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साइन्टिफिक-एनालिसिस,भारत-सरकार की कामचोरी, अमानवीय और देशद्रोही काम से फुटा महंगाई बम ; डॉ शैलेंद्र बीराणी

Pahado Ki Goonj

साइन्टिफिक-एनालिसिस

भारत-सरकार की कामचोरी, अमानवीय और देशद्रोही काम से फुटा महंगाई बम

  1. यहां बात हो रही हैं भारत-सरकार की जिसके प्रमुख राष्ट्रपति हैं | इसमें कार्यपालिका के रूप में प्रधानमंत्री और केन्द्रीय मंत्रिमंडल भी शामिल हैं | वर्तमान में पेट्रोल, डीजल, गैस, दूध व कई वस्तुओं के भाव अप्रत्याशित रूप से बढने से देश की जनता पर महंगाई बम फुटा हैं | आने वाले समय में देश की पुरी अर्थव्यवस्था के मंदी में फंसकर बैठ जाने का खतरा मंडरा रहा हैं |

महंगाई का जवाब अमेरिका-ईरान के युद्ध को बताया जा रहा हैं परन्तु यह असली सत्य नहीं हैं | भारत में पेट्रोलियम पदार्थों के भावों को कन्ट्रोल करने की पुरी योजना दुनियाभर के दस्तावेजों व संयुक्त राष्ट्र संघ, द ग्लोबल फन्ड, द क्लिंटन फाउंडेशन, इंटरनेशनल रेड क्रॉस सोसायटी, बिल एंड मैलिना गेट्स फाउंडेशन, विश्व स्वास्थ्य संगठन व अमेरिका के राष्ट्रपति की पावती रसीद के साथ भारत के राष्ट्रपति को 2011 में ही 3.5 किलोग्राम की दस पेज की इंडेक्स सूची के साथ भेज दिया था |

तीन राज्यों, कई मंत्रालयों, विभागों से होकर अन्तिम फैसला लेने के लिए राष्ट्रपति कानूनी रूप से अधिकृत हो गये | प्रधानमंत्री कार्यालय के पत्रों व कई केन्द्रीय मंत्रालयों के पत्रों की एक सामुहिक रिपोर्ट बनकर राष्ट्रपति को भी भेजी जा चुकी हैं | भारत के सरकारी राजस्व में प्रतिवर्ष करोड़ों-अरबों रूपये की आमदनी जमा होनी थी | इसके साथ देश में हजारों नई कम्पनीयां खुलनी थी और जो है उन्हें दस गुना बड़ा बनना था | इसके उत्पादन की मांग की विकास दर दस प्रतिशत प्रति दिन थी | उत्पादन तो एडवांस में देश व पुरी दुनिया की कम्पनियां लेने को तैयार थी | इसके प्रमाण के तौर पर चालीस से ज्यादा अन्तर्राष्ट्रीय कम्पनियों के आधिकारिक पत्र व ईमेल लगाये थे | भारत में नये करोड़ों रोजगार मीलने थे व दुनियाभर में हर एक मिनट पर दो निर्दोष लोगों की जिन्दगी बचनी थी |

इन सभी के साथ सबसे महत्वपूर्ण बात पेट्रोल, डीजल व गैस के दाम देश में स्थिर रहते | इतना सबकुछ होने व प्रमाणों व दस्तावेजों के साथ अग्रीम जानकारी देने के बाद भी कोरोना वायरस आ गया और लाखों लोगों को निगल गया | इसमें सबसे बड़ी बात भारत के एक राष्ट्रपति जिन्होंने भी इस फाईल को दबाकर रखी उन्हें भी कोरोना निगल गया |

महंगाई बम फूटे, देश की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो जाये, सामाजिक जीवन ध्वस्त हो जाये, लोगों की जिन्दगीया खत्म हो जाये तब भी भारत सरकार की कागजी प्रक्रिया और राष्ट्रपति का अन्तिम फैसला नहीं आयेगा | भारत यह सब करने में असमर्थ हैं तो लिखित में दे ताकि अन्तर्राष्ट्रीय प्रोटोकॉल का पालन करके दुसरे देशों से मदद ली जा सके | असली जिम्मेदार सबकुछ होते हुए भी एक फैसला नहीं ले रहे हैं जबकि राजशाही जीवन जनता के मुंह के निवाले पर वसूले टैक्स से जी रहे हैं | जब इन लोगों को भी फर्क नहीं पड़ता तो हमारा क्या, हमें अकेले को ही थोड़ा जीना है | ऐसा लगता हैं अरबों-खरबों के प्रस्ताव व पेटेंट के साथ सबकुछ भारत राष्ट्र को देना आज के नये भारत में सबसे बड़ा राष्ट्रद्रोह हैं |

शैलेन्द्र कुमार बिराणी
युवा वैज्ञानिक

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