राष्ट्रपति  राम नाथ कोविंद तथा प्रथम महिला श्रीमती सविता कोविंद का उत्तरकाण्ड प्रवास की रिपोर्ट

Pahado Ki Goonj

 

jeetmani painuli: राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद के उत्तराखंड आगमन पर शनिवार को राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने जौलीग्रांट एयरपोर्ट देहरादून में उनका स्वागत किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री

पुष्कर सिंह धामी, मेयर देहरादून  सुनील उनियाल गामा, जीओसी मेजर जनरल संजीव खत्री, कमिश्नर गढ़वाल  सुशील कुमार, डीआइजी गढ़वाल  के एस नगन्याल भी उपस्थित थे।
jeetmani painuli: राष्ट्रपति  राम नाथ कोविंद तथा फर्स्ट लेडी श्रीमती सविता कोविंद के उत्तराखंड आगमन पर शनिवार को राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) तथा राज्य की प्रथम महिला श्रीमती गुरमीत कौर ने राजभवन देहरादून में उनका स्वागत किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी, राज्यपाल के सचिव डॉ रंजीत कुमार सिन्हा, जिलाधिकारी देहरादून डा आर राजेश कुमार तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  जन्मेजय खंडूरी भी उपस्थित थे।      
jeetmani painuli: राष्ट्रपति  राम नाथ कोविंद तथा प्रथम महिला श्रीमती सविता कोविंद ने रविवार को उत्तराखंड के राजभवन में बोनसाई गार्डन के पुनरुद्धार तथा विस्तारीकरण कार्यों का लोकार्पण  किया। उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) तथा राज्य की प्रथम महिला श्रीमती गुरमीत कौर भी इस अवसर पर उपस्थित थे। राष्ट्रपति  राम नाथ कोविंद ने राजभवन उत्तराखंड मे  इस पहल की अत्यंत प्रशंसा की एवं राष्ट्रपति भवन में भी इस प्रकार की शुरुआत के किए जाने तथा इसमें राजभवन उत्तराखंड का सहयोग लिए जाने की बात कही। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) की पहल पर राजभवन परिसर में स्थित इस बोनसाई गार्डन को 1500 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में विस्तारित किया गया है। गार्डन में लगभग 220 प्रकार के बोनसाई पौधे संरक्षित किए गए हैं, जिनमें फ्लावरिंग बोनसाई, फ्रूट बोनसाई, क्लाइंबरस तथा विभिन्न लुप्तप्राय प्रजाति के बोनसाई पौधे रखें गए हैं। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) की परिकल्पना के अनुसार बोनसाई गार्डन में बांस के द्वार (बैंबू गेट) का भी निर्माण किया गया है। राज्यपाल ने इस बोनसाई गार्डन में 500 अत्यंत विशिष्ट प्रजाति के अतिरिक्त पौधे संरक्षित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि बोनसाई से संबंधित तकनीकी जानकारी आम जनमानस को भी मिलनी चाहिए। उल्लेखनीय है कि राजभवन के इस बोनसाई गार्डन में 50 वर्ष से अधिक आयु तक के बोनसाई पेड़-पौधों को संरक्षित किया गया है। इनकी देखभाल वैज्ञानिक विधि द्वारा की जाती है। सभी पौधों पर उनके वैज्ञानिक नाम तथा अनुमानित आयु लिखी गई है। इनमें से अधिकांश बोनसाई पौधे राजभवन निर्माण के समय अपने मूल स्थान से ट्रांसप्लांट कर गार्डन में संरक्षित किए गए हैं। प्रतिवर्ष राजभवन में आयोजित पुष्प प्रदर्शनी में आने वाले लोगों के लिए यह बोनसाई गार्डन मुख्य आकर्षण रहता है।
इस अवसर पर राजभवन के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे


jeetmani painuli: राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने रविवार को हरिद्वार स्थित दिव्य प्रेम सेवा मिशन के रजत जयंती समारोह को सम्बोधित किया। उन्होंने दिव्य प्रेम सेवा मिशन को संकल्प  और सेवा की भावना के साथ मानव कल्याण हेतु संवेदनशीलता से कार्य करने वाली संस्था बताते हुए कहा कि आज से 25 वर्ष पूर्व इस संस्था को एक छोटे बीज के रूप में बोने में उनकी भी भूमिका रही है, जो आज बड़ा वृक्ष बन गई है।


