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मुख्यमंत्री ने महिला जन आक्रोश रैली में प्रतिभाग कियाजानिए सभी समाचार

Pahado Ki Goonj

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को परेड ग्राउण्ड, देहरादून में महिला जन आक्रोश रैली में प्रतिभाग किया। इस दौरान मुख्यमंत्री, हजारों की संख्या में मौजूद महिलाओं के साथ परेड ग्राउंड से घंटाघर तक जन आक्रोश पदयात्रा में भी शामिल हुए।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मातृशक्ति को देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनका अधिकार दिलाने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाया गया था। परंतु लोकसभा में संख्या बल के कारण बिल पारित नहीं हो पाया। उन्होंने कहा विपक्ष ने षड्यंत्र करके नारी शक्ति का अधिकार छिनने का काम किया है। उन्होंने कहा देश की नारी, अन्याय के विरुद्ध अवश्य आवाज उठाएगी क्योंकि अब नारी अपने अधिकारों के प्रति सजग हो चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री द्वारा देश की आधी आबादी को उसका हक दिलाने के प्रयास को लोकसभा में विपक्ष ने विफल करके देश के साथ महा पाप किया है।मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने मातृशक्ति को नए भारत के निर्माण का आधार माना है। महिलाओं को सशक्त, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कई ऐतिहासिक कार्य किए गए हैं। बेटी बचाओं-बेटी पढ़ाओं अभियान, उज्ज्वला योजना, एवं जन धन योजना द्वारा करोड़ों बहनों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा, स्टार्टअप योजना के माध्यम से लाखों महिलाओं को सशक्त बनाने, लखपति दीदी योजना द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और ट्रिपल तलाक जैसी कुप्रथा को समाप्त कर महिलाओं को आगे बढ़ने का काम किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री की प्रेरणा से देश के प्रत्येक क्षेत्र में महिलाएँ आगे आ रही हैं। आदिवासी समाज की बेटी, देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंची हैं। केंद्रिय मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को वित्त मंत्रालय जैसा महत्वपूर्ण मंत्रालय दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार भी मातृशक्ति के कल्याण के लिए समर्पित होकर कार्य कर रही है। राज्य में महिलाओं के कल्याण एवं सशक्तिकरण के लिए सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया है। महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा हेतु राज्य में समान नागरिक संहिता को लागू किया गया है। इसके साथ राज्य में ग्रामीण आजीविका मिशन, सशक्त बहना उत्सव योजना और मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा प्रदेश में अब तक 2 लाख 65 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन गई हैं।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद श्री महेंद्र भट्ट, सांसद श्रीमती माला राज्यलक्ष्मी शाह, विधायक श्रीमती सविता कपूर, श्रीमती आशा नौटियाल, श्रीमती रेनू बिष्ट, श्रीमती रुचि भट्ट, श्रीमती दीप्ति रावत, श्रीमती नेहा जोशी, हिमानी, रश्मि रस्तोगी एवं बड़ी संख्या में मातृशक्ति मौजूद थी।

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मुख्यमंत्री धामी बोले, हिमालयी राज्य आपसी सहयोग और अनुभवों से करें नीति निर्माण*

*मुख्यमंत्री आवास में हिमालयी राज्यों से समन्वय और नीति निर्धारण परिषद की बैठक सम्पन्न*

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में हिमालयी राज्यों के मध्य आपसी समन्वय को सुदृढ़ करने, साझा चुनौतियों के समाधान हिमालयी राज्यों से समन्वय एवं नीति निर्धारण परिषद की प्रथम बैठक आयोजित की गई। बैठक के लिए समेकित रणनीति तैयार करने तथा क्षेत्रीय विकास को गति देने के विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालयी राज्यों की भौगोलिक, पर्यावरणीय एवं सामाजिक परिस्थितियाँ समान होने के कारण आपसी सहयोग और अनुभवों के आदान-प्रदान से प्रभावी नीति निर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि जिन हिमालयी राज्यों में विभिन्न क्षेत्रों में अच्छे कार्य हुए हैं, उन कार्यों का विस्तृत अध्ययन बेस्ट प्रैक्टिस के रूप में राज्य में अपनाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इकॉनोमी और ईकोलॉजी में समन्वय के साथ मानव जीवन स्तर को बेहतर बनाना हमारा मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड प्राकृति सम्पन्नता एवं जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य है। हिमालय और औषधियों के संरक्षण के क्षेत्र में राज्य में कार्य करने की अपार संभावनाएं हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण के दिशा में राज्य सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। जल स्रोंतों के पुनर्जीवीकरण की दिशा में अनेक प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिमालय और पर्यावरण सरंक्षण के क्षेत्र में जो संस्थान अच्छा कार्य कर रहे हैं, उनका भी निरंतर सहयोग लिया जाए। हिमालयी राज्यों की विभिन्न चुनौतियों के समाधान के लिए हिमालयी राज्यों के विशेषज्ञों के साथ बैठक समय-समय पर बैठकों और विचार गोष्ठियों का आयोजन भी किया जाए। बैठक के दौरान जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन, पर्यटन, जैव विविधता संरक्षण, जल स्रोतों के संरक्षण तथा सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बैठक में जो भी सुझाव प्राप्त हुए हैं, उस दिशा में तेजी से काम आगे बढ़ाये जायेंगे।

मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने कहा कि हिमालयी राज्यों की चुनौतियों को दूर करने के लिए हिमालयी राज्य कैसे एकीकृत रूप में कार्य कर सकते हैं, इस दिशा में प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि देश की बड़ी आबादी को हिमालय से फायदा होगा। हिमालय के संरक्षण और संवर्द्धन की दिशा में कार्य करने के लिए हमें इस क्षेत्र में कार्य करने वाले राष्ट्रीय संस्थानों का भी नियमित सहयोग लेना होगा।

हिमालयी राज्यों से समन्वय एवं नीति निर्धारण परिषद के सदस्य एवं विधायक श्री किशोर उपाध्याय ने कहा कि हिमालय एवं मध्य हिमालय क्षेत्र की अद्यतन वैज्ञानिक एवं पारिस्थितिकि स्थिति का अध्ययन होना चाहिए। हिमालयी नदियों के जल स्तर और प्रवाह का आंकलन करना भी जरूरी है। सदस्य एवं पूर्व डीजीपी श्री अनिल रतूड़ी ने कहा कि हिमालयी राज्यों को संगठित रूप से कार्य कर हिमालयी से संबंधित सभी सम्पदाओं और लोगों की आजीविका को बढ़ाने की दिशा में प्रयास करने होंगे। आचार्य डॉ. प्रशांत ने कहा कि हिमालयी राज्यों के लिए ज्वाइंट टास्क फोर्स बननी चाहिए। हिमालयी राज्यों की चुनौतियां लगभग एक जैसे होती हैं, इनके लिए मिलकर बेहमर नीति निर्धारण की दिशा में कार्य होने चाहिए। डॉ. जी.एस. रावत ने कहा कि प्रकृति और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में निरंतर कार्य होने चाहिए। पद्मश्री श्री कल्याण सिंह रावत ने कहा कि बुग्यालों का संरक्षण बहुत जरूरी है। जड़ी-बूटियों के क्षेत्र में राज्य में अनेक संभावनाएं हैं।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव डॉ. आर.मीनाक्षी सुदंरम, सचिव श्री शैलेश बगौली, यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से आज मुख्यमंत्री आवास में पूर्व मुख्यमंत्री श्री विजय बहुगुणा ने शिष्टाचार भेंट की।

इस अवसर उनके मध्य राज्य के विभिन्न समसामयिक विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।

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देहरादून,मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने शुक्रवार को सचिवालय में “25 बिंदु कार्यक्रम 2025-26” की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने प्रत्येक जनपद के सभी बिंदुओं पर विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने 25 बिंदु कार्यक्रम के वर्ष 2026-27 के लिए शीघ्र लक्ष्य निर्धारित किए जाने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि विभागों द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए सभी जनपदों के लिए टारगेट अगले एक महीने में निर्धारित करते हुए पोर्टल में अपडेट कर लिए जाएँ। उन्होंने कहा कि सभी जनपदों की अपनी जनपदों में अलग अलग समस्याएं हैं, चैलेंज हैं। जनपदों को अपने फोकस एरिया निर्धारित करते हुए अपने लक्ष्य निर्धारित किए जायें।

