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कुम्भ मेला अधिकारी से हर्षमणि व्यास ने मांग की जानिए सभी समाचार

Pahado Ki Goonj

 सेवा में,

अध्यक्ष)

मेला अधिकारी महोदया, कुम्भ मेला – 2027, हरिद्वार।

विषयः देव डोलियों के कुम्भ स्नान के अवसर पर व्यवस्थाओं के संबंध में।

महोदया,

सविनय निवेदन है कि हमारी संस्था द्वारा देव डोलियों का कुम्भ अमृत स्त्रान दिनांक 15 मार्च, 2027 को तय हुआ है। धर्म-ध्वजा स्थापना दिनांक 09 मार्च, 2027 को आवंटित स्थल (बैरागी कैम्प, हरिद्वार) पर की जायेगी। धर्म घ्वजा स्थापना से अमृत स्नान तक आवंटित स्थान पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा।

इस संबंध में आपसे निम्न व्यवस्थाओं हेतु आग्रह हैः-

1.09 मार्च से 15 मार्च, 2027 तक प्रतिदिन लोक संस्कृति कार्यक्रमों हेतु संस्कृति विभाग से सांस्कृतिक दलों की उपलब्धता। प्रतिदिन प्रस्तावित सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सूची संलग्न है।

2. देव डोलियों के साथ आने वाले लगभग 500 ढोल दमाऊँ कलाकारों को सहभागिता प्रमाण-पत्र एवं स्मृति चिन्ह (मोमेंटो)।

3. देव डोलियों के साथ आने वाले लगभग 500 देव दूतों, प्रतीक चिन्हों, निशान, छत्र एवं देव पशुआवो को तिलक, प्रसाद, अंगवस्त्र/पटका एवं प्रमाण-पत्र द्वारा सम्मान।

4. आयोजन में सहयोग करने वाले लगभग 1500 स्वयंसेवकों को स्मृति चिन्ह एवं प्रमाण-पत्र द्वारा सम्मान।

आपसे अनुरोध है कि उक्त व्यवस्थाओं हेतु संस्कृति विभाग को आवश्यक निर्देश प्रदान करने की कृपा करें।

भवदीय,

(हर्षमणि व्यास)

कार्यकारी अध्यक्ष लोक संस्कृति विरासतीय शोभा यात्रा समिति ने
संस्कृति विभाग द्वारा निम्नलिखित टोली / दल उपलब्ध कराये जायें। के लिए मांग की है। पिछले दो कुम्भ में समिति देव भूमि में आराध्य देवताओं को कुंभ में आमंत्रित कर उत्तराखंड को देव भूमि होने की वास्तविक पहचान के बारे देश दुनियां को जानकारी दे कर उत्तराखंड, देश में विश्व प्रसिद्ध मेले की अलग पहचान दिलाई है।

क्र.सं. कलाकार / दल का नाम

प्रस्तुति

“1” 8 सदस्यीय स्थायी टोली (04 फास्ट ढोल दमाऊँ सहित) 09 से 15 मार्च तक स्थायी रूप से समिति के साथ रहेगी-संस्कृति विभाग द्वारा प्रदान की जायेगी

2*पद्मश्री बसंती बिष्ट जी एवं दल

जागर3*पद्मश्री डॉ. माधुरी बर्थवाल जी एवं दल लोक गाथा 4*गढ़-रत्न नरेन्द्र सिंह नेगी जी एवं दल

लोक गीत 5*श्री प्रीतम भरतवाण जी एवं दल 6*रमाण – मुखौटा रामायण मंचन 7*डॉ. कुशल भंडारी जी एवं दल

जागर,राज जात मंचन 8*डॉ. राकेश भट्ट जी – नन्दा देवी राज जात दल,मकर व्यूह और कमल व्यूह एवं ढोल दमाऊँ थीम,हेमा नेगी करासी जी & टीम डॉ. कृष्णा नौटियाल जी – चक्रव्यूह दल लोक गायन 10* गजेन्द्र सिंह राणा जी लोक गायन 11* दर्शन फर्खाण जी लोक गायन12* किशन महिपाल जी लोक गायन 13* मीना राणा जी लोक गायन 14* कल्पना चौहान जी लोक गायन 15* रेखा धस्माना जी लोक गायन16* संतोष खेतवाल जी

