“धराली: सैलानियों का स्वर्ग अब खामोशी का मरुस्थल”।
उतरकाशी । मदन पैन्यूली ।
उत्तरकाशी जिले के धराली में खीरगंगा में आई बाढ़ के कारण धराली बाजार पांच अगस्त को पूरी तरह तबाह गया. हर्षिल घाटी जो कभी शैलानियों से हुवा करती थी गुलजार आज पसरा है चारों तरफ सिर्फ सन्नाटा, कभी अपनी खूबसूरती और शांत वातावरण के लिए देश-विदेश के सैलानियों से गुलजार रहने वाली हर्षिल घाटी आज वीरानी की चादर ओढ़े है।
हालिया आपदा के बाद यहां का जनजीवन पूरी तरह बदल गया है।यहा केवल प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि सैकड़ो परिवारों के सपनों का मलवा है । जिहोने अपनी जिंदगीभर की कमाई यहां लगा दी थी ।
धराली आपदा ग्राउंड जीरों पर उत्तराखंड पुलिस के साथ सेना के जवान पिछले 7 दिनों से मलबे में दबी जिंदगियों की तलाश कर रहे हैं. इसके लिए मानव, मशीनरी, मैकेनिज्म सब कुछ का इस्तेमाल किया जा रहा है.
इसके साथ ही आपदा पीडितों को भी रेस्क्यू किया जा रहा है ।मुझे भी धराली में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के दौरान एक रात जिस होटल में रहने का मौका मिला आज वहा होटल भी प्रकृति की गोद में समा गया है ।
अभी तक प्रशासन ने 43 लोगो की लापता होने की पुष्टि कर दी है जिसमे स्थानीय 9 सेना के जवान भी शामिल हैं। स्थानीय लोगो का कहना है कि लापता लोगों की संख्या अधिक हो सकती है। धराली में कई होटलों का निर्माण चल रहा था, जहां बिहार और नेपाल के मजदूर काम कर रहे थे। दो दर्जन से अधिक लोग होटलों में ठहरे थे। इनमें से कई लोगों का अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है। होटल, होमस्टे और दुकानें मलवे में दबी पड़ी हैं, वहीं, नदी के किनारों पर पड़े मलबे, झाड़ी, रेत आदि में तमाम एजंसी भी सर्च कर रही है.हर पत्थर, हर ढेर में उत्तराखंड पुलिस जीवन की तलाश कर रही है.और पर्यटकों की चहल-पहल के बजाय अब यहां सिर्फ यहाँ खामोशी गूंज रही है। हर्षिल, धराली और आसपास के गांवों में हालात सामान्य होने में समय लग सकता है,।
आपदा के बाद प्रभावितों के सामने पुनर्वास और रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। हालांकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर धराली गांव के आपदा प्रभावित परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये की सहायता राशि का वितरण शुरू कर दिया गया है।।इस तरह की आपदाओं के लिए हम कितने जिम्मेदार हैं और इनको रोकने के लिए जरूरी उपायों की पड़ताल ही आज बड़ा मुद्दा है..