मुख्य सचिव ने कहा कि सचिव, विभागाध्यक्ष एवं जिलाधिकारी अपने लक्ष्यों को निर्धारित करते हुए कार्ययोजना तैयार कर लें। उन्होंने कहा कि सभी इंडिकेटर्स के वर्षभर के लक्ष्य निर्धारित करते हुए मासिक लक्ष्य निर्धारित करें। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रत्येक माह इसकी समीक्षा की जाएगी।

मुख्य सचिव ने कहा कि वन विभाग से सम्बन्धित लक्ष्यों को सभी जनपदों के लिए निर्धारित किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देशी – विदेशी पर्यटकों की संख्या के लक्ष्य बढ़ाए जाने पर फोकस किया जाए। उन्होंने विभाग को ऐसे जनपदों, जहां ईको टूरिज्म की योजनाएं नहीं चल रही हैं, को भी ईको टूरिज्म योजनाओं में शामिल किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गवर्नेंस एंड जस्टिस के क्षेत्र में काफी सुधार हुआ है, परंतु अभी बहुत संभावनाएं हैं। इस दिशा में कार्य किए जाने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव श्री आर. मीनाक्षी सुंदरम एवं सचिव श्री नितेश कुमार झा सहित सम्बन्धित विभागों के उच्चाधिकारी एवं जनपदों से जिलाधिकारी उपस्थित थे।
*सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग*

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श्री केदारनाथ धाम यात्रा 2026: यात्रियों को मिल रही त्वरित एवं प्रभावी चिकित्सा सुविधा*

*3 दिनों में कुल 6733 यात्रियों को ओपीडी एवं इमरजेंसी सेवाएं प्रदान की गई*

*अब तक 4 यात्रियों को हेलीकॉप्टर के माध्यम से भेजा गया हायर सेंटर, 13 यात्रियों को एम्बुलेंस के माध्यम से सुरक्षित पहुंचाया नजदीकी अस्पताल*

उच्च हिमालयी क्षेत्र में संचालित श्री केदारनाथ धाम यात्रा 2026 के दौरान जिला प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को श्रद्धालुओं हेतु प्रभावी एवं व्यवस्थित ढंग से संचालित किया जा रहा है। संपूर्ण यात्रा मार्ग से लेकर धाम क्षेत्र तक स्थापित चिकित्सा इकाइयों, मेडिकल रिलीफ पोस्ट (MRP), बेस कैंप चिकित्सालयों तथा हेली एवं एम्बुलेंस रेस्क्यू सेवाओं के माध्यम से श्रद्धालुओं को त्वरित उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।

प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यात्रा प्रारम्भ से अब तक 3 दिनों में धाम स्थित चिकित्सालयों में कुल 6733 यात्रियों को ओपीडी एवं इमरजेंसी सेवाएं प्रदान की गई हैं। दिनांक 24 अप्रैल को 4993 श्रद्धालुओं का उपचार किया गया। इसी प्रकार अब तक 2869 यात्रियों की स्वास्थ्य जांच/स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिनमें से आज 1311 जांचें एक ही दिन में की गईं।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा यात्रा से पहले और यात्रा के दौरान नियमित परीक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जिससे संभावित जोखिम वाले यात्रियों की समय रहते पहचान हो सके।

रेस्क्यू व्यवस्था की बात करें तो अब तक 4 यात्रियों को हेली सेवा के माध्यम से उच्च चिकित्सा संस्थान में रेफर किया गया है, 13 यात्रियों को एम्बुलेंस के माध्यम से जबकि 07 श्रद्धालुओ को डंडी कंडी के माध्यम से सुरक्षित नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया है, जो प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया को दर्शाता है।

स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान अब तक 11 यात्री अस्वस्थ अथवा यात्रा हेतु अयोग्य पाए गए हैं, जिनमें 2 मामले आज के दिन के हैं। ऐसे यात्रियों को यात्रा न करने अथवा चिकित्सकीय सलाह के अनुरूप आगे बढ़ने की सलाह दी गई है।

यात्रा के दौरान स्वास्थ्य निगरानी के चलते गंभीर मामलों में भी तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। हेली रेस्क्यू के माध्यम से अब तक 04 मरीजों को उच्च चिकित्सा केंद्र में भेजा गया।