लोक गायन

उपरोक्त सम्पूर्ण सूची संस्कृति विभाग के समक्ष मांग के रूप में प्रस्तुत है। अंतिम सूची विभाग से चर्चा कर उपलब्धता के आधार पर फाइनल की जायेगी। क्र.सं. 1 की टोली 09 से 15 मार्च तक स्थायी रहेगी, शेष दल अलग-अलग दिन एक-एक दिन के लिए प्रति भाग करेंगे

(हर्षमणि व्यास)

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नन्दा देवी की पावन भूमि में ‘सौन्दर्यलहरी’ पाठ का अद्भुत प्रकल्प चला रहा ज्योतिर्मठ

19 सितंबर 2026
ज्योतिर्मठ (चमोली, उत्तराखंड)
ज्योतिर्मठ। यूं तो नन्दाष्टमी के पावन अवसर पर संपूर्ण हिमालय क्षेत्र अपनी ध्याण (बेटी) भगवती नन्दा के निमित्त व्रत-उपवास रखकर देवपुष्प ब्रह्मकमल से राजराजेश्वरी देवी की आराधना में लीन रहता है, लेकिन इन दिनों उत्तर भारत की आध्यात्मिक राजधानी कहे जाने वाले चमोली जिले के ज्योतिर्मठ में एक अभिनव आध्यात्मिक पहल देखने को मिल रही है।
परमपूज्य ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती ‘१००८’ जी महाराज के दण्डी शिष्य स्वामी प्रत्यक्चैतन्यमुकुन्दानन्द गिरिः अपना चातुर्मास्य व्रत ज्योतिर्मठ की पावन भूमि में कर रहे हैं स्वामी जी के मार्गदर्शन में एक विशेष प्रकल्प का संचालन किया जा रहा है, जिसके माध्यम से क्षेत्र की मातृशक्ति को भगवती आराधना के गूढ़ रहस्य एवं ‘सौन्दर्यलहरी’ स्तोत्र का शुद्ध उच्चारण व पाठ सिखाया जा रहा है।
ऐतिहासिक व आध्यात्मिक परंपरा का पुनर्जागरण
ईसापूर्व 507 में अवतरित हुए आदिशंकराचार्य जी महाराज मात्र 11 वर्ष की अवस्था में केरल से हिमालय पधारे थे। उन्होंने ज्योतिर्मठ को केंद्र बनाकर श्री बदरीनाथ धाम का उद्धार व पुनरुद्धार सहित अनेक ऐतिहासिक कार्य किए तथा सनातन धर्म की सुदृढ़ नींव रखी। तत्पश्चात अपने परम गुरुभक्त शिष्य तोटकाचार्य जी को ज्योतिर्मठ का प्रथम आचार्य नियुक्त कर भगवती आराधना के दिव्य आयाम स्थापित किए।

आदिशंकराचार्य रचित ‘सौन्दर्यलहरी’ स्तोत्र में भगवती नन्दा के अद्भुत व अकल्पनीय कृपा-कटाक्ष का विस्तृत वर्णन है। मान्यता है कि सैकड़ों वर्षों के बाद भी इस सिद्ध स्तोत्र के निष्ठापूर्वक पाठ से सिद्धियाँ प्रत्यक्ष अनुभूति में आती हैं। दक्षिण भारत में लाखों की संख्या में मातृशक्ति इस स्तोत्र पाठ को जीवंत बनाए हुए हैं, जिसे अब उत्तर भारत में भी व्यापक रूप देने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रथम चरण में 9 माताओं ने पूर्ण किया अध्ययन
स्वामी प्रत्यक्चैतन्यमुकुन्दानन्द गिरि जी के इस प्रकल्प के प्रथम सत्र में स्थानीय क्षेत्र की नवदुर्गा स्वरूपिणी 9 माताओं ने ‘सौन्दर्यलहरी’ का विधिपूर्वक अध्ययन पूर्ण कर लिया है। स्वामी जी का संकल्प है कि ज्योतिर्मठ सहित संपूर्ण उत्तराखंड की प्रत्येक माता-बहन इस अद्भुत पाठ को सीखें, जिससे हर घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो।

