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पेपर लीक के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगाः धामी

Pahado Ki Goonj

पेपर लीक के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगाः धामी
देहरादून। बेरोजगार युवाओं के उग्र प्रदर्शनों के मद्देनजर अब सरकार ने बेकाबू होती स्थिति को संभालने की ओर कदम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। पेपर लीक के इस मामले को भले ही सरकार व्यक्तिगत स्तर पर किए गए नकल के प्रयास या नकल माफिया और कोचिंग सेंटरों का षड्यंत्र बता रही हो लेकिन इस मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने तथा एसआईटी की जांच रिपोर्ट तक परीक्षा के परिणामों को स्थगित रखने के साथकृसाथ अपनी ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले लोगों को सस्पेंड करने जैसी कार्यवाही शुरू कर दी है।
जिन लोगों के खिलाफ अभी कार्रवाई की गई है उसमें सेक्टर मजिस्ट्रेट के. एन. तिवारी तथा जिस हरिद्वार के भर्ती परीक्षा केंद्र से पर्चा आउट हुआ वहां तैनात दरोगा रोहित कुमार एवं कांस्टेबल ब्रह्म दत्त को सस्पेंड कर दिया गया है। वहीं खालिद जिसकी बहन द्वारा जिस असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन को पेपर भेजा गया उसे भी सस्पेंड कर दिया गया है। यही नहीं इससे पूर्व कल देर शाम शासन द्वारा इस पूरे मामले की जांच कराने के लिए हाई कोर्ट के सेवा निवृत जज की अध्यक्षता में एसआईटी का भी गठन कर दिया गया है। जो एक माह में अपनी रिपोर्ट शासन तथा आयोग को सौंपेगी। सीएम पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि जब तक एसआईटी की रिपोर्ट नहीं आ जाती तब तक इस परीक्षा का परिणाम भी स्थगित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि यह मामला पेपर लीक का नहीं है बल्कि कुछ लोगों द्वारा नकल के प्रयास किए जाने का है। उन्होंने इसके साथ ही यह भी कहा है कि नकल विरोधी सख्त कानून आने के बाद भर्ती परीक्षाएं जो पारदर्शिता के साथ संपन्न हो रही थी वह कुछ लोगों को रास नहीं आई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया को संदेह के दायरे में लाने तथा अराजकता फैलाने की कुछ नकल माफियाओं व कुछ कोचिंग सेंटरों द्वारा यह षडयंत्र किया गया है उन्होंने प्रदर्शनकारी युवा बेरोजगार संघ के नेताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब उनके पास पेपर के स्क्रीनशॉट आ गए थे तो उन्होंने इसकी जानकारी पुलिस प्रशासन या सरकार को न देकर छुपाया गया जिससे बखेड़ा खड़ा किया जा सके। उन्होंने कहा कि हम छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पेपर लीक केस में सब इंस्पेक्टर समेत दो पुलिसकर्मी पर भी गिरी गाज
हरिद्वार। यूकेएसएसएससी पेपर लीक मामले में एक तरफ जहां पुलिस आरोपियों पर कार्रवाई कर रही है तो वहीं दूसरी ओर उन अधिकारियों पर भी गाज गिर रही है। जिनकी लापरवाही के वजह से पेपर लीक हुआ है। असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन और सेक्टर मजिस्ट्रेट सस्पेंड होने के बाद अब हरिद्वार ने दारोगा समेत दो पुलिसकर्मियों को निलंबित किया है। दोनों पुलिसकर्मियों की ड्यूटी आदर्श बाल सदन इंटर कॉलेज बहादरपुर जट हरिद्वार पर थी। हरिद्वार एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल की तरफ से दोनों पुलिसकर्मियों को निलंबित किया है। निलंबित पुलिसकर्मियों में सब इंस्पेक्टर रोहित कुमार और कांस्टेबल ब्रह्मदत्त जोशी हैं। दोनों पुलिसकर्मियों पर परीक्षा केंद्र में ड्यूटी के दौरान संवेदनशीलता और सतर्कता न बरतने का आरोप है।
हरिद्वार एसएसपी ने दोनों पुलिसकर्मियों की इस लापरवाही को गंभीरता से लिया और दोनों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश पारित किया है। साथ ही इस मामले की जांच सीओ रुड़की नरेंद्र पंत को दी है। एसएसपी ने एक हफ्ते में जांच पूरी कर विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है।

