विजय दिवसः 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर कब्जा कर लेना चाहते थे भारतीय जवान

Pahado Ki Goonj

देहरादून। पाकिस्तान के साथ 1971 की लड़ाई में भारतीय जवानों में ऐसा जोश था कि समूचे पाकिस्तान पर कब्जा जमा लेना चाहते थे। यह कहना है देश के लिए 1962, 65 और 1971 की लड़ाई लड़े जांबाज सूबेदार 90 वर्षीय लक्ष्मण सिंह बिष्ट का। भारत-पाक युद्ध की बातें करते हुए वह अब भी जोश से भर उठते हैं। लक्ष्मण सिंह बिष्ट 1971 की लड़ाई में बारूदी सुरंग की चपेट में आने से घायल हो गए थे।
मूल रूप से डुंगरी (रोड़ी) निवासी सूबेदार लक्ष्मण सिंह बिष्ट 05 कुमाऊं रेजीमेंट में तैनात थे। वह बताते हैं कि वर्ष 1971 की लड़ाई में वह जम्मू के आरएसपुरा सुचेतगड़ बॉर्डर में स्थित मैंगो ओपी चेकपोस्ट में तैनात थे। 5 कुमाऊं रेजीमेंट ने इस लड़ाई में अदम्य साहस का परिचय दिया।
दिसंबर 1971 की शुरुआत में पाकिस्तान की पीली चेकपोस्ट से पाकिस्तानी सैनिकों ने हमारी पोस्ट में मशीन गन से फायरिंग की। हमारे किसी भी सैनिक को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। जवाबी कार्रवाई इतनी जबरदस्त थी कि पाकिस्तानी सैनिकों को अपनी पोस्ट छोड़ कर भागना पड़ा। 5 कुमाऊं रेजीमेंट ने पाकिस्तान की पीली पोस्ट पर कब्जा जमा लिया।इसी लड़ाई में बारूदी सुरंग रिकवरी के समय सूबेदार लक्ष्मण सिंह बिष्ट विस्फोट की चपेट में आ गए। उनके पैर में छर्रे लगे, वह घायल हो गए। 13, 14 दिसंबर 1971 को उन लोगों को पाकिस्तान पर फतह की सूचना मिली। तब भारतीय सैनिक लाहौर तक पहुंच गए थे। सूबेदार लक्ष्मण सिंह बिष्ट की बहादुरी के लिए वर्ष 1982 में तत्कालीन राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी ने उन्हें सम्मान पत्र दिया था और उनकी वीरता को सराहा था। वर्ष 1979 में सेना से रिटायर बिष्ट का परिवार जिला मुख्यालय के कृष्णापुरी में रहता है।

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