दुःखद -इच्छाशक्ति के अभाव में बड़ी मछलीयों के हवाले प्रदेश को बचाय ,मनुष्य के नाते मनन कर इच्छा शक्ति जगाय- जानिये

Pahado Ki Goonj

इच्छाशक्ति के अभाव में बड़ी मछलीयों के हवाले प्रदेश
मनुष्य मनन कर इच्छा शक्ति जगाना चाहें
उत्तराखंड में कुछ दिन tv देखना बन्द कर दीजयेगा -राज्य आन्दोलकारी 

वर्ष 2013 से पहले 2 न्यूज पोर्टल वेव चैनल काम करते थे आज 400 पोर्टलों से रोजगार  पा रहे हैं।

देहरादून, पहाड़ों की गूंज, जनता का कहना है कि प्रदेश के विकास में टीवी चैनलों  को देखते हुए जनता ने समाचार  के लिए जहाँ दूरदर्शन निःशुल्क  कार्यक्रम देता है वहीं निजी चैनल भारी रकम लेकर अपने कार्यक्रम देता है ।कुल मिलाकर देखें तो उत्तराखंड को गलत तरीके से अपना व्यपार कर विकास कार्यो की गुणवत्ता के सवालों को दर किनार कर अपने मतलब के लिए बाजार तैयार कर आज जनता को 80हजार करोड़ के कर्ज का कोड़ का भगीदारी में सच्चाई को छुपाने के चलते बड़ा सवाल जनता के सामने है। जो इनको परोस  कर के  विज्ञापन इनकी सरत पर  दे दिया वह विकास होगया।अन्यथा सरकार को अस्थिर करने का काम किया जाता है। इसी प्रकार से मुख्यमंत्री को सुझाव न देकर समस्याओं में उलझा कर प्रदेश की विकास की रफ्तार रोकी है

इन्होंने 2013 में केदारनाथ आपदा 16,17 जून के बाद 28 जून से हरिद्वार ,रिश्केश से मसूरी ,हल्द्वानी से नैनिताल पर्यटकों बुलाया जा सकता था परन्तु सरकार से करोड़ों के विज्ञापन लेने के चलते केदारनाथ आपदा से देश वासियों को 16 जून2013 से सितंबर तक डरा डरा कर सरकार से लाभ लेने के चलते यह हाल किया कि उत्तरा खण्ड आने से लोग डरने लगे ,यहाँके होटलों ,धर्मशालाओं को बूकिंग वापिस किस हालत को पैदा कर करनी पड़ी यह उनके दिल से पूछें? तब इनके विकल्प के लिए पहाड़ों की गूंज राष्ट्रीय सा समाचार पत्र,www.ukpkg.com न्यूज पोर्टल वेव चैनल के स्वामी,संपादक जीतमणि पैन्यूली ,संयोजक उत्तराखंड पत्रकार संगठन समन्वय समिति और संरक्षक श्री बद्रीनाथ केदारनाथ मन्दिर समिति कर्मचारी संघ की ओर से जुलाई2013 से लेकर अक्टूबर तक 11 बैठकों की है विज्ञापन दिलाने के बाद 9 जिलों के पत्रकारों को नेटवर्क सुभिधा दिलवाने में तीन साल लग गये।

सम्मानित पत्रकारों की बैठकों में उनके सुझावों पर मा विधायकों मा नेता प्रतिपक्ष मा विधानसभा अध्यक्ष ,मा उपाध्यक्ष ने सरकार को पोर्टल के विज्ञापन सहित 20 मांगों पर कार्यवाही करने के आदेश दिये जिन पर कर्यवाही होने के लिए 

अधिकारीयों की इच्छा शक्ति जगानी है ( इसके  साथ साथ दिनांक 7 सितंबर 2013 पहाड़ों की गूंज समाचार पत्र में मसूरी की सुन्दता के बारे मे अंग्रेजी भाषा में नगर पालिका के अध्यक्ष का प्रार्थना प्रकाशित करने के बाद दिनांक7अक्टूबर2013से मसूरी नैनिताल के बाजार की रौनक लॉटने लगी इसकी जानकारी होटल यूनियन के अध्यक्ष रामेश्वर बडोनी एंव दो जून की रोटी कमा कर खाने वाले मजदूरों के साथ साथ नगर पालिका अध्यक्ष ने दी जिसके फलस्वरूप खुशी से मनमोहन सिंह मल्ल मोठे होकर अखबार को पतला कर गये )

उसके बाद प्रदेश के 9 जिलों में नेट सुभिधा दिलाने के लिए मा राज्यपाल  श्री  अजीत कुरैशी के क्षात्कार लेने के फल स्वरूप उत्तराखंड के अलावा अन्य राज्यों में ओएफसी लाइन बिछाने का कार्य सम्भव कर  पत्र नेे दिखाया है

इससे जहाँ प्रदेश में व्यवसाइट पोर्टल बनाने से सबके रोजगार के अबसर बढ़ने लगे हैं। सम्पूर्ण विश्व में जहां tv नहीं दिखाई देता है।हम वहां निशुल्क खबरें इनसे पहले भेजते हैं ।

वहीं बैंकों से जनता को अपने रुपये निकाल ने व सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए घण्टों लाइन पर खड़ा नहीं होना पड़ रहा है ।