मानसूनी आपदा में अब तक 135 की मौत,90 लापता,एनडीएमए की टीम ने शुरू किया क्षति का आंकलन
देहरादून। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) की ओर से उत्तराखंड में पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेसमेंट (पीडीएनए) की प्रक्रिया बुधवार से शुरू हो गई है। आपदा के बाद अब क्षति की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। इस कार्य के लिए गठित विशेषज्ञों की टीमें प्रभावित जनपदों के लिए रवाना हो गई हैं।
बुधवार को एक टीम उत्तरकाशी और दूसरी टीम चमोली पहुंची। यहां जिलाधिकारियों के साथ बैठक कर पीडीएनए पर चर्चा हुई। गुरुवार से टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण कर क्षति का आकलन प्रारंभ किया। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि इस वर्ष मानसून में अतिवृष्टि, भूस्खलन और आकस्मिक बाढ़ से राज्य को भारी नुकसान हुआ है।
अब तक 135 लोगों की मौत, 148 लोग घायल और 90 लोग लापता हुए हैं। पशुधन, संपत्ति, सड़क, बिजली, जल आपूर्ति, कृषि भूमि और आवासीय परिसरों समेत बुनियादी ढांचे को भी गंभीर क्षति पहुंची है। एनडीएमए के दिशा-निर्देशन में सभी विभागीय अधिकारियों को कार्यशाला के माध्यम से दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि पीडीएनए के लिए चार टीमें गठित की गई हैं।
पीडीएनए का मुख्य उद्देश्य आपदा से हुई क्षति का आकलन कर समग्र पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण रणनीति तैयार करना है। इसमें सामाजिक-आर्थिक प्रभाव का अध्ययन, अल्पकालिक व दीर्घकालिक पुनर्निर्माण योजनाएं को प्राथमिकता दी जाएगी। लैंगिक व पर्यावरणीय पहलुओं को भी महत्व दिया जाएगा।
सामाजिक क्षेत्रों में आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, सार्वजनिक भवन, जबकि बुनियादी ढांचे में पेयजल, सड़कें, बिजली और पुलों का आकलन होगा। उत्पादक क्षेत्रों में कृषि, पशुपालन, वानिकी, पर्यटन व सांस्कृतिक धरोहर का मूल्यांकन किया जाएगा।

पेपर लीक प्रकरणः असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन निलंबित
देहरादून। यूकेएसएसएससी पेपर लीक मामले में अब असिस्टेंट प्रोफेसर पर उच्च शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हे सस्पेंड कर दिया है। आरोप है कि असिस्टेंट प्रोफसर सुमन ने प्रश्न पत्र हल किया था। जिस पर जांच करते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने पाया कि असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन की गलत नियत से पेपर लीक में भूमिका रही है। आरोप प्रथम दृष्टया सही पाया गया है।
विदित हो कि बीते 21 सितंबर को यूकेएसएसएससी स्नातक स्तरीय परीक्षा हुई थी। इस परीक्षा में हरिद्वार के एक परीक्षा केंद्र से प्रश्न पत्र के तीन पेज लीक हुए थे। इस मामले में जहां पहले ही परीक्षा केंद्र में निगरानी के रूप में लापरवाही बरतने पर सेक्टर मजिस्ट्रेट को निलंबित किया जा चुका है तो वहीं अब असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन को भी निलंबित करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन राजकीय महाविघालय अगरौड़ा टिहरी गढ़वाल में इतिहास की प्रोफेसर है। परीक्षा केंद्र से खालिद नाम के युवक ने प्रश्न पत्र की फोटो परीक्षा केंद्र से बाहर भेजी थी और इसके बाद यह फोटो असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन को भेजी गई थी। जांच में सामने आया कि असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन ने प्रश्न पत्र हल किया था और इसका स्क्रीनशॉट प्रशासन को भेजने के बजाय बॉबी पंवार को भेजा था, ताकि यह प्रश्न पत्र वायरल हो जाए. इस मामले में असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन के खिलाफ रायपुर में एफआईआर दर्ज भी की जा चुकी है।

