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समाचार पत्र-पत्रिकाओं की सूचीबद्धता/नवीनीकरण पढ़ें सभी समाचार

Pahado Ki Goonj

 

*समाचार पत्र-पत्रिकाओं की सूचीबद्धता/नवीनीकरण के संबंध में प्राप्त दिशा-निर्देशों के क्रम में सादर अवगत कराना है कि—*

➡️ पूर्व में (वर्ष 2025) सूचीबद्धता हेतु आवेदन कर चुके समाचार पत्र-पत्रिकाओं को पुनः आवेदन करने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे आवेदनों में केवल अद्यतन वार्षिक विवरणी जमा किया जाना आवश्यक है।

➡️ यदि किसी समाचार पत्र-पत्रिका के स्वामित्व, प्रिंटिंग प्रेस अथवा अन्य किसी विवरण में परिवर्तन हुआ है, तो उससे संबंधित अद्यतन अभिलेख/प्रमाण-पत्र भी वार्षिक विवरणी के साथ जमा करना अनिवार्य होगा।

➡️आवेदन के साथ समाचार पत्र/पत्रिका के नवीनतम अंक की एक प्रति भी संलग्न की जानी है।

अतः अनुरोध है कि उपर्युक्तानुसार वांछित अभिलेख दिनांक 10 सितम्बर, 2026 तक अनिवार्य रूप से जिला सूचना कार्यालय, देहरादून को उपलब्ध कराने का कष्ट करें।

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टिहरी गढ़वाल, 27 अगस्त 2026

*नशे के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई के साथ जनजागरूकता गतिविधियों को और बढ़ाएं: जिलाधिकारी*

जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल नितिका खण्डेलवाल की अध्यक्षता में आज जनपद स्तरीय एन-कोर्ड (N-CORD) समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनपद में नशे के विरुद्ध की जा रही कार्रवाई, जनजागरूकता कार्यक्रमों एवं विभागीय गतिविधियों की समीक्षा की गई।

जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि नशे के अवैध कारोबार के विरुद्ध राजस्व, आबकारी एवं पुलिस विभाग संयुक्त रूप से प्रभावी कार्रवाई करें।  जिलाधिकारी ने ड्रग इंस्पेक्टर को मासिक निरीक्षण की संख्या बढ़ाने तथा प्रत्येक फार्मेसी/मेडिकल स्टोर पर सीसीटीवी कैमरों की उपलब्धता अधिकतम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही आबकारी एवं पुलिस विभाग को संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए सत्यों-सक्लाना, धनोल्टी एवं कैंपटी क्षेत्र में नशे के अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण के निर्देश दिए। उन्होंने अगली बैठक में टीएचडीसी एवं पीजी कॉलेजों के प्राचार्यों को भी आमंत्रित करने के निर्देश दिए, ताकि उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत युवाओं के लिए भी प्रभावी कदम उठाए जा सकें। समाज कल्याण विभाग को नशामुक्त/शराबमुक्त घोषित गांवों की सूची अगली बैठक में प्रस्तुत करने तथा पुलिस विभाग को ऐसे क्षेत्रों को चिन्हित करने के निर्देश दिए, जहां पोस्त, अफीम आदि की अवैध खेती की संभावना है।

बैठक में पुलिस विभाग ने अवगत कराया कि जुलाई माह में एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत एक अभियोग पंजीकृत किया गया, जिसमें स्मैक बरामद की गई। वहीं आबकारी अधिनियम के अंतर्गत 15 अभियोग दर्ज किए गए। टीएनटीएफ टीमों द्वारा नशे के विरुद्ध जनजागरूकता अभियान के तहत जुलाई माह में 48 गोष्ठियां आयोजित की गईं, जिनमें 2,195 छात्र-छात्राओं तथा 2,171 स्थानीय व्यक्तियों ने प्रतिभाग किया। कोटपा अधिनियम के तहत जुलाई माह में 262 चालान किए गए, जबकि अब तक कुल 1,931 चालान किए जा चुके हैं।

चिकित्सा विभाग ने बताया कि नेशनल टोबैको कंट्रोल प्रोग्राम के तहत विद्यालयों में चार प्रशिक्षण एवं संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित किए गए। दो स्वास्थ्य शिविरों में भी गतिविधियां संचालित की गईं। टीसीसी काउंसलिंग के अंतर्गत 101 सामान्य काउंसलिंग, 15 फार्माकोथेरेपी तथा 2 फोकस्ड ग्रुप डिस्कशन आयोजित किए गए।

आबकारी विभाग द्वारा बताया गया कि अब तक 91 छापेमारी की गई हैं, जिनमें 14 अभियोग पंजीकृत किए गए हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा भी अब तक 12 निरीक्षण किए गए हैं।

समाज कल्याण विभाग ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र विकास समिति के माध्यम से माह में दो गांवों में नशा मुक्ति कार्यक्रम आयोजित कर ग्राम सुधार समितियों का गठन किया गया। साथ ही नगर पालिका टिहरी क्षेत्र में कॉकटेल रहित विवाह समारोह आयोजित करने के लिए भी सहयोग किया गया।

शिक्षा विभाग ने अवगत कराया कि जनपद के शिक्षण संस्थानों में एंटी ड्रग कमेटियों को सक्रिय किया गया है। ड्रग एडिक्ट छात्रों का डेटा तैयार कर उनकी काउंसलिंग के प्रयास किए जा रहे हैं। सूचना विभाग द्वारा बताया गया कि मानस हेल्पलाइन-1933 का सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से नियमित प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।

इस बैठक में एसएसपी टिहरी श्वेता चौबे (वर्चुअल माध्यम से) डीएफओ टिहरी हिमांशु, एडीएम शैलेंद्र नेगी, एसडीएम टिहरी कमलेश मेहता, मनोचिकित्सक डॉ रीना सिंह, सीओ टिहरी चंद्र मोहन, आबकारी अधिकारी कुंवर सिंह, ड्रग इंस्पेक्टर ऋषभ धामा, एसीएमओ डॉ अमलेश कुमार, समाज कल्याण विभाग से मयंक थपलियाल, रॉड्स एनजीओ से रवीश चमोली आदि संबंधित उपस्थित रहे।

