
पिथौरागढ़। विभिन्न मंदिरों में लगातार हो रही चोरी की घटनाओं का सफल खुलासा करते हुए पुलिस ने एक शातिर चोर को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोेपी के कब्जे से चोरी की रकम के साथ-साथ 213.7 ग्राम अवैध चरस भी बरामद हुई है।
जानकारी के अनुसार क्षेत्र के कई मंदिरों में चोरी की घटनाओं की सूचना मिलने पर कोतवाली पिथौरागढ़ में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस द्वारा त्वरित जांच शुरू कर दी गयी। जांच केे दौरान पुलिस ने एक सूचना के आधार पर सन्तेष धामी उर्फ सन्नी धामी (21 वर्ष) पुत्र निवासी ग्राम गलाती, धारचूला, जनपद पिथौरागढ़ को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने बीती 31 मई की रात्रि ग्राम पौण स्थित चण्डिका मंदिर का ताला तोड़कर दानपात्र से नकदी चोरी की थी। आरोपी के कब्जे से चोरी की 1900 रूपये नगद राशि भी बरामद की गई। गरफ्तारी के दौरान की गई तलाशी में आरोपी के पास से 213.7 ग्राम अवैध चरस (पन्नी सहित) भी बरामद हुई, जिसके संबंध में अभियुक्त के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत अलग से अभियोग पंजीकृत किया गया है। जांच में यह भी प्रकाश में आया है कि आरोपी की संलिप्तता भदेलवाड़ा मंदिर, पुनेड़ी मंदिर एवं लिन्ठ्यूड़ा मंदिर में हुई चोरी की घटनाओं में भी रही है।
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अपनी बेटी का सौदा करने वाली मां सहित चार गिरफ्तार

देहरादून। नाबालिग को डेट लाख में बेचने वाली मां ने रकम न मिलने पर अपहरण की कहानी को जन्म दिया। पुलिस ने चार लोगो को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
मिली जानकारी के अनुसार श्रीमती नीलम देवी निवासी नागल हटनाला, सहस्त्रधारा रोड, देहरादून के द्वारा अपनी नाबालिक पुत्री का अपहरण होने के सम्बन्ध में एक शिकायती प्रार्थना पत्र थाना राजपुर में दिया गया। प्रार्थना पत्र के आधार पर थाना राजपुर पर तत्काल मुकदमा दर्ज किया गया। प्रकरण की संवेदनशीलता के दृष्टिगत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून द्वारा नाबालिग की सकुशल बरामदगी तथा आरोपियों की गिरफ्तारी हेतु थाना राजपुर पर पुलिस टीम गठित की गई। गठित टीम द्वारा मोबाइल सर्विलांस, सीसीटीवी कैमरों के अवलोकन के साथकृसाथ मैनुवल पुलिसिंग के माध्यम से अपहृत नााबालिग के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त की गई तो उक्त अपहृत नाबालिग के मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश में होने की जानकारी पुलिस टीम को प्राप्त हुई, जिस पर तत्काल एक टीम को मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश रवाना किया गया। जहां पुलिस टीम द्वारा गोपनीय रूप से जानकारियां प्राप्त करते हुए नाबालिग युवती के अपहरण में शामिल 02 आरोपियों मनीष पुत्र राजकुमार व लवी कुमार पुत्र बिल्लू को गिरफ्तार करते हुए उनके कब्जे से नाबालिग युवती को बरामद किया गया। आरोपियों से सख्ती से पूछताछ करने पर लवी कुमार द्वारा पिंकी मलिक नाम की एक महिला के माध्यम से उक्त नाबालिग को उसकी माता नीलम देवी से डेढ लाख रूपये में खरीदना बताया गया, जिसे उसने 02 लाख में मनीष को बेचा था, जिसने विवाह के लिए लवी कुमार से उक्त युवती को खरीदा था। आरोपियों से पूछताछ के आधार पर प्रकाश में आए अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हेतु पुलिस द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुए घटना में शामिल पिंकी मलिक को मुजफ्फरनगर तथा नीलम देवी को आईटी पार्क सहस्त्रधारा रोड से गिरफ्तार किया गया। जांच में दौरान प्रकाश में आये तथ्यों के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया। पूछताछ में नीलम देवी द्वारा बताया गया कि पिंकी मलिक से उसकी मुलाकात कुछ समय पूर्व देहरादून में एक समारोह के दौरान हुई थी तथा आपसी बातचीत के दौरान पिंकी मलिक द्वारा उसे एक युवती की आवश्यकता होने तथा उसके एवज में अच्छा पैसा देने की पेशकश की गई थी, जिस पर अभियुक्ता द्वारा उसे अपनी आर्थिक स्थिति खराब होने की बात बताते हुए अपनी नाबालिग पुत्री उम्र 15 वर्ष को उसे देने तथा उसके एवज में डेढ लाख रूपये की मांग की गई थी। सौदा तय होने पर पिंकी मलिक द्वारा उक्त युवती को अपनी पहचान के एक व्यक्ति लवि कुमार निवासी मुजफ्फरनगर को तथा लवि कुमार द्वारा उसे आगे मनीष नाम के एक व्यक्ति को 02 लाख रूपये में बेच दिया तथा प्राप्त रकम में से 80 हजार रूपये नीलम देवी को देते हुए शेष पैसा कुछ समय बाद देने की बात कही गई। तय समय के बाद भी सौदे की पूरी रकम न मिलने व नाबालिग को बेचने के अपराध में पकडे जाने के डर से नीलम देवी द्वारा अपनी नाबालिग पुत्री के अपहरण की झूठी कहानी गढते हुए पुलिस में एक झूठी रिर्पोट दी गई। परन्तु पुलिस द्वारा सम्पूर्ण प्रकरण की गहनता से जांच कर घटना से जुडी हर कडी को जोडते हुए नाबालिग की खरीदकृफरोख्त के प्रकरण का खुलासा कर उसके मंसूबों पर पानी फेर दिया। प्रकरण में पुलिस द्वारा घटना में शामिल सभी आरोपियों से गहनता से पूछताछ की जा रही है। साथ ही उनके पूर्व में भी इस प्रकार के प्रकरणों से जुडे होने सहित अन्य सभी सम्भावित पहलुओं के संबंध मे विरूतृत जानकारी की जा रही है।