23 अप्रैल को दो गंभीर मरीजों को हेली रेस्क्यू के माध्यम से उच्च चिकित्सा केंद्र में भेजा गया। इनमें गुजरात के मेहसाणा निवासी 55 वर्षीय धनजी भाई को सांस लेने में तकलीफ और शरीर के दाहिने हिस्से में कमजोरी की स्थिति में केदारनाथ क्षेत्र से बेस कैंप चिकित्सालय लाया गया। जांच में उनका ऑक्सीजन स्तर अत्यंत कम पाया गया, जिसके बाद प्राथमिक उपचार देकर उन्हें जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग के लिए हेली सेवा से रेफर किया गया।

दूसरे मामले में नागपुर (महाराष्ट्र) निवासी 19 वर्षीय मंदार मधुकर को पिछले दो दिनों से सांस लेने में कठिनाई, चक्कर एवं कमजोरी की शिकायत थी। केदारनाथ स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जांच के दौरान उनका ऑक्सीजन स्तर कम पाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें हेली सेवा से जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग भेजा गया, जहां से एम्बुलेंस द्वारा अस्पताल में भर्ती कराया गया।

वहीं आज 24 अप्रैल 2026 को भी 02 गंभीर मरीजों को हेली रेस्क्यू के माध्यम से उच्च चिकित्सा केंद्र में भेजा गया।

जिला प्रशासन द्वारा यात्रा मार्ग पर चिकित्सा सेवाओं को 24×7 सक्रिय रखा गया है। विभिन्न स्थानों पर ऑक्सीजन सुविधा, प्रशिक्षित चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, एम्बुलेंस और हेली सेवाएं तैनात हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा पर आने से पूर्व अपना स्वास्थ्य परीक्षण अवश्य कराएं, निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करें तथा किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या होने पर तुरंत नजदीकी चिकित्सा केंद्र से संपर्क करें।

कुल मिलाकर, केदारनाथ यात्रा के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की सुदृढ़ व्यवस्था और त्वरित रेस्क्यू प्रणाली के चलते श्रद्धालुओं को सुरक्षित एवं सुगम यात्रा अनुभव प्रदान करने की दिशा में प्रशासन निरंतर सक्रिय है।

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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के अनुमोदन के उपरान्त सचिव शैलेश बगौली ने सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग में सहायक निदेशक के पद पर कार्यरत श्रीमती अर्चना तथा श्री बद्री चन्द को उप निदेशक पद पर पदोन्न्त किये जाने के आदेश जारी किये है।

जारी आदेशों के क्रम में संबंधित अधिकारियों को नियमित चयनोपरान्त कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से उप निदेशक के पद पर प्रोन्नति प्रदान करते हुए 02 वर्ष की विहित परिवीक्षा अवधि में रखा गया है।

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सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो से भ्रम फैलाने की कोशिश, एक और FIR दर्ज*

*केदारनाथ यात्रा की व्यवस्थाओं पर गलत जानकारी फैलाने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई*

*फर्जी नैरेटिव फैलाने वालों पर शिकंजा, केदारनाथ को लेकर भ्रम फैलाने पर सख्त एक्शन*

*वृद्ध श्रद्धालु के मामले को तोड़-मरोड़ कर पेश करना पड़ा भारी, आरोपी पर केस दर्ज*

*फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए फैलाई गई फर्जी कहानी, प्रशासन ने दर्ज की FIR*

*FIR दर्ज होते ही फेक पोस्ट कर रहे डिलीट*

चारधाम यात्रा को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रामक एवं तथ्यहीन सूचनाएं प्रसारित करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई लगातार जारी है। पूर्व में दर्ज प्रकरणों के क्रम में आज जनपद रुद्रप्रयाग के थाना सोनप्रयाग में एक और प्राथमिकी दर्ज की गई है।

सोशल मीडिया मॉनीटरिंग के दौरान इंस्टाग्राम आईडी thecurlypoet के माध्यम से प्रसारित एक वीडियो संज्ञान में आया, जिसमें केदारनाथ धाम की व्यवस्थाओं को लेकर भ्रामक एवं निराधार दावे किए गए। वीडियो में यह गलत जानकारी दी गई कि एक वृद्ध श्रद्धालु को स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद प्रशासन द्वारा सहायता नहीं दी गई तथा वीआईपी प्रोटोकॉल के चलते सामान्य श्रद्धालुओं की अनदेखी की जा रही है।

