प्रतापनगर की लाइफ लाइन डोबरा,चांठी पुल निर्माण साथ ही 5लाख प्रति परिवार प्रतिपूर्ति 2010 से अभीतक नहीं दिया है

Pahado Ki Goonj

टिहरी लोकसभा क्षेत्र जो कि टिहरी,उत्तरकाशी और देहरादून जिले की विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों से मिलकर बना है,इसमे 14विधानसभाये आती है ज़िनमे उत्तरकाशी की पुरोला,य़मुनोत्री,गंगोत्री विधानसभा है तो टिहरी गढवाल की प्रतापनगर,घनसाली,टिहरी ,धनौल्टी आते है तो देहरादून जिले की चकराता,विकासनगर,सहसपुर,देहरादून कैंट,राजपुर रोड,मंसुरी और रायपुर विधानसभा आती है । अगर बात की जाये इस लोकसभा के प्रतिनिधित्व की तो आजादी के बाद सर्वाधिक बार टिहरी राज परिवार ही यहां से चुनता रहा है,जिसमे 1952 स्व श्रीमती कमलेंदू मती शाह,1957,62,67में स्व श्री मानवेंद्र शाह ,1971में परिपूर्णानन्द पैन्यूली,1977,80में स्व श्री त्रेपन सिंह नेगी ,1984,89में स्व श्री ब्रहम दत्त ,फिर 19991से अपने जीवन के आखिर दिन तक यानी 2007 तक स्व श्री मानवेन्द्र शाह,फिर 2007 के उपचुनाव और 2009में विजय बहुगुणा और फिर 2012 के उपचुनाव,और 2014से एक बार फिर राजपरिवार की श्रीमती माला राज्यलक्ष्मी शाह है जो कि दिवंगत टिहरी महाराजा और 8 बार साँसद रहे मानवेन्द्र शाह की बहू है।
आजाद भारत में टिहरी लोकसभा को 1नं क्रमाक पर रखा गया जो कि अभी तक है,2008परिसीमन से पहले इस सीट की भौगोलिक स्थिति कुछ इस तरह थी,उत्तरकाशी की सभी तीनो विधानसभा,टिहरी जिले की सभी 6विधानसभा ,देहरादून की ,चकराता ,विकासनगर,मसुरी ,राजपुर,डोईवाला ,
ऋषिकेश,रायपुर विधानसभा भी इसी लोकसभा में पड़ती थी,यूँ कहा जाये कि एक तरह से यह पहाड़ी लोगो के प्रभाव वाली सीट थी या यूँ कहें कि इस सीट पर टिहरी का दबदबा था क्यूँकि टिहरी उत्तरकाशी के गांव से पलायन करने वाले ज्यादातर लोग,चाहे टिहरी के हो या उत्तरकाशी के ऋषिकेश या दून में ही बसे हुये है तो यहां भी उनका गांव वाला संसदीय क्षेत्र था,परंतु 2008 के परिसीमन ने इस सीट को पहाड के बजाय मैंदानी बाहुल्य कर दिया,इस सीट से नरेन्द्रनगर,देवप्रयाग विधानसभाओं को तोडकर गढवाल लोकसभा में जोड दिया,साथ ही ऋषिकेश और डोईवाला विधानसभाओं को तोडकर हरिद्वार लोकसभा में जोड दिया गया है,ज़िससे इस सीट पर टिहरी,उत्तरकाशी का दबदबा खत्म सा हो गया है,पहले जहां नामांकन प्रक्रिया टिहरी और बाद में नई टिहरी में होता था वो सब अब देहरादून में होता है,अगर हम पिछले सांसदो की बात करें तो ज्यादात्तर सांसद पहाड के ही बने ज़िन्हे यहां के दुख दर्द का बखूबी पता था,चाहे महाराजा मानवेंद्र शाह हो,ज़िनका जन्म प्रतापनगर राजमहल में हुआ,चाहे सामान्य परिवार में जन्मे परिपूरणानन्द पैन्यूली हो या त्रेपन सिह नेगी सभी पहाड के दर्द से वाखिफ थे ।पर परिसीमन के बाद स्थिति ये है कि पहाड के लोग सिर्फ वोट बैंक बनकर रह गये,टिहरी उत्तरकाशी के पहाड के वोटरो को तीन लोकसभाओं टिहरी,पौड़ी,हरिद्वार में बांट दिया गया जो कि दुर्भाग्य है,आज की 17 वीं लोकसभा में पहाड़ के मूद्दे,समस्याएं कहीं न कहीं वही है,जिनमें प्रमुख रूप से पलायन,स्वास्थ्य,शिक्षा, बांध प्रभावित प्रतापनगर ,गाजणा की लाइफ लाइन डोबरा,चांठी पुल निर्माण साथ ही पत्र के सम्पादक जीतमणि पैन्यूली के संयोजक रहते हुए चावड़ बैंड पर 2008 जुलाई में आंदोलन करने के फलस्वरूप 5लाख प्रति परिवार प्रतिपूर्ति 2010 से अभीतक नहीं दिया है ,टिहरी बांध विस्थापितों,प्रभावितों की समस्याएं,प्रतापनगर को केन्द्रीय ओबीसी दर्जे की माँग, सेम मुखेम को पाँचवा धाम घोषित करने की माँग हो या गंगा घाटी की समस्या अथवा यमुना घाटी तमाम समस्याएं है,पर दुर्भाग्य आज का चुनाव इन मुद्दों के बजाय अन्य मुद्दों पर केंद्रित हो रहा है,बहरहाल गंगा,यमुना के मायके यानि गंगोत्री,गोमुख,यमुनोत्री,धाम सहित सेम मुखेम,महासू देवता ,सुरकण्डा माता की इस पावन धरा में राजनीत्तिक सरगर्मी तेज हो गयी है,जहाँ राजपरिवार और प्रीतम सिंह का परिवार क्रमशःबीजेपी काँग्रेस से सांसदी हथियाने को लालायित है वहीं दूसरी तरफ गौ गंगा कृपाकांक्षी गोपालमणि महाराज जी भी निर्दलीय ताल ठोक रहे हैं।उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून में19 साल से चल रही है देहरादून शिक्षा स्वास्थ्य का हब बना हुआ है साथ ही उद्योगों के लिए व्यापक रूप से सुभीदा है परन्तु यहाँ के लिए रोजगार के साधन देने में सरकार फिसड्डी साबित हुई है सही मायने में देहरादून राजधानी है टिहरी गढ़वाल संसदीय क्षेत्र में यमनोत्री गंगोत्री विश्व प्रसिद्ध धाम हैं पर्वतों की रानी मसूरी है प्रश्न यह है कि सिंगापुर उत्तराखंड से छोटे एरिया वाला देश है जिसमें नागरिक मोल का पानी पीते हैं वहां की अर्थव्यवस्था पर्यटन ही है।टिहरी गढ़वाल संसदीय क्षेत्र में देश की गंगा ,यमुना नदी बहती है जहाँ पानी प्रचूर मात्रा में है। जिससे विद्युत उत्पादन के साथ साथ जल किलड़ा में रोजगार की अपार संभावनाएं बनती हैं। परन्तु रोजगार की गारंटी के लिए सरकार कोई ठोस नीति नहीं बनाने से यहाँ के नागरिकों के साथ छल होते रहा है।