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वन्यजीव के हमले से विवाहिता की मौत
अल्मोड़ा। सोमवार सुबह सल्ट विकासखंड में डभरा सौराल ग्रामसभा के घोड़ीधार तोक में नवविवाहिता पर किसी वन्यजीव ने हमला कर दिया। जिससे उसकी मौत हो गई। महिला का शव जंगल से बरामद हुआ है। वहीं, इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत और आक्रोश का माहौल है। वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गई है। जबकि, हमलावर वन्यजीव की पहचान अभी तक स्पष्ट नहीं हो सकी है।
मिली जानकारी के मुताबिक, डभरा सौराल ग्रामसभा के घोड़ीधार तोक निवासी 19 वर्षीय शालिनी नेगी पत्नी रविंद्र नेगी सोमवार की सुबह घर के पास गोबर फेंकने गई थी। इसी दौरान किसी जंगली जानवर ने उस पर हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि जानवर उसे जंगल की ओर घसीट ले गया। काफी देर तक घर नहीं लौटने पर परिजनों और ग्रामीणों ने उनकी तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान जंगल से महिला का शव बरामद हुआ। जिसके गले में गहरे घाव के निशान मिले।
वहीं, शव को देखते ही परिजन बिलख उठे। इसके साथ ही घटना की सूचना पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही वन विभाग, पुलिस और प्रशासन को टीम मौके पर पहुंच गई। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल, ये स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमला बाघ ने किया है या गुलदार ने या फिर किसी अन्य वन्यजीव ने। वन विभाग का कहना है कि जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही इसकी आधिकारिक पुष्टि हो पाएगी।
बता दें कि कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से सटे सल्ट क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। जिसने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगल से सटे गांवों में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजामात नहीं हैं। जिससे लोगों को रोजमर्रा के कामों के लिए अपनी जान को जोखिम में डालना पड़ रहा है।
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बुटीक में लगी भीषण आग, लाखों का सामान जलकर राख

रूद्र्रपुर। सोमवार देर रात रुद्रपुर के व्यस्त भगत सिंह चैक स्थित एक बुटीक में भीषण आग लगने से लाखों रुपए का सामान जलकर राख हो गया। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई।
फायर स्टेशन रुद्रपुर के अनुसार, 2 अगस्त की रात 11.46 बजे पीएफटी के माध्यम से सूचना मिली कि भगत सिंह चैक स्थित एक दुकान में आग लगी है। सूचना मिलते ही अग्निशमन अधिकारी महेश चंद के निर्देश पर दो फायर टेंडरों को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। अग्निशमन अधिकारी स्वयं भी टीम के साथ मौके पर पहुंचे।
घटनास्थल पर पहुंचने पर पता चला कि भगत सिंह चैक स्थित एक बुटीक में आग लगी है। प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। आग तेजी से दुकान के बेसमेंट और अंदर रखे सामान तक फैल चुकी थी। फायर ब्रिगेड की टीम ने वाहन से पंपिंग कर दो हौज पाइपों की सहायता से आग बुझाने का अभियान शुरू किया। काफी देर तक लगातार पानी की बौछार करने के बाद आग पर पूरी तरह नियंत्रण पाया गया।
अग्निशमन अधिकारी महेश चंद ने बताया कि, सूचना मिलते ही विभाग की दो दमकल गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंच गई थी। आग बेसमेंट में लगी होने के कारण धुआं काफी अधिक था, जिससे राहत एवं बचाव कार्य में कठिनाई आई। इसके बावजूद फायर कर्मियों ने समय रहते आग को फैलने से रोक दिया, जिससे आसपास की अन्य दुकानों और इमारतों को सुरक्षित बचा लिया गया। उन्होंने बताया कि आग लगने के वास्तविक कारणों और कुल नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
दुकान स्वामी संदीप डोगरा ने बताया कि घटना के समय वह अपने परिवार के साथ दुकान के ऊपर स्थित मकान में सो रहे थे। देर रात नीचे से धुआं उठने की सूचना मिलने पर उन्होंने बाहर आकर देखा तो दुकान में आग लगी हुई थी, इसके बाद पड़ोसियों ने तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी। प्रथम दृष्टया आग शॉर्ट सर्किट से लगी प्रतीत हो रही है। दुकान में रखा कॉस्मेटिक, श्रृंगार सामग्री, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य सामान जल गया है।