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टिहरी गढ़वाल, 27 अगस्त 2026

*उपनिरीक्षक मुकेश शर्मा को राष्ट्रीय खेल दिवस पर मिलेगा द्रोणाचार्य पुरस्कार-2025

पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में नियुक्त उपनिरीक्षक मुकेश शर्मा को राष्ट्रीय खेल दिवस (29 अगस्त) के अवसर पर द्रोणाचार्य पुरस्कार-2025 से सम्मानित किया जाएगा। कैनोइंग एवं कयाकिंग के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया जा रहा है।

जनपद टिहरी गढ़वाल के ग्राम टिपौउ, खत अठगांव, जौनसार-बावर निवासी मुकेश शर्मा लंबे समय से कयाकिंग एवं कैनोइंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे राष्ट्रीय स्तर के पदक विजेता खिलाड़ी तथा छह बार भारतीय पुलिस गोल्ड मेडलिस्ट रह चुके हैं। वर्तमान में वे अंतरराष्ट्रीय कैनो महासंघ के साथ ओलंपिक तकनीकी अधिकारी (ITO) के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। इसके अतिरिक्त उत्तराखंड सरकार के जल क्रीड़ा क्षेत्र में मुख्य सलाहकार एवं नोडल अधिकारी के रूप में भी योगदान दे रहे हैं।

वर्तमान में वह राष्ट्रीय कोच के रूप में देश के शीर्ष खिलाड़ियों को प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं। साथ ही भारतीय कयाकिंग एवं कैनोइंग संघ (IKCA) में एथलीटों के मुख्य चयनकर्ता के रूप में भी महत्वपूर्ण दायित्व निभा रहे हैं।

खेल के क्षेत्र में उनके योगदान को अखिल भारतीय विश्वविद्यालयों द्वारा विकास के क्षेत्र में मानद उपाधि प्रदान कर सम्मानित किया गया है। खेल प्रशासन, नीति निर्माण, जमीनी स्तर पर प्रशिक्षण तथा खेल प्रतिभाओं के विकास में भी उनका उल्लेखनीय योगदान रहा है।

उपनिरीक्षक मुकेश शर्मा को द्रोणाचार्य पुरस्कार-2025 से सम्मानित किया जाना उत्तराखंड पुलिस के साथ-साथ प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। उनका यह सम्मान प्रदेश के युवा खिलाड़ियों को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा प्रदान करेगा।

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टिहरी गढ़वाल, 27 अगस्त 2026

*खेल महाकुम्भ की तैयारियों को समयबद्ध ढंग से पूर्ण करने के निर्देश*

खेल एवं युवा कल्याण मंत्री रेखा आर्य ने मुख्यमंत्री चैम्पियनशिप ट्रॉफी एवं खेल महाकुम्भ-2026  की तैयारियों को लेकर वर्चुअल बैठक ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने वाले खिलाड़ियों के आवागमन, भोजन एवं आवास सहित सभी व्यवस्थाएं समय से सुनिश्चित कर ली जाएं, ताकि खिलाड़ियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

बैठक में न्याय पंचायत स्तर पर आयोजित होने वाले खेलों की तैयारियों, विधानसभा वार बजट की स्थिति तथा खिलाड़ियों के पंजीकरण की प्रगति की जानकारी ली गई।

मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल ने बताया कि जनपद टिहरी गढ़वाल में अब तक 22,380 खिलाड़ियों का पंजीकरण हो चुका है तथा पंजीकरण की प्रक्रिया अभी जारी है। बताया कि जनपद में 01 सितम्बर से 30 सितम्बर 2026 तक खेलो का आयोजन तीन स्तरों पर किया जाएगा। प्रथम चरण में 01 से 10 सितम्बर तक न्याय पंचायत स्तर, द्वितीय चरण में 11 से 20 सितम्बर तक विधानसभा वार तथा इसके बाद सांसद स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।

उन्होंने बताया कि 01 से 10 सितम्बर तक न्याय पंचायत स्तर पर आयोजित होने वाले खेलों की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। वहीं, 11 से 20 सितम्बर तक विधानसभा वार आयोजित होने वाली प्रतियोगिताओं के संबंध में संबंधित अधिकारियों एवं आयोजकों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

मुख्य विकास अधिकारी ने बैठक में खेल महाकुम्भ के सफल एवं सुव्यवस्थित आयोजन के लिए की जा रही तैयारियों, बजट की स्थिति तथा पंजीकरण की प्रगति से भी अवगत कराया। साथ ही अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी व्यवस्थाओं को निर्धारित समय–सीमा में पूरा करते हुए प्रतियोगिताओं का सफल आयोजन करना सुनिश्चित करें।

इस अवसर पर जिला युवा कल्याण अधिकारी रविन्द्र सिंह फोनिया सहित सभी विकास खण्डों के क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी तथा सम्बधित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

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‎*जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल की अध्यक्षता में जनपदीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित*

‎*दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में तत्काल सुधार, क्रैश बैरियर, साइनेज एवं कॉन्केव मिरर लगाने के निर्देश*

‎*सूचना/टिहरी/27 अगस्त, 2026:* जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल की अध्यक्षता में जिला कार्यालय स्थित वीसी कक्ष में जनपदीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सड़क दुर्घटनाओं की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी एवं समयबद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

‎जिलाधिकारी ने राष्ट्रीय राजमार्ग, लोक निर्माण विभाग एवं पीएमजीएसवाई के अधिकारियों को दुर्घटना संभावित अंधे मोड़ों को चिह्नित कर आवश्यकतानुसार कॉन्केव मिरर, गति सीमा बोर्ड एवं पर्याप्त सड़क संकेतक लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग पर क्रैश बैरियर लगाए जाने वाले स्थानों में प्राथमिकता के आधार पर ऐसे डेंजर जोन चिह्नित करने को कहा, जहां 100 मीटर से अधिक गहरी खाई है। क्षतिग्रस्त क्रैश बैरियर को शीघ्र ठीक करने तथा नए क्रैश बैरियर निर्धारित मानकों के अनुसार मजबूत तरीके से लगाने के निर्देश भी दिए।

