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उत्तराखंड की ताजा खबरे पढ़ें।

Pahado Ki Goonj

गर्मी में बच्चों को पानी पीने के लिए राज्य के हर स्कूल में बजेगी वॉटर बेलः सीएस
ग्रीष्म ऋतु की समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने दिए निर्देश
छात्र-छात्राओं को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए लिया गया निर्णय
बसों, स्टेशन, बाजार में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था किए जाने के भी निर्देश दिए
गर्मी में आपात स्थिति के लिए कंट्रोल रुम स्थापित करने के दिए आदेश
देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सभी विद्यालयों में नियमित अंतराल पर वॉटर बेल बजाने के निर्देश दिए हैं, ताकि प्रत्येक छात्र-छात्राएं गर्मियों के मौसम में नियमित अंतराल पर पानी पी सकें और डिहाइड्रेशन से बचाव सुनिश्चित हो। मुख्य सचिव ने बुधवार को ग्रीष्मकाल में हीटवेव की तैयारियों को लेकर शासन के उच्चाधिकारियों के साथ बैठक ली। उन्होंने विद्यालय के समय में आवश्यकतानुसार परिवर्तन करने, कक्षाओं में पर्याप्त वेंटिलेशन, ओआरएस एवं आवश्यक दवाओं का भंडारण किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को हीट वेव से बचाव सम्बन्धी व्यवहारिक जानकारी देना सुनिश्चित किया जाए। राज्य में बढ़ते तापमान एवं संभावित हीट वेव की स्थिति को देखते हुए सभी स्कूलों में विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता पर रखी जाए। साथ ही उन्होंने जिलाधिकारियों को गर्मियों के मौसम में जिन भी क्षेत्रों में पानी की किल्लत हो, वहां सभी निर्माण कार्यों पर अस्थायी रोक लगाए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बसों, स्टेशन, बाजार में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने के भी निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि हीट वेव की चुनौती से निपटने के लिए राज्य से लेकर ग्राम स्तर तक सभी विभाग समन्वित एवं सक्रिय रूप से कार्य करें। प्रत्येक जनपद में हीट वेव एक्शन प्लान तैयार करते हुए संवेदनशील (हॉटस्पॉट) क्षेत्रों की पहचान की जाए तथा वहां विशेष निगरानी एवं राहत व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। इसके साथ ही 24×7 कंट्रोल रूम संचालित कर किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था सुदृढ़ रखी जाए।
मुख्य सचिव ने पेयजल की उपलब्धता को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए निर्देश दिए कि शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक स्थानों, बाजारों, बस स्टैंड, पंचायत भवनों आदि पर स्वच्छ पेयजल की सतत उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। जिन क्षेत्रों में जल संकट की संभावना है, वहां अग्रिम कार्ययोजना बनाकर टैंकरों की व्यवस्था, नलकूपों एवं पंपिंग सिस्टम की नियमित निगरानी तथा वैकल्पिक जल आपूर्ति व्यवस्था तैयार रखी जाए। उच्च मांग की स्थिति में आपूर्ति बाधित न हो, इसके लिए अतिरिक्त संसाधनों की पूर्व व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
इस अवसर पर सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, सीसीएफ सुशांत कुमार पटनायक, डॉ. पराग मधुकर धकाते,सी. रविशंकर, विनोद कुमार सुमन एवं रणवीर सिंह चौहान सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं जनपदों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलाधिकारी उपस्थित थे।

हीट वेव से प्रभावित मरीजों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को दुरूस्त करने को कहा
देहरादून। मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य सेवाओं के संदर्भ में निर्देशित किया कि सभी चिकित्सालयों में हीट वेव से प्रभावित मरीजों के उपचार के लिए पर्याप्त बेड, समर्पित वार्ड, आवश्यक दवाइयां, ओआरएस एवं आइस पैक की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। एम्बुलेंस सेवाओं को सुदृढ़ रखते हुए उनमें आइस पैक तथा ओआरएस अनिवार्य रूप से रखा जाए तथा चिकित्सा एवं पैरामेडिकल स्टाफ को हीट वेव प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित किया जाए। आमजन को हीट वेव के लक्षण, बचाव एवं प्राथमिक उपचार के सम्बन्ध में व्यापक रूप से जागरूक किया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि चिकित्सालयों में मरीजों के बैठने के स्थान पर शेड और पंखे हों।

गर्मी में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा पर दिया विशेष बल
देहरादून। मुख्य सचिव ने हीटवेव के दौरान श्रमिकों एवं खुले में कार्य करने वाले लोगों की सुरक्षा पर विशेष बल देते हुए निर्देश दिए कि कार्य समय में आवश्यकतानुसार परिवर्तन किया जाए, विशेषकर दोपहर के समय भारी कार्य से बचा जाए। कार्यस्थलों पर छायादार विश्राम स्थल, आइस पैक, स्वच्छ पेयजल, ओआरएस तथा प्राथमिक उपचार की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही श्रमिकों को हीट वेव से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक स्थानों पर अस्थायी आश्रय (कूलिंग स्पेस), पानी के प्याऊ व वॉटर कियोस्क स्थापित किए जाएं तथा जरूरतमंद लोगों तक पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। पार्कों को अधिक समय तक खोलने, गरीब एवं संवेदनशील वर्गों तक राहत पहुंचाने तथा पशुओं के लिए भी पानी एवं शेल्टर की समुचित व्यवस्था करने पर विशेष जोर दिया गया।

निर्बाध विद्युत आपूर्ति करने के दिए निर्देश
देहरादून। मुख्य सचिव ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर निर्देश दिए कि बढ़ती मांग को देखते हुए निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। ट्रांसफार्मर एवं अन्य आवश्यक उपकरणों का पर्याप्त स्टॉक रखा जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में गैस आपूर्ति प्रभावित होने के चलते किचन में विद्युत उपकरणों के प्रयोग में वृद्धि हुई है। सामान्यतौर पर गर्मियों में एसी, पंखे, कूलर के कारण विद्युत मांग में वृद्धि रहती है। इसलिए बिजली की मांग इस सीजन बढ़ सकती है, लिहाजा उच्च मांग के समय वैकल्पिक योजना तैयार रखते हुए आवश्यक सेवाओं पर प्रभाव न पड़ने दिया जाy

प्रदेश में 50 स्विफ्ट स्कूलों का होगा शुभारंभः डॉ. धन सिंह
शिक्षा विभाग व कॉन्व जीनियस फाउण्डेशन के बीच हुआ एमओयू साइन
सीएसआर फंड से छात्र-छात्राओं को वितरित किये जायेंगे 1000 लैपटॉप