दुकान स्वामी के अनुसार, आग से उन्हें भारी नुकसान हुआ है। क्षति का आकलन अभी किया जा रहा है।
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उत्तराखंड में स्थापित किए जाएंगे दो साहित्य ग्राम
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दून में मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त
देहरादून। प्रदेश की राजधानी देहरादून के पछवादून स्थित जौनसार क्षेत्र में बीती रात से हो रही लगातार मूसलधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। मूसलाधार बारिश के कारण लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत आने वाले प्रमुख मार्गों सहित कई ग्रामीण संपर्क मार्ग भारी भूस्खलन और मलबे की चपेट में आ गए हैं, जिससे आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है।
क्षेत्र के कई मार्गों के बंद होने से सबसे अधिक मार स्थानीय किसानों पर पड़ी है। मलबे के कारण कालसी-चकराता मुख्य मोटर मार्ग,हरिपुर ईच्छाड़ी मोटर मार्ग, खारसी संपर्क मार्ग, परियाड-सिमोग और कोठा बैंड-चंदोऊ-सैंज मोटर मार्ग बाधित हो गए हैं।
सड़कों के बंद होने से किसान अपनी नगदी फसलों (सब्जियों) को समय पर मंडियों तक नहीं पहुँचा पा रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
विभाग के अधिकारियों ने स्थिति की पुष्टि करते हुए बताया कि मुख्य मार्ग, कालसी-चकराता स्टेट हाईवे को प्राथमिविभागीय अधिकारियों का कहना है कि बारिश के बीच मलबे को हटाने का कार्य जारी है और जल्द ही सभी बंद मार्गों पर यातायात बहाल कर दिया जाएगा।कता के आधार पर यातायात के लिए सुचारू कर दिया गया है। अन्य अवरुद्ध ग्रामीण मार्गों को खोलने के लिए विभाग द्वारा जेसीबी मशीनें मौके पर भेज दी गई हैं।
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पिता पर अपनी पुत्री के साथ दुष्कर्म के प्रयास का आरोप,पुलिस कर रही जांच
रुद्रपुर। शहर से रिश्तों का शर्मसार करने का एक मामला सामने आया है। एक महिला ने अपने पति पर अपनी ही 10 वर्षीय पुत्री के साथ दुष्कर्म का प्रयास करने का गंभीर आरोप लगाया है। महिला का आरोप है कि घटना के समय आरोपी शराब के नशे में था। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच पूरी होने के बाद आरोपी के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
महिला की तहरीर मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर आरोपी के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम सहित अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस के अनुसार, पीड़ित महिला ने अपनी शिकायत में बताया कि रविवार देर रात करीब एक बजे वह अपने तीन वर्षीय पुत्र के साथ एक चारपाई पर सो रही थी, जबकि उसकी 10 वर्षीय पुत्री पास में दूसरी चारपाई पर सोई हुई थी। इसी दौरान उसका पति शराब के नशे में घर पहुंचा और पुत्री के पास जाकर लेट गया।
महिला ने बताया कि कुछ देर बाद उसकी पुत्री अचानक घबराकर चिल्लाने लगी। उसे लगा कि बच्ची शायद कोई बुरा सपना देखकर डर गई है। उसने बच्ची को शांत कराया और दोबारा सुलाने के बाद कमरे की लाइट बंद कर दी, लेकिन कुछ ही देर बाद बच्ची फिर से असहज होकर हरकत करने लगी। इस बार महिला को संदेह हुआ तो उसने तुरंत कमरे की लाइट जलाई।
महिला का आरोप है कि लाइट जलाते ही उसने देखा कि उसका पति अपनी ही पुत्री के साथ दुष्कर्म का प्रयास कर रहा था। यह देखकर वह स्तब्ध रह गई। उसने तत्काल बच्ची को आरोपी के चंगुल से छुड़ाया और पति का विरोध किया। आरोप है कि विरोध करने पर आरोपी ने महिला के साथ मारपीट की और धमकी दी कि यदि उसने इस घटना की जानकारी किसी को दी या पुलिस में शिकायत की तो वह उसे जान से मार देगा।
घटना के बाद महिला ने हिम्मत जुटाई और अपनी पुत्री के साथ पुलिस के पास पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। उसने आरोपी पति के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए लिखित तहरीर सौंपी। मामले की जांच कर रहीं एएसआई विनीता नेगी ने बताया कि महिला की शिकायत प्राप्त हो गई है। पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। बच्ची और परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। अन्य आवश्यक साक्ष्य भी जुटाए जा रहे हैं।
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मौसम के बदले पैटर्न ने डेंगू के आउटब्रेक के खतरे को बढ़ाया
