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डायट बड़कोट में कौशलम का तीन दिवसीय प्रशिक्षण सफलतापूर्वक संपन्न

Pahado Ki Goonj

डायट बड़कोट में कौशलम का तीन दिवसीय प्रशिक्षण सफलतापूर्वक संपन्न
कौशलम से बदलेगी पढ़ाई की तस्वीर, शिक्षकों को मिला कौशल आधारित शिक्षा का मंत्र
डायट बड़कोट में तीन दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न, रचनात्मकता, नवाचार और व्यावहारिक दक्षता पर दिया जोर
बड़कोट। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) बड़कोट, उत्तरकाशी में कौशलम कार्यक्रम के अंतर्गत तीन दिवसीय प्रशिक्षण का सफल आयोजन किया गया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को विद्यार्थियों में कौशल-आधारित अधिगम, रचनात्मकता, नवाचार, समस्या समाधान, आत्मविश्वास और व्यावहारिक जीवन कौशल विकसित करने के लिए प्रभावी शिक्षण तकनीकों से परिचित कराना रहा।
संस्थान के प्राचार्य संजीव जोशी ने प्रशिक्षण के सफल आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए कौशल आधारित शिक्षा आज के समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। ऐसे प्रशिक्षण शिक्षकों को नवीन शैक्षणिक दृष्टिकोण से जोड़ने के साथ विद्यार्थियों में रचनात्मकता, आत्मनिर्भरता, व्यावहारिक दक्षता और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने में मददगार साबित होंगे।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को कौशलम की अवधारणा, उद्देश्यों तथा विद्यालयी शिक्षा में कौशल आधारित शिक्षण के महत्व की जानकारी दी गई। समूह कार्य, गतिविधियों, प्रायोगिक अभ्यास, चर्चा और प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रशिक्षण को रोचक एवं सहभागी बनाया गया।
कक्षा 10 के लिए चिन्यालीसौड़, नौगांव और पुरोला विकासखंड के शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया, जबकि कक्षा 11 के प्रशिक्षण में जनपद उत्तरकाशी के सभी विकासखंडों से शिक्षक शामिल हुए। शिक्षकों को विद्यार्थियों की रुचि और क्षमता के अनुरूप कौशल विकास, स्थानीय संसाधनों के उपयोग तथा कार्यानुभव आधारित अधिगम को विद्यालयी शिक्षण से जोड़ने के लिए प्रेरित किया गया।
कक्षा 11 के प्रशिक्षण में संदर्भदाता जगजीवन शाह एवं नितेश चौहान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं कक्षा 10 के प्रशिक्षण में वासुदेव रावत, मनीष असवाल एवं गुरुदेव असवाल ने गतिविधि आधारित शिक्षण, विद्यार्थियों की सहभागिता और स्थानीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर मार्गदर्शन दिया।
कौशलम प्रशिक्षण के समन्वयक अरविन्द चौहान ने कहा कि विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है। शिक्षा को जीवनोपयोगी और कौशल आधारित बनाना समय की जरूरत है। सहसमन्वयक मो. अरशद अंसारी ने कहा कि कौशलम के माध्यम से विद्यार्थियों में रचनात्मकता, सहयोग की भावना, समस्या समाधान और आत्मनिर्भरता जैसे महत्वपूर्ण कौशल विकसित किए जा सकते हैं।
उन्होंने शिक्षकों से प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान और अनुभव को विद्यालयों तक पहुंचाने तथा विद्यार्थियों को अधिक से अधिक गतिविधि एवं कौशल आधारित अधिगम के अवसर उपलब्ध कराने का आह्वान किया।
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों ने विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करते हुए अपने अनुभव साझा किए। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी, व्यावहारिक और विद्यालयी संदर्भ में प्रभावी बताते हुए सीखी गई गतिविधियों को अपने-अपने विद्यालयों में लागू करने की प्रतिबद्धता जताई।
तीन दिवसीय प्रशिक्षण के समापन अवसर पर शिक्षकों को कौशलम की गतिविधियों को विद्यालय स्तर पर प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए प्रेरित किया गया। इस अवसर पर संस्थान के संकाय सदस्य सुशील जोशी, शांति रतूड़ी, गोपाल सिंह राणा, रिचा उनियाल सहित अन्य मौजूद रहे।

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