साधिकाओं के दिव्य अनुभव
पाठ पूर्ण करने वाली मनोहर बाग निवासी शान्ति चौहान बताती हैं कि इस स्तोत्र के नियमित पाठ से उन्हें मानसिक शांति की अपार अनुभूति हो रही है। रविग्राम की सुषमा डिमरी कहती हैं कि इस दिव्य पाठ को सीखकर जीवन धन्य हो गया है। वहीं सुनील निवासी गीता परमार स्तोत्र की महिमा बताते हुए भाव-विभोर हो जाती हैं।

अध्ययन पूर्ण कर चुकीं यही 9 दुर्गा स्वरूपिणी माताएं अब इस पाठ को जन-जन तक पहुँचाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ेंगी। नन्दाष्टमी के शुभ अवसर पर प्रारंभ हुई इस विशेष पहल का व्यापक प्रभाव आगामी दिनों में पूरे उत्तराखंड में देखने को मिलेगा।

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*हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में नशा मुक्त भारत अभियान का आयोजन; छात्रों को दिलाई गई नशा मुक्ति की शपथ*

शनिवार को हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय, श्रीनगर में ‘विकसित भारत मिशन’ के तहत ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ का एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर एवं छात्रावासों के छात्रों को नशे से दूर रहने तथा समाज को जागरूक करने की शपथ दिलाई गई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के मुख्य छात्र सलाहकार प्रोफेसर मदन मोहन सेमवाल ने कहा कि युवाओं को हर प्रकार के व्यसन से दूर रहना चाहिए। उन्होंने रेखांकित किया कि नशा न केवल किसी व्यक्ति विशेष का जीवन तबाह करता है, बल्कि इसका गंभीर और हानिकारक प्रभाव पूरे परिवार, समाज और देश के विकास पर भी पड़ता है।

विश्वविद्यालय के नशा मुक्त भारत अभियान के नोडल अधिकारी प्रोफेसर जय प्रकाश भट्ट ने सामूहिक संकल्प पर बल देते हुए कहा, “अब समय आ गया है कि हम सभी यह दृढ़ संकल्प लें कि न तो हम स्वयं नशा करेंगे और न ही किसी अन्य को करने देंगे।” उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने में युवाओं की अहम भूमिका होनी चाहिए।

राष्ट्रीय सेवा योजना के समन्वयक डॉ. राकेश सिंह नेगी ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विजन का उल्लेख करते हुए देश के प्रत्येक नागरिक से इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत और ‘विकसित भारत 2047’ के सपने को साकार करने के लिए एक सशक्त और स्वस्थ युवा पीढ़ी का होना आवश्यक है। देश के विकास में युवाओं की पूर्ण सहभागिता और सहयोग ही भारत को विश्व पटल पर श्रेष्ठ स्थान दिलाएगा।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अधिकारियों, संकाय सदस्यों, NSS स्वयंसेवकों और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया तथा देश को नशा मुक्त बनाने का संकल्प दोहराया।