देहरादून। विद्यालयी शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्रदेशभर में 50 ‘स्विफ्ट स्कूल’ स्थापित किये जायेंगे। इसके लिये शिक्षा विभाग एवं कॉन्वजीनियस फाउण्डेशन के बीच एक महत्वपूर्ण एमओयू साइन हुआ है। जिसके तहत इन विद्यालयों में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिये आधुनिक तकनीक युक्त डिजिटल अवसंरचना विकसित की जायेगी। साथ ही कॉन्वजीनियस फाण्डेशन एमेजन वेब सर्विस के सहयोग से छात्र-छात्राओं को 1000 लैपटॉप भी वितरित करेगा। स्विफ्ट स्कूलों की स्थापना के लिये विभाग द्वारा स्कूलों का चयन कर लिया गया है, साथ ही विभागीय अधिकारियों को स्वीफ्ट स्कूलों के शीघ्र संचालन को निर्देश दे दिये गये हैं।
सूबे के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि राज्य सरकार नई शिक्षा नीति-2020 के प्रावधानों के अनुरूप प्रदेश की शिक्षा प्रणाली को तकनीकी आधारित बनाने के लिये निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में समग्र शिक्षा एवं कॉन्वजीनियस फाउण्डेशन के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन साइन हुआ है। जिसके तहत प्रदेशभर में 50 ‘स्विफ्टस्कूल’ की स्थापना की जायेगी। डॉ. रावत ने बताया कि ‘स्विफ्ट स्कूल’ एक एकीकृत विद्यालय परिवर्तन मॉडल है। जिसमें व्यक्तिगत शिक्षण, कक्षाओं में आधुनिक तकनीक का उपयोग, शिक्षकों को डेटा आधारित सहायता के साथ ही डिजिटल अवसंरचना का समावेश होगा। जिससे छात्र-छात्राओं को उनके सीखने के स्तर के अनुसार शिक्षा देने में मदद मिलेगी साथ ही शिक्षकों को डेटा आधारित जानकारी मिलेगी जिससे वह कक्षा में अधिक प्रभावी अध्यापन कर सकेंगे। स्विफ्ट स्कूलों में तकनीकी के माध्यम से बच्चों के सीखने की कमियों की समय पर पहचाना कर उन्हें आवश्यक शैक्षणिक सहायता भी उपलब्ध कराई जायेगी। विभागीय मंत्री ने बताया कि कॉन्वजीनियस फाउण्डेशन प्रदेश में सीएसआर आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने में भी मदद कर रहा है। अपनी इस पहल के तहत फाउण्डेशन द्वारा अमेजन वेब सर्विस के सहयोग से 1000 लैपटॉप छात्र-छात्राओं को वितरित किये जायेंगे ताकि प्रदेश में स्विफ्ट स्कूलों के क्रियान्वयन को मजबूत आधार मिल सके। डा. रावत ने बताया कि स्विफ्ट स्कूलों के संचालन को विभाग द्वारा प्रदेशभर में 50 विद्यालयों का चयन कर लिया गया है, जिसमें पौड़ी व चम्पावत जनपद के 19-19 तथा देहरादून व हरिद्वार जनपद के 6-6 विद्यालय शामिल है। उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारयों को स्विफ्ट स्कूलों के शीघ्र संचालन के निर्देश दे दिये गये हैं ताकि बच्चों को जल्द से जल्द तकनीकी आधारित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिल सके।

संपर्क क्रांति ट्रेन में पिस्टल की नोक पर 7 लाख की लूट
रुद्रपुर से दिल्ली जा रहे थे पीड़ित, ट्रेन से कूदकर फरार हुए बदमाश

रुद्रपुर। उधम सिंह नगर के रुद्रपुर से दिल्ली जा रहे दो कर्मचारियों से चलती ट्रेन में हथियारों के बल पर 7 लाख रुपए लूटने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बदमाश बिलासपुर स्टेशन के पास ट्रेन की रफ्तार धीमी होते ही कूदकर फरार हो गए। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और जल्द गिरफ्तारी का दावा कर रही है।
ट्रेन में एक बड़ी लूट की घटना ने यात्रियों में दहशत फैला दी है। जानकारी के अनुसार, रुद्रपुर के सिंह कॉलोनी स्थित जपनीत ऑटो में कार्यरत दो कर्मचारी रितिक मंडल और साहिब सिंह दिल्ली से ऑटोमोबाइल का सामान खरीदने के लिए संपर्क क्रांति ट्रेन से रवाना हुए थे। बुधवार सुबह दोनों रुद्रपुर रेलवे स्टेशन से ट्रेन में सवार हुए थे।
बताया जा रहा है कि दोनों कर्मचारियों के पास करीब सात लाख रुपए नकद थे, जिन्हें उन्होंने सुरक्षा के लिए बेल्ट में बांधकर कमर पर रखा हुआ था। आशंका जताई जा रही है कि किसी तरह बदमाशों को इस रकम की भनक लग गई थी। इसी दौरान तीन संदिग्ध बदमाश भी उसी ट्रेन में सवार हो गए और पूरे समय कर्मचारियों पर नजर बनाए रखी।
जैसे ही ट्रेन यूपी के बिलासपुर रेलवे स्टेशन के पास पहुंची और उसकी रफ्तार धीमी हुई। बदमाशों ने मौके का फायदा उठाया। उन्होंने अचानक रितिक मंडल और साहिब सिंह को घेर लिया और उनके सिर पर तमंचा और पिस्टल तान दी। भयभीत कर्मचारियों से उन्होंने 7 लाख रुपए लूट लिए। लूट की वारदात को अंजाम देने के बाद बदमाशों ने हवाई फायरिंग भी की, ताकि कोई उनका पीछा न कर सके। इसके बाद वे चलती ट्रेन से कूदकर मौके से फरार हो गए। घटना के बाद ट्रेन में अफरा-तफरी मच गई और पीड़ित कर्मचारियों ने तुरंत इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दी।
घटना की जानकारी मिलते ही व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय जुनेजा के नेतृत्व में कई व्यापारी रुद्रपुर रेलवे स्टेशन पहुंचे और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) चौकी प्रभारी संतोष कुमार मीणा से मुलाकात की। व्यापारियों ने इस घटना पर गहरी नाराजगी जताते हुए आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की। आरपीएफ चौकी प्रभारी संतोष कुमार मीणा ने बताया कि, मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी गई है। बिलासपुर रेलवे स्टेशन और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि बदमाशों की पहचान की जा सके। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
वहीं, व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय जुनेजा ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि, इस तरह की वारदातें व्यापारियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि रेलवे और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके।

हरिद्वार मनसा देवी मंदिर से गंगोत्री धाम भेजा गया प्रसाद, 19 अप्रैल को खुलेंगे कपाट

