
आस्था और भक्ति से सराबोर यमुना घाटी, कथा व शेषनाग मेले में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब ।
उत्तरकाशी बड़कोट।
यमुना घाटी सोमवार को आस्था, भक्ति और लोक संस्कृति के रंग में सराबोर नजर आई। एक ओर श्रीमद् देवी भागवत कथा के सप्तम दिवस पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी, वहीं नाग पंचमी के अवसर पर कुपड़ा गांव में आयोजित पौराणिक शेषनाग देवता के मेले में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पहुंचकर आराध्य देव के दर्शन किए।
श्रीमद् देवी भागवत कथा के सप्तम दिवस पर कथा व्यास आचार्य हिमांशु गैरोला महाराज ने देवी भगवती की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि माता भगवती की भक्ति और सत्संग मनुष्य के जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं। सच्चे मन से की गई भक्ति से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म, सत्य, सदाचार और परोपकार को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
उधर, यमुनोत्री धाम के समीप ग्राम कुपड़ा में नाग पंचमी पर आयोजित शेषनाग देवता के पौराणिक मेले में दूर-दराज क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं ने शेषनाग, जाखेश्वर महादेव और शमेंश्वर देवता के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। मेले में पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीत, लोकनृत्य और वाद्य यंत्रों ने यमुना घाटी की समृद्ध लोक संस्कृति की शानदार झलक प्रस्तुत की।
इस दौरान पारंपरिक माखन की होली भी खेली गई, जिसमें ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। धार्मिक आयोजनों और लोक परंपराओं के इस संगम ने जहां श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराई, वहीं नई पीढ़ी को क्षेत्र की पौराणिक मान्यताओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का संदेश भी दिया।

