देहरादून। नए मोटर व्हीकल एक्ट के विरोध में उत्तराखंड परिवहन महासंघ के आह्वान पर आज निजी बस ऑपरेर्ट्स के अलावा टैक्सी, मैक्सी संचालक भी हड़ताल पर हैं। निजी बस ऑपरेटर्स के हड़ताल में शामिल होने से जहां मैदान से लेकर पहाड़ तक परिवहन व्यवस्था पर असर पड़ेगा। लोगों को आवाजाही में दिक्कत होगी। वहीं सिटी बस, विक्रम व आटो यूनियनों के हड़ताल में शामिल होने के एलान से राजधानी देहरादून की सड़कों पर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था ठप रहेगी।
परिवहन महासंघ की एक दिवसीय हड़ताल को ट्रांसपोर्ट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने भी समर्थन दे दिया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक अग्रवाल का कहना है कि नए मोटर व्हीकल एक्ट के खिलाफ तमाम ट्रक संचालक अपनी गाड़ियों का संचालन ठप रहेंगे। ट्रक संचालकों के हड़ताल में शामिल होने से इसका सीधा असर सामान की ढुलाई पर पड़ेगा। पहाड़ के कई हिस्सों में आज टैक्सी-मैक्सी और बसों के पहिए पूरी तरह जाम रहेंगे। वाहनों के नहीं चलने से लोगों की दिक्कतें बढ़ सकती है, क्योंकि पर्वतीय क्षेत्र के रूटों पर रोडवेज बसों का संचालन बहुत कम है। टिहरी जिले में पर्वतीय टैक्सी-मैक्सी महासंघ की 3500 के लगभग जीप-टैक्सियों का संचालन होता है। टीजीएमओ जिले में लगभग 40 से 50 बसों की सेवाएं प्रतिदिन संचालित करता है। पर्वतीय क्षेत्र में जीप-टैक्सी यूनियन और निजी बस कंपनियों के भरोसे ही यातायात व्यवस्था संचालित होती है। ग्रामीण संपर्क मार्गों पर रोडवेज की बस सेवाएं नहीं है। टिहरी गढ़वाल टैक्सी चालक एसोसिएशन के अध्यक्ष टीकम सिंह चैहान, गंगा जीप कमांडर यूनियन के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह रावत और टीजीएमओ के स्टेशन प्रभारी विजयपाल सिंह नेगी ने बताया कि आज वाहनों का संचालन पूरी तरह बंद रहेगा। कोटद्वार में भी प्रस्तावित हड़ताल को सफल बनाने के लिए निजी परिवहन कंपनियों और समितियों ने कमर कस ली है। गढ़वाल जीप टैक्सी समिति, जीएमटी, जीएमओयू, सिद्धबली ऑटो यूनियन, ई रिक्शा यूनियन ने हड़ताल का समर्थन करते हुए अपने वाहनों का संचालन बंद रखने का निर्णय लिया है।
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न्यूयार्क। 18 साल पहले 11 सितंबर के दिन न्यूयॉर्क में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला हुआ था जिसके बाद दुनिया की राजनीति बदल गई. अमरीका ने बिना वक्त गंवाए अफगानिस्तान में चरमपंथ के खिलाफ लड़ाई का मोर्चा खोल दिया और तालिबान को सत्ता से बेदखल कर दिया। मगर 18 साल […]

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ब्रेकिंग न्यूज़ उत्तरकाशी के पुरोला को जिला बनाओजिला मुख्यालय पुरोला से 150 से 200 किमी की दूरी में होने से उन्हें काफी सारी परेशानीयों का सामना करना पड़ता है। -स्थानीय लोगों को हर छोटी या बड़ी समस्या के लिये इतना लम्बा सफर तय करना पड़ता है। -जिला मुख्यालय से दूर होने के कारण वहां के विकास पर ध्यान नहीं दिया जाता है। -उनका कहना है कि पुरोला को जिला बनाने से यह सारी परेशानी खत्म हो जाएंगी। अलग जिला बनाने की मांग क्षेत्रवासियों ने बताया कि 24 फरवरी 1960 में उत्तरकाशी जिला टिहरी से अलग हुआ था। उस समय रवांई परगना उत्तरकाशी जिले में शामिल किया गया था। यह क्षेत्र बड़कोट, पुरोला, नो गांव, मोरी तहसील के अंदर आता है। 1960 में रवांई के लोगों ने अलग जिले की मांग शुरू कर दी थी। उसके बाद उत्तराखंड राज्य बनने के बाद पृथक जिले की मांग और तेज हुई, जिसके चलते सरकार ने राज्य के 4 नए जिलों की घोषणा में यमुनोत्री को जिला बनाने की बात कही थी। जिससे पुरोला के लोग भड़क गए और तब से लगातार पुरोला को जिला बनाने की मांग की जा रही है।
Pahado Ki Goonj July 31, 2018

