देहरादून। स्वास्थ्य निदेशालय ने 15 अक्टूबर तक डेंगू का प्रकोप कम होने की बात कही थी। लेकिन स्वास्थय निदेशालय के सभी दावे फेल नजर आ रहे हैं। प्रदेश में डेंगू का कहर जारी है और लगातार डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रहा है। प्रदेश में डेंगू का आंकड़ा 8143 पहुंच गया है। वहीं, प्रदेश में दो जिलों में सबसे अधिक डेंगू के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिसमें देहरादून में डेंगू के मरीजों की संख्या 4519 और नैनीताल में 2541 मरीजों की संख्या हो गई है। प्रदेश में बढ़ते जा रहे डेंगू के मरीज.गौर हो कि अक्टूबर का आधा महीना निकल गया है, लेकिन डेंगू के मरीजों की संख्या कम नहीं हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार शुक्रवार को देहरादून जिले 55 ओर नैनीताल में 54 मरीजों की पुष्टि हुई है। वही हरिद्वार में अब तक 363, उधमसिंह नगर में 544, पौड़ी में 17, टिहरी में 118, अल्मोड़ा में 24, रुद्रप्रयाग में 6, चमोली में 4, बागेश्वर में 3, चंपावत में दो और पिथौरागढ़ में दो मरीज डेंगू की चपेट में आए हैं।उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग की महानिदेशक अमिता उप्रेती ने जानकारी देते हुए बताया कि शुक्रवार को डेंगू के मरीजों की संख्या 8143 हो गई है। साथ ही बताया कि प्रदेश में अक्टूबर में करीब डेंगू मच्छर खत्म हो चुके हैं। वहीं, प्रदेश में डेंगू से पीड़ित 8 लोगों की मौत हुई है, जिसमें देहरादून में 6 और नैनीताल में दो की मौत हुई है।
गोल्डन कार्ड धारकों को मिलेंगी सभी सुविधाएं
Sat Oct 19 , 2019
निजी अस्पताल में करवा पाएंगे इलाज देहरादून। उत्तराखंड में गोल्डन कार्ड धारकों की सुविधाओं को देखते हुए अस्पतालों को ही मरीजों के मेडिकल टेस्ट करने के लिए अनुबंध किया गया है। ऐसे में किसी टेस्ट की सुविधा न होने पर भी अस्पताल को ही मरीज के लिए मेडिकल जांच की […]

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ब्रेकिंग न्यूज़ उत्तरकाशी के पुरोला को जिला बनाओजिला मुख्यालय पुरोला से 150 से 200 किमी की दूरी में होने से उन्हें काफी सारी परेशानीयों का सामना करना पड़ता है। -स्थानीय लोगों को हर छोटी या बड़ी समस्या के लिये इतना लम्बा सफर तय करना पड़ता है। -जिला मुख्यालय से दूर होने के कारण वहां के विकास पर ध्यान नहीं दिया जाता है। -उनका कहना है कि पुरोला को जिला बनाने से यह सारी परेशानी खत्म हो जाएंगी। अलग जिला बनाने की मांग क्षेत्रवासियों ने बताया कि 24 फरवरी 1960 में उत्तरकाशी जिला टिहरी से अलग हुआ था। उस समय रवांई परगना उत्तरकाशी जिले में शामिल किया गया था। यह क्षेत्र बड़कोट, पुरोला, नो गांव, मोरी तहसील के अंदर आता है। 1960 में रवांई के लोगों ने अलग जिले की मांग शुरू कर दी थी। उसके बाद उत्तराखंड राज्य बनने के बाद पृथक जिले की मांग और तेज हुई, जिसके चलते सरकार ने राज्य के 4 नए जिलों की घोषणा में यमुनोत्री को जिला बनाने की बात कही थी। जिससे पुरोला के लोग भड़क गए और तब से लगातार पुरोला को जिला बनाने की मांग की जा रही है।
Pahado Ki Goonj July 31, 2018