हरिद्वार। मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट की ओर से हर साल की तरह इस बार भी गंगोत्री धाम के लिए खाद्य सामग्री से भरा ट्रक रवाना किया गया। चरण पादुका मंदिर परिसर से यह ट्रक विधिवत पूजा अर्चना के बाद गंगोत्री धाम के लिए भेजा गया, जहां मंदिर के कपाट खुलने पर इसी सामग्री से बने प्रसाद का विशेष भोग अर्पित किया जाएगा।
इस अवसर पर निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रामरतन गिरी महाराज ने ट्रक को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। वहीं गंगोत्री धाम के रावल शिव प्रकाश महाराज ने चरण पादुका मंदिर में पूजा अर्चना कर यात्रा के सफल और मंगलमय होने की कामना की। मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट द्वारा भेजी गई खाद्य सामग्री से तैयार प्रसाद हजारों श्रद्धालुओं में वितरित किया जाएगा, जिससे धार्मिक आस्था और सेवा परंपरा को आगे बढ़ाया जाएगा। निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रामरतन गिरी ने कहा कि हर वर्ष गंगोत्री धाम के कपाट खुलने के बाद सबसे पहले जिस प्रसाद का भोग लगाया जाता है, वो हरिद्वार की मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट की ओर से लगाया जाता है।
इसलिए खाद्य सामग्री से ट्रक भरकर हरिद्वार से गंगोत्री धाम भेजा गया है। उनकी मां गंगा और मां मनसा देवी से यही कामना है कि इस वर्ष भी चारधाम यात्रा अपने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़कर दिव्य और भव्य तरीके से संपन्न हो। गंगोत्री धाम के रावल शिवप्रकाश महाराज ने कहा कि चारधाम यात्रा को लेकर सरकार की ओर से भव्य और दिव्य तैयारियां की गई है। 18 अप्रैल को मां गंगा की दिव्य उत्सव डोली यात्रा मुखीमठ से गंगोत्री धाम के लिए प्रस्थान करेगी। पूरे विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करने के पश्चात आगामी 19 अप्रैल को 12 बजकर 15 मिनट पर गंगोत्री धाम के कपाट खोल दिए जाएंगे।
मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट की ओर से भेजी गई खाद्य सामग्री से बने प्रसाद से भोग लगाया जाएगा और भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा। उन्होंने मां गंगा और मां मनसा देवी से इस वर्ष भी चारधाम आने वाले यात्रियों के लिए सुखद और सुरक्षित यात्रा पूर्ण करने की कामना की है। गौर हो कि यह परंपरा वर्षों पुरानी है, जो बीच में किन्हीं कारणों से बंद हो गई थी, लेकिन गंगोत्री धाम के रावल शिवप्रकाश महाराज और मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज के प्रयास से इसे फिर से शुरू किया गया है। पिछले कई सालों से यह परम्परा अनवरत जारी ।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम”सशक्त भारत की ओर ऐतिहासिक कदमः माला राज्य लक्ष्मी शाह
देहरादून। महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में आज का दिन भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक स्वर्णिम एवं युगांतकारी अध्याय के रूप में सदैव अंकित रहेगा। यह केवल एक विधायी उपलब्धि नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी को समान अवसर, सम्मान और निर्णायक भागीदारी प्रदान करने का सशक्त संकल्प है। इस गौरवपूर्ण अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी, संवेदनशील एवं दृढ़ नेतृत्व के प्रति हार्दिक आभार एवं अभिनंदन व्यक्त किया जाता है। उनके नेतृत्व में पारित “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” महिलाओं को सशक्त, आत्मनिर्भर एवं निर्णय प्रक्रिया में सहभागी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।
यह अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीय महिलाओं के सपनों, संघर्षों और उम्मीद को नई दिशा देने वाला एक व्यापक सामाजिक-राजनीतिक परिवर्तन का माध्यम है। इसके माध्यम से महिलाओं की भागीदारी पंचायत से लेकर संसद तक और अधिक सुदृढ़, संगठित एवं प्रभावशाली होगी, जिससे लोकतंत्र की जड़ों को मजबूती मिलेगी। देवभूमि उत्तराखंड की पावन भूमि, जो वीरांगनाओं और मातृशक्ति के अद्वितीय योगदान के लिए जानी जाती है, जिसमें स्वतंत्र भारत की पहली महिला सांसद राजमाता कमलेंदु मति शाह चाहे वह रानी कर्णावती, तिलू रौतेली, गौरा देवी या पर्वतारोही बचेंद्री पाल जैसी प्रेरणास्रोत विभूतियाँ होंकृइन सभी ने समाज में महिलाओं की भूमिका को नई ऊँचाइयाँ प्रदान की हैं।
इस ऐतिहासिक क्षण के हम सभी आज साक्षी बनते हुए गौरवान्वित है।
उत्तराखंड की महिलाएं सदियों से विषम भौगोलिक परिस्थितियों में भी अद्वितीय साहस, त्याग, श्रम और समर्पण का परिचय देती रही हैं। उन्होंने न केवल अपने परिवारों को सशक्त बनाया है, बल्कि सामाजिक परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक सशक्तिकरण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वे वास्तव में समाज की आत्मा और विकास की आधारशिला हैं। आज भारत की बेटियां अंतरिक्ष, विज्ञान, रक्षा, खेल, शिक्षा, उद्यमिता और स्टार्टअप जैसे हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं। यह नए भारत की आत्मविश्वासी, आत्मनिर्भर और सशक्त नारी शक्ति का जीवंत प्रमाण है। “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” के माध्यम से महिलाओं को राजनीति एवं शासन व्यवस्था में अधिक अवसर प्राप्त होंगे, जिससे वे नीति निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकेंगी। यह अधिनियम न केवल अधिकार प्रदान करेगा, बल्कि महिलाओं को नेतृत्व, सम्मान और नई ऊंचाइयों तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम भी बनेगा।
विशेष उल्लेखनीय है कि “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” किसी एक दल या वर्ग विशेष की महिलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की सभी वर्गों, समुदायों एवं पृष्ठ भूमियों से आने वाली महिलाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित करता है। यह समावेशी दृष्टिकोण ही इस अधिनियम की वास्तविक शक्ति है, जो प्रत्येक महिला को सशक्त बनने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर प्रदान करेगा।
प्रधानमंत्री के नेतृत्व में लिया गया यह ऐतिहासिक निर्णय “सशक्त नारी, सशक्त भारत” के संकल्प को साकार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। यह पहल देश को अधिक समावेशी, न्यायपूर्ण और प्रगतिशील राष्ट्र बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अंततः, इस ऐतिहासिक पहल के लिए हम पुनः आदरणीय प्रधानमंत्री जी का हार्दिक धन्यवाद एवं आभार व्यक्त करते हुए हमें पूर्ण विश्वास है कि “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को एवं कानून अधिनियम को और अधिक सशक्त एवं संतुलित बनाएगा तथा देश को नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर करेगा।

