैठक बुलाई गई। 5,6

दिसम्बर 2003 में इन्टरकालेज कोटाल गावँ विकास मेले में 2004 कोटाल गाँव विकास मेले में पहल की गई।

2005 देहरादून

पैन्यूली जी सन्देश मासिक पत्रिका के प्रकाशन के 59दिन बाद

26 जनवरी2006 से लम्बगांव में चलाए गये जन आंदोलन में केशव रावत पत्रकार ,भान सिंह नेगी,चन्द्रभान बगियाल ने सुरु कर दिया ,इससे पूर्व टिहरी स्नाकोत्तर महाविद्यालय की छात्रा मकानी देवी की नो दिन की भूख हड़ताल में खर्च की गई जन धन शक्ति को मुकाम हासिल करने के उद्देश्य से चावाड़ बैंड पर 1जुलाई2008 से प्रारंभ किये गये आंदोलन को समाप्त करने के लिए 2009में सँवेदनशील जन प्रिय जिलाधिकारी सौजन्य जावलकर एंव सचिन कुर्वे (दोनों अधिकारी शासन में प्रदेश में सेवा देरहे हैं )द्वारा जनता की परेशानियों का आकनकलन भर्मण कर किया और टिहरी जल विकास निगम के साथ हुए समझौते के अनुपालन में उत्तराखंड शासन के द्वारा 5 जनवरी2010 को ऊर्जा मंत्रालय भारत सरकार को भेजे गये पत्र पर कार्यवाही नहीं करना जनता के द्वारा राष्ट्रीय विकास के लिए बांध निर्माणमें दी गई की कुर्वानी की अनदेखी करना ।सभ्य समाज की एक लाख आवादी के रिश्तेदार तक को असुरक्षित महसूस होगया है बांध की उम्र आर टी आई से प्राप्त जनकारी के अनुसार अब93 साल बची हुई है । अब सोचो 15 वर्ष में प्रतापनगर में किसी विद्यालय में प्रधानाचार्य नहीं है डाक्टर नहीं है। 59 बेसिक के स्कूल बंद होगये यह हमारी बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं और अपने को बड़े नेताओं की श्रेणी में शामिल करने के लिए अपनी बुद्धि का प्रदर्शन करते हुए दुनिया का सबसे कमजोर मनुष्य बताने में लगे हुए हैं।मनुष्य मनन करता है तब तो मनुष्य है ।हमने मनन किया और आंदोलन किया अब कुछ लोगों ने छेत्र का स्वास्थ्य खराब करके अपने

स्वार्थ सिद्ध कर दिया है ।जब हम अपने को बड़े बुद्धिमान समझने लगे हैं thdc से चांदना कुर्सी, बारात घर बवानाने चक्कर में वर्ष 2005 से अबतक 4000 हजार परिवार स्वास्थ्य, शिक्षा बेरोजगारी ,बांध से इलाके की दूरी बढ़ने महंगाई के चलते पलायन करगये हैं।

इसकी भरपाई नही हो रही है ।केन्द्र सरकार को प्रतापनगर जनता के लिए किये गए समझौते को शीघ्र लागू कर देना चाहिए और यदि यह सरकार से सम्भव नहीं होता है तो हमारे पास नदी है।हमारी सभ्यता को बचाने के लिए टिहरी बांध का मालिकाना हक देकर संचालन प्रबंधन प्रतापनगर की जनता को देना चाहिए । वह टिहरी बांध से होरही परेशानी को दूर करते हुए बांध का सफल संचालन करेगा। बांध प्रशासन इतना संवेदन हीन है कि समझौते के 8 अरब रुपये नहीं दे रहे हैं और कर्जे लेकर बांध कर्मचारियों ऋण देकर हो रहे अनावश्यक खर्चे पर रोक लगने लगेगी। बांध परिवार टी यच डीसी का यह आलम है कि 2005 के पहले से उन्होंने अपनी सुख सुविधाओं पर 10 अरब से ज्यादा खर्चा कर दिया है ।कॉम करने के नाम पर अपने परिवार के लोगो के यन जी ओ ,और फर्म बना कई प्रकार के व्यपार कर रहे हैं सरकारी इंटरनेट से अपने कॉम कर वेतन निगम से ले कर सालाना 50 अरब का नुकसान लोक वित्त का होरहा है संयोजक पैन्यूली ने 2014-15 को नई टिहरी में प्रदेश के कैबनेट मंत्री प्रीतम सिंह की अध्यक्षता मेंसर्व सम्मत अधिकार प्राप्त कमेटी की बैठक में प्रति पूर्ति देना सुनिश्चित किया गया था। पर बांध के उच्च अधिकारियों का प्रतापनगर से कोई भावनात्मक लगाव नहीं होने से मानवता को वह दानवता में परिवर्तन कराने के लिए न्यायालय का सहारा लेकर जनता को जलील कर लोक वित्त का दुरुपयोग कर रहा है ।इनके खर्चो की सीबीआई जांच होनी चाहिये ।साथ हीआंदोलन की सरल भाषा बांध प्रशासन को समझने का प्रयास करना चाहिए।जन भावनाओं का

