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प्रतापनगर के भविष्य पर फिर उठे सवाल, टिहरी बांध प्रभावितों से एकजुट होने की अपील

Pahado Ki Goonj

प्रतापनगर के भविष्य पर फिर उठे सवाल, टिहरी बांध प्रभावितों से एकजुट होने की अपील
प्रतापनगर/टिहरी। टिहरी बांध प्रभावित क्षेत्र प्रतापनगर की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर पहाड़ों की गूंज हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र के संपादक जीत मणि पैन्यूली ने क्षेत्रवासियों से जागरूक और संगठित होने की अपील की है। उनका कहना है कि वर्षों से टिहरी बांध प्रभावितों के पुनर्वास, प्रतिपूर्ति और विकास से जुड़े मुद्दे पूरी तरह हल नहीं हो सके हैं, जिसके कारण क्षेत्र आज भी मूलभूत सुविधाओं और विकास से वंचित है।
उन्होंने कहा कि 26 अक्टूबर 2005 को टिहरी बांध की टी-1 और टी-2 टनल बंद किए जाने के बाद जब जलभराव शुरू हुआ तो प्रतापनगर के लोगों ने 26 जनवरी 2006 से आंदोलन शुरू किया। उस समय प्रतापनगर को जिला बनाने, प्रत्येक प्रभावित परिवार को 10 लाख रुपये प्रतिपूर्ति, मुफ्त बिजली तथा रिंग रोड पर प्रभावितों को व्यावसायिक दुकानें उपलब्ध कराने जैसी प्रमुख मांगें उठाई गई थीं। उनका आरोप है कि समय के साथ आंदोलन अपनी मूल दिशा से भटक गया और अधिकांश मांगें आज तक अधूरी हैं।
जीत मणि पैन्यूली का कहना है कि तत्कालीन प्रशासन के साथ वार्ताओं के दौरान कुछ आश्वासन मिले थे। उन्होंने उल्लेख किया कि तत्कालीन जिलाधिकारी सचिन कुर्वे के प्रयासों से टीएचडीसी लिमिटेड के माध्यम से प्रभावितों को 5 लाख रुपये देने का समझौता हुआ, लेकिन कई महत्वपूर्ण मांगें अब भी पूरी नहीं हो सकीं। कंडियाल गांव में उपतहसील खोलने और प्रतापनगर को जिला बनाने की मांग भी अधूरी रह गई।
उन्होंने कहा कि सड़क, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं के अभाव का सबसे अधिक असर आम जनता पर पड़ रहा है। उनका दावा है कि क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं न होने से प्रसव जैसी आपात स्थितियों में भी लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जिससे कई परिवार प्रभावित हुए हैं।
संपादक ने यह भी कहा कि पहाड़ों की गूंज समाचार पत्र फरवरी 2011 से लगातार प्रतापनगर की मांगों को प्रमुखता से प्रकाशित करता आ रहा है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से आग्रह किया कि समाचार पत्र में प्रकाशित मांगों और तथ्यों को प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री तथा संबंधित जनप्रतिनिधियों तक भेजकर जनआंदोलन को मजबूत करें।
उन्होंने नंदप्रयाग-घाट सड़क आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि संगठित जनसंघर्ष से विकास कार्य संभव हैं। इसलिए प्रतापनगर के लोगों को भी अपने बच्चों के भविष्य और क्षेत्र के विकास के लिए एकजुट होकर शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए।

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