*गढ़वाली एवं कुमाऊनी भाषा के लिए ‘BHASHINI राज्यम् कार्यशाला’ का होगा आयोजन*
– 17 दिसंबर 2025 को होटल रमाडा, देहरादून में होगा आयोजन
– गढ़वाली एवं कुमाऊनी में एआई-सक्षम, वॉइस-फर्स्ट डिजिटल गवर्नेंस पर विशेष फोकस
– भारत सरकार की प्रमुख पहल BHASHINI का लक्ष्य एआई-संचालित उपकरणों के माध्यम से भाषा बाधाओं को समाप्त करना है
डिजिटल इंडिया भाषिणी BHASHINI डिवीजन (डीआईबीडी), इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, उत्तराखंड राज्य आईटी मिशन, उत्तराखंड सरकार के सहयोग से ‘BHASHINI राज्यम् कार्यशाला: उत्तराखंड अध्याय’ का आयोजन 17 दिसंबर 2025 को होटल रमाडा, देहरादून में हो रहा है। कार्यशाला का उद्देश्य एआई-संचालित भाषा नवाचार के माध्यम से वॉइस-फर्स्ट डिजिटल गवर्नेंस को सशक्त बनाना तथा गढ़वाली एवं कुमाऊनी की डिजिटल परिवर्तन यात्रा को गति देना है।
राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन के अंतर्गत भारत सरकार की प्रमुख पहल BHASHINI का लक्ष्य एआई-संचालित उपकरणों के माध्यम से भाषा बाधाओं को समाप्त करना है, ताकि सभी भारतीय भाषाओं में डिजिटल प्लेटफॉर्म और सेवाएं सुलभ हो सकें। उत्तराखंड अध्याय में नागरिकों को गढ़वाली और कुमाऊनी में वॉइस एवं टेक्स्ट इंटरफेस के माध्यम से शासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सेवाओं से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जायेगा, जिससे राज्य की भाषाई पहचान को और सुदृढ़ किया जा सके।
समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और गहन भाषाई विरासत के लिए प्रसिद्ध उत्तराखंड में गढ़वाली और कुमाऊनी भाषाएं सामाजिक, सांस्कृतिक और क्षेत्रीय पहचान से गहराई से जुड़ी हुई हैं। कार्यशाला के दौरान डिजिटल इंडिया BHASHINI डिवीजन ने गढ़वाली एवं कुमाऊनी के लिए विशेष रूप से तैयार मजबूत एआई भाषा मॉडल, स्पीच रिकग्निशन सिस्टम और बहुभाषी अनुप्रयोगों के विकास हेतु किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी जाएगी। इन पहलों को सामुदायिक सहभागिता, नागरिक-नेतृत्व वाले भाषा योगदान और शैक्षणिक एवं संस्थागत साझेदारियों के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा, जिससे समावेशी और सतत डिजिटल भाषा विकास सुनिश्चित हो सके।
कार्यशाला में उत्तराखंड सरकार, डिजिटल इंडिया BHASHINI डिवीजन, शैक्षणिक संस्थानों और सिविल सोसायटी के वरिष्ठ नीति-निर्माता, तकनीकी विशेषज्ञ एवं अन्य हितधारक शामिल होंगे। कार्यक्रम के दौरान वॉइस-फर्स्ट बहुभाषी गवर्नेंस के लिए BHASHINI के टूल्स का प्रदर्शन किया जाएगा, जिनमें मित्र कार्यक्रम (MITRA) भी शामिल है—जो राज्यों की सक्रिय भागीदारी से एआई समाधानों के सह-विकास का मॉडल प्रस्तुत करता है।
इस अवसर पर भाषिणी समुदाय की भी शुरुआत की जाएगी, जिसका उद्देश्य राज्य भाषा मिशनों की स्थापना कर राज्यों को डिजिटल भाषा अपनाने में नेतृत्व प्रदान करना होगा। साथ ही, भाषादान नागरिक-योगदान मंच का लाइव प्रदर्शन किया गया, जिसके माध्यम से नागरिकों को गढ़वाली और कुमाऊनी में वॉइस एवं टेक्स्ट डेटा दान करने के लिए प्रेरित किया जाएगा, ताकि एआई मॉडल और अधिक सशक्त बन सकें तथा स्पीच-आधारित सेवाओं की सटीकता बढ़े सके।
प्रतिभागियों ने विभिन्न विभागों के लिए भाषा प्रौद्योगिकी को शासन प्रक्रियाओं में एकीकृत करने के रोडमैप पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। कार्यशाला में सरकारी अधिकारियों और तकनीकी टीमों के क्षमता निर्माण पर विशेष जोर दिया जाएगा, जिससे BHASHINI के टूल्स का प्रभावी उपयोग कर डिजिटल सेवाओं को अधिक समावेशी, सुलभ और भाषाई रूप से प्रासंगिक बनाया जा सके।