‎उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग पर आवश्यक स्थानों पर रंबल स्ट्रिप लगाने, सड़क किनारे पड़े मिट्टी के ढेर हटाने तथा पत्थर गिरने की आशंका वाले स्थानों पर उपचारात्मक कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने कहा कि लगाए गए साइनेज की स्थिति का नियमित निरीक्षण किया जाए तथा उन पर पोस्टर-पंपलेट न लगने दिए जाएं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्यों की लगातार निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

‎बैठक में पहाड़ी क्षेत्रों में 14 टायर या उससे अधिक वाले वाहनों के संचालन से संबंधित नियमों, परमिट एवं ओवरलोडिंग सहित अन्य मानकों की जांच के लिए पुलिस एवं परिवहन विभाग को संयुक्त अभियान चलाकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि यातायात नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

‎बैठक में वर्चुअल माध्यम से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे, जबकि वीसी कक्ष में अपर जिलाधिकारी शैलेन्द्र सिंह नेगी, अधीक्षण अभियंता लोक निर्माण विभाग के.एस. नेगी, उपजिलाधिकारी कमलेश मेहता, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग दीपक कुमार, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) राजेंद्र विराटिया सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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‎*रक्षाबंधन पर्व को लेकर खाद्य प्रतिष्ठानों में विशेष जांच अभियान*

‎*14 खाद्य पदार्थों के नमूने जांच के लिए संग्रहित, दो प्रतिष्ठानों को सुधार नोटिस जारी*

‎*सूचना/टिहरी/27 अगस्त, 2026:* ‎मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर रक्षाबंधन एवं जन्माष्टमी पर्व के मद्देनजर जनपद में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी नीतिका खण्डेलवाल के निर्देशन में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा विशेष जांच एवं प्रवर्तन अभियान चलाया जा रहा है।

‎अभियान के तहत जाखधार, पडागली, गोज्याणा एवं घनसाली आदि क्षेत्रों में खाद्य प्रतिष्ठानों का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा प्रमोद रावत ने बताया कि अभियान के दौरान जांच के लिए कुल 14 नमूने संग्रहित किए गए। इनमें बेकरी के 02, तेल का 01, मिठाई के 05, अनाज उत्पाद के 02 तथा अन्य खाद्य पदार्थों के 04 नमूने शामिल हैं। सभी नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत दो खाद्य प्रतिष्ठानों को धारा-32 के तहत सुधार नोटिस जारी किए गए हैं।

‎जिलाधिकारी ने अधिकारियों को नियमित जांच करने तथा मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। पर्व के दौरान उपभोक्ताओं को सुरक्षित एवं मानकयुक्त खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के लिए विभाग द्वारा खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

‎अभियान के दौरान वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी टिहरी शारदा शर्मा, जिला प्रशासन की ओर से विजय पेटवाल एवं विनोद रावत, आपूर्ति विभाग से अमित भंडारी, पुलिस प्रशासन से मनीष कंडारी एवं सहायक श्रीचंद कुमाई उपस्थित रहे।

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‎ *टिहरी में राजस्व संग्रहण की समीक्षा, डीएम ने अधिकारियों को वादों के निस्तारण में तेजी लाने के दिए निर्देश*

‎*लंबित राजस्व वादों के निस्तारण में तेजी के साथ त्योहारी सीजन में खाद्य पदार्थों की सघन जांच के निर्देश*

‎/टिहरी/27 अगस्त, 2026:* जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल की अध्यक्षता में कलक्ट्रेट स्थित वीसी कक्ष में राजस्व संग्रहण एवं अनुश्रवण समिति की मासिक बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों की राजस्व प्राप्ति, लंबित राजस्व वसूली, राजस्व वादों के निस्तारण तथा खाद्यान्न व्यवस्था एवं वितरण की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

‎बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद की राजस्व प्राप्ति में निरंतर वृद्धि होनी चाहिए। वाहन चेकिंग की समीक्षा के दौरान बताया गया कि जुलाई 2026 तक कुल 3,857 चालान किए गए तथा 190 वाहन बंद किए गए। इसके माध्यम से 66.16 लाख रुपये प्रशमन शुल्क प्राप्त हुआ, जो गत वर्ष की इसी अवधि में प्राप्त 65.46 लाख रुपये की तुलना में 1.07 प्रतिशत अधिक है।

‎वसूली की समीक्षा के दौरान बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में जुलाई माह तक 158 मांग पत्र जारी किए गए, जिनकी कुल धनराशि 11.66 लाख रुपये है। इनमें से 57 वसूली पत्र जारी किए गए, जिनके सापेक्ष 17.06 लाख रुपये की शेष धनराशि दर्शाई गई है। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को राजस्व वसूली में तेजी लाने तथा लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

‎आबकारी विभाग की समीक्षा के दौरान बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में जुलाई 2026 तक विभाग की कुल राजस्व प्राप्तियां 57.14 करोड़ रुपये रही हैं, जबकि जुलाई 2025 तक यह 54.97 करोड़ रुपये थीं। इस प्रकार गत वर्ष की तुलना में 3.90 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विभाग का वार्षिक राजस्व लक्ष्य 135 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है।

‎अभियोजन की समीक्षा के दौरान बताया गया कि जुलाई 2026 तक अभियोजन न्यायालय में विभिन्न अधिनियमों के कुल 96 वाद लंबित हैं। इनमें आबकारी अधिनियम के 63, आयुध अधिनियम के 12, आईटी अधिनियम के 06, एनडीपीएस अधिनियम के 12, विदेशी अधिनियम के 02 तथा कॉपीराइट अधिनियम का 01 वाद शामिल है।