राष्ट्रपति ने कहा कि उत्तराखण्ड की पवित्र धरती आध्यात्म् के साथ ही शांति एवं ज्ञान की भूमि रही हैं। गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बदरीनाथ के साथ हरिद्वार व हर द्वार भगवान विष्णु एवं शिव की प्राप्ति के द्वार हैं। पतित पावनी जीवन दायिनी गंगा भी इसकी साक्षी है। उन्होंने कहा कि जब वे पहली बार राज्य सभा के संसद बने तब भी तथा राष्ट्रपति बनने के बाद भी उनकी पहली यात्रा उत्तराखण्ड की रही। उन्होंने कहा कि पवित्र गंगा के तट पर स्थापित यह मिशन मानव सेवा के लिए समर्पित हैं। संस्था द्वारा कुष्ठ रोगियों की समर्पित भाव से की जा रही सेवा सराहनीय है।
राष्ट्रपति ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद संविधान द्वारा जाति एवं धर्म पर आधारित अस्पृश्यता का तो अंत कर दिया गया लेकिन अभी भी कुष्ठ के प्रति अस्पृश्यता का भाव समाप्त नहीं हो पाया है। कुष्ठ रोग को कलंक के रूप में देखे जाने की अवेज्ञानिकता के अवशेष आज भी देखे जाते हैं। कुष्ठ रोगियों के प्रति व्याप्त आशंकाओं को दूर करने के प्रयास किये जाने चाहिए। उन्हें भी बीमारी के दौरान तथा उसके बाद स्वास्थ्य होने पर अन्य रोगों से मुक्त होने वाले रोगियों की तरह ही अपनाया जाना चाहिए। इस सम्बन्ध में समाज मे फैली आंशकाओं को दूर करने के प्रयासों की भी उन्होंने जरूरत बतायी।
राष्ट्रपति ने कहा कि महात्मा गांधी ने भी कुष्ठ रोगियों की सेवा कर समाज को इसके लिये प्रेरित किया था। महात्मा गांधी का जन्मदिन राष्ट्रीय कुष्ठ दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि कुष्ठ रोग असाधारण नही है। इसे असाधारण समझने वाले ही असली रोगी है। राष्ट्रपति ने कहा कि कुष्ठ रोगियों के बीच कार्य करने वालों का आत्मविश्वास कितना ऊंचा होता है, इस संस्था से जुड़े लोग इसका उदाहरण है।
इससे पूर्व राष्ट्रपति  रामनाथ कोविन्द ने दिव्य प्रेम सेवा मिशन, सेवाकुंज परिसर पहुंचने पर शिव अवतरण, शिव ज्ञान से जीव सेवा यज्ञ, सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग पूजन, एक वर्षीय अनुष्ठान कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इसके पश्चात उन्होंने दिव्य प्रेम सेवा मिशन, सेवाकुंज परिसर में बिल्ब के पौधे का रोपण भी किया।
इस अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल  गुरमीत सिंह (से नि)ने कहा कि आज का यह कार्यक्रम ‘सेवा की साधना’ को समर्पित है,  सेवा की साधना की प्रेरणा हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों की देन है। भारतीय शास्त्रों की देन है, जिनमें परोपकार को सबसे बड़ा पुण्य कहकर महिमामण्डित किया गया है।  पवित्र गुरुवाणी और सिक्ख जीवन दर्शन में सेवा और परिश्रम को सबसे अधिक महत्व दिया गया है। संस्था की इन स्वर्णिम उपलब्धियों’ की पृष्ठभूमि में पिछले पच्चीस वर्षों की तपस्या, सेवा और निष्ठा छिपी हुई है।
उन्होंने कहा कि दिव्य प्रेम सेवा मिशन ने, ‘नर सेवा, नारायण सेवा’ के मंत्र को समझा और एक कठिन कार्य को अपने हाथों में लिया है। कुष्ठ रोगियों के बच्चों के भविष्य को उज्जव बनाने का संकल्प लिया, उनकी शिक्षा और दीक्षा का संकल्प लिया, कला और कौशल विकास का संकल्प लिया यह सब असंभव को संभव बनाने जैसा है। ये कार्य एक सच्चा देशभक्त, राष्ट्रभक्त ही कर सकता है।