यात्रा से पहले तीथेयात्रियों के स्वास्थ्य पर जोर
यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को कई प्रदेश में किया जा रहा जागरूक
देहरादून। चारधाम यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए इस बार स्वास्थ्य विभाग ने विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं। यात्रा के दौरान उच्च हिमालयी क्षेत्रों में होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए विभाग ने देश के विभिन्न राज्यों में हेल्थ अलर्ट अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को यात्रा से पहले ही जरूरी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देना और संभावित जोखिमों को कम करना है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी एडवाइजरी में विशेष रूप से उन दिक्कतों को लेकर जागरूक किया जा रहा है, जो ऊंचाई वाले क्षेत्रों में यात्रा के दौरान सामने आती हैं। इनमें सांस लेने में तकलीफ, ऑक्सीजन की कमी, थकान, ब्लड प्रेशर, हृदय संबंधी समस्याएं और अचानक मौसम बदलने से होने वाली परेशानियां शामिल हैं। विभाग का मानना है कि यदि यात्री पहले से स्वास्थ्य जांच करा लें और जरूरी सावधानियों का पालन करें, तो यात्रा अधिक सुरक्षित और सुगम हो सकती है।
सरकार ने इस बार अंतरराज्यीय समन्वय पर भी विशेष ध्यान दिया है। जिन राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु चारधाम यात्रा पर आते हैं, वहां स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने राजस्थान में प्रशासनिक और चिकित्सा अधिकारियों के साथ बैठक कर यात्रा से जुड़ी स्वास्थ्य गाइडलाइन साझा की। बैठक में यह तय किया गया कि चारधाम यात्रा पर जाने वाले लोगों तक यात्रा शुरू होने से पहले ही सभी जरूरी स्वास्थ्य सलाह पहुंचाई जाएगी।
इस अभियान को केवल शहरों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि गांवों और दूरदराज के इलाकों तक भी पहुंचाया जाएगा। इसके लिए स्थानीय प्रशासन, स्वास्थ्य कर्मियों और जनप्रतिनिधियों की मदद ली जाएगी, ताकि हर उस व्यक्ति तक जानकारी पहुंचे जो यात्रा की तैयारी कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा पर निकलने से पहले अपना पूरा स्वास्थ्य परीक्षण अवश्य कराएं। खासकर बुजुर्ग, हृदय रोग, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोग डॉक्टर की सलाह के बाद ही यात्रा करें। साथ ही यात्रा के दौरान सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और किसी भी स्वास्थ्य समस्या को नजरअंदाज न करें। सरकार का मानना है कि समय रहते जागरूकता और तैयारी से न केवल यात्रा को सुरक्षित बनाया जा सकता है, बल्कि किसी भी आपात स्थिति से भी बचा जा सकता है।

गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति को हाईकोर्ट से बड़ी राहत
नियुक्ति मामले में दर्ज याचिका की खारिज

नैनीताल। हाईकोर्ट ने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर ( केंद्रीय विश्वविद्यालय) के कुलपति की नियुक्ति को निरस्त (क्वैश) करने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायधीश मनोज कुमार गुप्ता व न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खण्डपीठ ने उनकी नियुक्ति को यूजीसी और केंद्रीय विश्वविद्यालय के नियमों के तहत पाते हुए जनहित याचिका को खारीज कर दिया है।
मामले के अनुसार प्रोफेसर नवीन प्रकाश नौटियाल ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि कुलपति की नियुक्ति केंद्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम, 2009 तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में शिक्षकों तथा अन्य अकादमिक स्टाफ की नियुक्ति के लिए न्यूनतम अर्हताएं एवं उच्च शिक्षा में मानकों के अनुरक्षण के उपाय) विनियम, 2018 के प्रावधानों का उल्लंघन करने के खिलाफ हुए हैं। यूजीसी विनियमों तथा विज्ञापन में निर्धारित स्वयं की पात्रता शर्तों के उल्लंघन में प्रोफेसर प्रकाश सिंह की कुलपति के रूप में निरंतर हुई। जिनकी नियुक्ति मनमानी एवं अवैध है। यह मेरिट-आधारित नियुक्तियों की पवित्रता को क्षति पहुंचाती है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 16 का उल्लंघन करती है।
उपर्युक्त तथ्यों एवं परिस्थितियों के दृष्टिगत, याचिकाकर्ता के पास इस माननीय न्यायालय के समक्ष भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत वर्तमान याचिका प्रस्तुत करने के अतिरिक्त कोई अन्य वैकल्पिक, प्रभावी एवं पर्याप्त उपाय उपलब्ध नहीं है।
कुलपति की नियुक्ति यूजीसी विनियम, 2018 की विनियम 7.3 के प्रतिकूल है। जिसमें विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में न्यूनतम दस वर्षों के अनुभव की अनिवार्यता निर्धारित की गई है। प्रोफेसर सिंह का भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए) में चेयर प्रोफेसर के रूप में अनुभव को विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के समकक्ष नहीं माना जा सकता, क्योंकि आईआईपीए न तो कोई विश्वविद्यालय है और न ही यूजीसी मानदंडों द्वारा शासित संस्था है।
शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञापन में पात्रता को स्पष्ट रूप से “विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में 10 वर्ष” तक सीमित किया गया था, जिससे किसी भी प्रकार की समकक्षता या प्रतिस्थापन की कोई गुंजाइश नहीं रहती। सर्वाेच्च न्यायालय ने विभिन्न निर्णयों में यह बार-बार प्रतिपादित किया गया है कि चयन समिति चयन प्रक्रिया के मध्य में किसी सार्वजनिक पद हेतु नियुक्ति की पात्रता शर्तों को परिवर्तित व शिथिल नहीं कर सकती।