सम्मान के लिए समन्वय स्थापित करना चाहिए

Thdc की 5 लाख 15साल का व्याज सहित अन्य बिजली ,बांध के छेत्र में दुकानों का व्यबसाइक प्लॉटों, नाव चलाने के लाइसेंस प्रवाभितों 100 यूनिट बिजली निशुल्क देते हुए कोचिंग संस्थान स्वास्थ्य चिकित्सा सूविधा खोल कर जनता को लाभ देना चाहिए। वहां कमीशन खोरी के लिए वर्तन ,ख़ुर्शी ठेकेदार भवन बना कर जनता को 16वीं सदी जाने के लिएछोटी सोच से राजनीति करते हुए चाटूकारों के कारण एक राज्य की सबसे जागरूक आवादी को इच्छा शक्ति के आभाव में टिहरी बांध के अधिकारियों का गुलाम बनाने का काम किया जा रहा है। जन सरोकार को प्रमुखता देने वाले जहां देश मे बलि प्रथा सर्व प्रथम बन्द करने, कन्या बिक्रय, शराब बंदी ,पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा का जीवन मे महत्वपूर्ण समझते हुए आजादी से पहले विद्यालय बनाया और इतनी मजबूती कार्यो को दी कि सूखे पत्थरों की चिनाई के ऊपर लम्बगांव बाजार के पके मकान बनाये गये हैं यह दुनिया में निर्माणाधीन कार्यो का अपने पूर्बजों की जन सेवा को चाटूकारों ने अपमानित कर दिया है।और क्रांतिकारी की जगह चाटूकारों का बाजार प्रतापनगर की जनता में पैदा कर दिया गया है ।इन के व्यवहार से नरकीय जीवन जीने की ओर प्रतापनगर के लोग मजबूर कर दिये जारहे हैं।हमें राष्ट्र निर्माण के लिए विक्टिम बनाया गया है।देश मे जब गोवा जैसी 5 लाख आवादी को उस समय एक राज्य देश हित में सरकार बना सकती है तो प्रतापनगर की जनता ने बांध बनाने के लिए दिगई कुर्वानी से 24 करोड़ राजस्व रोज देगा वर्तमान में रोज16 करोड़ के राजस्व बिजली से मिल रहा है। 70 लाख लोगों को दिल्ली उत्तरप्रदेश में पीने का पानी साथ ही 3लाख 50 हजार हेक्टेयर से ज्यादा अतिरिक्त सिचाई की सुविधाओं से राजस्व प्राप्ति हो रही है। तो जिला क्यों नहीं बना सकते हैं।सिर्फ और सिर्फ हमारे निजी स्वार्थ की पूर्ति से बिलम्ब होरहा है।जनता के लिए सरकार की ओर से की जारही अनदेखी उचित नहीं है।संयोजक पैन्यूली को पूर्ण विश्वास है कि देश विदेश में लोकप्रिय मंत्री सतपाल महाराज नैतिकता प्रभु के प्रति मानवता को बढ़ाना मानव सेवा उनका मूल मंत्र है। कि जनता एंव जन प्रतिनिधियों की समस्याओं को सुलझाने के लिए कार्य करेंगें। प्रतापनगर जिला बनाने के लिए विजय बहुगुणा को भावी मुख्यमंत्री बनाने की घोषणा पत्र के सम्पादक एंव संयोजक पैन्यूली ने लम्बगांव सितंबर 2007 में की तो 1998 से चुनाव लड़ते लड़ते टिहरी गढ़वाल के आखिरी महाराजा मानवेन्द्र साह के स्वर्गवास होने के बाद बिली के भाग से छीकें टूटने वाली बात जनता ने होने कही है। पर इस बात को सुनकर उन्होंने माथा मेरी ओर घूम कर अनहोनी जैसे प्रकट किया।परन्तु हमारे कहे शब्द बेकार नहीं जाते हैं उनको1998 में चुनाव लड़ने की प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाकर दी थी जब उसके अनुसार कार्य किया गया तब ही उनका सांसद बनाना सम्भव होसका। फिर मुख्यमंत्री होने पर उन्हें हम प्रतापनगर वासी याद नहीं आये।यह न्यायाधीश न्यायमूर्ति रह चुके बहुगुणा जी का व्यवहार चापलूसों की वजह से सामाजिक नहीं रहा है। यहां उतर द्वारिका कृष्ण भगवान की भूमि पर जो किसी के लिए बोला गया वह हुआ।इसी क्रम में विकास पुरूष पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी जी ने 21 फरवरी2010 को उर्जा मंत्री सुशील कुमार सिंदे जी से वार्ता कर मिलने का समय मांगाते हुये कहा कि आपके चुनाव में मैं दोबार प्रचार करने गया थे उन्होंने तिवारी जी का आभार व्यक्त करते हुए हमरा मिलने का समय तय ऊर्जा मंत्री से तय किया गया। परन्तु सांसद बहुगुणा के समय पर नही मिलने से बैठक ठीक से नहीं हो पाई उसके बाद हमारी नाराजगी से वह सिंदे भी अपने पद पर नहीं रहे सके।भगवान बद्रीविशाल की कृपा से मनन कर कहा गई हमारी वाणी कारगर सिद्ध होती रहती है।


श्रम शक्ति भवन में आयोजित की इस बैठक में

सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज, टिहरी सांसद श्रीमती माला राज्य लक्ष्मी शाह, टिहरी के विधायक धन सिंह नेगी घनसाली विधायक सत्य लाल सहा प्रताप नगर विधायक विजय सिंह पवार सिंचाई सचिव नितेश झा ,टिहरी के जिलाधिकारी एवं डायरेक्टर पुनर्वास ईवा आशीष श्रीवास्तव एवं सिंचाई विभाग के ओएसडी सहित पुनर्वास विभाग के अधिकारी मौजूद थे।

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