बच्चे की मौत के मामले में डॉक्टर पर कार्रवाई से चिकित्सा संघ में आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी
बागेश्वर। जिला चिकित्सालय में बीती 10 जुलाई को सैनिक के बेटे की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। आरोप था कि फौजी के बेटे को पांच अस्पतालों के चक्कर काटने के बावजूद उचित इलाज नहीं मिल पाया। जिसके बाद सरकार ने बच्चे की मौत के प्रकरण में गंभीर लापरवाही बताते हुए अस्पताल में तैनात दोषी चिकित्सकों, अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है।
उत्तराखंड प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ ने अस्पताल में तैनात चिकित्सकों पर की गई कार्रवाई का तीखा विरोध किया है। सरकार से आर-पार की लड़ाई का मन बनाया है। संघ के मुताबिक, बागेश्वर के डॉक्टरों के विरुद्ध की गई मनमानी और एक तरफा की गई कार्रवाई का वह विरोध करते हैं। 10 जुलाई 2025 को एक बच्चा जो की अत्यंत गंभीर अवस्था में दिमागी बुखार से पीड़ित था, उसे शाम 6 जिला चिकित्सालय बागेश्वर लाया गया था। जहां बच्चे को इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर भूपेंद्र घटियाल ने देखा और बच्चे की स्थिति को देखते हुए बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अंकित कुमार को तत्काल कॉल किया। उस समय डॉक्टर अंकित कुमार अस्पताल में ही राउंड पर थे। उन्होंने जब बच्चे को देखा, तब उसकी गंभीर हालत को देखते हुए सीमित संसाधनों के कारण हायर सेंटर रेफर कर दिया। उस दौरान उन्होंने 108 एंबुलेंस के आने तक बच्चे को जरूरी उपचार दिया और उसकी देखभाल की. उसके परिजनों ने बच्चे को सुशीला तिवारी मेडिकल हॉस्पिटल हल्द्वानी में भर्ती कराया। लेकिन गंभीर स्थिति के कारण 16 जुलाई 2025 को उसकी मौत हो गई। उत्तराखंड प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मनोज वर्मा का कहना है कि बागेश्वर अस्पताल के सभी डॉक्टरों और वहां तैनात मेडिकल स्टाफ ने कोई लापरवाही नहीं बरती है और ना ही किसी संवेदनहीनता का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि बागेश्वर जैसे दुर्गम और दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्र में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अंकित कुमार और अन्य विशेषज्ञ चिकित्सक लोगों को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनकी ओर से अस्पताल आने वाले मरीजों को बेहतर उपचार दिए जा रहा है। लेकिन इस तरह से डॉक्टरों के साथ अन्यायपूर्ण कार्रवाई करने से जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
डॉ. मनोज वर्मा ने कहा कि संघ के सभी डॉक्टर इस कार्रवाई का पूरी तरह से विरोध करते हैं। इस घड़ी में हम सब जिला अस्पताल बागेश्वर के डॉक्टरों के साथ खड़े हैं। अगर सरकार ने चिकित्सकों के खिलाफ की गई कार्रवाई को वापस नहीं लिया तो प्रदेश भर के डॉक्टर राज्य में उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर हो जाएंगे।
गौरतलब है कि उत्तराखंड के स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए फौजी के बेटे की मौत मामले में सीएमएस समेत 8 डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधीक्षक तपन शर्मा को पद से हटाकर स्वास्थ्य निदेशक कुमाऊं कार्यालय में संबद्ध किया गया है। चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टर अंकित कुमार पर प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं। 108 एंबुलेंस चालक ईश्वर सिंह और लक्ष्मण कुमार को 1 महीने तक ड्यूटी से बाहर किया गया है। नर्सिंग अधिकारी महेश कुमार, हिमानी और कक्ष सेवक सूरज सिंह को भविष्य में लापरवाही की पुनरावृत्ति होने पर कठोर कार्रवाई किए जाने की चेतावनी दी गई है। डॉ. भूरेंद्र घटियाल को भी भविष्य में गलती दोहराने पर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।