,मसूरी,चकराता,धनौल्टी,नईटिहरी,डैम,चम्बा,
पुरोला,बड़कोट,तिलाड़ी,मोरी,हर्षिल,भटवाड़ी,प्रतापनगर,चौरंगीखाल,केमुंडाखाल,राड़ी,पवांली,घुतु,बूढाकेदार,महस्त्रताल,दयारा बुग्याल आदि पर्यटन स्थलों को अपने भौगौलिक क्षेत्र में समेटे टिहरी लोकसभा 2019 में किसे अपना प्रतिनिधि चुनता है,ये तो 23 मई को पता लग जायेगा,लेकिन जिस तरह से दो सियासी परिवारों,राजपरिवार और प्रीतम सिंह परिवार साँसद बनने को लालायित है कहीं न कहीं निर्दलीय गोपालमणि इन दोनों के खेल को बिगाड़ सकते हैं,सभी के मन में यही सवाल है कि क्या टिहरी में सांसद इस बार भी सियासी परिवार से ही बनेगा या कोई नया इतिहास बनेगा,बहरहाल टिहरी लोकसभा में चुनाव प्रचार की गति में तेजी आ चुकी है।राजपरिवार और 5 बार विधायक दो बार मंत्री रहे कांग्रेस पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष प्रीतम सिंह परिवार को अपने परिवार के बर्चस्व को बनाये रखने की चुनौती जरूर दिख रही है।

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