‎राजस्व विभाग की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने लंबित राजस्व वादों के निस्तारण में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने धारा 34, धारा 33/39, धारा 176, धारा 143, धारा 229(बी) एवं धारा 209 के अंतर्गत लंबित वादों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण करने को कहा। उन्होंने विवादित मामलों की सूची तैयार कर उनका तत्काल निस्तारण करने तथा रजिस्ट्री से संबंधित लंबित मामलों में भी तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही फौजदारी मामलों के निस्तारण में तेजी लाते हुए नियमित रूप से प्रगति की समीक्षा करने को कहा।

‎खाद्य सुरक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि त्योहारी सीजन को देखते हुए माननीय मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार जनपद में अधिक से अधिक निरीक्षण एवं जांच अभियान चलाए जाएं। उन्होंने की गई कार्रवाई की रिपोर्ट प्रतिदिन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

‎खाद्य आपूर्ति की समीक्षा के दौरान बताया गया कि अक्टूबर माह तक के राशन का उठान प्रारंभ हो चुका है तथा जनपद में एलपीजी की भी पर्याप्त उपलब्धता है। जिलाधिकारी ने राशन कार्डों के सत्यापन की प्रक्रिया की जानकारी लेते हुए निर्देश दिए कि सत्यापन की प्रक्रिया एवं उसकी प्रगति की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

‎बैठक में अपर जिलाधिकारी शैलेन्द्र सिंह नेगी, उपजिलाधिकारी कमलेश मेहता, उपजिलाधिकारी नरेंद्रनगर आशीष घिल्डियाल, उपजिलाधिकारी प्रतापनगर घनसाली मंजू राजपूत, जिला पूर्ति अधिकारी सुनील बडोनी, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) राजेंद्र विराटिया, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा प्रमोद रावत, तहसीलदार टिहरी धीरज राणा सहित अन्य संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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ग्लेशियर झीलों की निगरानी के लिए अत्याधुनिक सिस्टम होंगे स्थापित*

*ग्लेशियर झीलों की सुरक्षा को लेकर मा0 मुख्यमंत्री के निर्देश*

*अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम के साथ मजबूत होगी सुरक्षा व्यवस्था*

*जल्द होगा केदारताल और सरस्वती ताल का सर्वे*
देहरादून। उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में ग्लेशियर झीलों से उत्पन्न होने वाले संभावित खतरों को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा उनकी निगरानी एवं सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जाएगा। मा0 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने ग्लेशियर झीलों की नियमित एवं वैज्ञानिक निगरानी के साथ-साथ संवेदनशील क्षेत्रों में अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने तथा आवश्यकतानुसार इनकी संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
मा0 मुख्यमंत्री ने सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में स्थित संवेदनशील ग्लेशियर झीलों का व्यापक सर्वे एवं वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए। झीलों की स्थिति, जलस्तर, आकार में होने वाले परिवर्तन, आसपास के भू-भाग की स्थिति तथा संभावित जोखिम क्षेत्रों का नियमित आकलन किया जाए। संभावित खतरे की स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों में समय रहते चेतावनी पहुंचाने के लिए आधुनिक सेंसर, जलस्तर मापक उपकरण, संचार प्रणाली एवं अन्य आवश्यक तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए हैं कि केवल अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने तक सीमित न रहते हुए ग्लेशियर झीलों से संभावित आपदा के प्रभाव को कम करने के लिए सभी आवश्यक सुरक्षात्मक एवं जोखिम न्यूनीकरण उपायों पर कार्य किया जाए। संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां आपदा की स्थिति में सुरक्षित निकासी मार्ग, संभावित प्रभावित क्षेत्रों का चिन्हांकन, संचार व्यवस्था, स्थानीय स्तर पर चेतावनी तंत्र तथा राहत एवं बचाव की तैयारियों को मजबूत किया जाए। इसी क्रम में मा0 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर मा0 उपाध्यक्ष, राज्य सलाहकार समिति, आपदा प्रबंधन विभाग श्री विनय रुहेला तथा ले. कर्नल रघुवीर सिंह भण्डारी (सेवानिवृत्त) द्वारा नेपाल में घटित आपदा के उपरांत उत्तराखण्ड में ऐसी संभावित आपदाओं से निपटने की तैयारियों को लेकर सभी जिलाधिकारियों के साथ समीक्षा की गई।
बैठक में विशेष रूप से ग्लेशियर झीलों, नदियों के जलस्तर, संवेदनशील स्थलों की निगरानी, अर्ली वार्निंग सिस्टम, संचार व्यवस्था, आपदा के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों की समीक्षा की गई। जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए कि अपने-अपने जनपदों में संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करें तथा किसी भी असामान्य गतिविधि की सूचना तत्काल उच्च स्तर पर उपलब्ध कराई जाए।
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि उत्तराखण्ड में कुल 13 ग्लेशियर झीलें संवेदनशील श्रेणी में चिन्हित की गई हैं। इनमें से 04 ग्लेशियर झीलों का सर्वेक्षण किया जा चुका है। शेष संवेदनशील झीलों का भी चरणबद्ध तरीके से सर्वेक्षण एवं वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि जल्द ही चमोली जनपद स्थित सरस्वती ताल तथा उत्तरकाशी जनपद स्थित केदारताल का सर्वेक्षण करने के लिए विशेषज्ञ दल रवाना किया जाएगा। सर्वेक्षण के दौरान झीलों की वर्तमान स्थिति, जलस्तर, संभावित खतरे के कारकों तथा डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में पड़ने वाले संभावित प्रभाव का अध्ययन किया जाएगा।
बैठक में एसीईओ प्रशासन श्री प्रकाश चंद्र, एसीईओ क्रियान्वयन डीआईजी श्री राजकुमार नेगी, जेसीईओ श्री दिनेश कुमार पुनेठा आदि उपस्थित रहे।