स्वामी विवेकानन्द जी ने दुनियां के सामने विश्व गुरू भारत की संकल्पना दी थी, उस संकल्पना की पूर्ति भारतीय ज्ञान के विस्तार और सेवा की सच्ची भावना से ही हो सकती है। भारत के युवा जितने ज्ञानी और सेवा भावी होंगे हमारा देश उसी गति से विश्वगुरू के अपने पद को प्राप्त कर सकेगा।
राज्यपाल ने कहा कि सेवाभावी भारत के निर्माण के लिए युवाओं द्वारा गरीबों, वंचितो, निर्बलों की सेवा का संकल्प लेना होगा। स्वामी विवेकानन्द के ‘नर सेवा, नारायण सेवा’ के मंत्र को सच्चे अर्थाे में अपनाना होगा। ज्ञान की उपासना और सेवा की पराकाष्ठा ही हमें विश्व गुरू के पथ पर अगे ले जा सकती है। यह समारोह इस दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरणा देने वाला है।
इस अवसर पर अपने सम्बोधन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि दिव्य प्रेम सेवा मिशन से जुड़े लोगों ने वर्ष 1997 से आजतक तिल तिल जलाकर इस मिशन को आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि जिसके प्रेम में दिव्यता होती है उनके लिये दूसरों की सेवा करना ही धर्म बन जाता है। कुष्ठ रोगियों के हित के लिये यह संस्था निरन्तर कार्य कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वे सैनिक के पुत्र है और सैनिक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता हैं। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति सहित अन्य अतिथियों का उत्तराखण्ड की जनता की ओर से स्वागत करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड की जनता ने राज्य के अंदर एक नया इतिहास बनाने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि मिशन के संकल्प में कोई विकल्प नहीं है। अतः इस विकल्प रहित संकल्प के सेवा के मिशन को पूर्ण करने में उनका सहयोग रहेगा।
दिव्य प्रेम सेवा मिशन के डॉ आशीष गौतम ने संस्था के कार्यों की जानकारी दी।
इस अवसर पर देश की प्रथम महिला श्रीमती सविता कोविन्द, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, डा0 धन सिंह रावत, सांसद रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, विधायक आदेश चौहान, प्रदीप बत्रा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।

राष्ट्रपति  राम नाथ कोविंद की उत्तराखंड से नई दिल्ली  वापसी पर रविवार को राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने जौली ग्रांट एयरपोर्ट देहरादून में उनको विदाई दी।

Next Post

भूलोक के स्वर्ग उत्तराखण्ड को मिली एक और उपलब्धि

भूलोक के स्वर्ग उत्तराखण्ड को मिली एक और उपलब्धि ज्योतिर्मठ, चमोली, पहाडोंकीगूँज, आदि शंकराचार्य भगवत्पाद द्वारा स्थापित चतुराम्नाय पीठों में से अन्यतम श्री ज्योतिर्मठ बदरिकाश्रम हिमालय के उत्तराखण्ड क्षेत्र में स्थापित होने से जहाॅ एक ओर यह प्रदेश आध्यात्मिक उन्नति की ऊंचाई को प्राप्त कर चुका है वहीं पूज्यपाद ज्योतिष्पीठाधीश्वर […]

You May Like