
कास्ट कला का अद्भुत नमूना: भटाड़ गांव का केदार बाबा मंदिर ।
मदन पैन्यूली
गढ़वाल में स्थित विश्वप्रसिद्ध केदारनाथ मंदिर की भांति जौनसार-बावर क्षेत्र के खत बौन्दूर के भटाड़ गांव में भी एक प्राचीन केदार बाबा मंदिर स्थित है। कास्ट (लकड़ी नक्काशी) कला का जो अद्भुत नमूना इस मंदिर में देखने को मिलता है, वैसा स्वरूप जौनसार-बावर के अन्य मंदिरों में विरल ही दिखाई देता है।
जौनसार-बावर के ऐतिहासिक स्थल लाखामंडल से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर बसे भटाड़ गांव में लगभग 40 परिवार निवास करते हैं। स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार इस मंदिर का इतिहास भी उतना ही प्राचीन माना जाता है जितना केदारनाथ धाम का।
मान्यता है कि जो श्रद्धालु केदारनाथ धाम की यात्रा पर जाते थे, वे पहले भटाड़ स्थित केदार बाबा मंदिर में दर्शन कर अपनी यात्रा प्रारंभ करते थे। ऐसी भी आस्था रही है कि जो लोग किसी कारणवश केदारनाथ नहीं जा पाते थे, वे यहां पूजा-अर्चना कर वही पुण्यफल प्राप्त करते थे। इस पावन स्थल पर पिंडदान और पितरों का श्राद्ध भी किया जाता है, जिसकी क्षेत्र में विशेष मान्यता है।
भटाड़ गांव भ्रमण के दौरान मंदिर के पुजारी राजेंद्र नौटियाल ने बताया कि लाखामंडल क्षेत्र का संबंध पांडवों से जोड़ा जाता है और इस मंदिर की स्थापना को लेकर भी भीम से संबंधित लोककथाएं प्रचलित हैं। मंदिर में प्रतिदिन प्रातःकाल प्राचीन शिवलिंग पर जलाभिषेक किया जाता है। पूर्वाह्न 11 से 12 बजे के बीच विधिवत पूजा संपन्न होती है तथा संध्या समय आरती होती है। यहां के पुजारियों के लिए तामसी भोजन वर्जित है।
मंदिर का जीर्णोद्धार उसके प्राचीन स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए किया गया है। पूर्णतः देवदार की लकड़ी से निर्मित यह मंदिर वास्तु और शिल्प की दृष्टि से अत्यंत आकर्षक है। देवदार के वृक्षों की गोद में बसा यह पावन धाम पीढ़ियों से लोकसंस्कृति, देवी-देवताओं में अटूट आस्था और ग्राम्य जीवन की सामूहिक भावना को सहेजे हुए है। यहां पहुंचकर श्रद्धालुओं को अपनी जड़ों से जुड़ने और आध्यात्मिक शांति का अद्भुत अनुभव होता है।