भारत से लगी सीमा पर नेपाल ने बढ़ाई सिक्योरिटी
सीमा से सटे कैलाली, कंचनपुर व बैतड़ी में 240 अतिरिक्त सशस्त्र जवान तैनात
मानव तस्करी व अवैध आवाजाही रोकने के लिए की गई सुरक्षा पुख्ता
पहले तैनात रहने थे 12 से 15 जवान
पिथौरागढ़। नेपाल में नई सरकार के गठन के बाद लगातार हर क्षेत्र में बदलाव दिखाई दे रहे हैं। भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा को लेकर नेपाल सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। भारतीय सीमा से सटे कैलाली, कंचनपुर और बैतड़ी जिलों में 240 अतिरिक्त सशस्त्र जवान तैनात किए गए हैं। नेपाल का यह कदम सीधे तौर पर मानव तस्करी और सामान की अवैध आवाजाही पर रोक लगाने से जुड़ा माना जा रहा है।
दरअसल पिछले दिनों बड़ी मात्रा में भारत से तस्करी कर लाया जा रहा सामान नेपाल पुलिस ने पकड़ा था। नेपाल ने भारतीय सीमा से लगे तीन जिलों की चौकियों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी है। नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कैलाली और कंचनपुर में 90-90 जवानों की अतिरिक्त तैनाती की गई है। बैतड़ी जिले में 60 जवान भेजे गए हैं।
पहले एक चौकी पर 12 से 15 जवान तैनात रहते थे। अब इस संख्या को बढ़ाकर करीब 30 किया जा रहा है। यानी बॉर्डर चौकियों पर निगरानी दोगुनी बढ़ा दी गई है। नेपाल के गृह मंत्री सुधन गुरंग ने सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए थे।
इसके बाद सशस्त्र पुलिस बल के प्रमुख राजू अर्याल ने भी कैलाली बॉर्डर पर सख्त निगरानी रखने के आदेश जारी किये हैं। बैतड़ी जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, सीमा पर लगातार सामने आ रहे तस्करी के मामलों को देखते हुए अतिरिक्त जवानों की मांग की गई थी। अब इनकी तैनाती से अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने की कोशिश की जा रही है।

तस्करों पर लगाम लगाने के लिए बढ़ाई सुरक्षा
नेपाल के बैतड़ी और दार्चुला जिले उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से सटे हैं। इनकी सीमा काली नदी तय करती है। कंचनपुर जिला, चंपावत और उधमसिंह नगर से जुड़ा है। नेपाल के सुदूर पश्चिमी क्षेत्र में कुल 9 जिले आते हैं। इनमें अछाम, बैतड़ी, बझांग, बाजुरा, डडेलधुरा, दार्चुला, डोटी, कैलाली और कंचनपुर हैं।
भारत-नेपाल की खुली सीमा लंबे समय से मानव तस्करी और अवैध सामान की आवाजाही के लिए संवेदनशील मानी जाती रही है। सीमावर्ती इलाकों में कई बार महिलाओं और बच्चों की तस्करी के मामलों के साथ-साथ खाद्य पदार्थ, कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स और मवेशियों की अवैध ढुलाई पकड़ी जा चुकी है।

भारतीय सीमा पर एसएसबी कर रही निगरानी
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, पहाड़ी और नदी क्षेत्रों के कारण कई जगहों पर निगरानी चुनौतीपूर्ण रहती है, जिसका फायदा उठाकर तस्कर सक्रिय रहते हैं। यही वजह है कि समय-समय पर दोनों देशों की एजेंसियां संयुक्त कार्रवाई भी करती रही हैं।
नेपाल द्वारा सीमा पर अतिरिक्त सशस्त्र जवानों की तैनाती को न सिर्फ निगरानी बढ़ाने, बल्कि तस्करी के नेटवर्क पर सीधी कार्रवाई के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। नेपाल के द्वारा सीमा पर कड़ी निगरानी को देखते हुए भारतीय क्षेत्र में स्थित झूलाघाट, जौलजीबी, धारचूला में भी एसएसबी के द्वारा कड़ी निगरानी रखी जा रही है। पिछले दिनों झूलाघाट में एक मृतक नेपाली के शव को संदिग्ध होने पर वापस लौटा दिया गया था।

विश्व का सबसे ऊंचा शिवालय है ’तुंगनाथ धाम
तृतीय केदार के नाम से विश्व विख्यात है बाबा का धाम
चंद्रशिला की चोटियों पर खिंच रही सुनहरी आभा
रुद्रप्रयाग। देवभूमि में समुद्र तल से 3680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ का धाम इन दिनों देश-दुनिया के श्रद्धालुओं और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पंचकेदारों में तृतीय स्थान रखने वाला यह मंदिर न केवल अपनी प्राचीनता बल्कि अपनी अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए भी विश्व विख्यात है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत युद्ध के पश्चात आत्मग्लानि से मुक्ति और भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए पांडवों ने इसी स्थान पर कठोर तपस्या की थी। यहां भगवान शिव की बाहुओं (भुजाओं) की पूजा की जाती है। पत्थरों की अद्भुत स्थापत्य शैली से निर्मित इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि इसका जीर्णोद्धार आदि गुरु शंकराचार्य ने किया था। मंदिर के गर्भगृह में विराजमान स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन मात्र से ही श्रद्धालु असीम शांति का अनुभव करते हैं। वर्तमान में ग्रीष्मकालीन यात्रा के दौरान हजारों की संख्या में भक्त कठिन चढ़ाई पार कर बाबा तुंगनाथ के दरबार में पहुंच रहे हैं, जिससे पूरी घाटी शिव के जयकारों से गुंजायमान है।

प्रकृति का स्वर्ग: मखमली बुग्याल और दुर्लभ पुष्प
रुद्रप्रया। तुंगनाथ घाटी का प्राकृतिक सौंदर्य इन दिनों अपने पूरे यौवन पर है। चारों ओर फैले हरे-भरे मखमली बुग्याल और उनमें खिले दुर्लभ प्रजाति के रंग-बिरंगे फूल किसी स्वर्गिक अनुभूति से कम नहीं हैं। घाटी की शीतल हवाएं और हिमालय की बर्फ से ढकी ऊंची चोटियां पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर रही हैं।

चंद्रशिला शिखरः जहाँ राम ने की थी तपस्या’’
रुद्रप्रया। तुंगनाथ मंदिर से लगभग 1.5 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित चंद्रशिला शिखर ट्रैकिंग के शौकीनों की पहली पसंद बना हुआ है। धार्मिक मान्यता है कि लंका विजय के पश्चात भगवान श्रीराम ने यहां एकांत में तपस्या की थी।

चंद्रशिला की चोटियों से दिखेगा हिमालय का 360 डिग्री नजारा
रुद्रप्रयाग। यहा से चौखम्भा, नंदा देवी, त्रिशूल और केदारनाथ जैसी पर्वत श्रृंखलाओं के 360-डिग्री दर्शन होते हैं। विशेषकर सूर्योदय और सूर्यास्त के समय जब सूरज की किरणें चोटियों को स्वर्ण आभा से नहलाती हैं, तो वह दृश्य अविस्मरणीय होता है।

आस्था और रोमांच का अनूठा संगम
रुद्रप्रयाग। क्षेत्र के प्रसिद्ध कथावाचक लम्बोदर प्रसाद मैठाणी का कहना है कि तुंगनाथ धाम, तुंगनाथ घाटी और चंद्रशिला का यह त्रिकोणीय संगम धार्मिक आस्था, प्राकृतिक वैभव और साहसिक पर्यटन का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। यह स्थान न केवल श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है, बल्कि फोटोग्राफी और जैव विविधता के प्रेमियों के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है।