*केवल निगरानी नहीं, जोखिम कम करने पर होगा फोकस*
सचिव श्री सुमन ने बताया कि ग्लेशियर झीलों की निगरानी के साथ-साथ ऐसी व्यवस्थाओं को विकसित किया जा रहा है, जिससे संभावित खतरे की स्थिति में चेतावनी से लेकर राहत एवं बचाव तक की पूरी श्रृंखला प्रभावी ढंग से काम कर सके। इसके तहत संवेदनशील ग्लेशियर झीलों की निरंतर निगरानी, अत्याधुनिक सेंसर एवं अर्ली वार्निंग उपकरणों की स्थापना, रियल टाइम डेटा प्राप्त करने की व्यवस्था, आवश्यकतानुसार उपकरणों की संख्या बढ़ाना, चेतावनी के लिए वैकल्पिक संचार माध्यम विकसित करना तथा संभावित प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की तैयारियों को मजबूत किया जाएगा। संवेदनशील क्षेत्रों में स्थानीय लोगों को भी संभावित खतरों एवं आपदा के समय अपनाई जाने वाली सुरक्षित प्रक्रियाओं के संबंध में जागरूक किया जाएगा।

*नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी के निर्देश*
मा0 उपाध्यक्ष, राज्य सलाहकार समिति, आपदा प्रबंधन विभाग श्री विनय रुहेला ने कहा कि उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियां नेपाल के पर्वतीय क्षेत्रों से काफी हद तक मिलती-जुलती हैं। ऐसे में नेपाल में घटित आपदा से सीख लेते हुए उत्तराखण्ड में संभावित जोखिमों को लेकर पहले से तैयारी करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विभिन्न प्रकार की आपदाओं को लेकर चिन्हित संवेदनशील स्थलों की निरंतर मॉनीटरिंग की जानी चाहिए। साथ ही डैम व बैराज के प्रबंधकों के साथ नियमित बैठकें करने के निर्देश दिए। डैम से पानी छोड़े जाने की स्थिति में निचले क्षेत्रों में रहने वाली आबादी को समय रहते अलर्ट किया जाए।

*आपदा से सीख लेकर स्थानीय क्षमता बढ़ाने पर जोर*
ले. कर्नल रघुवीर सिंह भण्डारी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि प्रत्येक आपदा अपने साथ महत्वपूर्ण सीख लेकर आती है। नेपाल में घटित त्रासदी से सीख लेते हुए उत्तराखण्ड में संभावित आपदाओं के लिए तैयारियों को और अधिक प्रभावी बनाया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आपदा के समय सबसे महत्वपूर्ण भूमिका स्थानीय स्तर पर मौजूद लोगों और प्रशासन की होती है। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधानों एवं स्थानीय प्रतिनिधियों के साथ मजबूत एवं त्वरित संचार नेटवर्क स्थापित किया जाना जरूरी है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में चेतावनी और आवश्यक सूचना सबसे पहले प्रभावित क्षेत्र के लोगों तक पहुंच सके।

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*नेपाल में आपदा की स्थिति के दृष्टिगत उत्तराखंड शासन ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए*

*नागरिकों से अपील: हेल्पलाइन पर साझा करें आवश्यक जानकारी, हर संभव सहायता के लिए करें संपर्क*

*देहरादून, 27 अगस्त 2026*

नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ से हुई जन-धन की क्षति के दृष्टिगत उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) द्वारा उत्तराखण्ड के नागरिकों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं।

यदि उत्तराखण्ड का कोई नागरिक नेपाल के प्रभावित क्षेत्र में फंसा हुआ है अथवा कोई व्यक्ति किसी नागरिक के संबंध में जानकारी साझा करना चाहता है, तो राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र, देहरादून के हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है।

प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि नेपाल के प्रभावित क्षेत्र से संबंधित कोई भी आवश्यक जानकारी होने पर उसे उपरोक्त हेल्पलाइन नंबरों पर तत्काल साझा करें। प्रभावित क्षेत्र में फंसे उत्तराखण्ड के नागरिक भी इन नंबरों पर संपर्क कर सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

*राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र, देहरादून के हेल्पलाइन नंबर*
0135-2710334 | 0135-2710335
0135-2664314 | 0135-2664315 | 0135-2664316
मोबाइल: 8218867005
टोल फ्री: 1070

*जनपद देहरादून की हेल्पलाइन*
0135-2726066 | 0135-2626066
मोबाइल: 7534826066
टोल फ्री: 1077

नागरिक नेपाल के प्रभावित क्षेत्रों में फंसे उत्तराखण्ड के नागरिकों अथवा अन्य संबंधित व्यक्तियों के संबंध में उपरोक्त राज्य एवं जनपद स्तरीय हेल्पलाइन नंबरों पर आवश्यक जानकारी साझा कर सकते हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर सहायता के लिए संपर्क कर सकते हैं।

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LIVE: रुद्रपुर, ऊधम सिंह नगर में आयोजित मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन*

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LIVE: धूरा, चम्पावत में आयोजित ‘सशक्त बहना उत्सव-2026’ कार्यक्रम*

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देहरादून 27 अगस्त, 2026
*मुख्य सचिव से विश्व बैंक के एमडी एवं प्रतिनिधिमंडल की शिष्टाचार भेंट*

मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन के साथ विश्व बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं चीफ नॉलेज ऑफिसर श्री पास्कल डोनोहोई एवं उनकी टीम ने गुरुवार को सचिवालय में शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उत्तराखण्ड के समग्र एवं दीर्घकालिक विकास, शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन, जल प्रबंधन, आपदा प्रबंधन तथा राज्य की उत्तराखण्ड@2047 की विकास रणनीति सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड को वर्ष 2047 तक एक सशक्त, समृद्ध, टिकाऊ और आपदा- प्रतिरोधी राज्य के रूप में विकसित करने के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ, विभिन्न क्षेत्रों में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में नदियों के पुनर्जीवन एवं जल स्रोतों के संरक्षण की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने इस क्षेत्र में विश्व बैंक से वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के भविष्य के विकास के लिए जल, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जल वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण चुनौती बनने जा रहा है, इसलिए राज्य में वर्षा जल के संरक्षण एवं अधिक से अधिक रेन वाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा देने की दिशा में विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस दिशा में विश्व बैंक के साथ वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग को और मजबूत किया जा सकता है।

मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य में स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आजीविका के पर्याप्त अवसर सृजित कर पलायन को नियंत्रित करने तथा आवश्यकतानुसार रिवर्स माइग्रेशन को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है। स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और युवाओं के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के दृष्टिगत राज्य के दीर्घकालिक विकास पर फोकस किया जा रहा है।

शिक्षा क्षेत्र में भी विश्व बैंक के सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि स्कूली शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा में सुधार तथा आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ ही आजीविका एवं पलायन के क्षेत्र में भी विश्व बैंक से वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग की आवश्यकता है। बैठक में विभागीय अधिकारियों द्वारा राज्य के ऊर्जा, वित्त एवं पेयजल के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों एवं परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

विश्व बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं चीफ नॉलेज ऑफिसर श्री पास्कल डोनोहोई ने राज्य की विकास प्राथमिकताओं को समझते हुए भविष्य में रणनीतिक एवं फ्लैगशिप परियोजनाओं के माध्यम से सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया। विश्व बैंक की ओर से उत्तराखंड के विकास के लिए दीर्घकालिक सहयोग एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई। बैठक में ‘विजन उत्तराखंड@2047’ के तहत राज्य की रणनीतिक विकास प्राथमिकताओं पर विशेष रूप से विचार-विमर्श किया गया। राज्य में तेजी से हो रहे शहरीकरण को ध्यान में रखते हुए भविष्य की शहरी आवश्यकताओं, आधारभूत सुविधाओं तथा सतत एवं सुनियोजित शहरी विकास पर भी चर्चा हुई। विश्व बैंक के सहयोग से राज्य की प्राथमिकताओं के अनुरूप भविष्य की विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की गई।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव श्री आर. के. सुधांशु, श्री आर. मीनाक्षी सुंदरम, विश्व बैंक से श्री जोहांस जट्ट, सचिव डॉ. रणवीर सिंह चौहान, अपर सचिव श्री नरेंद्र सिंह भंडारी, श्री रोहित मीणा एवं श्री नवनीत पाण्डे सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे ।
*देहरादून 27 अगस्त, 2026

*उत्तराखण्ड में विंटर टूरिज्म को बढ़ावा देने के सम्बन्ध में मुख्य सचिव ने की बैठक*

*नए संभावित स्थलों की पहचान कर वहां आवश्यक सुविधाओं, इवेंट्स एवं पर्यटन उत्पादों के विकास की समग्र योजना की जाए तैयार*

*उत्तराखण्ड की भौगोलिक एवं मौसमी परिस्थितियों से मिलती-जुलती परिस्थितियों वाले विदेशी पर्यटन स्थलों से ली जाए सीख*

*पर्यटन सर्किटों को एक पैकेज के रूप में किया जाए विकसित*

उत्तराखण्ड में शीतकालीन पर्यटन को नई गति देने और राज्य के पर्यटन स्थलों को वर्षभर पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाने के उद्देश्य से मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिव पर्यटन के साथ बैठक आयोजित की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड को वर्षभर पर्यटन का प्रमुख गंतव्य बनाने के लिए नए डेस्टिनेशन, नए पर्यटन उत्पाद और स्थानीय सहभागिता पर विशेष फोकस किया जाए, ताकि पर्यटन का लाभ राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों और स्थानीय समुदायों तक भी प्रभावी रूप से पहुंच सके। बैठक में राज्य में विंटर टूरिज्म की संभावनाओं, नए पर्यटन स्थलों के विकास तथा पर्यटन गतिविधियों के विस्तार को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड में पर्यटन को केवल कुछ पारंपरिक एवं अधिक पर्यटक दबाव वाले स्थलों तक सीमित न रखते हुए नए डेस्टिनेशन और पर्यटन सर्किट विकसित किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नैनीताल एवं मसूरी जैसे प्रमुख स्थलों पर पर्यटकों के दबाव को कम करने के लिए नए एवं कम ज्ञात पर्यटन स्थलों को विकसित कर उन्हें प्रभावी ढंग से प्रचारित किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि जीएमवीएन, केएमवीएन एवं पर्यटन से जुड़े स्टैक होल्डर्स सहित संबंधित विभागों से इनपुट लेकर राज्यभर में विंटर टूरिज्म की संभावनाओं वाले क्षेत्रों की पहचान की जाए। प्रत्येक संभावित डेस्टिनेशन की विशेषता और यूएसपी निर्धारित करते हुए वहां उपयुक्त पर्यटन उत्पाद एवं गतिविधियां विकसित की जाएं। उन्होंने नए ट्रैकिंग रूट्स विकसित करते हुए, हाई-अल्टीट्यूड मैराथन, बर्ड वॉचिंग, नेचर एवं एडवेंचर टूरिज्म जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिए जाने के निर्देश दिए। कहा कि संभावित स्थलों की पहचान कर वहां आवश्यक सुविधाओं, इवेंट्स एवं पर्यटन उत्पादों के विकास की समग्र योजना तैयार की जाए।

मुख्य सचिव ने स्थानीय स्टेकहोल्डर्स, टूर ऑपरेटर्स एवं स्थानीय समुदायों को पर्यटन विकास की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों के साथ निरंतर संवाद स्थापित कर उनके सुझावों को योजनाओं में शामिल किया जाए, ताकि पर्यटन से स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ रिवर्स माइग्रेशन को भी प्रोत्साहन मिल सके।