पेपर लीक मामलाः तहकीकात के लिए खालिद को लेकर एग्जाम सेंटर पहुंची पुलिस
देहरादून। यूकेएसएसएससी की स्नातक स्तरीय पदों के लिए लिखित प्रतियोगी परीक्षा के प्रश्न पत्रों के फोटो आउट होने की गुत्थी धीरे धीरे सुलझ रही है। मामले के मास्टरमाइंड खालिद की गिरफ्तारी के बाद कई अहम जानकारियां सामने आई है। खालिद ने नकल की योजना को ऐसे अंजाम दिया, जिसमें उसकी फिटनेस काम आई। पुलिस ने सीन सीन रिक्रिएट किया। जिसमें ये बातें निकलकर सामने आई।
हरिद्वार के जिस कॉलेज में खालिद का परीक्षा केंद्र था, उसके दोनों तरफ गन्ने के खेत हैं। खालिद दो बार रेकी करने वहां गया था। इसके बाद खालिद ने चंद सेकंड में साढ़े छह फीट ऊंची दीवार लांघकर कॉलेज में घुस कॉलेज की पुरानी बिल्डिंग में मोबाइल छुपाया था। जिसके बाद खालिद को दून पुलिस बुधवार को हरिद्वार लेकर गई। बहादरपुर जट स्थित बाल सदन इंटर कॉलेज में सीन दोहराने के दौरान खालिद ने सबको हैरान कर दिया. वह कुछ ही सेकंड में कॉलेज की दीवार फांदकर अंदर चला गया।
खालिद की गिरफ्तारी के बाद दून पुलिस ने दीवार बांधकर पूरा सीन री क्रिएट करने के लिए बुधवार को आरोपी खालिद को दोबारा उसी कॉलेज में लेकर गई। जहां उसने परीक्षा दी थी। कॉलेज पहुंचने पर खालिद को पीछे की तरफ ले जाया गया। जहां खालिद ने साढ़े छह फीट ऊंची दीवार पर चढ़कर अंदर जाने का तरीका दिखाया। कुछ ही सेकेंड में खालिद सीधे परीक्षा कक्ष नंबर 9 तक पहुंच गया, जहां उसने परीक्षा दी थी। यह देखकर पुलिस अधिकारी और अन्य लोग हैरान रह गए। इसके बाद पुलिस ने पूरे कॉलेज परिसर का बारीकी से निरीक्षण किया। एक शिक्षक से पूछताछ कर उनका मोबाइल नंबर भी नोट किया।
निरीक्षण में यह सामने आया कि स्कूल की दीवार ऊंची होने के बावजूद खालिद अंदर घुसने में सफल रहा. साथ ही छोटे गेट और खुली जगह पर निगरानी की खामियां भी उजागर हुई. पुलिस टीम ने आरोपी के हर मूवमेंट को ट्रेस किया. यह सीन रिक्रिएट मामले की जांच को आगे बढ़ाने और सुरक्षा व्यवस्था की कमियों को समझने के लिए किया गया. पुलिस अनुसार खालिद शारीरिक तौर पर खासा फिट है. गांव में उसकी लगभग 8 बीघा खेती है. वह गाय भैंस भी पालता है.
एसपी देहात जया बलूनी ने बताया इस पूरे मामले में फिलहाल मुख्य सूत्रधार खालिद और उसकी बहन साबिया को गिरफ्तार किया जा चुका है. प्रश्नों का जवाब देने वाली सुमन भी पुलिस के संपर्क में है. फिलहाल खालिद के आईफोन की तलाश जारी है. मोबाइल का डाटा रिकवर करने से लेकर आयोग से ओएमआर शीट प्राप्त कर उसकी जांच करना टेक्निकल टीम के हाथ में है।

यूकेएसएसएससी पेपर लीक मामले में सेक्टर मजिस्ट्रेट सस्पेंड
देहरादून। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) द्वारा 21 सितंबर को आयोजित स्नातक स्तरीय प्रतियोगी परीक्षा के दौरान परीक्षा पेपर लीक से जुड़े मामले में आयोग की रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार ने सेक्टर मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात के एन तिवारी, परियोजना निदेशक, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण, हरिद्वार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
हरिद्वार जिले के आदर्श बाल सदन इंटर कॉलेज (केन्द्र कोड-1302) में एक अभ्यर्थी द्वारा परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन से प्रश्नपत्र के 12 प्रश्नों की फोटो खींचकर परीक्षा केन्द्र से बाहर भेज दी थी। मामला सामने आया था पूरे राज्य में बवाल मच गया।
संबंधित केंद्र पर जनपद स्तरीय अधिकारियों व कर्मचारियों की तैनाती के बावजूद इस तरह की चूक सामने आना, आयोग द्वारा गंभीर लापरवाही मानी गई। आयोग ने सचिव, ग्राम्य विकास विभाग को पत्र भेजकर इस संबंध में उपयुक्त कार्रवाई करने का आग्रह किया था।
इस क्रम में राज्य सरकार ने यह मानते हुए कि तिवारी अपने कार्यदायित्वों के प्रति संवेदनशील नहीं रहे, उन्हें निलंबित कर दिया है और आगामी आदेशों तक उन्हें ग्राम्य विकास आयुक्त कार्यालय, पौड़ी से संबद्ध किया गया है। निलंबन की अवधि में के एन तिवारी को केवल जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा, जो उनके मूल वेतन के अर्द्ध वेतन के बराबर होगा। उन्हें महंगाई भत्ता या अन्य भत्तों का लाभ नहीं मिलेगा, जब तक वह यह प्रमाणकृपत्र नहीं प्रस्तुत करते कि वे किसी अन्य सेवायोजन, व्यापार या व्यवसाय में संलग्न नहीं हैं।

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