22 अप्रैल को खुलेंगे तुंगनाथ धाम के कपाट’
रुद्रप्रयाग। वैसाखी के पावन पर्व पर शीतकालीन गद्दी स्थल मक्कूमठ में पंचांग गणना के अनुसार तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट खुलने की तिथि विधिवत घोषित कर दी गई है। 20 अप्रैल बाबा तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली मक्कूमठ से रवाना होकर रात्रि प्रवास के लिए भूतनाथ मंदिर पहुंचेगी। 21 अप्रैल डोली भूतनाथ मंदिर से प्रस्थान कर अंतिम रात्रि प्रवास के लिए’चोपता पहुंचेगी। 22 अप्रैल को प्रातःकाल वैदिक मंत्रोच्चार और ऋचाओं के बीच तुंगनाथ धाम के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए जाएंगे।
धाम में कपाट खुलने की तैयारियां जोर-शोर से शुरू कर दी गई हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े। – बलवीर नेगी प्रबंधक, तुंगनाथ धाम

कैसे पहुंचें बाबा तुंगनाथ के द्वार’’
रुद्रप्रयाग। तृतीय केदार तुंगनाथ धाम की यात्रा के लिए श्रद्धालु सड़क और पैदल मार्ग का सहारा ले सकते हैं। हरिद्वार से लगभग 202 किमी की दूरी बस या टैक्सी से तय कर ऊखीमठ पहुँचा जा सकता है। ऊखीमठ से मात्र 28 किमी की दूरी पर खूबसूरत हिल स्टेशन और यात्रा का आधार शिविर चोपता स्थित है। चोपता से तुंगनाथ धाम तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को चार किमी’ की खड़ी लेकिन बेहद खूबसूरत पैदल चढ़ाई तय करनी होती है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ळडव्न् द्वारा जिला मुख्यालय रुद्रप्रयाग से चोपता के लिए सीधी बस सेवा शुरू की गई है। रुद्रप्रयाग से चोपताः’’ प्रतिदिन सुबह 9ः00 बजे और चोपता से हरिद्वार प्रतिदिन सुबह 9ः00 बजे (वापसी सेवा)।

रुद्रप्रयाग में यूसीसी जैसा सख्त कानून भी नही रोक पा रहा बाल विवाह
महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग ने दो दिनों में रूकवाया दूसरा बाल विवाह
जनपद में एक साल में रोके जा चुके हैं 26 बाल विवाह
रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में बाल विवाह थमने का नाम नहीं ले रही हैं। व्यापक जागरूकता अभियान और तमाम प्रयासों के बावजूद समाज में यह कुप्रथा गंभीर समस्या बनती जा रही है। चौंकाने वाली बात ये है कि महज दो दिनों के भीतर बाल विवाह का दूसरा मामला सामने आया है, जिसे विभागीय टीम की तत्परता से समय रहते रोक दिया गया।
बता दें कि महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की ओर से चलाए जा रहे जागरूकता कार्यक्रमों के बावजूद इस साल अब तक 26 बाल विवाह रुकवाए जा चुके हैं। ताजा मामले में खुद नाबालिग बालिका ने अपने परिजनों की ओर से गुपचुप तरीके से विवाह कराए जाने की सूचना चाइल्ड हेल्पलाइन को दी। यह सूचना मिलते पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन के अधिकारियों के कान खड़े हो गए।
सूचना मिलते ही जिला कार्यक्रम अधिकारी अखिलेश कुमार मिश्रा के निर्देश पर वन स्टॉप सेंटर की टीम, बाल कल्याण समिति के पदाधिकारी एवं चाइल्ड हेल्पलाइन से जुड़े सदस्य तत्काल मौके पर पहुंचे। टीम में केंद्र प्रशासक रंजना गैरोला भट्ट, बाल कल्याण समिति अध्यक्ष रंजू खन्ना, सदस्य ममता शैली, दलवीर सिंह रावत, केस वर्कर अखिलेश, सामाजिक कार्यकर्ता पूजा भंडारी और तिलवाड़ा चौकी से कांस्टेबल डीसी पुरोहित शामिल रहे।
शुरुआत में परिजनों ने टीम को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन सख्ती बरतने पर सच्चाई सामने आ गई। बालिका की मां ने बताया कि देहरादून में पड़ोस के एक युवक से प्रेम प्रसंग और उसके नशे की लत के चलते, साथ ही लड़की की ओर से घर से भागने की धमकी देने के कारण उन्होंने जल्दबाजी में विवाह तय कर दिया था। जानकारी के मुताबिक, विवाह उसी रात होने वाला था और इसे गुपचुप तरीके से सीमित लोगों के बीच आयोजित किया जा रहा था। टीम ने मौके पर पहुंचकर परिजनों को बाल विवाह प्रतिषेध कानून की जानकारी दी और बताया कि इस अपराध में 2 साल तक की सजा और 1 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।
इसके बाद परिजनों ने तत्काल लड़के पक्ष से संपर्क कर बारात न लाने का निर्णय लिया और विवाह रोक दिया। साथ ही टीम ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के प्रावधानों की जानकारी देते हुए सख्त चेतावनी दी कि भविष्य में किसी भी स्थिति में बाल विवाह न किया जाए। हैरानी की तमाम जागरूकता के बावजूद भी बाल विवाह के मामले कम नहीं हो रहे हैं। खासकर पहाड़ी जिलों में इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं। खासकर रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ में बाल विवाह के मामले ज्यादा रिकॉर्ड किए जा रहे हैं। बाल विवाह से बालिका के मेच्योर न होने की वजह से उसे कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

22 अप्रैल को खुलेंगे बाबा केदार के कपाट
19 को ऊखीमठ से रवाना होगी बाबा की चल विग्रह उत्सव डोली
जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं से की पंजीकरण और नियमों के पालन की अपील