मुख्य सचिव ने कहा कि नए पर्यटन स्थलों के विकास के लिए वैश्विक स्तर पर सफल मॉडलों का अध्ययन किया जाए। उत्तराखण्ड की भौगोलिक एवं मौसमी परिस्थितियों से मिलती-जुलती परिस्थितियों वाले विदेशी पर्यटन स्थलों से सीख लेकर राज्य की परिस्थितियों के अनुरूप नए पर्यटन उत्पाद विकसित किए जा सकते हैं।

मुख्य सचिव ने पर्यटन सर्किटों को एक पैकेज के रूप में विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि जागेश्वर, कसार देवी एवं सूर्य मंदिर जैसे प्रमुख स्थलों को जोड़कर समेकित पैकेज टूर विकसित करने तथा इनकी पब्लिसिटी का कार्य समय रहते शुरू किए जाएँ। उन्होंने नए पर्यटन प्रोजेक्ट्स तलाशने एवं संभावनाओं की समीक्षा के लिए 15 दिन के भीतर पुनः बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए। साथ ही, राज्य में विंटर टूरिज्म एवं नए पर्यटन उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए एक पर्यटन कॉन्क्लेव आयोजित किए जाने की बात भी कही।

इस अवसर पर सचिव श्री धीराज सिंह गर्ब्याल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मेरे सपनों का उत्तराखंड पर विद्यार्थियों से किया संवाद।*

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को रुद्रपुर स्थित निजी विद्यालय में मेरे सपनों का उत्तराखंड पर आयोजित ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।

मुख्यमंत्री ने इस दौरान युवा विद्यार्थियों से संवाद कर उनके विचारों, सुझावों और भविष्य के उत्तराखंड को लेकर उनकी परिकल्पनाओं को जाना। मुख्यमंत्री ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उनका मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा विद्यार्थियों की ऊर्जा, सोच और विकसित उत्तराखंड के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उत्साहवर्धक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की भावी पीढ़ी, सशक्त, आत्मनिर्भर और जागरूक बने, यही हमारी प्राथमिकता है। युवाओं के विचार और सुझाव उत्तराखंड के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। शिक्षा के साथ-साथ युवाओं को रोजगार, कौशल विकास, नवाचार और उद्यमिता के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘विकसित भारत–विकसित उत्तराखंड’ के संकल्प को साकार करने के लिए शिक्षा, रोजगार, नवाचार, कौशल विकास, पर्यटन, कृषि, खेल और तकनीक सहित प्रत्येक क्षेत्र को सशक्त बनाया जा रहा है। युवा शक्ति उत्तराखंड की सबसे बड़ी ताकत है और उनके सपनों, विचारों एवं प्रतिभा को अवसर देकर हम एक आत्मनिर्भर, सक्षम और विकसित उत्तराखंड के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा केवल आज का नहीं बल्कि कल के भविष्य भी हैं। मेरे सपनों का उत्तराखंड विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में छात्रों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य पर्यटन, विकास, नवाचार तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। और इन क्षेत्रों के लिए सरकार ने नई नीतियां लागू की हैं।

विज्ञान के क्षेत्र में युवाओं को बढ़ावा देने का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून में देश की 5वीं सबसे बड़ी साइंस सिटी का निर्माण किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य के होनहार विद्यार्थियों को साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में देश और दुनिया पर नेतृत्व करने का अवसर प्रदान करना है।

मुख्यमंत्री ने लीडरशिप के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नेतृत्व क्षमता केवल राजनीति तक सीमित नहीं है। बल्कि खेल, चिकित्सा, विज्ञान, मीडिया और उद्योग—हर क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्ति अपने-अपने क्षेत्र में सच्चे लीडर होते हैं। उन्होंने युवाओं से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प से जुड़कर देश व राज्य के विकास में अपना योगदान देने का भी आह्वान किया। उन्होंने सभी को राखी त्यौहार की बधाईयां व शुभकामनाएं दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ प्रतियोगिता को प्रदेश के विद्यार्थियों का व्यापक समर्थन मिला है। अभियान के तहत प्रदेशभर के 2,67,744 विद्यार्थियों ने अपने निबंध एवं विचार भेजे हैं। विद्यार्थियों द्वारा व्यक्त किए गए विचार उत्तराखंड के विकास, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य के प्रति उनकी सोच और संकल्प को दर्शाते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की युवा पीढ़ी राज्य के भविष्य को लेकर सजग और जागरूक है। विद्यार्थियों के सपनों, सुझावों और नवाचारपूर्ण विचारों को विकास की दिशा से जोड़ते हुए एक ऐसे उत्तराखंड के निर्माण किया जाएगा, जो सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित हो।

कार्यक्रम में विभिन्न विधालयों के लगभग 800 छात्र-छात्राएं, शिक्षक सहित महापौर विकास शर्मा, दर्जा मंत्री अनिल कपूर डब्बू, रामपाल सिंह, श्री दिनेश मानसेरा, उत्तम दत्ता, फरजाना बेगम, पूर्व विधायक राजेश शुक्ला, जिलाध्यक्ष कमल जिन्दल, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

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मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव में मुख्यमंत्री ने चम्पावत को दी ₹62.97 करोड़ की 50 विकास योजनाओं की सौगात*

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*मातृशक्ति के सम्मान, स्वावलंबन और बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध—मुख्यमंत्री*

रक्षाबंधन के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को रामलीला मैदान धूरा चंपावत में ‘मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव-2026’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने चम्पावत के सर्वांगीण विकास के लिए कुल ₹62.97 करोड़ की 50 महत्वपूर्ण विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। इनमें ₹11.08 करोड़ की 20 योजनाओं का लोकार्पण तथा ₹51.89 करोड़ की 30 नई विकास योजनाओं का शिलान्यास शामिल है। इन योजनाओं से जनपद में सड़क, पेयजल, सिंचाई, बाढ़ सुरक्षा एवं धार्मिक पर्यटन से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों की घोषणा की। इनमें स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के स्थान धूरा में पेयजल योजना, धूरा से सेतीचौड़ ब्याला तक संपर्क मोटर मार्ग, ग्राम पंचायत ककनई के तोक बूंगा दुर्गापीपल तक सड़क, भागिना भंडारी में मुख्य सड़क से राजकीय इंटर कॉलेज एवं राजकीय प्राथमिक विद्यालय दयारतोली तक सीसी मार्ग व इंटरलॉकिंग टाइल्स, धन एवं बस्तियागूंठ के विभिन्न मंदिरों का सौंदर्यीकरण शामिल है।

