
पहाड़ से राजधानी तक विकास की नई तस्वीर! ₹76.91 करोड़ की दो बड़ी परियोजनाओं को रफ्तार, रतूड़ा में बनेगा भव्य राज्य अतिथि गृह और रेसकोर्स में 48 नए आवास
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य संपत्ति विभाग ने सरकारी परिसंपत्तियों को आधुनिक, सुविधायुक्त और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में योजनाओं को गति दी है। सचिव आवास एवं राज्य संपत्ति डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठकों में रुद्रप्रयाग के रतूड़ा में प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह और देहरादून के रेसकोर्स स्थित ओल्ड ऑफिसर्स कॉलोनी में 48 नए आवासों की निर्माण योजना की समीक्षा की गई।
रतूड़ा में ₹48.84 करोड़ से बनेगा राज्य अतिथि गृह
रुद्रप्रयाग के रतूड़ा में करीब ₹48.84 करोड़ की लागत से भव्य राज्य अतिथि गृह प्रस्तावित है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि भवन को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप आधुनिक सुविधाओं से विकसित किया जाए। कॉन्फ्रेंस हॉल में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, बड़े आकार के फ्लैट टीवी सहित अत्याधुनिक तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
निर्माण के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। लोक निर्माण विभाग को एनजीटी के मानकों के अनुरूप निर्माण स्थल की नदी से न्यूनतम 200 मीटर दूरी सुनिश्चित करने और संबंधित प्रमाण-पत्र अभिलेखों में रखने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य प्रवेश द्वार और केंद्रीय भवन पर आकर्षक बड़े आकार का लोगो लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
रेसकोर्स में ₹28.07 करोड़ से बनेंगे 48 नए आवास
देहरादून के रेसकोर्स स्थित ओल्ड ऑफिसर्स कॉलोनी में पुराने जर्जर भवनों को हटाकर रिक्त भूमि पर करीब ₹28.07 करोड़ की लागत से 48 श्रेणी-3 आवास बनाए जाने प्रस्तावित हैं। इन भवनों में आधुनिक सुविधाओं के साथ कम रखरखाव लागत वाली निर्माण सामग्री और फिनिशिंग का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं।
परियोजना में ग्रीन बिल्डिंग मानकों का पालन करने के साथ अनिवार्य रूप से रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम विकसित किया जाएगा। प्रत्येक कॉलोनी का नाम भी आकर्षक और स्पष्ट डिजाइन के साथ प्रदर्शित किया जाएगा।
स्थानीय वास्तुशैली को मिलेगी प्राथमिकता
सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि सरकार का उद्देश्य निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करना है। पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए निर्माण में स्थानीय वास्तुशैली को प्राथमिकता दी जा रही है।
उन्होंने अधिकारियों को परियोजनाओं की नियमित समीक्षा कर निर्धारित समयसीमा में कार्य पूरा कराने के निर्देश दिए। राज्य संपत्ति विभाग की इन दोनों परियोजनाओं में आधुनिक सुविधाओं के साथ पर्यावरण संरक्षण, कम रखरखाव लागत और दीर्घकालिक उपयोगिता पर विशेष फोकस किया जा रहा है।