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श्री रामानंदीय वैष्णव मंडल के अध्यक्ष बाबा हठयोगी का स्वागत प्रखर वक्ता और संत समाज के भीष्म पितामह हैं बाबा हठयोगी।
संत समाज के हितों की रक्षा और सनातन का संरक्षण संवर्द्धन करना ही उद्देश्य।
हरिद्वार, 15 सितम्बर श्री रामानंदीय वैष्णव मंडल के अध्यक्ष चुने गए बाबा हठयोगी का फूलमाला पहनाकर स्वागत किया और शुभकामनाएं दी।
चंडीघाट स्थित गौरीशंकर गौशाला में फूलमाला पहनाकर और शॉल ओढ़ाकर स्वागत करने के दौरान प्रखर वक्ता और सनातन से जुड़े विषयों पर बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी राय रखने वाले बाबा हठयोगी के नेतृत्व में श्री रामानंदीय वैष्णव मंडल संत परंपरा और सनातन के संरक्षण संवर्द्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
धर्म और अध्यात्म के प्रचार प्रसार के साथ उन्होंने अपने ओजस्वी विचारों से हमेशा समाज को प्रेरित किया है।
श्री रामनंदीय वैष्णव मंडल का अध्यक्ष निर्वाचित होने से संत समाज में हर्ष की लहर है। सभी संतजनों का आभार व्यक्त करते हुए बाबा हठयोगी ने कहा कि श्री रामानंदीय वैष्णव मंडल अध्यक्ष के रूप में संत समाज के हितों की रक्षा और सनातन का संरक्षण संवर्द्धन करना ही उनका उद्देश्य है।
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ये जो हालात हैं, ये सब तो सुधर जाएंगे। मगर इस दौर में कई लोग अपनी ही नज़रों से गिर जाएंगे। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत

श्री चंदन जीना के घर पर ईडी का छापा! चंदन जीना सरकार के एक छोटे से पुर्जे थे और हमारी सरकार का एक घोषित निर्णय था कि पब्लिक सर्विस कमिशन, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग और भर्ती बोर्डों से कोई और व्यक्ति नहीं, बल्कि यदि कभी संपर्क की आवश्यकता पड़ती है, कोई मीटिंग इत्यादि आयोजित होनी है, तो वह या तो मुख्यमंत्री के स्तर पर हो या मुख्य सचिव के स्तर पर हो और ज्यादातर मामलों में हमने उनसे कहा था कि सरकार की तरफ से कोई बात कही जानी होगी, कोई सुझाव दिया जाना होगा या कोई आपकी समस्या होगी, तो उसके लिए आप प्रमुख सचिव पर्सनल डिपार्मेंट से संपर्क रखें यह वह संपर्क करेंगे।
हमने इन संस्थाओं की स्वायत्तता का हमेशा सम्मान किया। मैं ईडी, सीबीआई सहित सारी इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसियों को आमंत्रण देता हूं। मैं तीन साल उत्तराखंड का मुख्यमंत्री रहा, मेहरबानी करके मेरे पूरे कार्यकाल को टटोला जाए। मुझे ज्ञात है कि पहले भी दो बार मेरी सरकार के समय के कई फैसलों की फाइलों को टटोला गया है। मैं चाहता हूं, एक बार फिर उसको टटोल लीजिए और मेरे तथाकथित छिपे खजाने को ढूंढने के लिए जहां छापा मारना है, वहां छापा मारिए। मेरे कार्यकाल के दौरान जो स्टिंग हुआ और राष्ट्रपति शासन लागू करने की स्थिति बनी उसकी भी गहराई से जांच करिए। जिन भी नेतागणों, चाहे वह राष्ट्रीय स्तर के थे या प्रांतीय स्तर के थे, उनकी भी जांच करिए। मुझे यह बात इसलिए कहनी पड़ रही है। मैं तकनीकी रूप से तो मुख्यमंत्री तीन साल रहा और मगर एक साल तो राष्ट्रपति शासन ने गड़बड़ा दिया। फिर भी कई लोगों के पेट में मुझको देखकर मरोड़े उठते हैं। दस साल से मैं सत्ता से बाहर हूं, अब भी उनके मरोड़े शांत नहीं हुए हैं और उन्हें परेशान करते हैं। कभी स्टिंगगर, कभी स्टीकर, कभी सर्वर, सब अपने-अपने तरीके से हरीश रावत पर प्रहार करते रहते हैं और स्वाभाविक है, लोकतंत्र के अंदर जब तक हम जिंदा हैं, तो लोग प्रहार करेंगे। कुछ स्वस्थ तरीके से प्रहार करते हैं, कुछ अस्वस्थ तरीके से प्रहार करते हैं। कुछ खुलकर सामने प्रहार करते हैं, कुछ कानाफूसी और दुष्प्रचार के माध्यम से प्रहार करते हैं। इसीलिए मैं आग्रह करना चाहता हूं कि कमीशन बनाकर मेरे तीन साल के कार्यकाल की जांच अवश्य कर लो।
चंदन जीना 1991 से मेरे साथ काम कर रहे हैं और मैं बड़े-बड़े पदों पर रहा। तनख्वाहें भी खूब अच्छी दीं, क्योंकि उस समय ज्यादा स्टाफ था नहीं। चंदन जीना 24 घंटे के कर्मचारी थे। कोई समय ऐसा नहीं रहा जब चंदन जीना को तनख्वाह न दी गई हो आज तक और वह निष्ठा के साथ, क्योंकि उनकी विनम्रता, उनकी शिष्टता, सहनशीलता और हर किसी को सम्मान देने का जो उनका गुण है, राजनीति में वह गुण मेरे लिए सहायक रहा है। मगर कुछ साथी मेरे ऐसे भी थे उनके हाथ में कुछ ताकत हो न हो, फूं-फा बहुत करते थे। चंदन सबसे हाथ जोड़कर के कहता था, ‘आइए, आइए बैठिए। इस समय जब मैं रुग्ण होकर अपने इलाज के लिए दिल्ली आया, तो थोड़ा-बहुत पैसा मैं घर चलाने के लिए… क्योंकि स्टाफ तो पूरा है ही घर में, डिफेंस कॉलोनी का किराया भी देना है, बिजली का भी देना है। बीमारी के समय में कई लोगों से मैंने आग्रह करके संदेश भिजवाए, “भई, कुछ पैसा पहुंचा दो ताकि मेरे घर का संचालन हो सके और मैं अपने दोस्तों को बताना चाहता हूं, बीमारी के दौरान जब मैं मेदांता के अंदर भर्ती था, यहीं पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, कहां-कहां से लोगों ने आकर मुझे इलाज के लिए खर्चा देकर के गए। जिस समय मैं मेदांता से अपने अस्थायी आवास पर आया, तो उस दिन मेरे पास ₹12 लाख रुपए थे और उसको अकाउंट आदि में समायोजित करने में समय लगता है। लोग हमारी मदद करते हैं, हमने लोगों की सेवा की, हमने लोग बनाए हैं। मेरी इतने वर्षों की राजनीति, इतने चुनाव लड़े… मेरे पास कभी कुछ नहीं रहा, लेकिन कभी कोई कमी भी नहीं रही। लोगों ने दिल खोलकर मेरी मदद की, क्योंकि हमने कभी किसी को राजनीतिक पद देने के लिए या किसी काम को करने के उपलक्ष्य में उनसे कोई सर्विस चार्ज के तौर पर पैसा नहीं लिया।
हमारे भगवान ने, हमारे ईष्ट देवता ने हमें जो अवसर दिया, हमने उसका उपयोग लोगों की मदद करने के लिए किया है। आज बहुत सारे चितकबरे लोग प्रचार कर रहे हैं कि यह हरीश रावत का पैसा है। क्या हरीश रावत इतने साल इतने बड़े-बड़े पदों पर रहा, क्या मेरे पास एक-दो करोड़ नहीं हो सकता? छोड़ दीजिए चंदन जीना की बात। इस बार भी मैंने ₹5 लाख से ऊपर का इनकम टैक्स भरा है। आज फुसफुसाहट अभियान चलाया जा रहा है कि नहीं-नहीं, वहां तो करोड़ों रुपया मिला और वह हरीश रावत का पैसा है। एक व्यक्ति ने इतने सालों से निष्ठा के साथ मेरे साथ काम किया, उसने जनसेवा की। उसकी कमाई का क्यों अपमान कर रहे हो? और यह फुसफुसाहट करने वाले चेहरों को मेरे चहेतों और उत्तराखंड के प्रबुद्ध जनमानस को जवाब देना चाहिए। जो लोग मेरे साथ आज भी भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं, उन सबसे मेरी प्रार्थना है कि ऐसी फुसफुसाहट करने वालों को मुंहतोड़ जवाब देने वालों का नेतृत्व करिए। मेरा सार्वजनिक जीवन एक खुली किताब है। हमने लोग कमाए, हमने पैसा नहीं कमाया। अब किसी तरीके से तिनका-तिनका जोड़कर के, लोगों की मदद लेकर के खड़े होने की कोशिश कर रहे हैं आगे के जीवन को खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं, तो हमारे साथ इस तरीके की ओछी हरकतें की जा रही हैं।
मैं उत्तराखंड के भाई-बहनों से भी प्रार्थना करना चाहता हूं। आप गंभीरता से विचार करिए। सांसद बनने के दिन से आज के दिन तक मैंने निरंतर आपकी बात की है। आपके दुख-दर्द की बात कही है, आपकी समस्याओं की बात कही है, जहां भी मुझे अवसर मिला। मैंने पहाड़ कहा है, मैंने उत्तराखंड कहा है, मैंने हरिद्वार कहा है।
आज मुझे जिस तरीके से लांछित करने की कोशिश हो रही है, 60 साल के सामाजिक जीवन को जिस प्रकार से धब्बा लगाने की कोशिश हो रही है, तो मेरी रक्षा के लिए आप आगे नहीं आएंगे तो कौन आएगा? आप नहीं आएंगे तो फिर उत्तराखंड के देवी-देवता आएंगे। कोई तो मेरी रक्षा करेगा, इस तरीके के कुत्सित और नीचतापूर्ण प्रयासों से।