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सांसद टिहरी गढ़वाल ने लोकसभा में उठाया कौलागढ़–बाजावाला मार्ग चौड़ीकरण का मुद्दा
देहरादून।
सांसद टिहरी गढ़वाल श्रीमती माला राज्य लक्ष्मी शाह ने आज लोकसभा में शून्यकाल के दौरान कैंट विधानसभा से विधायक श्रीमती सविता कपूर जी के अनुरोध पर देहरादून जनपद के कौलागढ़ क्षेत्र में वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) से संबंधित अड़चनों के कारण आम जनता को हो रही गंभीर समस्याओं का मुद्दा उठाया।
सांसद ने नियम 377 के तहत सदन को अवगत कराया कि देहरादून–कौलागढ़–बाजावाला मार्ग, जो आगे राष्ट्रीय राजमार्ग (पोंटा साहिब मार्ग) से जुड़ता है, अत्यंत संकरा होने के कारण आए दिन यातायात जाम एवं सड़क दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है। इस मार्ग का उपयोग कौलागढ़, बाजावाला सहित आसपास के अनेक गांवों के निवासी देहरादून शहर से आवागमन हेतु करते हैं। लंबे समय से क्षेत्रवासी इस मार्ग के चौड़ीकरण की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि समस्या के समाधान हेतु प्रांतीय खंड, लोक निर्माण विभाग देहरादून द्वारा एक प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसके अंतर्गत कौलागढ़ चरखी गेट से होते हुए वन अनुसंधान संस्थान की सुरक्षा दीवार के भीतर से लगभग 1500 मीटर लंबाई में 30 फीट चौड़ा मार्ग बाजावाला तक विकसित किया जाना प्रस्तावित है। किंतु वन अनुसंधान संस्थान स्तर पर अनुमति एवं विभागीय अड़चनों के कारण अब तक स्थलीय निरीक्षण एवं आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त नहीं हो पाई हैं।
सांसद श्रीमती माला राज्य लक्ष्मी शाह ने केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव जी से जनहित को ध्यान में रखते हुए उक्त मार्ग के शीघ्र चौड़ीकरण हेतु आवश्यक अनुमति प्रदान करने का आग्रह किया, ताकि स्थानीय नागरिकों को सुरक्षित, सुगम एवं निर्बाध आवागमन की सुविधा मिल सके।
कैंट विधायक श्रीमती सविता कपूर जी एवं क्षेत्रवासियों ने इस महत्वपूर्ण जनसमस्या को लोकसभा में प्रभावी रूप से उठाने हेतु माननीय सांसद का आभार व्यक्त किया तथा आशा जताई कि शीघ्र ही इस विषय का सकारात्मक समाधान निकलेगा।
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*मा0 वन मंत्री सुबोध उनियाल ने की वन विभाग के कार्यों की समीक्षा*
*मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने को ग्रामीणों से संवाद बढ़ाने के दिए निर्देश*
*वनाग्नि से निपटने को अभी से हो तैयारी, विभागीय कार्य समय पर हो पूरे-मंत्री*
*कैंपा-जायका योजनाओं में धीमी प्रगति पर वन मंत्री नाराज, अधिकारियों को लगाई फटकार,*
*शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए वन विभाग ने तैयार की एसओपी*
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मा0 वन मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने राजपुर रोड स्थित राज्य वन मुख्यालय में वन विभाग की समीक्षा बैठक ली। बैठक के दौरान उन्होंने मानव-वन्यजीव संघर्ष को प्रभावी ढंग से कम करने के लिए ठोस और समयबद्ध कार्य योजना पर अमल करने, शीतकालीन पर्यटन के लिए एसओपी तैयार करने, विभागीय कार्याे को गुणवत्ता के साथ समय पर पूरा करने और वनाग्नि की रोकथाम के लिए अभी से तैयारियां करने के निर्देश दिए।
मा0 वन मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जाए और स्थानीय लोगों के साथ समन्वय बढ़ाकर मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को न्यूनतम किया जाए। साथ ही उन्होंने वन सुरक्षा, संरक्षण और विकास से जुड़े कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। वन मंत्री ने कहा कि शासन स्तर पर जो भी निर्णय लिए जा रहे है उनको प्रभावी ढंग से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
