देहरादून। गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने के लिए प्रदेश सरकार और विपक्ष दोनों ही गंभीर नहीं है। हाल ही संपन्न हुए विधानसभा सत्र में इस गंभीर मुद्दे को लेकर जनप्रतिनिधियों ने चर्चा तक नहीं की। यह बात रविवार को एक राज्य एक राजधानी की मांग को लेकर अंशन पर बैठे बनारस निवासी सामाजिक कार्यकर्ता प्रवीण काशी ने कही।
दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र रहे प्रवीण काशी कहा कि उत्तराखंड राज्य में बड़ी संख्या में बेरोजगार युवा धरना प्रदर्शन करने के लिए मजबूर हो चुके हैं। बावजूद एक ही प्रदेश में दो राजधानियों का खर्च उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से पूरी उम्मीद थी कि वह गैरसैंण को स्थाई राजधानी घोषित करेंगे। लेकिन वहां सत्र तक नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि महंगाई बढ़ने से लोगों के लिए दो वक्त की रोजी रोटी मुश्किल से मिल पा रही है। राज्य आंदोलनकारी गुरदीप कौर ने कहा गैरसैंण स्थाई राजधानी नहीं बनना शहीदों का अपमान है। एडीआर के संयोजक मनोज ध्यानी ने बताया कि भ्रष्ट नेता कभी भी गैरसैंण को स्थाई राजधानी नहीं बनाएंगे। आमरण अनशन को समर्थन देने वालों में रविंद्र प्रधान, मदन भंडारी, विनोद गैरोला हेमचंद्र तिवारी आदि शामिल रहे।
बाबा रामदेव ने की सीडीएस जनरल बिपिन रावत को भारत रत्न देने की मांग
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