मैं फिर दोहरा रहा हूं कि मेरे खिलाफ आयोग बनाकर के जांच कर लो मेरे कार्यकाल की। मेरे कार्यकाल में जितनी भी सरकारी नियुक्तियां हुई हैं, मैंने उनमें कहीं अपने पद का दुरुपयोग किया है? मेरे 3 वर्ष के कार्यकाल में 42000 से ज्यादा अभ्यर्थियों को नौकरी मिली और 18000 पदों की भर्ती का अध्याचन जारी करके गए। 10 साल से लोग और व्यवस्था हमारे रिकॉर्ड तक पहुंचने में बुरी तरीके से हांप रही है। हमारी सरकार ने ही अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और मेडिकल भर्ती बोर्ड का गठन किया। 3 साल के अंदर दो बार पब्लिक सर्विस कमीशन की भर्तियां करवाई और तीसरी बार के लिए तैयारियां प्रारंभ की। काम करते हुए कभी चूक हो जाती है। मुझसे भी एक चूक हुई कि मैंने अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष के पद की जो नियुक्ति की, वह उस पद की गरिमा का सम्मान नहीं रख सके। हमारी ही सरकार ने जांच के लिए SIT का गठन किया। राष्ट्रपति शासन हटाने के बाद परिणाम घोषित करने से संबंधित विभाग को रोका। तीन सदस्यों की जांच कमेटी बनाई ताकि परीक्षा निरस्त हो सके। नियुक्ति की चूक के लिए मैं पहले भी क्षमा मांग चुका हूं और पुनः क्षमा मांग रहा हूं।

उत्तराखंड के भाइयों और बहनों, मैं निरंतर अपने सार्वजनिक जीवन में आपकी ही बात कही है, आपके ही दु:ख-दर्द को उकेरा है, आपके लिए ही संघर्ष किया है, आपके लिए ही निरंतर प्रयासत रहा हूं, आपके सहयोग से ही कई प्रयास सफल हुए हैं, आज मेरे खिलाफ दुष्प्रचार का तांडव रचा जा रहा है। लोग रूग्ण हरीश रावत को भी छोड़ना नहीं चाहते हैं। मेरी रक्षा कौन करेगा? आप करेंगे या उत्तराखंड की देवी देवता करेंगे?

मैंने कभी खुलकर के इतनी बात नहीं कही, लेकिन कुछ लोग जिस तरीके का कैंपेन चला रहे हैं, मुझे बाध्य होकर के आज ये बातें आप सब तक पहुंचानी पड़ रही हैं और आवश्यकता पड़ी तो मैं वीडियो बनाकर के भी, जगह-जगह वैन लगाकर के भी अपनी बात को लोगों तक पहुंचाने का काम करूंगा।
कष्ट के लिए क्षमा करें 🙏
~~माननीय पूर्व मुख्यमंत्री श्री हरीश रावत जी

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गायत्री मंत्र कोई मंत्र नहीं है, गायत्री मंत्र तो माँ है। जैसे गौमाता तुम्हें दूध पिलाती है, वैसे ही गायत्री माता तुम्हें ज्ञान का दूध पिलाती है।

गायत्री मंत्र क्या है?