वन मंत्री ने कहा कि वन्यजीवों की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में कैमरों के माध्यम से निरंतर निगरानी रखें, साथ ही स्थानीय स्तर पर जन प्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों के साथ अपना संवाद मजबूत रखें। पम्पलेट, बैनर, होर्डिग्स एवं सोशल मीडिया के माध्यमों से वन्य जीवों से बचने के लिए आम नागरिकों को जागरूक करें। आबादी क्षेत्रों से जानवरों को दूर भगाने के लिए आधुनिक उपकरणों सहित सोलर लाइट, पिंजरा इत्यादि उपकरणों का सदुपयोग सुनिश्चित किया जाए। कहीं पर भी मानव-वन्यजीव संघर्ष होने पर एसडीओ एवं डीएफओ तत्काल मौके पर जाए।
मा0 मंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश में हक-हकूक समय सारिणी एवं स्वीकृति प्रक्रिया की शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करें। कीड़ा जड़ी संरक्षण, विपणन एवं वानिकी उत्पादन बढ़ाने हेतु ठोस कार्ययोजना के तहत काम करने को कहा। उन्होंने नर्सरी वृक्षारोपण योजना के एक्शन प्लान को विभागीय वेबसाइट पर अपलोड करने तथा ईको टूरिज्म गतिविधियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। साथ ही पेड़ों की प्रजाति को छूट देने तथा पेड़ काटने की अनुमति की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने हेतु ऑनलाइन सुविधा को शीघ्र बहाल करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए।
मा0 मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री घोषणाओं के तहत स्वीकृत विभागीय कार्यों को जल्द से जल्द पूरा कराया जाए। जायका एवं कैंपा योजनाओं के तहत वन विभाग द्वारा संचालित विभिन्न कार्यों की समीक्षा करते हुए मंत्री ने कहा कि विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए सरकार द्वारा पर्याप्त बजट उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्वीकृत बजट का समयबद्ध और प्रभावी ढंग से सदुपयोग सुनिश्चित किया जाए, ताकि योजनाओं का लाभ निर्धारित समय सीमा में धरातल पर दिखाई दे। उन्होंने कहा कि वित्तीय संसाधनों के सही उपयोग से ही वनों के संरक्षण, संवर्धन और विकास से जुड़े लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मा0 मंत्री ने शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए वन विभाग द्वारा तैयार की गई एसओपी को तुरंत लामू करते हुए शीतकालीन पर्यटन गतिविधियों को बढ़ाने के भी निर्देश दिए। बैठक में प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, वन विभाग के एचओएफएफ रंजन मित्र, पीसीसीएफ बीपी गुप्ता, पीसीसीएफ कपील लाल, पीसीसीएफ सुबुधी, वन विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों सहित वर्चुअल माध्यम से सभी जनपदों से डीएफओ मौजूद थे।
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महानिदेशक, कृषि एवं उद्यान, उत्तराखण्ड शासन श्रीमती वंन्दना द्वारा रेशम निदेशालय प्रेमनगर देहरादून का निरीक्षण किया गया। प्रभारी निदेशक रेशम श्री प्रदीप कुमार द्वारा महानिदेशक महोदय का स्वागत करते हुये उन्हें रेशम निदेशालय के अन्तर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई गई।
महानिदेशक महोदया द्वारा निदेशालय परिसर में स्थापित शहतूती रेशम कीट बीजागार का निरीक्षण कर बीजागार की कार्यप्रणाली की जानकारी ली गई। उनके द्वारा उत्तराखण्ड राज्य के शहतूती रेशम कीट बीज उत्पादन में स्वावलम्बी बनने पर प्रशंसा करते हुये बीजागार में कीट बीज उत्पादन को बढ़ाते हुऐ अन्य राज्यों की भी मांग की पूर्ति करने हेतु कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिये गये। महानिदेशक महोदया द्वारा सेलाकुई स्थित रेशम कोया बाजार व यू०सी० आर० एफ० के माध्यम से संचालित ग्रोथ सेन्टर का निरीक्षण किया गया।
