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प्रतापनगर का पनियाला गांव माना जाता है पैन्यूली ब्राह्मणों का मूल उद्गम स्थल

Pahado Ki Goonj

प्रतापनगर का पनियाला गांव माना जाता है पैन्यूली ब्राह्मणों का मूल उद्गम स्थल
प्रतापनगर (टिहरी गढ़वाल)। मदन पैन्यूली। ।
टिहरी जनपद के प्रतापनगर विकासखंड स्थित पनियाला गांव पैन्यूली ब्राह्मणों का मूल उद्गम स्थल माना जाता है। लोक मान्यताओं और पारंपरिक वंशावली के अनुसार इसी गांव के नाम पर ‘पैन्यूली’ उपनाम प्रचलित हुआ। समय के साथ इस वंश के लोग गढ़वाल के विभिन्न क्षेत्रों के साथ-साथ उत्तराखंड और देश के अन्य राज्यों में भी जाकर बस गए, लेकिन आज भी पनियाला गांव को अपनी मूल जन्मभूमि और ऐतिहासिक पहचान का केंद्र मानते हैं।
पारंपरिक वंशावली के अनुसार पैन्यूली ब्राह्मण भारद्वाज गोत्र तथा लेखवार कबीले से संबंधित हैं। इस वंश के आदि पूर्वज पंडित रुद्रपाल पैन्यूली और पंडित हरीश्वर पैन्यूली माने जाते हैं, जिनसे आगे वंश परंपरा का विस्तार हुआ। गुरु बटुक भैरवनाथ, ग्राम देवता नागराजा भगवान तथा कुलदेवी मां राजराजेश्वरी इस वंश के आराध्य हैं। आज भी विभिन्न धार्मिक अवसरों और पारिवारिक संस्कारों में इनकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।


गढ़वाल के इतिहास में पैन्यूली वंश का उल्लेख विद्वानों और राजपुरोहितों के रूप में मिलता है। कहा जाता है कि 52 गढ़ों के काल में इस वंश के विद्वानों ने वेद, ज्योतिष, कर्मकांड और धार्मिक अनुष्ठानों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पंवार राजवंश के संस्थापक राजा अजय पाल के राज्याभिषेक में भी पैन्यूली विद्वानों की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जाती है। इसके बाद उन्हें राजपुरोहित के रूप में सम्मान प्राप्त हुआ और लंबे समय तक वे राजपरिवार के धार्मिक कार्यों से जुड़े रहे।
इतिहास और लोक परंपराओं के अनुसार इस वंश के विद्वानों ने केदारनाथ सहित अनेक प्रमुख मंदिरों में धार्मिक व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने, राजपरिवार को धार्मिक परामर्श देने तथा राजकुमारों को वेद, धर्म और नीतिशास्त्र की शिक्षा देने का कार्य किया। गोरखा शासन के कठिन दौर में भी धार्मिक परंपराओं, मंदिरों और प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण में इस वंश का उल्लेखनीय योगदान माना जाता है।
टिहरी गढ़वाल रियासत के समय भी पैन्यूली वंश के लोग धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े रहे। स्वतंत्रता से पहले और टिहरी रियासत के भारत में विलय तक इस वंश के प्रतिनिधि राजपरिवार के धार्मिक दायित्वों का निर्वहन करते रहे। शिक्षा, धर्म और सामाजिक जीवन में भी इस वंश का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
पैन्यूली वंश ने देश को कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्व दिए हैं। इनमें महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, टिहरी प्रजामंडल के प्रथम अध्यक्ष, प्रख्यात पत्रकार और वर्ष 1971 में टिहरी गढ़वाल संसदीय क्षेत्र से सांसद रहे परिपूर्णानंद पैन्यूली का नाम विशेष सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन, लोकतांत्रिक अधिकारों और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आज पनियाला गांव केवल एक गांव नहीं, बल्कि पैन्यूली समाज की ऐतिहासिक, विरासत का प्रतीक माना जाता है। देश-विदेश में बसे पैन्यूली परिवार अपनी जड़ों को इसी गांव से जोड़ते हैं। गांव आज भी अपनी प्राचीन परंपराओं, धार्मिक आस्थाओं और सांस्कृतिक मूल्यों को संजोए हुए है।यही कारण है कि पनियाला गांव गढ़वाल के इतिहास में एक विशेष स्थान रखता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी गौरवशाली विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है।

सआभार । आशीष पैन्यूली

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