देहरादून। मौसम के पैटर्न ने डेंगू के आउटब्रेक के खतरे को बढ़ा दिया है। इससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। विभाग ने जिलेभर के 40 सरकारी और निजी अस्पतालों में 1530 सामान्य और 132 आईसीयू बेड आरक्षित किए हैं। अब तक जिले में 50 लोगों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। जंतु वैज्ञानिकों की मानें तो रुक-रुककर बारिश होना डेंगू मच्छरों के लिए बेहद मुफीद है। इस तरह के नमी और हल्की गर्मी वाले मौसम में मादा मच्छर अपने अंडों के विकास के लिए बाहर निकलती हैं।
ऐसे में इस वर्ष आउटब्रेक का खतरा ज्यादा है। मई से अब तक डेंगू के 50 मामले सामने आ चुके हैं जबकि डेंगू के मामले आमतौर पर सिंतबर महीने से सामने आने शुरू होते हैं। एक महीने पहले ही डेंगू के बढ़ते मामले स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा रहे हैं। विभाग की ओर से एम्स ऋषिकेश, राजकीय दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय और जिला अस्पताल समेत जिले के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों डेंगू के लिए बेड आरक्षित कराए गए हैं।इसके अलावा क्लीनिकल स्तर पर तैयारी पूरी रखने के भी निर्देश दिए गए हैं। ब्लड बैंक में रक्त की पर्याप्त मात्रा रखने के लिए भी कहा गया है। तीन फीट की ऊंचाई तक ही उड़ सकता है मच्छर रू जंतु विशेषज्ञ सुनील कुमार के मुताबिक मादा मच्छर के काटने से ही डेंगू फैलता है। मच्छर के शरीर में अंडे होने की वजह से वे ज्यादा ऊंचाई तक नहीं उड़ पाते हैं। उनके उड़ने की ऊंचाई क्षमता मात्र तीन फीट ही होती है। इसके अलावा यह मच्छर बहुत कम दायरे में रहते हैं। जिले भर में 16 हॉटस्पॉट पर टीमें सक्रिय रू मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार शर्मा के मुताबिक बंजारावाला, पटले नगर, क्लमेंटाउन, मोथरोवाला, जाखन, मेहूंवाला, लक्खीबाग और माजरा समेत जिले के 16 स्थान डेंगू के हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित किए गए हैं।
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ट्रॉली में बैठने से पहले नदी में गिरा तीर्थयात्री, हालत गंभीर

रुद्रप्रयाग। सोमवार सुबह द्वितीय केदार भगवान मध्यमहेश्वर यात्रा मार्ग मोरखंडा नदी पर बने अस्थायी लकड़ी के पुल के बह जाने के कारण श्रद्धालुओं को ट्रॉली के माध्यम से नदी पार कराई जा रही थी। इसी दौरान ट्रॉली में बैठने से पहले एक तीर्थयात्री अचानक असंतुलित होकर नदी में गिर गया।
घटना के बाद मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों और अन्य श्रद्धालुओं ने तत्काल साहस का परिचय देते हुए नदी में गिरे यात्री का रेस्क्यू किया। गंभीर रूप से घायल तीर्थयात्री को सुरक्षित बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया। तीर्थयात्री की हालत चिंताजनक बताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि मोरखंडा नदी पर बना लकड़ी का अस्थायी पुल बह जाने के बाद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की आवाजाही ट्रॉली के माध्यम से कराई जा रही है। यात्रा मार्ग पर ट्रॉली में बैठने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र हैं, जिससे अव्यवस्था और जोखिम की स्थिति बनी हुई है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि घायल तीर्थयात्री के हेली रेस्क्यू के लिए नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को पत्र भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि घायल का पहले रासी तक रेस्क्यू किया जाएगा, जिसके बाद उसे हेलीकॉप्टर के माध्यम से उच्च चिकित्सा केंद्र (हायर सेंटर) भेजने की कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद यात्रा मार्ग की सुरक्षा व्यवस्थाओं और तीर्थयात्रियों के आवागमन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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सोशल मीडिया विवाद में सड़क पर मारपीट, कार तोड़ी

हरिद्वार। जिले की मंगलौर कोतवाली क्षेत्र से सोशल मीडिया पर अभद्र टिप्पणी के विरोध में दूसरे पक्ष के लोगों ने एक युवक के चार दोस्तों को बीच रास्ते में घेर कर न सिर्फ जमकर पिटाई की, बल्कि लाठी-डंडों से उनकी कार को भी चकनाचूर कर दिया। इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो के आधार पर पुलिस ने हुड़दंगियों की पहचान कर ली है। कई आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
यह मामला मंगलौर कोतवाली क्षेत्र के गुरुकुल नारसन गांव का है। बताया जा रहा है कि मंगलौर क्षेत्र के एक युवक द्वारा फेसबुक पर अभद्र टिप्पणी करने से दो पक्षों में काफी समय से तनाव बना हुआ था। बीते शनिवार को विवादित टिप्पणी करने वाले युवक के चार दोस्त कार में सवार होकर गुरुकुल नारसन से गुजर रहे थे। इसी दौरान विरोधी पक्ष के लोगों ने उनकी कार को चारों तरफ से घेर लिया।
