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शांतिकुंज हरिद्वार का विचार क्रांति अभियान ।

Pahado Ki Goonj

*शांतिकुंज हरिद्वार का विचार क्रांति अभियान ।

मदन पैन्यूली उतरकाशी
इस युग के विद्वान चिंतक वेद मूर्ति ,तपोनिष्ठ पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने 1971 में हरिद्वार में शांतिकुंज गायत्री तीर्थ नाम से एक आश्रम स्थापित किया, जो आज पूरे विश्व में आकर्षण का केंद्र बना है।
भारतीय सनातन संस्कृति को विश्व में फैलाने एवं विश्व बंधुत्व की भावना से वसु धैव कुटुम्बकम् का लक्ष्य लेकर यहां से अनेकों धार्मिक आध्यात्मिक एवं समाज सुधार की गतिविधियां चल रही है
उन्हौने मुख्य रूप से विचार क्रांति अभियान पर जोर दिया । आचार्य जी का मानना है कि यदि हमें युग को बदलना है तो व्यक्ति की सोच को बदलना होगा। क्योंकि जैसा चिंतन होगा वैसा जीवन होगा यदि व्यक्ति का चिंतन घटिया है तो उसका जीवन भी घटिया ही होगा।
अतः आदर्श सिद्धांतों और ऊंचे विचारों का संपर्क बहुत जरूरी है इसके लिए आचार्य जी ने व्यक्ति, परिवार, समाज व राष्ट्र निर्माण के लिए विभिन्न विषयों पर 3000 से अधिक पुस्तकें लिखी। इनमें आज की समस्त समस्याओं का समाधान प्रस्तुत किया है उन्होंने व्यक्ति को ऊंचा उठाने के लिए ,जीवन लक्ष्य प्राप्त करने के लिए ,बच्चों में अच्छे संस्कार डालने के लिए ,परिवार में सुख शांति लाने के लिए,सामाजिक कुरीतियों को मिटाने के लिए तथा राष्ट्र को समर्थ और सशक्त बनाने के लिए बहुत सी पुस्तकें लिखी हैं
राष्ट्र के नेता कैसे हो? प्रजातंत्र कैसे सफल हो? आर्थिक स्वावलंबन कैसे हो?
ईश्वर उपासना ,धर्म और अध्यात्म ,तीर्थ और देवालय कैसे हों?
शिक्षा व्यवस्था तथा शिक्षक का दायित्व, ऐसे अनेकों विषयों पर कलम चलाई है
इसके अलावा चारों वेद, 108 उपनिषद, 6 दर्शन, 18 पुराण ,गीता भागवत रामायण आदि आर्ष साहित्य पर भी बहुत लिखा है
अच्छे विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए जगह-जगह साहित्य केंद्र तथा पुस्तकालय स्थापित किए।ज्ञान रथ बनवाए, झोला पुस्तकालय चलवाए, घरों में विद्यालयों में रेलवे स्टेशनों पर सदवाक्य लगवाने का अभियान चलाया
आजकल सोशल मीडिया पर पुस्तकों के ऑडियोबुक तथा प्रवचनों के वीडियो यूट्यूब एवं व्हाट्सएप के माध्यम से अच्छे विचारों को खूब फैलाय जा रहा है
शांतिकुंज में एक विराट *पुस्तक प्रदर्शनी एवं साहित्य विक्रय केंद्र* बना है जहां विषय के अनुसार सभी पुस्तकों को डिस्प्ले किया गया है ।यहां हिंदी अंग्रेजी के अलावा गुजराती मराठी ओड़िआ बांग्ला कन्नड़ तेलुगू तमिल मलयाली असमिया नेपाली पंजाबी आदि भाषाओं में भी साहित्य उपलब्ध है
भारतीय भाषाओं के अलावा विदेशी भाषाओं जैसे रशियन, पुर्तगाली, चाइनीस, स्पेनिश तथा फ्रेंच भाषाओं में भी साहित्य है
आचार्य जी ने कहा था कि मनुष्य जन्म में पढ़ने तथा ज्ञान प्राप्त करने की जो सुविधा मिली है, वह पशु पक्षी आदि अन्य योनियों में नहीं मिली है अतः हमें नियमित स्वाध्याय करते हुए ज्ञान अर्जन करना चाहिए ।स्वाध्याय को जीवन की अनिवार्य आवश्यकता समझ कर नित्य एक घंटा पढ़ने की आदत डालना चाहिए

सौजन्य से- शांतिकुंज साहित्य प्रकोष्ठ

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