
चारधाम यात्रा: सुरक्षा, सुगम दर्शन और संवाद पर जोर
मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि यात्रा प्रबंधन का मूल मंत्र “सुरक्षित यात्रा, सुगम दर्शन और सतत संवाद” होना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और मानसून के दौरान सभी विभागों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी।
प्रमुख निर्देश
रात्रि 10 बजे से सुबह 4 बजे तक चारधाम यात्रा मार्गों पर वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध का सख्ती से पालन कराया जाए।
ट्रक एवं अन्य भारी वाहनों को केवल रात्रिकाल में ही संचालन की अनुमति दी जाए।
चारों धामों में श्रद्धालुओं की संख्या के अनुरूप दर्शन व्यवस्था के लिए विस्तृत एसओपी तैयार की जाए।
भीड़ प्रबंधन वैज्ञानिक एवं चरणबद्ध तरीके से किया जाए ताकि धामों में अव्यवस्था न हो।
होल्डिंग एरिया एवं चेक प्वाइंट्स पर पार्किंग, भोजन, पेयजल, शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
सूचना व्यवस्था पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि यात्रियों को किसी भी स्थिति में सूचना के अभाव का सामना न करना पड़े। इसके लिए:
सार्वजनिक सूचना प्रणाली,
एलईडी डिस्प्ले,
सोशल मीडिया,
व्हाट्सएप चैनल,
एफएम रेडियो
के माध्यम से मौसम, यातायात, मार्ग अवरोध और दर्शन व्यवस्था संबंधी अपडेट लगातार प्रसारित किए जाएं।
मानसून को देखते हुए तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रा अब अधिक चुनौतीपूर्ण चरण में प्रवेश कर रही है, जहां मानसून और खराब मौसम बड़ी चुनौती होंगे। संवेदनशील स्थानों पर:
जेसीबी एवं पोकलैंड मशीनें,
सैटेलाइट फोन,
एम्बुलेंस,
राहत एवं बचाव उपकरण
पहले से उपलब्ध रखे जाएं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
स्वास्थ्य एवं स्वच्छता पर फोकस
गंभीर मरीजों के लिए हेली एम्बुलेंस सेवा हेतु राज्य स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा।
पैदल यात्रा मार्गों पर पर्याप्त शौचालय एवं नियमित सफाई सुनिश्चित की जाएगी।
Kedarnath पैदल मार्ग पर श्रद्धालुओं के लिए अतिरिक्त शेड और वर्षा-धूप से बचाव की व्यवस्था की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने चारधाम यात्रा से जुड़े सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को यात्रा व्यवस्थाओं की निरंतर निगरानी, नियमित समीक्षा और श्रद्धालुओं की समस्याओं के त्वरित समाधान के निर्देश दिए।