इसके बाद आरोपियों ने कार पर ताबड़तोड़ लाठी और डंडे बरसा दिए। इसी के साथ कार में सवार युवकों को खिड़की से बाहर निकालकर बुरी तरह पीटा गया। इसके बाद किसी तरह से पीड़ितों ने वहां से भागकर अपनी जान बचाई। बात सिर्फ मारपीट तक सीमित नहीं रही। पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि सोशल मीडिया पर कुछ समय पहले एक और वीडियो पोस्ट किया गया था। वीडियो में एक युवक एक-47 जैसा हथियार लहराता दिख रहा है। अन्य वीडियो में अवैध तमंचे दिखाए गए थे। इसके अलावा क्षेत्र में चार दिन पहले हुई हवाई फायरिंग की घटना से भी इस विवाद के तार जोड़े जा रहे हैं। घटना के बाद इलाके में भारी तनाव को देखते हुए पुलिस को मुस्तैद किया गया है। मंगलौर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक भगवान सिंह मेहर के मुताबिक वायरल वीडियो के आधार पर हुड़दंगियों की पहचान कर ली गई है। कई आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। कानून हाथ में लेने वाले किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।
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आईजी एसटीएफ और डीआईजी गढ़वाल ने किया कांवड मेले की व्यवस्थाओं का निरीक्षण
हरिद्वार। कांवड़ यात्रा अपने चरम पर है। धर्मनगरी में कांवड़ियों के आने का सिलसिला लगातार जारी है। ऐसे में मेला क्षेत्र की सुरक्षा, यातायात और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर शासन और पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। सोमवार को उत्तराखंड के आईजी एसटीएफ नीलेश आनंद भरणे और डीआईजी गढ़वाल धीरेंद्र सिंह गुंज्याल ने हरिद्वार पहुंचकर कांवड़ मेले की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने मेला क्षेत्र के विभिन्न सेक्टरों का दौरा कर अधिकारियों से तैयारियों की जानकारी ली और कांवड़ियों से सीधे बातचीत कर व्यवस्थाओं पर उनका फीडबैक भी लिया।
आईजी एसटीएफ नीलेश आनंद भरणे ने एसएसपी हरिद्वार समेत अन्य पुलिस अधिकारियों के साथ कांवड़ पटरी और बैरागी कैंप क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था, यातायात संचालन, भीड़ प्रबंधन और संवेदनशील स्थलों पर तैनात पुलिस बल की तैयारियों का जायजा लिया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि कांवड़ियों की सुरक्षा और सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता रहे और किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए। आईजी एसटीएफ ने कई कांवड़ियों से बातचीत कर व्यवस्थाओं के संबंध में उनका फीडबैक भी लिया। हालांकि श्रद्धालुओं ने सभी व्यवस्थाएं बेहतर बताई। उनसे मिली प्रतिक्रियाओं के आधार पर अधिकारियों को आवश्यक सुधार के निर्देश दिए गए।
पुलिस प्रशासन का अनुमान है कि 4 अगस्त को पंचक समाप्त होने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में और अधिक तेजी आएगी। इसे देखते हुए पुलिस बल की तैनाती, यातायात प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है, ताकि कांवड़ यात्रा शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।
वहीं डाक कांवड़ को लेकर भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम है। सभी पार्किंग में वाहन खड़े होने की व्यवस्था की गई है। डाक कांवड़ शुरू होते ही कांवड़ पटरी पर भीड़ का दबाव कम होगा और हाईवे से सारा ट्रैफिक गुजरेगा. ऐसे में पुलिस प्रशासन की चुनौती बढ़ जाएगी।
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पिछले चार दिनों में 76 लाख कांवड़िए गंगाजल लेने पहंुचे हरिद्वार

हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में कांवड़ मेला चरम पर है। पिछले चार दिनों में 76 लाख से ज्यादा कांवड़िए गंगाजल लेकर हरिद्वार से रवाना हो चुके है। अधिकारियों द्वारा लगातार निरीक्षण कर कांवड़ मेले की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया जा रहा है। सावन के पहले सोमवार पर तो धर्मनगरी हरिद्वार में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। भगवान भोलेनाथ का ससुराल कहे जाने वाले कनखल स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रही।
