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आराकोट-बंगाण की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठी आवाज जनता बोली—आश्वासन नहीं, चाहिए स्थायी इलाज की व्यवस्था ।

Pahado Ki Goonj

आराकोट-बंगाण की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठी आवाज
जनता बोली—आश्वासन नहीं, चाहिए स्थायी इलाज की व्यवस्था
उत्तरकाशी/आराकोट। सीमांत आराकोट-बंगाण क्षेत्र की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर अब आवाज मुखर होने लगी है। क्षेत्र में चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी को दूर करने की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता मनमोहन सिंह चौहान के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल ने स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल से मुलाकात कर क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को तत्काल मजबूत करने की मांग उठाई।
शिष्टमंडल ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आराकोट में स्थायी चिकित्सक के साथ एएनएम, वार्ड बॉय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नियुक्ति किए जाने की मांग की। इसके अलावा राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय टिकोची में फार्मासिस्ट, वार्ड बॉय तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की स्थायी तैनाती की मांग भी प्रमुखता से रखी गई।
सामाजिक कार्यकर्ता मनमोहन सिंह चौहान ने कहा कि आराकोट-बंगाण, विकासखंड मोरी का अत्यंत दूरस्थ और सीमांत क्षेत्र है। विषम भौगोलिक परिस्थितियों और स्वास्थ्य केंद्रों से लंबी दूरी के कारण ग्रामीणों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बना हुआ है। विशेषकर आपातकालीन परिस्थितियों में स्थानीय स्तर पर पर्याप्त चिकित्सकीय सुविधा नहीं मिलने से मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में पर्याप्त चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ उपलब्ध नहीं होने के कारण ग्रामीणों को इन स्वास्थ्य केंद्रों का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सामान्य उपचार के लिए भी दूर-दराज के अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
चौहान ने कहा कि आराकोट-बंगाण की स्वास्थ्य व्यवस्था का सवाल महज कुछ रिक्त पदों को भरने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के हजारों लोगों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा गंभीर जनहित का विषय है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों में मरीजों को दूर स्थित अस्पतालों तक ले जाना हर परिवार के लिए आसान नहीं है। ऐसे में स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर और पर्याप्त पैरामेडिकल स्टाफ की स्थायी उपलब्धता बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि “आराकोट-बंगाण की जनता को अब आश्वासन नहीं, बल्कि स्थायी स्वास्थ्य व्यवस्था चाहिए।” उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से मामले को प्राथमिकता के आधार पर लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक पदों पर तत्काल नियुक्ति और तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग की है।

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