गुडन्यूज -चंडीगढ़ गुरु का लंगर ने सुपरलेटी हॉस्पिटल में 13 रुपये रोज की दवा से इलाज किया जाता है

Pahado Ki Goonj

चंडीगढ़, (पहाडोंकीगूँज) गुरु के सिद्धांत पर सब कुछ तेरा ही तेरा है के अनुसार भगतो के द्वारा  यहाँ ककरते हुए दिखाई देरहा है।सेक्टर45 मे गुरू के लंगर हॉस्पिटल के डॉक्टर निशुल्क मरीज को देखकर एक ही छत के निचे टेस्ट होते हैं। सभी प्रकार के टेस्ट बहुत कम कीमत पर करने के साथ साथ सभी प्रकार के मरीजों को मात्र 13 तेरह रुपये कीमत से प्रत्येक दिन की दवाई देते हैं ।यह दवा तेरा ही तेरा मेडकोज स्टोर से मिलती है। जिस मरीज से इलाज के रुपये नहीं दीया जा सकता है । (मो  9888700113,जनकारी ले सकते हैं।

उसके लिए निशुल्क इलाज करने की व्यवस्था बनाई गई है।यह हॉस्पिटल चंडीगढ़, उत्तराखंड, हिमाचल, हरियाणा, पंजाब प्रदेश के लोगों के साथ साथ अन्य जरूरत मन्दो के लिए सरल एवं सस्ता इलाज के लिए बरदान साबित होरहा है। बाहर से आने वाले लोगों के लिए टेलीफोन नंबर दिये गए हैं ।

01725020113,9814002506

उन से आप जनकारी,बुकिंग ले सकते हैं।

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कोरोना के मरीजों के लिए  दवा  बनाने  के लिए सहयोग  वाले दानियों एंव  उद्योग पतियों की आवश्यकता है इस महामारी से बचने के लिए मानवीय संवेदना व्यक्त करते हुए आगे आने की आवश्यकता है।

सेवा में
माननीय मुख्यमंत्री जी
उत्तराखंड सरकार, देहरादून

महोदय,

देश के इन महान आयुर्वेद के ज्ञान का रिसर्च कर देहरादून में अदभुत अलौकिक, अमृत तुल्य कोरोना उपचार की सटीक दवा बनाई है। उत्तराखंड सरकार इसकी महत्ता समझेगी?
वही बड़ी खबर आ रही है : किडनी तथा लिवर को खराब करती है रेमेडिसविर वैक्सीन

गुजरात सरकर ने इसके खतरे को लेकर किया अलर्ट किया है
जबकि
वैज्ञानिक विजय कुमार ने कोरोना के मरीज श्री प्रसाद थपलियाल के ठीक हुए, इसके साथ श्री राजेश यादव
रिलाइंस वेस्ट यूपी
महोदय, कोरोनो इलाज में प्रभावी माने जाने वाली एंटी वायरल इंजेक्शन रेमडेसिविर को लेकर कइ सवाल खड़े हो गए हैं। इसके निर्यात पर रोक लगाने की बीच दावा किया जा रहा है कि इस इंजेक्शन में साइक्लोडेक्ट्रीन है जो किडनी तथा लिवर को खराब कर सकता है। दरसअल गुजरात उच्च न्यायालय ने राज्य में कोरोना वायरस की स्थिति पर स्वत:संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका की कार्रवाही शुरू की, जिसके जवाब में सरकार ने यह दावा किया।

गुजरात उच्च न्यायालय ने उठाया सवाल
कोर्ट ने कहा कि मीडिया में महामारी को लेकर आई खबरों में यह संकेत दिया गया था कि प्रदेश ‘स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति’ की तरफ बढ़ रहा है। इसके साथ ही कोर्ट ने सवाल किया कि कोरोना संक्रमण के इलाज के लिए प्रयोग होने वाले रेमेडिसविर इंजेक्‍शन इतनी अधिक कीमत पर क्‍यों बेचे जा रहे हैं। याद हो कि कोविड-19 के मामलों में वृद्धि के कारण रेमडेसिविर की मांग बढ़ने के मद्देनजर केन्द्र ने रविवार को कहा कि वायरल रोधी इंजेक्शन और इसकी सक्रिय दवा सामग्री (एपीआई) के निर्यात पर स्थिति में सुधार होने तक रोक लगा दी गई है।

रेमेडिसविर की कालाबाजारी रोकेने के लिए निर्देश जारी
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा की दवा की आसानी से उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए रेमडेसिविर के सभी घरेलू निर्माताओं को अपने विक्रेताओं और वितरकों की जानकारी अपनी वेबसाइट पर प्रदर्शित करने की सलाह दी गई है। औषधि निरीक्षकों और अन्य अधिकारियों को भंडार को सत्यापित करने, कदाचारों की जांच करने और इसकी जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए अन्य प्रभावी कदम .उठाने के निर्देश दिये गये है। राज्यों के स्वास्थ्य सचिव संबंधित राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के औषधि निरीक्षकों के साथ इसकी समीक्षा करेंगे।

रेमडेसिविर की बढ़ रही है मांग
मंत्रालय ने कहा कि भारत में कोविड के मामले तेजी से बढ़ रहे है। इससे कोविड मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले रेमडेसिविर इंजेक्शन की मांग तेजी से बढ़ी है।आने वाले दिनों में इसकी मांग में और बढ़ोतरी हो सकती है। मंत्रालय ने कहा कि सात भारतीय कंपनियां मेसर्स गिलीड साइंसेज, अमेरिका, के साथ स्वैच्छिक लाइसेंसिंग समझौते के तहत इंजेक्शन का उत्पादन कर रही हैं। उनके पास प्रति माह लगभग 38.80 लाख इकाइयों को बनाने की क्षमता है। भारत सरकार ने स्थिति में सुधार होने तक रेमडेसिविर और इसकी सक्रिय दवा सामग्री (एपीआई) के निर्यात पर स्थिति में सुधार होने तक रोक लगा दी गई है।”

महोदय, देश के इन ख्याति प्राप्त आयुर्वेद के वैज्ञानिक को आप समय देगे, जिसका लाभ उत्तराखंड ही नही पूरे देश को मिलेगा
सादर

जीतमणि पैन्यूली सम्पादक
प्रचार कार्यालय एजेण्डा बिजनेस सेन्टर देहरादून -1
मो09456334283

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