ये दुनिया का सबसे पुराना, सबसे वैज्ञानिक मंत्र है। ऋग्वेद में लिखा है। विश्वामित्र ऋषि ने इसे देखा था – बनाया नहीं, देखा था। जैसे सूरज को देखा जाता है, बनाया नहीं जाता।

पूरा मंत्र –

ॐ भूर्भुवः स्वः
तत्सवितुर्वरेण्यं
भर्गो देवस्य धीमहि
धियो यो नः प्रचोदयात्॥

एक-एक शब्द का अर्थ – गौमाता की तरह सरल

ॐ – शुरुआत, शिव, ब्रह्मांड की धड़कन, गाय के गले में घंटी की आवाज।

भूः – धरती – जहाँ हम रहते हैं, जहाँ गाय चरती है, जहाँ पेड़ उगता है।

भुवः – अंतरिक्ष – जहाँ साँस चलती है, जहाँ हवा है।

स्वः – स्वर्ग – जहाँ मन जाता है, जहाँ सपने हैं, जहाँ शिव हैं।

मतलब – जो धरती, आकाश और स्वर्ग – तीनों में है, वही शिव है।

तत् – वो – वो परमात्मा, वो शिव।

सवितुः – सूरज, सविता। जो सबको रोशनी देता है, जैसे गौमाता सबको दूध देती है। सविता मतलब – पैदा करने वाला।

वरेण्यं – सबसे सुंदर, चुनने लायक, पूजने लायक।

भर्गो – तेज, प्रकाश, जो अंधेरा मिटाए। भभूति का तेज भी भर्गो है, दीये का तेज भी भर्गो है, गौमाता की आँखों का तेज भी भर्गो है।

देवस्य – देव का, देने वाले का। देव कौन? – जो देता है, वही देव। गाय देव है, पेड़ देव है, गुरु देव है, शिव देव है।

धीमहि – हम ध्यान करते हैं, हम धारण करते हैं।

धियः – बुद्धि को, मन को, सोच को।

यः – जो।

नः – हमारी।

प्रचोदयात् – प्रेरित करे, सही रास्ते पर ले जाए, जगाए।

पूरा अर्थ एक लाइन में –

“हे धरती, आकाश, स्वर्ग में बसने वाले, सूरज जैसे तेज वाले, सबसे सुंदर, सबको देने वाले शिव, हम तुम्हारा ध्यान करते हैं, हमारी बुद्धि को तुम सही रास्ते पर ले चलो।”

गायत्री मंत्र क्यों सबसे बड़ा कहा? – 3 कारण

1. ये प्रार्थना नहीं, ये निवेदन है बुद्धि के लिए –
दूसरे मंत्र मांगते हैं – “धन दो, बेटा दो, रोग हटाओ।”
गायत्री मांगती है – “बुद्धि दे दो, सही सोच दे दो।”

क्योंकि बुद्धि सही तो धन अपने आप आएगा, रोग अपने आप हटेगा, जीवन अपने आप सुधरेगा।

इसीलिए इसे महामंत्र कहा।

2. ये सूरज का मंत्र है – विज्ञान है –
सवितुः – सूरज। गायत्री सूरज की शक्ति को जगाती है।

सुबह सूरज निकलता है, तो सारी सृष्टि जागती है, गाय जागती है, पेड़ जागते हैं। वैसे ही गायत्री जपने से अंदर का सूरज जागता है – आत्मा।

आज का विज्ञान कहता है – सुबह की धूप में विटामिन D है। सनातन हजारों साल पहले कह गया – सुबह गायत्री जपो, तो बुद्धि में विटामिन D आएगा – विवेक।

