
नागदेवता के क्षेत्र में बड़ा फैसला: 5 से 23 सितंबर तक शराब-मांस पर पूर्ण प्रतिबंध, उल्लंघन पर 51 हजार का धार्मिक दंड!
नैनबाग (श्रीकोट)। भगवान श्री नागदेवता मंदिर समिति इड्वालस्यु जौनपुर की ऐतिहासिक बैठक में 16 गांवों के प्रतिनिधियों ने कई बड़े और महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। श्रीकोट इंटर कॉलेज सभागार में 3 सितंबर को आयोजित बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष सुनील थपलियाल ने की।
बैठक में भगवान श्री नागदेवता से जुड़े 16 गांवों के प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। इस दौरान भगवान श्री नागदेवता के आगामी गांव-गांव भ्रमण, मंदिर निर्माण और धार्मिक परंपराओं को लेकर कई अहम प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए।
सबसे बड़ा फैसला धार्मिक अनुशासन को लेकर लिया गया। समिति ने निर्णय किया कि 5 सितंबर से 23 सितंबर 2026 तक श्री नागदेवता के पूरे क्षेत्र में मांस और शराब के सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इस दौरान यदि कोई परिवार शराब पीते, पिलाते या धार्मिक मर्यादा का उल्लंघन करते पाया गया तो उस पर 51 हजार रुपये का धार्मिक दंड लगाया जाएगा। समिति ने सभी श्रद्धालुओं और ग्रामीणों से इस निर्णय का कड़ाई से पालन करने की करबद्ध अपील की है।
बैठक में श्री नागदेवता श्रीकोट मंदिर के नव-निर्माण को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। मंदिर निर्माण के लिए सभी गांवों से सहयोग राशि और चंदा एकत्र किया जाएगा। जिन गांवों से अभी तक सहयोग राशि प्राप्त नहीं हुई है, उनसे शीघ्र सहयोग देने का आग्रह किया गया।
इसके अलावा भगवान श्री नागदेवता के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार गांव-गांव भ्रमण का निर्णय भी दोहराया गया। देवडोली के प्रत्येक गांव पहुंचने पर भव्य स्वागत किया जाएगा और ग्रामीणों से धार्मिक अनुशासन एवं परंपराओं का पालन करने की अपील की गई।
23 सितंबर को भंडारे के दिन विशाल बैठक आयोजित होगी, जिसमें सभी 16 गांवों के प्रतिनिधि और श्रद्धालु शामिल होंगे। इसी बैठक में आगामी धार्मिक कार्यक्रमों और मंदिर निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी।
बैठक में विभिन्न गांवों के प्रतिनिधियों ने अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए आयोजन को सफल बनाने के लिए सहमति जताई। समिति ने कहा कि नागदेवता की आस्था, पौराणिक परंपराओं और सामाजिक एकता को बनाए रखने के लिए सभी 16 गांव एकजुट होकर कार्य करेंगे।
बैठक के अंत में समिति अध्यक्ष सुनील थपलियाल ने सभी ग्रामीणों से धार्मिक मर्यादा बनाए रखने और समिति द्वारा लिए गए निर्णयों का पूर्ण पालन करने की अपील की।

