बुरांस के फूलों से लकदक उत्तराखण्ड के पहाड़ इनसे सरकार की रोजगार की नहीं है आड़

Pahado Ki Goonj

बुरांस के फूलों से लकदक उत्तराखण्ड के पहाड़ इनसे सरकार की रोजगार की नहीं है आड़

मदन पैन्यूली बडकोट उत्तरकाशी:उत्तराखण्ड के पहाड़ों पर इन दिनों जंगल बुरांस के फूलों से मनमोहक एवं आकर्षक हुए हैं। ऊंचाई के हिसाब से फरवरी, मार्च और अप्रैल महीने में फूलने वाले बुरांस के फूलों का इन क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीण लोग विभिन्न बीमारियों में औषधि के रूप में भी प्रयोग करते हैं। इसके अलावा बुरांस के फूल की तासीर ठंडी होने के कारण जूस भी बनाया जाता है। बुरांस समुद्रतल से 1500 से 3600 मीटर की ऊंचाई में पाया जाता है। करीब 14 मीटर तक की लम्बाई वाले ये वृक्ष मुख्यत: ढलानदार भूमि में पाए जाते है। बुरांस के फूल देखने में जितने सुंदर होते हैं, उतने ही स्वास्थ्यवर्द्धक भी हैं।
उत्तराखण्ड में पाए जाते हैं 3 प्रकार के फूल वाले बुरांस
उत्तराखंड में 3 प्रकार के फूल वाले बुरांस पाए जाते हैं, जिनमें गुलाबी, लाल और सफेद फूल लगते हैं। सफेद बुरांस तुंगनाथ में पाये जाते हैं। लाल फूलों का औषधीय महत्व सबसे अधिक माना जाता है। लोग इसे लिवर, किडनी रोग के अलावा खूनी दस्त, बुखार आदि के दौरान प्रयोग करते हैं। बुरांस के फूलों में मिथेनॉल होता है जोकि डायवटीज के लिए भी उत्तम माना जाता है। इसके अलावा बुरांस के फूलों से जूस व चटनी भी बनाई जाती है। वैसे तो बुरांस की विश्व में करीब 300 प्रजातियां हैं लेकिन लाल फूल वाले बुरांस को ही औषधीय दृष्टि से उत्तम माना जाता है। बुरांस का वैज्ञानिक नाम रोडोडेन्ड्रम है और भारत के अलावा पड़ोसी देशों जैसे नेपाल में भी काफी पाया जाता है।
भगवान को भी चढ़ाए जाते हैं बुरांस के फूल

आजकल पहाड़ों पर बुरांस के फूल खिले हैं। इससे जंगल सुहाने लगते हैं। लोग इसे दवा के रूप में प्रयोग करते हैं। हिमाचल में इनसे घरों में दवाइयां बनाई जाती हैं। दस्त-उल्टी आदि में इन फूलों का प्रयोग किया जाता है। बुरांस के फूल भगवान को भी चढ़ाए जाते हैं। बुरांस के फूलों को पीसने के बाद पेट की बीमारियां खास कर खूनी दस्त आदि में दवा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है तथा लोग इन फूलों को चटनी के रूप में भी प्रयोग करते हैं। सरकार से इसके लिए इन उनीस साल में कोई स्थानीय स्तर पर दोहन कर रोजगार प्रयाप्त मात्रा में लोगों को नहीं मिल पारहा है। उत्पादन की बात करें तो पूरे उत्तराखंड में 300टन से ऊपर फूल का उत्पादन होता है जिससे 300 टन शर्बत बनाया जासकता है उसकी बाजरी कीमत 3 करोड़ रुपये बैठती है इसके लिये 300 लोगों को सीधे तौर पर रोजगार की गारंटी देकर 50000 हजार से अधिक कमाई कर सकते हैं।पर सरकार की नियत जन सेवा की होतो बात बने।

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