रुद्रप्रयाग। विश्व प्रसिद्ध ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग भगवान केदारनाथ धाम के कपाट आगामी 22 अप्रैल को प्रातः 8 बजे विधिवत रूप से खोल दिए जाएंगे। वैदिक मंत्रोच्चार, पारंपरिक पूजा-अर्चना और सनातन रीति-रिवाजों के साथ होने वाले इस भव्य कपाटोद्घाटन को लेकर जनपद में भारी उत्साह का माहौल है। जिला प्रशासन ने यात्रा को सुगम बनाने के लिए सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।
भगवान केदारनाथ की चल-विग्रह उत्सव डोली अपने शीतकालीन गद्दी स्थल ’’ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ’’ से धाम के लिए प्रस्थान करेगी। यात्रा का कार्यक्रम इस प्रकार हैः
18 अप्रैल: ओंकारेश्वर मंदिर में सांयकालीन आरती के बाद भैरवनाथ पूजा संपन्न होगी।
19 अप्रैल: बाबा केदार की पंचमुखी डोली ऊखीमठ से प्रस्थान कर प्रथम पड़ाव फाटा पहुंचेगी।
20 अप्रैल: फाटा से रवाना होकर डोली गौरीकुंड’’ स्थित गौरीमाई मंदिर में रात्रि विश्राम करेगी।
21 अप्रैल: डोली गौरीकुंड से पैदल मार्ग होते हुए ’’केदारनाथ धाम’’ पहुंचेगी और मंदिर भंडार गृह में स्थापित की जाएगी।
22 अप्रैल: प्रातः 8 बजे शुभ मुहूर्त में कपाट खुलने के साथ ही यात्रा का विधिवत शुभारंभ होगा।
प्रशासन की श्रद्धालुओं से अपील’
रुद्रप्रयाग। भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए जिला प्रशासन ने देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने अपील की है कि श्रद्धालु यात्रा पर आने से पूर्व’अनिवार्य रूप से अपना पंजीकरण’’ सुनिश्चित करें। निर्धारित तिथियों और स्लॉट के अनुसार ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं। सुरक्षित और सुगम यात्रा के लिए सरकारी गाइडलाइन्स का पूर्ण पालन करें।
केदारनाथ यात्रा को लेकर प्रशासन मुस्तैद है। हमारा प्रयास है कि हर श्रद्धालु को बाबा के दर्शन सुलभता से हों और उनकी यात्रा सुरक्षित रहे। – जिला प्रशासन, रु

धधकते अंगारों पर आस्था का नृत्य
जाख मेले में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
जाख मंदिर में संपन्न हुई सदियों पुरानी अनूठी परंपरा
नर पश्वा’ ने तीन बार अग्निकुंड में उतरकर दिया आशीर्वाद

रुद्रप्रयाग। आस्था, आध्यात्म और रोमांच का अद्भुत संगम जनपद के गुप्तकाशी क्षेत्र में देखने को मिला, जहां विश्व प्रसिद्ध ’जाख मेला’ हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस वर्ष भी सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार, भगवान जाख के पश्वा (नर देवता) ने धधकते अंगारों के बीच नृत्य कर उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को विस्मित किया।
मेले का मुख्य आकर्षण वह क्षण रहा जब ढोल-दमाऊ, भोंपू की थाप और “जय जाख देवता“ के गगनभेदी उद्घोष के बीच नर देवता ने दहकते अग्निकुंड में प्रवेश किया। इस बार भगवान जाख ने एक नहीं बल्कि तीन बार अग्निकुंड के भीतर जाकर नृत्य किया और भक्तों पर कृपा बरसाई। रोंगटे खड़े कर देने वाले इस दृश्य को देखकर न केवल श्रद्धालु, बल्कि आधुनिक विज्ञान के जानकार भी अचंभित रह गए।
नगर भ्रमण और स्नान परंपरा के अनुसार नर देवता को उनके मूल गांव से देवशाल स्थित विंध्यवासिनी मंदिर लाया जाता है। यहाँ से जाख की कंडी और जलते दीपक के साथ मंदिर प्रस्थान होता है। मंदिर परिसर में बांज के वृक्ष के नीचे ढोल सागर की विशेष थाप पर देवता अवतरित होते हैं, जिसके बाद उन्हें तांबे की गागर के पवित्र जल से स्नान कराया जाता है।
नारायणकोटी, देवशाल और कोठड़ा गांवों के ग्रामीण मिलकर विशाल अग्निकुंड तैयार करते हैं। वैशाख संक्रांति की रात को जागरण के साथ अग्नि प्रज्वलित की जाती है और अगले दिन (द्वितीया) सुबह बड़ी लकड़ियां हटाकर केवल लाल अंगारों के बीच यह दिव्य नृत्य संपन्न होता है।

संस्कृति की जीवंत झलक’
रुद्रप्रयाग। गुप्तकाशी से लगभग 6 किलोमीटर दूर स्थित इस मंदिर में भगवान जाख को यक्ष के रूप में पूजा जाता है। मेले में पहंुचे हजारों श्रद्धालुओं ने न केवल भगवान के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया, बल्कि मेले के सांस्कृतिक परिवेश और स्थानीय बाजार का भी आनंद लिया।  यह मेला उत्तराखंड की उस समृद्ध लोक संस्कृति का प्रतीक है, जहां आज भी श्रद्धा और विश्वास के आगे विज्ञान मौन खड़ा नजर आता है। जाख मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की एकता और जीवंत परंपराओं का प्रतिबिंब है।

शिव-पार्वती नृत्य और राम-रावण युद्ध के साथ रासी के पांच दिवसीय वैशाखी मेले का भव्य समापन
पौराणिक जागरों और अनुष्ठानों से भक्तिमय हुआ रासी गांव
विश्व कल्याण की कामना के साथ उमड़ा जनसैलाब

रुद्रप्रयाग। मदमहेश्वर घाटी के रासी गांव में आस्था, संस्कृति और परंपराओं का पांच दिवसीय महाकुंभ वैशाखी मेला धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हो गया। मेले के अंतिम दिन शिव-पार्वती नृत्य और पौराणिक राम-रावण युद्ध का मंचन मुख्य आकर्षण रहा, जिसे देखने के लिए पूरी घाटी से ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ी। पांच दिनों तक रासी गाँव सहित संपूर्ण मदमहेश्वर घाटी का वातावरण भक्ति और पौराणिक जागरों से गुंजायमान रहा।
मेले के महत्व पर प्रकाश डालते हुए राकेश्वरी मंदिर समिति के कार्यकारी अध्यक्ष  मदन भट्ट ने बताया कि युगों से चली आ रही इन पौराणिक परंपराओं को रासी गांव ने आज भी जीवंत रखा है। बद्री-केदार मंदिर समिति के पूर्व सदस्य शिव सिंह रावत ने कहा कि मेले का शुभारंभ पौराणिक जागरों से होता है, जिसमें हरिद्वार से लेकर चौखम्बा हिमालय तक विराजमान 33 कोटि देवी-देवताओं की स्तुति कर क्षेत्र की खुशहाली की कामना की जाती है।
पूर्व अध्यक्ष ’’जगत सिंह पंवार’’ ने बताया कि मेले के दौरान ’’मधु गंगा’’ से पवित्र गाडू घड़ा (कलश) लाकर भगवती राकेश्वरी का जलाभिषेक किया गया। मंदिर परिसर में पांच दिनों तक अखंड धूनी प्रज्वलित की गई और रात्रि जागरण कर भगवान मदमहेश्वर व माता राकेश्वरी की आराधना की गई।  मेले के समापन पर आयोजित सांस्कृतिक गतिविधियों के बारे में क्षेत्र पंचायत सदस्य ’’रेशमा भट्ट और रणजीत रावत ने बताया कि शिव-पार्वती नृत्य समापन अवसर पर यह नृत्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। युगों पुरानी परंपरा के अनुसार राम-रावण युद्ध के साथ मेले का औपचारिक समापन हुआ। मेले में गांव की विवाहित बेटियों (धियाणियों) और प्रवासियों की भारी भागीदारी से आपसी प्रेम और आत्मीयता का अनूठा दृश्य देखने को मिला।

