
बड़कोट। बड़कोट क्षेत्र के गंगनानी में आयोजित पांच दिवसीय बसंतोत्सव (कुंड की जातर) के चौथे दिन जहां सांस्कृतिक रंगत चरम पर रही, वहीं मेले की दिशा और दशा को लेकर गंभीर चिंतन भी देखने को मिला।
कार्यक्रम में लघु सिंचाई समिति के उपाध्यक्ष एवं राज्य मंत्री जगत सिंह चौहान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के पारंपरिक मेले क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करते हैं।
“मेले की दिशा व दशा पर मीडिया की भूमिका” विषय पर गोष्ठी
चौथे दिन जिला पंचायत द्वारा मेला सभागार में एक महत्वपूर्ण पत्रकार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का विषय था— “मेले की दिशा व दशा पर मीडिया की भूमिका”। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए पत्रकारों ने इसमें भागीदारी कर अपने विचार रखे।
वक्ताओं ने कहा कि मेला स्थल पर मूलभूत सुविधाओं का विस्तार कर इसे अधिक भव्य और सुव्यवस्थित बनाया जाना चाहिए। साथ ही यह चिंता भी व्यक्त की गई कि आधुनिकता की अंधी दौड़ में पौराणिक मेलों और जातरों का मूल सांस्कृतिक स्वरूप प्रभावित हो रहा है।
आधुनिकता के साथ परंपरा का संतुलन जरूरी
गोष्ठी में यह सुझाव सामने आया कि मेलों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करना समय की आवश्यकता है, लेकिन उनकी पौराणिकता और पारंपरिक पहचान अक्षुण्ण रहनी चाहिए।
स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक व्यंजनों और वेश-भूषा को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया, ताकि देश-विदेश से आने वाले लोग यहां की लोक संस्कृति से परिचित हो सकें और स्थानीय उत्पादकों को बेहतर बाजार मिल सके।
पत्रकार संघ के रचनात्मक सुझाव
जिला पत्रकार संघ ट्रस्ट की ओर से मेले के स्वरूप को और अधिक प्रभावी बनाने हेतु कई रचनात्मक सुझाव प्रस्तुत किए गए। जिला पंचायत के प्रशासनिक अधिकारियों एवं सदस्यों ने इन सुझावों को प्राथमिकता के साथ बोर्ड बैठक में रखने का आश्वासन दिया।
चौथे दिन जहां एक ओर लोक संस्कृति की रंगीन प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र बनी रहीं, वहीं मीडिया और जनप्रतिनिधियों के बीच हुआ यह संवाद मेले के भविष्य की दिशा तय करने की दिशा में एक सार्थक पहल माना जा रहा है।
गोष्ठी में प्रमुख उपस्थिति
गोष्ठी में जिला पंचायत सदस्य विजय बंधानी, श्रीमती सरिता वर्धन, प्रशासनिक अधिकारी अरुण चौहान, वीरेंद्र वर्धन, सुरेश राणा सहित जिला पत्रकार संघ के अध्यक्ष सुनील थपलियाल, महामंत्री सुरेंद्र नौटियाल, दिनेश रावत, बलबीर परमार, बीरेंद्र चौहान, तिलक रमोला, विजय पाल रावत, सुभाष रावत, जयप्रकाश बहुगुणा, द्वारिका सेमवाल, महावीर राणा, सूर्यप्रकाश, दीपक नौटियाल, भगत राणा, भगवती रतूड़ी, पृथ्वी नैथानी, नितिन चौहान, सचिन नौटियाल, आशीष मिश्रा, शंकर गुसाईं, उपेंद्र असवाल, मदन पैन्यूली, अरविंद थपलियाल, सोबन असवाल, राकेश रतूड़ी, विनोद रावत, संदीप चौहान, नितिन रमोला, संजय हरण, नरेश रावत सहित अनेक वरिष्ठ पत्रकार मौजूद रहे।