श्री मातबर कन्डारी, उप महाप्रबन्धक यू०सी० आर० एफ० द्वारा ग्रोथ सेन्टर में किये जा रहे रेशम धागा उत्पादन कार्य एवं वस्त्र उत्पादन कार्य की जानकारी उपलब्ध कराई गई। महानिदेशक महोदया द्वारा उपभोक्ताओं की वर्तमान मांग के अनुरूप विविधतापूर्ण उच्चगुणवत्ता के रेशम वस्त्रों के निर्माण किये जाने के निर्देश दिये गये। तत्पश्चात महानिदेशक द्वारा बीजू कोया उत्पादन क्षेत्र आदूवाला एवं व्यवसायिक रेशम उत्पादन क्षेत्र सभावाला में स्थापित चाकी रेशम फार्मो का निरीक्षण किया गया व मौके पर उपस्थित रेशम कृषको से वार्ता करते हुये उनसे और ज्यादा शहतूत वृक्षारोपण करते हुए अधिक मात्रा में रेशम कोया उत्पादन किये जाने को प्रोत्साहित किया साथ ही विभागीय अधिकारियों से वर्ष में अतिरिक्त रेशम कीटपालन फसलों को अपनाने की संभावनाओं पर कार्य करने के निर्देश दिये गये। साथ ही कृषकों की समस्याओं व मांगो की जानकारी लेते हुये उनके ससमय निराकरण हेतु उपस्थित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिये। अन्त में महानिदेशक द्वारा प्रेमनगर स्थित यू०सी० आर० एफ० कार्यालय व रिटेल शोरूम का भ्रमण कर कार्यों के जानकारी लेते हुये शोरूम पर विक्रय हेतु उपलब्ध विभिन्न रेशमी वस्त्रों एवं ककून काफ्ट उत्पादों का अवलोकन किया गया।
महानिदेशक द्वारा रेशम विभाग के अधिकारियों को अग्रिम कार्ययोजना के संबंध में कतिपय निर्देश दिए गए
1. रेशम कीट बीज उत्पादन में विभाग की क्षमता वृद्धि कर, उत्तराखंड राज्य बीज/कीट का सप्लायर बने और विभागीय व्यावसायिक सेवा के खर्च को बीज विक्रय से हुई आय से वहन कर आत्मनिर्भरता प्राप्त करने हेतु प्लान तैयार करें ।
2. रेशम विभाग से जुड़े 10 हजार किसानों का आय के आधार पर वर्गीकरण कर कम आय वाले कृषक समूह को अधिक आय वर्ग में लाने की कार्ययोजना तैयार करें।
3. वर्तमान में रेशम कृषकों द्वारा ली वर्ष में दो फसल से आगे बढ़कर वर्ष में चार फसल तक लाने के लिए प्रशिक्षण और इनपुट सप्लाई पर ध्यान दें ।
4. पोस्ट कोकून कार्यों जैसे रेशम उत्पादन/वस्त्र निर्माण में वेस्टेज को कम कर आधुनिक मार्केट आधारित उत्पादों पर फोकस करें और कस्टमर बेस बढ़ाने पर ध्यान दें ।
5. प्राथमिक प्रोसेसिंग/स्पिनिंग से महिला समूहों को जोड़ा जाए ।
6. शहतूत के अधिक पत्ती उत्पादन वाली प्रजातियों पर ध्यान दें, इसके लिए रिसर्च संस्थानों से समन्वय करें।
7. किसानों को कोकून का बेहतर दाम मिल सके इसके लिए गुणवत्तायुक्त कोकून उत्पादन के लिए किसानों का मार्गदर्शन करें।
महानिदेशक महोदया के भ्रमण के दौरान सहायक निदेशक रेशम (मुख्यालय) श्री विनोद तिवारी, सेवानिवृत वैज्ञानिक केन्द्रीय रेशम बोर्ड श्री वी०पी० गुप्ता व अन्य उपस्थित रहे।
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एक और एजेंसी आई डीएम की क्यूआरटी के निशाने पर; यूपीसीएल पर 02 माह का लगा प्रतिबन्ध; कार्य अनुमति निरस्त

प्रदत्त अनुमति में निर्धारित शर्तों का उल्लंघन दंडनीय अवश्य होगाः डीएम
Time & Cost overruns की जिम्मेदारी विभाग और कार्यदायी फर्म कीः डीएम
सड़कों पर मलबे का ढेर; बेरिकेटिंग व साईन बोर्ड नदारद; फिर दिखा डीएम का एक्शन
रात की थी अनुमति; दिन में ही खोद डाली सड़क; जनमानस की सुरक्षा पर संकट; विधिक कार्यवाही तय
