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रंवाई में गूंजेगा ‘आजाद पंचायत’ का बिगुल! विश्वविद्यालय और मेडिकल कॉलेज की मांग पर 15 सितंबर से आंदोलन ।

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रंवाई में गूंजेगा ‘आजाद पंचायत’ का बिगुल! विश्वविद्यालय और मेडिकल कॉलेज की मांग पर 15 सितंबर से आंदोलन

बड़कोट, उत्तरकाशी।

रंवाई घाटी के समग्र विकास, उच्च शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग को लेकर क्षेत्र में जनआंदोलन की तैयारी शुरू हो गई है। शनिवार को तुनाल्का स्थित रौतेला होटल में सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं और जनप्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में सर्वसम्मति से ‘आजाद पंचायत’ के बैनर तले 15 सितंबर 2026 से बड़कोट में व्यापक जनआंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया गया।
बैठक में स्पष्ट किया गया कि आंदोलन पूरी तरह गैर-राजनीतिक होगा। इसका किसी राजनीतिक दल, संगठन अथवा व्यक्ति विशेष के समर्थन या विरोध से कोई लेना-देना नहीं होगा। आंदोलन का मुख्य उद्देश्य रंवाई घाटी के शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास से जुड़े जनहित के मुद्दों को सरकार के सामने मजबूती से रखना है।
दो बड़ी मांगों को लेकर आंदोलन
आंदोलन में मुख्य रूप से दो प्रमुख मांगें सरकार के सामने रखी जाएंगी। पहली मांग है रंवाई विश्वविद्यालय की स्थापना। प्रस्तावित विश्वविद्यालय में कृषि, बागवानी, पर्वतीय विकास, पर्यटन, पर्यावरण, विज्ञान, कला, वाणिज्य सहित विभिन्न विषयों की उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने की मांग की गई है। वक्ताओं का कहना है कि स्थानीय जरूरतों और पहाड़ की परिस्थितियों के अनुरूप शोध एवं विकास का केंद्र बनने वाला विश्वविद्यालय क्षेत्र के युवाओं के भविष्य को नई दिशा दे सकता है।
दूसरी प्रमुख मांग रंवाई घाटी में मेडिकल कॉलेज एवं आधुनिक अस्पताल की स्थापना है। आंदोलनकारियों का कहना है कि क्षेत्र के लोगों को गंभीर बीमारी की स्थिति में बेहतर उपचार के लिए देहरादून, ऋषिकेश और अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। इससे लोगों को आर्थिक, मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। क्षेत्र में आधुनिक चिकित्सा संस्थान स्थापित होने से स्थानीय लोगों को पहाड़ में ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी और युवाओं को चिकित्सा शिक्षा के अवसर भी प्राप्त होंगे।
15 सितंबर से बड़कोट में आंदोलन का आगाज
बैठक में निर्णय लिया गया कि जनआंदोलन का शुभारंभ 15 सितंबर 2026 को नगरपालिका टैक्सी पार्किंग, बड़कोट से किया जाएगा। इसके बाद आंदोलन को व्यापक रूप देते हुए रंवाई घाटी के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को इससे जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
वक्ताओं ने कहा कि रंवाई घाटी लंबे समय से उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी का सामना कर रही है। बेहतर उच्च शिक्षा के लिए युवाओं को घर से दूर जाना पड़ता है, जबकि गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के दौरान मरीजों और उनके परिजनों को सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है।
आजाद पंचायत’ नाम के पीछे जुड़ा है संघर्ष का इतिहास
बैठक में ‘आजाद पंचायत’ नाम के चयन को लेकर भी चर्चा हुई। आयोजकों ने कहा कि यह केवल संगठनात्मक पहचान नहीं है, बल्कि रंवाई घाटी के गौरवशाली जनसंघर्ष के इतिहास से प्रेरणा का प्रतीक है।
वक्ताओं के अनुसार वर्ष 1930 में रंवाई क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों ने टिहरी रियासत की दमनकारी नीतियों के खिलाफ संगठित होकर ‘आजाद पंचायत’ का गठन किया था। तिलाड़ी आंदोलन और आजाद पंचायत को उत्तराखंड के जनसंघर्षों के इतिहास में एकता, स्वाभिमान और जनभागीदारी के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।
आयोजकों ने कहा कि आज का ‘आजाद पंचायत’ आंदोलन किसी सत्ता परिवर्तन के लिए नहीं, बल्कि विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और क्षेत्रीय अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने का प्रयास है।
दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एकजुट होने की अपील
बैठक के अंत में क्षेत्रवासियों से अपील की गई कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर रंवाई घाटी के विकास और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए एकजुट हों। आयोजकों का कहना है कि यदि क्षेत्र की जनता एक साझा मंच पर मजबूती से अपनी मांग रखेगी तो सरकार तक रंवाई घाटी की आवाज प्रभावी ढंग से पहुंचाई जा सकेगी।
बैठक में विजयपाल रावत, अनुज रावत, बासुदेव डिमरी, बाबूराम शाह, आशीष विश्वकर्मा, जय प्रकाश इंदवाण, संदीप डोभाल, आनंद परमार, कपिल राणा, ऋषभ कुमार, खजान चौहान, लोकेश चौहान, गणेश राणा, राधेश्याम कोठार, अमर शाह, अंकित रावत, अजय भारती, सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता और युवा मौजूद रहे ।

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