इसके साथ ही आमोड़ी, भलुवागाड़ी, डोलाकांडा, फुरकियाझाला, छतकोट, बेलखेत, खिरद्वारी , बुडम, झालाकुड़ी, नौलापानी एवं बस्तियागूंठ के मास्वाड तोक सहित विभिन्न क्षेत्रों में भूकटाव एवं बाढ़ सुरक्षा हेतु वायरक्रेट कार्य, ग्राम पंचायत पोथ के लदिया नदी में झूला पुल, दियूरी से चौड़ा तक सड़क का सुधारीकरण एवं डामरीकरण, डांडा ककनई में सिंचाई हेतु नलकूप, सुखीढांग-डांडा-मीनार मोटर मार्ग में हॉटमिक्स तथा बुडम के कठोल में झूला पुल निर्माण कार्य किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वे अपनी बहनों, माताओं, बेटियों और भांजियों के बीच अपने घर आए हैं। चम्पावत से मिलने वाला प्रेम और अपनापन उन्हें हमेशा ऊर्जा देता है। मुख्यमंत्री ने कुमाऊंनी भाषा में मातृशक्ति से संवाद भी किया।

मुख्यमंत्री ने मातृशक्ति से रक्षा सूत्र बंधवाकर सभी को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि राज्य की प्रत्येक मातृशक्ति को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने कहा चम्पावत के विकास के लिए क्षेत्र में निरंतर विकास कार्य किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान केवल हिमालयी चोटियों और प्राकृतिक सौंदर्य से नहीं, बल्कि यहां की मेहनती, साहसी और आत्मनिर्भर मातृशक्ति से भी है। महिला सशक्तिकरण का अर्थ केवल सरकारी योजनाओं का लाभ देना नहीं, बल्कि महिलाओं को शिक्षित, स्वस्थ, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाकर परिवार एवं समाज के निर्णयों में भागीदार बनाना है।

मुख्यमंत्री ने कहा सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक स्वावलंबन के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। चम्पावत में बेटियों की शिक्षा एवं स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए कॉलेज हॉस्टल, आईटीआई लैब, ₹256.97 करोड़ की लागत से महिला स्पोर्ट्स कॉलेज, इंटीग्रेटेड नर्सिंग संस्थान तथा महिला प्रौद्योगिकी पार्क जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है, ताकि बेटियों को अपनी प्रतिभा निखारने के लिए गांव या जनपद से बाहर न जाना पड़े।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि लखपति दीदी बनने के बाद प्रदेश की माताएं-बहनें आगे बढ़कर करोड़पति बनें। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पादों की सराहना करते हुए कहा कि इन उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए वोकल फॉर लोकल, हाउस ऑफ हिमालयाज, हिलांस आउटलेट, फूड वैन और ई-रिक्शा जैसे माध्यम उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे महिलाओं को रोजगार तलाशने वाली नहीं, बल्कि रोजगार देने वाली बनने के अवसर मिल रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब एक महिला आत्मनिर्भर होती है तो पूरा परिवार आत्मनिर्भर होता है। परिवार से गांव, गांव से समाज और समाज के सशक्त होने से पूरा उत्तराखंड सशक्त एवं समृद्ध बनता है। सरकार का उद्देश्य ऐसा उत्तराखंड बनाना है, जहां किसी बेटी को अवसरों की कमी के कारण पलायन न करना पड़े और चम्पावत की मातृशक्ति विकास की मुख्यधारा में नेतृत्वकर्ता बनकर उभरे।

कार्यक्रम के उपरांत मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया। बाल विकास विभाग के स्टॉल में उन्होंने छोटी बच्चियों के साथ केक काटकर ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का संदेश दिया। कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं को रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री की ओर से उपहार भी वितरित किए गए।

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य श्री अजय टम्टा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री आनंद सिंह अधिकारी, जिलाध्यक्ष भाजपा श्री गोविन्द सामन्त, जिला महामंत्री भाजपा श्री मुकेश कलखुड़िया, दायित्वधारी श्री श्याम नारायण पाण्डेय, श्री मुकेश महराना, श्री सुभाष बगौली, श्री मनोज कालाकोटी, श्रीमती हेमा जोशी जिला अधिकारी श्री मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक श्रीमती रेखा एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

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अर्ली वार्निंग सिस्टम को किया जा रहा मजबूत: कौशिक*

देहरादून। आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री श्री मदन कौशिक ने कहा कि उत्तराखण्ड आपदा की दृष्टि से संवेदनशील राज्य है और सरकार संभावित जोखिमों को कम करने के लिए पूरी गंभीरता के साथ कार्य कर रही है। नेपाल में हाल में घटित आपदा से सीख लेते हुए प्रदेश में ग्लेशियर झीलों, नदियों एवं अन्य संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि संवेदनशील ग्लेशियर झीलों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण, नियमित मॉनीटरिंग और अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम की स्थापना पर विशेष जोर दिया जा रहा है। जहां आवश्यकता होगी, वहां अतिरिक्त उपकरण एवं तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि किसी भी संभावित खतरे की सूचना समय रहते प्रशासन एवं आमजन तक पहुंचाई जा सके।

श्री कौशिक ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता जन-जीवन की सुरक्षा है। आपदा से पहले की तैयारी, समय पर चेतावनी, स्थानीय स्तर पर क्षमता निर्माण और विभागों के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से संभावित जनहानि को न्यूनतम करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। मानसून के दौरान सभी संबंधित विभागों एवं अधिकारियों को सतर्क रहते हुए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

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