जबकि वास्तविकता में दिनांक 22.04.2026 को गुजरात निवासी एक श्रद्धालु की तबीयत खराब होने पर प्रशासन द्वारा तत्काल प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, केदारनाथ पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों द्वारा उन्हें मृत घोषित किया गया। तत्पश्चात प्रशासन द्वारा आवश्यक कार्यवाही करते हुए हेलीकॉप्टर के माध्यम से शव को गुप्तकाशी भेजा गया।

उक्त वीडियो के माध्यम से तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत कर आमजन को भ्रमित करने एवं प्रशासन की छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया, जिस पर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध विधिक कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है।

पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि चार धाम यात्रा से जुड़ी किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना, अफवाह या दुष्प्रचार पर तत्काल, सख्त एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

साथ ही, अन्य संदिग्ध वीडियो एवं सोशल मीडिया कंटेंट की भी सतत निगरानी की जा रही है और उन्हें चिन्हित कर कार्रवाई के दायरे में लाया जा रहा है। स्पष्ट किया जाता है कि चार धाम यात्रा की गरिमा, श्रद्धालुओं की आस्था एवं उत्तराखंड की छवि के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। भ्रामक सूचना फैलाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की यह प्रक्रिया लगातार, सख्ती और पूरी सतर्कता के साथ जारी रहेगी।

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केदारनाथ हेली शटल सेवा हेतु ऑनलाइन बुकिंग प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न, पारदर्शिता और सुव्यवस्था से यात्रियों को मिली सुविधा*

दिनांक 15 अप्रैल 2026 को सायं 6:00 बजे से श्री केदारनाथ हेली शटल सेवा के लिए 22 अप्रैल 2026 से 15 जून 2026 की अवधि हेतु ऑनलाइन बुकिंग के हेली यात्रा बुकिंग पोर्टल के माध्यम से प्रारंभ की गई। निर्धारित अवधि के लिए कुल 31,450 सीटों की बुकिंग खोली गई, जिनमें 10,855 टिकटों के माध्यम से सभी 31,450 सीटों की सफलतापूर्वक बुकिंग की गई।

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ऑनलाइन बुकिंग प्रक्रिया की समीक्षा के लिए टूरिस्ट हेल्पलाइन कॉल सेंटर, उत्तराखंड पर्यटन द्वारा 565 रैंडम कॉल्स की गईं। इस विश्लेषण में पाया गया कि IRCTC की बुकिंग में यात्रियों द्वारा उपयोग किए गए 10,859 मोबाइल नंबरों में से 4,400 नंबर वास्तविक यात्रियों से मेल खाते पाए गए। साथ ही लगभग 51 प्रतिशत बुकिंग स्वयं यात्रियों द्वारा की गई, जबकि शेष 49 प्रतिशत बुकिंग अन्य माध्यमों से संपन्न हुई।

बुकिंग प्रक्रिया के दौरान प्रथम टिकट सायं 6:02 बजे तथा अंतिम टिकट सायं 7:28 बजे बुक की गई। सायं 6:10 बजे से 6:32 बजे के मध्य पीक बुकिंग दर्ज की गई, जिसमें 6:10 बजे 849 बुकिंग दर्ज की गईं और 6:32 बजे तक बुकिंग संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।

राज्यवार आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र से सर्वाधिक 1708 बुकिंग, उत्तर प्रदेश से 1243, दिल्ली से 867, तेलंगाना से 864, कर्नाटक से 801 तथा गुजरात से 700 बुकिंग दर्ज की गईं।

बुकिंग प्रक्रिया को सुव्यवस्थित बनाए रखने हेतु प्रति यूज़र अधिकतम 2 बुकिंग एवं अधिकतम 12 सीट बुक करने की अनुमति दी गई। एक IP से अधिकतम 5 यूज़र ID द्वारा बुकिंग की जा सकती है तथा एक बुकिंग में अधिकतम 6 यात्रियों को शामिल किया जा सकता है। इस प्रकार एक यूज़र द्वारा कुल अधिकतम 12 यात्रियों की बुकिंग संभव है।

वर्तमान तक 510 बुकिंग ID के सापेक्ष कुल 913 सीटों के लिए कैंसलेशन दर्ज किए गए हैं।

राज्य सरकार द्वारा संचालित यह बुकिंग प्रक्रिया पूर्णतः पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न की गई है, जिससे यात्रियों को सुगम, सुरक्षित एवं विश्वसनीय यात्रा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।

 

 

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