देहरादून। उत्तराखंड में मौसम ने करवट बदल ली है। ज्यादातर इलाकों में बादलों ने डेरा डाल लिया है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार अगले तीन दिन उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में हल्की बारिश और ओलावृष्टि हो सकती है।
जबकि, मैदानी इलाकों में तेज हवाओं के साथ हल्की बौछारें पड़ सकती हैं। इसके साथ ही आगामी तीन और चार मई को पहाड़ों गरज के साथ ओलावृष्टि और मैदानों में अंधड़ को लेकर आरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
चकराता छावनी क्षेत्र के सेंट्रल फारेस्ट के जंगल में आग फिर सुलगने पर हर तरफ धुंआ ही नजर आया। पिछले पांच दिनों से चकराता छावनी के आसपास के जंगलों में आग लग रही है। जवान, वन और कैंट कर्मी आग को बुझा देते हैं, गर्मी की वजह से आग फिर से सुलग जा रही है, यह सिलसिला सोमवार से लगातार चल रहा है। कैंट बोर्ड के अधिकारियों ने ग्रामीणों से सूखी घास न जलाने की अपील भी की है।
गर्मी की तपिश जिस तरह से बढ़ रही है, उससे जंगल में आग लगने की घटनाओं में इजाफा हो रहा है। पिछले पांच दिन से चकराता छावनी क्षेत्र के सेंट्रल फारेस्ट में आग लग रही है। सुबह कैंट बोर्ड के पोलो ग्राउंड के पास जंगल में आग लग गई। रावना क्षेत्र से शुरु हुई आग पोलो ग्राउंड तक पहुंच गई। जंगल में पहुंची आग को बुझाने के लिए कैंट र्किमयों के साथ सेना के जवानों को भी लगना पड़ा। दिन में बारिश होने जैसे मौसम बना, लेकिन बारिश न होने पर जंगल की आग बुझाने में कोई मदद नहीं मिली। रेंजर कैंट अमित साहू का कहना है कि कैंट कर्मचारी लगातार 5 दिन से आग बुझाने में जुटे हुए हैं, क्योंकि बुझाई गई आग के बाद भी जंगल फिर से सुलग जा रहे हैं। जंगल में आग लगने की वजह से कर्मचारी अपने घर तक नहीं जा पा रहे हैं। देर रात तक टीम आग बुझाने में जुटी रही।
चारों धामों के कपाट खुलने से पहले ही उमड़ेंगे हजारों श्रद्धालु
Sat Apr 30 , 2022
देहरादून। उत्तराखंड के चारों धाम उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्थित हैं। हर साल बर्फ गिरने के चलते शीतकाल में जब कपाट बंद होते हैं, तो यहां से देवडोलियों में भगवान की मूर्ति को शीतकालीन प्रवास स्थल यानी निचले क्षेत्रों के निर्धारित मंदिरों में ले आया जाता है। शीतकाल की पूजा […]

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