इसी बीच हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने अपनी पत्नी प्रज्ञा दीक्षित के साथ मंदिर पहुंचे और विधि-विधान से भगवान शिव का जलाभिषेक किया। उन्होंने भगवान शिव से कांवड़ मेले के सकुशल संपन्न होने की कामना की। इतना ही नहीं उन्होंने मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को फल और पेयजल का वितरण किया। पूजा-अर्चना के बाद मंदिर परिसर और आसपास की सुरक्षा एवं व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया। सावन के पहले सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के मंदिरों में पहुंचने को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्थाओं की जानकारी ली गई। डीएम मयूर दीक्षित ने बताया कि कांवड़ मेले में बड़ी संख्या में कांवड़िए गंगाजल लेने हरिद्वार आ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह संख्या और भी ज्यादा बढ़ेगी। उसी को लेकर सभी तैयारियां की गई है। सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। डाक कांवड़ की शुरुआत के लिए अलग से ट्रैफिक प्लान बनाया गया है। खासकर बैरागी कैंप, पंतद्वीप और रोडिबेलवाला पार्किंग में वाहनों के पार्क को पार्क करने की व्यवस्था की गई है।
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अलकनंदा का जलस्तर चेतावनी स्तर पर पहंुचा

रुद्रप्रयाग। जनपद में सोमवार सुबह से घने बादल का मौसम बना है। जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र की जारी रिपोर्ट के अनुसार अलकनंदा नदी का जलस्तर चेतावनी स्तर पर पहुंच गया है। प्रशासन ने लोगों से नदी तटों से दूर रहने और अनावश्यक रूप से नदी के समीप न जाने की अपील की है।
रिपोर्ट के अनुसार पिछले 24 घंटों में रुद्रप्रयाग तहसील में 4.00 मिमी, ऊखीमठ में 12.50 मिमी तथा जखोली में 25.00 मिमी वर्षा दर्ज की गई। जिले का न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तथा अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।सुबह 7 बजे की रीडिंग के अनुसार अलकनंदा नदी का जलस्तर 626.00 मीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी स्तर (626.00 मीटर) के बराबर है। वहीं मंदाकिनी नदी का जलस्तर 624.70 मीटर, गंगानगर में 800.20 मीटर तथा गौरीकुंड में 1973.80 मीटर दर्ज किया गया, जो अपने-अपने चेतावनी स्तर से नीचे हैं। अलकनंदा के चेतावनी स्तर पर बहने के मद्देनजर नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायतों द्वारा लाउडस्पीकर के माध्यम से लगातार लोगों को नदी किनारों से दूर रहने और सतर्कता बरतने के लिए जागरूक किया जा रहा है। सड़कों की स्थिति की बात करें तो जिले में फिलहाल कोई राष्ट्रीय राजमार्ग बंद नहीं है। हालांकि एक राज्य मार्ग, चार लोक निर्माण विभाग मार्ग, छह पीएमजीएसवाई सड़कें तथा एक एनपीसीसी मार्ग अवरुद्ध है। जिला प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को आपदा से निपटने के लिए उच्चतम स्तर की तैयारियां बनाए रखने के निर्देश दिए हैं तथा किसी भी आपदा, दुर्घटना या मार्ग अवरुद्ध होने की सूचना तत्काल जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र को देने की अपील की है।
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सावन का पहला सोमवारः दक्षेश्वर महादेव मंदिर व अन्य शिवालयों में भक्तों की उमड़ी भीड़
हरिद्वार। सावन के पहले सोमवार को धर्मनगरी हरिद्वार में भगवान शिव के मंदिरों में पूजा अर्चना करने वाले शिवभक्तों की सुबह से ही लम्बी कतारें दिखाई दी। हरिद्वार के कनखल स्थित पौराणिक इतिहास वाले दक्षेश्वर महादेव मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। लोगों ने जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक कर अपनी मनोकामनाएं सिद्ध होने का आशीर्वाद मांगा।
सावन के पहले सोमवार को दक्षेश्वर महादेव मंदिर के अलावा हरिद्वार के तिल भांडेश्वर मंदिर, बिल्केश्वर मंदिर, नीलेश्वर महादेव मंदिर समेत सभी शिवालयों की भक्तों की भीड़ नजर आई। मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए हरिद्वार पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े प्रबंध किये गए।
वैसे तो सालभर दूर दूर से श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए दक्ष मंदिर आते रहते हैं, लेकिन फागुन और शारदीय कांवड़ मेले महीने में मंदिर की छठा अलग ही देखने को मिलती है। शिवभक्त गंगाजल, फल, फूल, दूध , दही, शहद , बेलपत्र, भांग और धतूरे से भगवान् शिव को प्रसन्न करते हैं। हरिद्वार के कनखल स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर एक पौराणिक मंदिर है, जिसे दक्ष मंदिर भी कहते है। कनखल को भगवान शिव की ससुराल कहा जाता है। माता सती के पिता राजा दक्ष प्रजापति का यहां साम्राज्य हुआ करता था। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि प्राचीन समय में राजा दक्ष प्रजापति की इक्षा के विरुद्ध उनकी पुत्री सती का विवाह भगवान शिव के साथ हुआ था। राजा दक्ष ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन लिया लेकिन इस यज्ञ में भगवान शिव को छोड़कर समस्त देवी देवताओ को निमंत्रण दिया गया। माता सती इस यज्ञ के आयोजन में पहुंची तो उन्होंने देखा कि वहां भगवान शिव को आमंत्रण नहीं किया गया है। जिसे देख माता सती क्रोधित हो उठी और यज्ञ कुंड में कूदकर अपने प्राणों की आहुति दे दी। माता सती की मृत्यु से क्रोधित होकर भगवन शिव ने अपने गण से वीरभद्र का सृजन किया और उसे राजा दक्ष के यज्ञ का विध्वंस करने के लिए भेजा। क्रोध में आकर वीरभद्र ने राजा दक्ष का सिर काट दिया। उधर माता सती के वियोग में भगवान् शिव ने सम्पूर्ण पृथ्वी पर तांडव मचा दिया और माता सती के मृत शरीर को लेकर इधर उधर भटकने लगे। तब देवी देवताओं के आह्वान पर भगवान विष्णु ने अपने चक्र से माता सती को मुक्ति दिलाई और भगवान शिव का क्रोध शांत हुआ। शांत होकर भगवान शिव ने बकरे का सिर लगाकर राजा दक्ष को पुनः जीवनदान दिया और शिवलिंग के रूप में यज्ञ कुंड में विराजमान हो गए। राजा दक्ष के आग्रह पर भगवान शिव ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि वो सावन के महीने में कनखल में रहकर सम्पूर्ण सृष्टि का संचालन करेंगे।
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बीएलओ की आत्महत्या मामले में एसआईआर के काम के दबाव में जान देने की बात आई सामने
बागेश्वर। रविवार को जिले में कांडा थाना क्षेत्र के बांसतोली गांव में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) का शव पेड़ से लटका मिला था। बीएलओ के पति का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के कार्य के दबाव से उनकी पत्नी ने ऐसा कदम उठाया है। उधर निर्वाचन रजिस्टार आफिसर का कहना है कि कमला देवी ने कभी काम के दबाव या तनाव की शिकायत नहीं की।
मिली जानकारी के अनुसार बांसतोली निवासी 47 वर्षीय कमला देवी पत्नी पूरन राम आंगनबाड़ी कार्यकर्ता होने के साथ बीएलओ की जिम्मेदारी भी निभा रही थी। रविवार सुबह वह रोज की तरह उठीं और पति के साथ चाय पी। इसके बाद करीब साढ़े पांच बजे उनके पति गाय का दूध दुहने के लिए गोशाला चले गए। कुछ देर बाद लौटने पर पत्नी घर में नहीं मिली। तलाश करने पर पत्नी का शव घर के पास खेत में एक पेड़ से लटका मिला। सूचना के बाद थानाध्यक्ष बलवंत कंबोज पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और शव को उतारकर आगे की कार्यवाही के लिए अपने कब्जे में लिया। इस मामले में निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी अनिल चन्याल ने कहा कि कमला देवी ने बीएलओ रहते हुए सराहनीय कार्य किया। काम को लेकर किसी तरह का दबाव होने की शिकायत कभी किसी मंच पर नहीं की। यदि किसी प्रकार का दबाव या कठिनाई थी, तो इसकी सूचना संबंधित उच्चाधिकारियों को दी जा सकती थी।
कमला देवी बूथ संख्या-164 (जूनियर हाईस्कूल गणेशपुर) की बीएलओ थीं। एसआईआर के पहले चरण में उन्होंने घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन कर विवरण पोर्टल पर अपलोड किया। दूसरे चरण में मतदाता सूची में पाई गई त्रुटियों के संबंध में नोटिस वितरित करने, मैपिंग और अन्य कार्यों की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई थी। परिजनों के अनुसार, 31 जुलाई तक उन्हें 88 नोटिस वितरित करने थे, लेकिन वह 56 नोटिस ही बांट सकी। इस कारण वह तनाव में थी। पति पूरन राम का कहना है कि
नोटिस देने के दौरान उनकी पत्नी को लोगों की नाराजगी का भी सामना करना पड़ रहा था। अधिकारियों के लगातार फोन आने से उन पर मानसिक दबाव बढ़ गया था। पांच और छह अगस्त को इंटर कॉलेज विजयपुर में प्रस्तावित एसआईआर शिविर के लिए सभी बीएलओ को अद्यतन अभिलेखों के साथ उपस्थित होना था. कमला देवी पिछले दो दिनों से 32 लंबित नोटिस को लेकर दबाव में थी। रात में भी वह इस मुद्दे पर लगातार बात कर ही थी। 2003 के एसआईआर से मैपिंग होने के कारण मतदाता सूची में कई विसंगतियां सामने आ रही है। इस काम को सपन्न कराने के लिए जिले में 405 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बीएलओ की भूमिका में है। जिले में कार्यरत बीएलओ का कहना है कि विसंगतियों को दूर किया जा रहा है, लेकिन विसंगतियों के लिए बीएलओ जिम्मेदार नहीं है। पूर्व में सारा काम हाथों से होता था, लेकिन अब सिस्टम से हो रहा है। सिस्टम की छोटी-छोटी कमी जब तक दूर नहीं हो जाती, तब तक उसे ओके नहीं करता है। नई व्यवस्था होने के कारण लोग परेशान रहते है। एसआईआर में मैपिंग में दिक्कत है, लेकिन मदद के लिए लगे शिक्षक उसे पूरा कर रहे है। बागेश्वर जिले के कांडा थाने के थानाध्यक्ष ने कहा कि बागेश्वर जिले में कांडा थाना क्षेत्र के बांसतोली गांव में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) का शव मिला है। प्रथम दृष्टया ये आत्महत्या का मामला लग रहा है। पोस्टमार्टम कि रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। अभी कोई तहरीर नहीं मिली है। मौत के कारणों की जांच की जा रही है।