संरक्षण की दरकार’
रुद्रप्रयाग। शिक्षाविद भगवती भट्ट’ ने पौराणिक मेलों के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि यदि प्रदेश सरकार इन मेलों और पौराणिक जागर गायन की विधा को संवर्धित करने की पहल करे, तो इन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान मिल सकती है। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि हमारी भावी पीढ़ी भी अपनी समृद्ध संस्कृति से जुड़ी रहेगी।

यह ‘आर्थिक आतंकवाद’ है

राष्ट्रपति टंªप के आदेश पर अमरीकी नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग की नाकेबंदी शुरू कर दी है। ईरान की बंदरगाहों पर पाबंदियां लागू कर दी गई हैं। जो जहाज ईरान को ‘टोल’ देकर गुजरते रहे हैं, अमरीका उन पर भी नाकेबंदी करेगा। उन जहाजों को भी रोका जाएगा और जांच होगी। युद्ध का नया आयाम खुल गया है। क्या अब ईरान के प्रतिरोध पर ‘समुद्री युद्ध’ का आगाज हो सकता है? चूंकि ईरान 90 फीसदी कच्चा तेल चीन को निर्यात करता रहा है, लिहाजा चीन की चेतावनी सामने आई है कि ईरान के साथ उसका समझौता है, लिहाजा उसमें हस्तक्षेप न करें। इस मुद्दे पर चीन के साथ रूस भी है। क्या अब चीन-रूस बनाम अमरीका का नया टकराव सामने आ सकता है? हम स्पष्ट कर दें कि विश्व युद्ध के कोई आसार नहीं हैं, जो सनसनी कुछ टीवी चौनल फैला रहे हैं। बहरहाल अमरीका और ईरान नाकेबंदी के जरिए जो कुछ कर रहे हैं, वह निश्चित रूप से ‘आर्थिक आतंकवाद’ है। यदि एशिया महाद्वीप की ही बात करें, भारत-चीन-जापान जिसका हिस्सा हैं, उसकी करीब 389 करोड़ आबादी तेल-गैस और अन्य सामान से वंचित है। तेल रुकने से 59 फीसदी वैश्विक महंगाई बढ़ गई है। होर्मुज से 3 अरब बैरल तेल औसतन हररोज गुजरता था। खाने-पीने की चीजें, उर्वरक आदि के गंभीर संकट पैदा होते जा रहे हैं। भारत भी 35-40 फीसदी कच्चा तेल होर्मुज के रास्ते ही आयात करता था। भारत सरकार के पास मात्र 9.5 दिन के तेल का रणनीतिक भंडार है, शेष 64.5 दिनों के भंडारण तेल कंपनियों के पास हैं। भारत की आबादी के मद्देनजर यह तेल ‘ऊंट के मुंह में जीरे’ समान है। ईरान युद्ध और अब होर्मुज की नाकेबंदी के प्रत्यक्ष प्रभाव भारतीय उद्योग पर भी दिखने लगे हैं। मसलन-राजस्थान के मेंहदी कारोबार का 300 करोड़ रुपए का सामान ठप पड़ा है। उसका सामान खाड़ी देशों को जाता था। वे सभी युद्ध से त्रस्त और ध्वस्त हैं। इसके अलावा, कांच की चूडिय़ों का कारोबार, सिरेमिक टाइल्स, प्लास्टिक के उद्योग और खाद की कमी से खेती आदि पर घोर संकट हैं। सरकार कुछ भी दावे करे या सहानुभूति व्यक्त करे, लेकिन देश में 22 अरब रुपए का नुकसान हो चुका है। करीब 5.5 लाख रेस्तरां, छोटे होटल या तो बंद हो चुके हैं अथवा तालाबंदी के कगार पर हैं।
श्रमिक पलायन कर अपने गांव लौट रहे हैं अथवा नोएडा, हरियाणा की कुछ कंपनियों के बाहर हिंसक प्रदर्शन कर रहे हैं। वाहन भी फूंक दिए गए। इस ‘आर्थिक आपातकाल’ में कंपनियां भी मजदूरों को पर्याप्त मेहनताना कैसे दें, क्योंकि उनके उत्पाद भी बेकार पड़े हैं। निर्यात संभव नहीं हैं। भारत खाड़ी देशों को 19 लाख करोड़ रुपए का सालाना निर्यात करता है। यह कोई सामान्य राशि नहीं है। भारत ने एक बार फिर रूस से 19.75 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा है। यह 2025 जितना ही है। हालांकि अमरीका की घुडक़ी और टैरिफ के भय के कारण भारत ने यह खरीद 6 लाख बैरल तक घटा दी थी। इसी तरह 2019 से ईरान से तेल लेना भी बंद कर दिया था। अब मौजूदा दौर में ईरानी तेल के दो टैंकर (20-20 लाख बैरल) भी भारतीय तटों पर आए हैं। अब हम अमरीका, अल्जीरिया, अंगोला, ओमान आदि देशों से भी कच्चा तेल आयात करने को विवश हैं। भारत की विदेश नीति, तेल आयात नीति और भंडारण की नीति सवालिया हैं। दरअसल हम कुआं खोदना तब शुरू करते हैं, जब आग धधकने लगती है। तेल का भंडारण आज भी उतना ही है, जितना 2014 में था, जब नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने थे। चीन में 110-140 दिन का भंडारण है और जापान 254 दिन के तेल का भंडारण रखता है। बहरहाल अब अमरीका और ईरान जो नाकेबंदियां कर रहे हैं, युद्धपोत, लड़ाकू विमान, पनडुब्बियां, मिसाइल, ड्रोन और बारूदी सुरंगें जिस तरह तैनात हैं, उन्हें शेष दुनिया की चिंता भर भी नहीं है। फ्रांस, ब्रिटेन, इटली, स्पेन सरीखे सहयोगी देशों ने राष्ट्रपति टं्रप की नाकेबंदी का विरोध किया है। वे अपने ‘शांति मिशन’ पर अलग से विचार कर रहे हैं। अमरीका के निशाने पर ईरान के साथ-साथ चीन भी है, जिसकी तेल-आपूर्ति पर भी पहरेदारियां बिठा दी गई हैं। कुल मिला कर ये हरकतें ‘आर्थिक आतंकवाद’ नहीं हैं, तो क्या हैं?

 

 

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