आज से भदूरा पट्टी सहित गढ़वाल के अनेकों गाँव में धान की कटाई,मड़ाई का कार्य शुरू हो जाता है

Pahado Ki Goonj

टिहरी,आज से हमारे भदूरा पट्टी सहित गढ़वाल के अनेकों गाँव में धान की कटाई,मड़ाई का कार्य शुरू हो जाता है,आज 7 गते असूज से किसानों को उनकी मेहनत का फल उनकी फसल पककर तयारी के रूप में मिलती है ,चैत्र माह से ही धान की पौध बुवाई,उनकी सिंचाई से शुरू होने वाली मेहनत ,ज्येष्ठ,आषाढ़ में धान की रोपाई(रोपणी) में और अधिक कठिन मेहनत करनी होती है,उसके बाद निराई,खाद आदि से फसल की देखभाल के साथ लगातार किसान अपनी कड़ी मेहनत करते हैं, जिनमें पहाड़ी क्षेत्रों में महिलाओं का अधिक योगदान रहता है।उसी फसल को काटने का और उसकी मड़ाई से लेकर भंडारण का समय आज से शुरू हो गया है,7 गते आश्विन से किसानों में प्रसन्नता का भाव रहता है क्योंकि उनकी धान की फसल अब उन्हें धान, और पराली पशुओं के चारे के रूप में मिलने वाली है,इस वर्ष हालाँकि कल से मौसम खराबी के कारण किसान मायूस हैं क्योंकि उनकी लहलहाती फसलों और इंद्रदेव लगातार पानी बरसा रहे हैं, मैं इन्द्रदेव जी से प्रार्थना करूँगा कि हे इन्द्रदेव किसानों की तैयार हो चुकी फसल को आप बर्बाद न कीजिये बल्कि मौसम को साफ़ कर किसानों को अपनी खेती का काम करने की शक्ति दे। आज के दिन किसान भाई बहन बड़े उल्लास,हर्ष और ख़ुशी के साथ नए नए वस्त्र पहनकर खेतों में धान की कटाई के लिए जाते हैं, सबसे पहले आराध्य देवी देवताओं के नाम से 5,7 या 11 पौधों को एक मुट्ठी बनाकर उन्हें अलग रखा जाता है,जिसे स्थानीय भाषा में कौंली कहा जाता है।उसके बाद कटाई शुरू जिसको कि खेत के ही मध्य भाग में एक गुम्बदनुमा,ढेर लगाकर जिसे स्थानीय भाषा में कोंडका कहा जाता है,में रखा जाता है जिसे 2 से लेकर 4,5 दिनों में जाकर मड़ाई की जाती है और उससे धान को अलग और पराली को अलग अलग किया जाता है। किसानों के मुख्य पर्व धान की कटाई के अवसर पर मैं आज 7 गते असूज को अपने सभी किसान भाई बहनों को बधाई देता हूँ,क्योंकि यदि आप न हो तो खाने पीने की वस्तुओं का आभाव हो जायेगा,आप लोगों के कठिन परिश्रम से ही हम सबको भोजन मिल पाता है,क्योंकि कोई कितनी भी बड़ी नौकरी कर ले,लेकिन खाना उसे अन्न ही होता है,जिसको कि आप अपनी मेहनत से पैदा करते हैं, लहलहाते खेत आपके पुरुषार्थ की निशानी है,आप धन्य है जो अपने पुरखों की जमीन को उर्वरा बनाकर रखे हो वरना कई भागों में तो भारी पलायन के कारण पुरखों के घर और जमीन बंझर हो चुके हैं, जो जरूर अपनी इस दुर्दशा के लिए उनकी तरफ पीठ करने वालों को श्राप देते होंगे,पुनः सभी किसानों को धान की कटाई,मड़ाई की पोर्टल परिवार की ऒर बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनायें।
चन्द्रशेखर पैन्यूली।

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