: बीएलओ( आंगनवाड़ी वर्कर) की मौत/आत्महत्या का जिम्मेदार कौन!मोर्चा #मानदेय एक मजदूर की दिहाड़ी से भी कम ! #पूरा परिवार जुटा पड़ा है एसआईआर का काम निपटाने में | #सड़े- गले अंडे, नैपकिन पैड और घटिया पोषाहार के वितरण की भी है जिम्मेदारी ! #सरकार इन वर्कर्स / बीएलओं का दर्द क्यों नहीं समझ रही ! विकासनगर- जन संघर्ष अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि कल बागेश्वर के कांडा क्षेत्र के बांसतौली गांव की एक बीएलओ/ आंगनवाड़ी वर्कर ने सरकार द्वारा जबरन थोपे गए एसआईआर व अन्य काम के बोझ के चलते आत्महत्या कर ली गई, इससे समझा जा सकता है कि प्रदेश भर की बीएलओ कितने मानसिक दबाव में कार्य कर रही हैं ! आत्महत्या किन परिस्थितियों में की गई, इसको समझने एवं विचार करने की जरूरत है!कई बीएलओ न जाने कितने दबाव व किन परिस्थितियों में में काम कर रहे हैं, यह तो सिर्फ वही जान सकते हैं!एसआईआर जैसे जटिल काम की जिम्मेदारी बीएलओ अपने पूरे परिवार के सहयोग से निपटाने में लगा है यानी पूरा परिवार इस काम में झोंक रखा है | सरकार द्वारा एक साथ दोहरी जिम्मेदारी देकर इनके साथ बहुत बड़ी नाइंसाफी कर रखी है | सावल यह उठता है कि आखिर इतने कम मानदेय में ये आंगनवाड़ी वर्कर्स अपने परिवार का भरण- पोषण कैसे करें ! क्यों इनके मामले में सरकार उसके मंत्री व अधिकारी संवेदनशील नहीं है ! नेगी ने कहा कि भ्रष्ट एवं गैर जिम्मेदार मंत्री की वजह से इनको सड़े- गले अंडे,घटिया क्वालिटी के सेनेटरी नैपकिन पैड, घटिया पोषाहार वितरण करने की जिम्मेदारी भी है, जो जबरन लाभार्थियों को विचलित करनी पड़ती है | मंत्री की कमीशन खोरी वाले सेनेटरी पैड बिक नहीं रहे हैं और उसका पैसा भी इन वर्कर्स को अपनी जेब से भरना पड़ता है | सरकार को संवेदनशीलता के साथ इनके कार्य/ जिम्मेदारियां को देखते हुए इनकी सुख- सुविधाओं व मानदेय आदि मामलों का भी संज्ञान लेना चाहिए | पत्रकार वार्ता में- विजय राम शर्मा व हाजी असद मौजूद थे आगे पढ़ें
’भाजपा राष्ट्रीय सहकोषाध्यक्ष व सांसद राज्यसभा डा. नरेश बंसल ने अतारांकित प्रश्न के अंतर्गत सदन मे सरकार से आपातकालीन अलर्ट का प्रसार संबंधित प्रश्न किया।’
डा. नरेश बंसल ने जानना चाहा कि क्या संचार मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि-
क- स्वदेशी सेल ब्राॅडकास्ट सिस्टम (सीबीएस) के माध्यम से भू-स्थान आधारित आपातकालीन अलर्ट के प्रसार के लिए विकसित की गई रूपरेखा का ब्यौरा क्या है।
ख- क्या मंत्रालय ने सेल ब्राॅडकास्टिंग सिस्टम का देशव्यापी परीक्षण पूरा कर लिया है।
ग- यदि हां तो तत्संबंधी परिणाम क्या है और
घ- आपातकालीन अलर्ट के समय पर प्रसार के लिए दूरसंचार सेवा प्रदाताओं और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के बीच समन्वय में सुधार हेतु की गई पहलों का तत्संबंधी ब्यौरा क्या है?
इसके उत्तर मे संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री- डाॅ0 पेम्मासानी चंद्र शेखर ने बताया कि-ः
क से घ- सी डाॅट ने एक स्वदेशी सेल ब्राॅडकास्ट सिस्टम (सीबीएस) विकसित किया है जो प्राधिकृत सरकारी एजेंसियों को प्रभावित क्षेत्र में मौजूद सभी मोबाइल डिवाइस पर आपातकालीन अलर्ट प्रसारण की सुविधा प्रदान करता है। इसे मोबाइल फोन पर आपदा की चेतावनी और आपातकालीन अलर्ट भेजने के लिए सभी 36 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं द्वारा कार्यान्वित किया गया है।
इसे नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट आॅथोरिटी (एनडीएमए) के तहत नेशनल काॅमन अलर्टिंग प्रोटोकाॅल (सीएपी) आधारित डिजास्टर अलर्टिंग प्लेटफाॅर्म ‘‘सचेत’’ के साथ जोड़ा गया है जिससे एसडीएमए, सचेत प्लेटफाॅर्म का उपयोग करके सेल ब्राॅडकास्ट अलर्ट भेज सकते हैं और निगरानी भी कर सकते हैं।
देश भर में बड़े पैमाने पर परीक्षण के बाद इस सिस्टम का दिनांक 2 मई, 2026 को माननीय संचार मंत्री द्वारा पूरे देश में शुभारंभ किया गया।
एनडीएमए के मानक प्रचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार, सभी एसडीएमए के आॅनबोर्डिंग और प्लेटफाॅर्म का उपयोग करते हुए सेल ब्राॅडकास्ट प्रौद्योगिकी के माध्यम से अलर्ट भेजने की ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किए गए हैं।