देहरादून, दिनांक 16 दिसंबर 2025 (सूवि) जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देशानुसार आज उप जिलाधिकारी श्रीमती कुमकुम जोशी के नेतृत्व में क्यूआरटी (त्वरित प्रतिक्रिया टीम) द्वारा देहरादून शहर के विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे रोड कटिंग कार्यों का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। जिलाधिकारी ने अनियंत्रित रोड़ कटिंग, मानकों के उल्लंघन पर एजेसिंयो को चेताया है जनमानस की सुरक्षा से खिलवाड़ कर जिला प्रशासन को विधिक एक्शन कोे मजबूर न किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदत्त अनुमति में निर्धारित शर्तो का उल्लंघन दंडनीय अवश्य होगा। अनुमति बाधित होने पर समय और लागत वृद्धि की जिम्मेदारी सम्बन्धित विभाग और कार्यदायी संस्था की होगी।
निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि उत्तराखण्ड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) द्वारा सहारनपुर रोड पर सब्जी मंडी चौक से आईएसबीटी तक तथा जीएमएस रोड पर बल्लूपुर चौक से सब्जी मंडी चौक तक एडीबी द्वारा वित्तपोषित योजना Uttarakhand Climate Resilient Power System Development Project (UCRPSDP) के अंतर्गत मुख्य मार्गों की उपरगामी विद्युत लाइनों को भूमिगत किए जाने का कार्य कराया जा रहा है। यह कार्य अधीक्षण अभियंता (एडीबी) (लॉट-2), यूपीसीएल, ऊर्जा भवन, कांवली रोड द्वारा कराया जा रहा है, जिसमें परियोजना समन्वय समिति से प्राप्त अनुमति की शर्तों का उल्लंघन किया जा रहा है।
निरीक्षण के दौरान क्यूआरटी टीम ने पाया कि संबंधित विभाग/ठेकेदार द्वारा रोड कटिंग का कार्य परियोजना समन्वय समिति द्वारा निर्धारित प्रतिबंधों एवं शर्तों के अधीन नहीं किया जा रहा है। निर्धारित प्रावधानों के विपरीत रोड कटिंग का कार्य रात्रि के स्थान पर दिन के समय भी किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त रिस्पना, आराघर चौक, कारगीदृमोथरोवाला रोड, दून यूनिवर्सिटी रोड, शिमला बाईपास रोड सहित अन्य क्षेत्रों में भी गंभीर अनियमितताएँ पाई गईं। निरीक्षण में यह सामने आया कि कार्यस्थलों पर आवश्यक बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टिंग टेप एवं साइनेंज की व्यवस्था नहीं की गई है। जगह-जगह खुदाई से निकला मलबा सड़कों पर पड़ा हुआ है, जिससे मार्ग संकीर्ण हो गए हैं तथा यातायात की दृष्टि से स्थिति अत्यंत असुरक्षित बनी हुई है। यह सभी स्थितियाँ सुरक्षा मानकों के घोर उल्लंघन को दर्शाती हैं।
अनुमति की शर्तों के गंभीर उल्लंघन को दृष्टिगत रखते हुए जिलाधिकारी द्वारा पूर्व में जारी रोड कटिंग अनुमति संख्या 6691/643 को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। साथ ही, यूपीसीएल को आगामी 02 माह की अवधि तक किसी भी प्रकार की रोड कटिंग अनुमति से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को निर्देशित किया है कि भविष्य में किसी भी प्रकार के कार्य से पूर्व निर्धारित अनुमति शर्तों, सुरक्षा मानकों एवं यातायात व्यवस्था का पूर्णतः पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि आमजन को किसी भी प्रकार की असुविधा अथवा दुर्घटना की स्थिति उत्पन्न न हो।
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IFAD मुख्यालय, रोम (इटली) में ऐतिहासिक ‘India Day Event’ का आयोजन
अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास निधि (IFAD) के मुख्यालय, रोम (इटली) में दिनांक 9 दिसम्बर 2025 को IFAD के अंतरराष्ट्रीय बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स द्वारा पहली बार “India Day Event” का भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन किया गया। कार्यक्रम में IFAD के अध्यक्ष सहित विश्व के लगभग 60 देशों के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। भारत सरकार की ओर से वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग (Department of Economic Affairs – DEA) के अपर सचिव, ग्रामीण विकास विभाग के उप सचिव तथा इटली स्थित भारतीय दूतावास के प्रतिनिधि डॉ. बाला जी, IAS की गरिमामयी उपस्थिति रही। यह IFAD के इतिहास में पहली बार आयोजित किसी एक देश को समर्पित विशेष कार्यक्रम था।