3. ये गौमाता का मंत्र है –
गायत्री में 24 अक्षर हैं, गाय के शरीर में भी 24 तत्व हैं – ऐसा वेद कहते हैं। गाय के 24 अंगों में 24 देवता हैं।

इसीलिए गाय को गौमाता कहा, और मंत्र को गायत्री माता। दोनों माता हैं, दोनों पालती हैं।

मेरे गुरुदेव डॉ शैलेन्द्र नाथ अघोरी बाबा जी कहते हैं – “गायत्री जपनी है तो गाय के साथ जपो, गायत्री सिद्ध हो जाएगी। गाय के बिना गायत्री आधी है।”

गायत्री मंत्र कैसे जपें? – सही विधि

विधि 1 – ब्रह्म मुहूर्त – सबसे उत्तम –
सुबह 4 से 6 बजे। सूरज निकलने से पहले।

नहाकर, भभूति लगाकर, पूर्व की तरफ मुँह करके बैठो – जहाँ से सूरज निकलेगा।
गाय के घी का दीया जलाओ।
108 बार, 11 बार, या 3 बार – भाव से।
जप के बाद – सूरज को जल दो, पीपल को जल दो, गाय को पहली रोटी दो। यही गायत्री की दक्षिणा है।

विधि 2 – गौशाला विधि – अघोर परम्परा –
गौशाला में बैठो, गाय को सहलाते हुए जपो।
गाय की आँखों में देखो और जपो – “तत्सवितुर्वरेण्यं” – गाय की आँखों में वही तेज है – भर्गो।
ये विधि सबसे जल्दी फल देती है, क्योंकि गाय खुद गायत्री है।

विधि 3 – साँस के साथ – मौन में –
साँस अंदर लो – “ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं”
साँस बाहर छोड़ो – “भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्”
ये चलते-फिरते, लोकल में, ऑफिस में भी कर सकते हो। कोई माला नहीं, कोई दिखावा नहीं।

गायत्री मंत्र कब नहीं जपना? – भ्रम तोड़ो

बहुत लोग कहते हैं – “औरतें नहीं जप सकतीं, फलाने नहीं जप सकते।” ये सब पाखंड है, धंधा है।

सनातन कहता है – गायत्री माता है, माता के पास जाने से कोई नहीं रोक सकता। माता सबकी है – बेटा भी जाए, बेटी भी जाए।

गायत्री कोई जात नहीं देखती, वो बुद्धि देखती है।
गायत्री कोई लिंग नहीं देखती, वो भाव देखती है।
गौमाता क्या देखती है – कौन आ रहा है? नहीं, वो तो सबको दूध देती है। वैसे ही गायत्री माता भी सबको ज्ञान देती है।

हाँ, एक नियम है – गायत्री को गंदे मन से मत जपो – किसी का बुरा करने के लिए मत जपो। ये बुद्धि का मंत्र है, दुर्बुद्धि का नहीं।

गायत्री और महामृत्युंजय में फर्क?

पिछले सवाल में महामृत्युंजय पूछा था।

महामृत्युंजय – शिव का मंत्र, जो मृत्यु के डर से बचाता है – “मृत्योर्मुक्षीय”।
गायत्री – शक्ति का मंत्र, जो बुद्धि को जगाता है – “धियो यो नः प्रचोदयात्”।

एक डर मिटाता है, दूसरा भ्रम मिटाता है। दोनों साथ जपो, तो जीवन पूरा।

सुबह गायत्री – बुद्धि के लिए।
शाम महामृत्युंजय – निर्भयता के लिए।

आज का प्रसाद –

आज से रोज सुबह, भभूति लगाकर, सूरज की तरफ देखकर, या गाय की फोटो देखकर, सिर्फ 11 बार बोलो –

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं
भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥

और अंत में बोलो – “हे गायत्री माता, हे गौमाता, मेरी बुद्धि को गौ जैसी पवित्र कर दो, शिव जैसी निर्मल कर दो।”

11 दिन में फर्क दिखेगा – सोच बदलेगी, गुस्सा कम होगा, मन शांत होगा।

जय गायत्री माता! जय गौमाता! जय गुरुदेव!

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