न्यूज पोर्टलों की वासी खबरें दिन भर दिखाने वाले बड़े tv चैनलों को रास नहीं आया है। उन्होंने 4 साल बाद अपने एजंटों से न्यूज पोर्टल के स्वामी ,पत्रकारों को बेरोजगार कर, भ्रष्टाचार को बढ़ाने व विकास रोकने के लिए पोर्टल पर विज्ञापन दिखाने की दर के टेन्डर में पिछले साल की दर से 8 गुना कम करके 343 न्यूज पोर्टल में हजारों लोगों को बेरोजगार कर विकास रोकने के लिए चाल चली है।

प्रदेश बचाने के लिए आपका कर्तव्य बनता है कि 2013 की आपदा के बाद जैसे उत्तराखंड की लाइफ लाइन पर्यटन, तीर्थाटन का हाल न बने। दिनांक 15 जून2021 से 7 बजे से 9बजे रात्री तक अपने टी वी  बन्द करने के लिए 169 राज्य के बुद्धिजीवियों,

ट्रेड यूनियन के अध्यक्षों, याता यात ट्रांसपोर्ट कम्पनियों ने होटल ,व्यपारियो  ने अपनी समर्थन दिया है ।कुछ लोग ने पूर्ण तह टीवी देखना बन्द करने की सूचना दी है।

जनता का कहना है कि विधायकों की संस्तुति ,विधानसभा के अध्यक्ष की संस्तुति की अनदेखी करने से प्रदेश के  सेहत के लिए ठीक नही है ।अब देखना है कि जनता की भावना विधायकों की संस्तुति पर सूचना विभाग कब अमल करवाता है।

समाचार 7983825336 पर भेजने  ।

Dehradun, echo of the mountains, the public says that while watching TV channels in the development of the state, where Doordarshan gives free programs for news, while private channels give their programs for a huge amount. Overall, Uttarakhand is seen in a wrong way. Today the public is facing a big question because of hiding the truth in the code of loan of 80 thousand crores to the public by setting aside the questions of the quality of development works by doing their business with them and preparing the market for their own meaning. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . Those who served them and gave advertisements on their heads, that development has happened. Otherwise the work of destabilizing the government is done. Similarly, by not giving suggestions to the Chief Minister, he has stopped the pace of development of the state by engaging in problems

State handed over to big fish due to lack of will
Man wants to awaken the will power by contemplating
The state agitator will stop watching TV in Uttarakhand for a few days.
He could have called tourists from Haridwar, Rishikesh to Mussoorie, Haldwani to Nainital from June 28, after the Kedarnath disaster in 2013, June 16, 17, but due to the advertisements of crores from the government, the people of the country were scared from June 16, 2013 to September due to the Kedarnath disaster. Due to taking benefit from the tax government, it was done that people were afraid of coming to Uttarakhand, ask their heart what condition the hotels, dharamshalas had to book back here? Then for their alternative, the National News paper echoing the mountains, www.ukpkg.com News Portal Wave Channel Editor Jeetmani Paneli Convenor Uttarakhand Journalist Organization Coordination Committee Patron Shri Badrinath Kedarnath Temple Committee Employees Union from July 2013 to October 11 meetings In the meetings of respected journalists, on their suggestions, the MLAs, the Leader of the Opposition, the Speaker, the Deputy Speaker, ordered the government to act on 20 demands, including the advertisement of the portal, on which action is to be taken. After publishing the prayer of the President of the Municipality in the English language about the beauty of Mussoorie in the newspaper, from October 7, 2013, the market of Mussoorie Nainital began to shine, its information was received by Rameshwar Badoni, the President of Hotel Union and the bread earners of June 2. Along with the laborers, the Municipality President gave, as a result of which he became fat and diluted the newspapers) After that, to get the net facility in 9 districts of the state, I went to interview the Governor. As a result, besides Uttarakhand, the work of laying OFC lines has been made possible in other states. Due to this, employment opportunities for everyone have started increasing by creating a website portal in the state. Where TV is not visible all over the world. We send free news there before them. At the same time, people do not have to stand in queues for hours to withdraw their money from banks and get benefits of government schemes. The big TV channels, which show live news throughout the day from news portals, have not liked it. After 4 years, he asked his agents to reduce the rate of showing advertisements on the portal by 8 times from last year’s rate to thousands of people in 343 news portals by making news portal owners jobless, increasing corruption and preventing development. The jobless tax has been a trick to stop growth. To save the state, it becomes your duty that after the disaster of 2013, like Uttarakhand’s lifeline tourism, pilgrimage does not become a condition. 169 state intellectuals to turn off their TVs from 7 pm to 9 pm from 15th June 2021,

Presidents of trade unions, transport companies, hotels, businessmen have given their support. Some people have reported to stop watching TV completely.

Will be kindly sent to March 7983825336.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

पलायन रोकने के लिए शिक्षा में कृषि कार्य समलित किया जाय

टिहरी, पहाडोंकीगूँज,आज का विषय लेते है कोविड काल मे स्कूली शिक्षा मे गरीब मजदूर व गॉव के बच्चो की शिक्षा का स्तर क्या होगा । आप जानते ही हो कि करीब डेड साल से स्कूल बिल्कुल बंद है जिसका असर सीधा बच्चो की पढाई पर हो रहा है शहरी क्षेत्रो […]

You May Like