कार्यक्रम के दौरान भारत एवं IFAD के मध्य 50 वर्षों की सुदृढ़ एवं दीर्घकालिक साझेदारी को रेखांकित किया गया।
इस अवसर पर REAP की प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुश्री झरना कमठान द्वारा उत्तराखंड राज्य में IFAD के सहयोग से वर्ष 2013 से 2021 तक संचालित एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना (ILSP) एवं वर्ष 2022 से संचालित REAP परियोजना के माध्यम से पर्वतीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका विकास के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों और स्थानीय उत्पादों की प्रोसेसिंग पैकेजिंग और मार्केटिंग हेतु विकसित किए गए ब्रांडो Hilans और House of Himalayas (HoH)की जानकारी प्रस्तुत की गई।
ILSP के अंतर्गत विकसित उद्यम विकास मॉडल की सफलता को दृष्टिगत रखते हुए IFAD द्वारा इसे राज्य भर में Replicate करने के उद्देश्य से ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना (Rural Enterprise Acceleration Project – REAP) को स्वीकृति प्रदान की गई। वर्तमान में REAP परियोजना के अंतर्गत राज्य के लगभग 5.60 लाख परिवारों से जुड़े 60 हजार स्वयं सहायता समूह (SHGs), 10 हजार ग्राम संगठन (VOs) तथा 601 क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLFs) के साथ उद्यम स्थापना, कौशल विकास एवं सतत आजीविका संवर्धन के कार्य प्रभावी रूप से किए जा रहे हैं।
सुश्री कमठान द्वारा उपरोक्त वैश्विक मंच पर अवगत कराया गया कि ग्रामीण उत्पादों की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग एवं मार्केटिंग को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ILSP के अंतर्गत Hilans ब्रांड की स्थापना की गई, जिसके माध्यम से स्थानीय एवं पारंपरिक उत्पादों को संगठित बाजार से जोड़ा गया। इसी अनुभव के आधार पर REAP परियोजना के अंतर्गत राज्य सरकार की कंपनी House of Himalayas (HoH) Ltd. का गठन किया गया, जो उत्तराखंड के जैविक, पारंपरिक एवं विशिष्ट हिमालयी उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांड पहचान दिलाने का कार्य कर रही है।
परियोजना के अंतर्गत किए जा रहे नवाचारों, महिला सशक्तिकरण, उद्यम आधारित आजीविका मॉडल तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़े सकारात्मक प्रभावों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। प्रस्तुतीकरण में यह स्पष्ट किया गया कि किस प्रकार REAP परियोजना ग्रामीण महिलाओं, युवाओं एवं कृषकों को स्वरोजगार, उद्यमिता एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त बना रही है।
कार्यक्रम के अवसर पर REAP के उप निदेशक श्री महेंद्र सिंह यादव द्वारा House of Himalayas (HoH) Ltd. के अंतर्गत विकसित विभिन्न सामुदायिक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित किया गया। इन उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग एवं बाजार संभावनाओं की IFAD के अध्यक्ष एवं बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के सदस्यों द्वारा सराहना की गई। यह उपलब्धि उत्तराखंड राज्य के लिए गौरव का विषय है, जिससे राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादित वस्तुओं को वैश्विक पहचान प्राप्त हुई है।
यह आयोजन भारत की ग्रामीण विकास उपलब्धियों को वैश्विक मंच पर प्रभावी रूप से प्रस्तुत करने के साथ-साथ भविष्य में भारत–IFAD सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हुआ है।

