मतदान में समलित कर्मचारी मत का प्रयोग कर सकते हैं और चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी आचार सहिंता का उल्लंघन न करें -यस.ए.मुरुगेशन

Pahado Ki Goonj

देहरादून, 30 अक्टूबर 2018, मुख्य विकास अधिकरी/प्रभारी अधिकारी कार्मिक जी.एस रावत ने अवगत कराया है कि जिन कार्मिकों की ड्यूटी स्थानीय नागर निकाय निर्वाचन-2018 में लगी है और वे भी अगर किसी नागर निकाय निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता भी हैं तो ऐसे कार्मिक डाक मतपत्र के द्वारा अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकते हैं। इसके लिए उन्हे प्रारूप-9 में सम्बन्धित क्षेत्र के रिटर्निंग अधिकारी के यहां आवेदन करना होगा। ऐसे कार्मिकों की सुविधा के लिए प्रथम औ द्धितीय प्रशिक्षण के दौरान डाक मतपत्र काउन्टर प्रशिक्षण स्थल पर बनाये जायेंगे, जहां वे अपना भरा हुआ प्रारूप-09 वाल आवेदन जमा कर सकते हैं। भरा हुआ आवेदन पत्र यथासम्भव 02 से 04 नवम्बर तक प्रशिक्षण स्थल ओ.एन.जी.सी आॅडिटोरियम पर पंहुचा दिया जाय ताकि उन्हे समय से डाक मतपत्रों में सम्मिलित किया जा सके। ऐसे कार्मिक प्रारूप-9 सम्बन्धित क्षेत्र के रिटर्निंग अधिकारी के समन्वय से अथवा वेबसाईट dehradun.gov.in/election_department_panchasthani के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं। आवेदन प्रारूप का नमूना निम्न प्रकार से है।

देहरादून, 30 अक्टूबर 2018, जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी एस.ए मुरूगेशन ने स्थानीय नागर निकाय सामान्य निर्वाचन-2018 के तहत सभी राजनैतिक दलों के प्रत्याशियों एवं उम्मीदवारों के मुख्य अभिकर्ताओं के साथ आचार संहिता सम्बन्धी बैठक रिटर्निंग अधिकारियों की अध्यक्षता में सम्पन्न की गयी। इस अवसर पर रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा प्रत्याशियों एवं उनके अभिकर्ताओं को अवगत कराया कि आदर्श आचार संहिता के प्राविधन लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 तथा भारतीय दण्ड सहिता, 1980 में निहित है। इस संहिता में वर्णित प्राविधानों का उल्लंघन करने वालों को अधिनियम के अन्तर्गत दण्ड दिया जा सकता है। इसके अलावा उल्लंघन पाये जाने पर सम्बन्धित क्षेत्र का निर्वाचन, राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा रद्द भी किया जा सकता है।
नागर निकाय स्थानीय सामान्य निर्वाचन-2018 नियुक्त प्रभारी अधिकारी आदर्श आचार संहिता चन्द्र सिंह धर्मशक्तू ने समस्त रिटर्निंग अधिकारियों, उप जिलाधिकारियों, समस्त नगर आयुक्त/अधिशासी अधिकारी नागर निकाय को अपने-अपने क्षेत्रों में आदर्श आचार संहित का प्रभावी रूप से अनुपालन सुनिश्चित कराये जाने हेतु सोशल मीडिया यथा फेसबुक, ट्वीटर व यूट्यूब इत्यादि के माध्यम से ऐसे संदेश, जिससे किसी धार्मिक, जातीय भावनाओं एवं सामाजिक सौहार्द्ध पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हो, को प्रतिबन्धित करते हुए आदर्श आचार संहिता का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है।

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