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Good news मुख्यमंत्री ने लोनिवि की गेम चेंजर योजनाओं की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए जानिए सभी खबर

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मुख्यमंत्री ने  लो नि वि की गेम चेंजर योजनाओं की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सचिवालय में लोक निर्माण विभाग की गेम चेंजर योजनाओं की समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि रिस्पना और बिंदाल नदी पर चार लेन एलिवेटेड रोड निर्माण परियोजना की सभी प्रक्रियाओं में तेजी लाई जाए।

आशारोड़ी से मोहकमपुर तक देहरादून रिंग रोड/बाईपास एवं यूटिलिटी डक्ट पॉलिसी पर भी तेजी से कार्य किए जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क निर्माण कार्यों में नवीन तकनीक का उपयोग किया जाए। जिन पुलों की स्थिति खराब हो रही है, उनके पुनर्निर्माण और मरम्मत के कार्य प्राथमिकता के आधार पर किए जाएं। भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित और टिकाऊ सड़कों के निर्माण के लिए जियोसिंथेटिक रिटेनिंग वॉल जैसी तकनीक का उपयोग किया जाए। सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का अभियान लगातार चलाया जाए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी के विस्तार की दिशा में विशेष ध्यान दिया जाए। केदारखंड और मानसखंड की आपसी कनेक्टिविटी बेहतर बनाने के लिए तेजी से कार्य किए जाएं। देहरादून से हल्द्वानी, दिल्ली से हल्द्वानी और अन्य प्रमुख शहरों के लिए सड़क कनेक्टिविटी को और मजबूत बनाने के लिए बेहतर कार्ययोजना बनाई जाए। मसूरी और देहरादून के बीच यातायात के दबाव को कम करने के लिए वैकल्पिक मार्गों पर तेजी से कार्य किया जाए। सड़कों के डामरीकरण के कार्यों में तेजी लाई जाए।

सचिव, लोक निर्माण विभाग, डॉ. पंकज पाण्डेय ने जानकारी दी कि रिस्पना नदी पर 11 किलोमीटर और बिंदाल नदी पर 15 किलोमीटर लंबे चार लेन एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण कार्य के प्रथम चरण की स्वीकृति के अंतर्गत फिजिबिलिटी स्टडी व हाइड्रोलॉजिकल स्टडी हो चुकी है। प्रस्तावित भू-अधिग्रहण प्लान के अनुसार मौके पर चिन्हीकरण की कार्यवाही गतिमान है। देहरादून रिंग रोड के संरेखण को अंतिम रूप दिया जा चुका है। परियोजना की फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार हो चुकी है और रेलवे के साथ संयुक्त निरीक्षण कर डायवर्जन प्लान भी तैयार कर लिया गया है। देहरादून-मसूरी कनेक्टिविटी परियोजना की फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार हो चुकी है और जियोटेक्निकल इन्वेस्टिगेशन किया जा चुका है।

बैठक में अवस्थापना अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष श्री विश्वास डाबर, मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव श्री आर.के. सुधांशु, श्री आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव श्री सचिन कुर्वे, अपर सचिव श्री आशीष चौहान, श्री विनीत कुमार एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने नागरिक उड्डयन विभाग की निर्माणाधीन परियोजनाओं में तेजी लाने के साथ ही राज्य में हेली सेवाओं के संचालन में सुरक्षा मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं।

मंगलवार को सचिवालय में आयोजित नागरिक उड्डयन विभाग की गेमचेंजर योजनाओं की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य में दूरस्थ क्षेत्रों तक आवाजाही को सुगम बनाने के लिए हवाई सेवाओं का नेटवर्क बढ़ाया जाना जरूरी है, इसी के साथ हवाई सेवाओं में सुरक्षा मानकों का भी सख्ती से पालन कराया जाए। मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड में एयरो स्पोर्ट्स को भी बढ़ावा देने के प्रयास किए जाने के साथ ही चारधामों के लिए नियमित चार्टर सेवा शुरु करने के भी निर्देश दिए।

बैठक में सचिव नागरिक उड्डयन श्री सचिन कुर्वे ने बताया कि पायलट प्रशिक्षण के लिए पंतनगर में नया फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूल स्थापित किया जा रहा है। नागरिक उड्डयन क्षेत्र में प्रशिक्षित पायलट की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए यह केन्द्र एक महत्वपूर्ण कदम है। हवाई यातायात को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए इसरो के साथ मिलकर डिजिटल मैपिंग की क्षमता विकसित की जा रही है। उकाडा के माध्यम से उत्तराखंड एयर कनेक्टिविटी स्कीम के तहत देहरादून- जोशीमठ, जोशीमठ- बद्रीनाथ के बीच शटल सेवा और पिथौरागढ़- धारचूला और पिथौरागढ़- मुनस्यारी के बीच हवाई सेवा शुरु करने की तैयारी की जा रही है। इसी तरह आदि कैलाश क्षेत्र में तीर्थाटन ओर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए गुंजी से सीधी हेलीकॉप्टर सेवा शुरु करने की योजना है। केदारनाथ हेली सेवा को मजबूत बनाने के लिए, गरुड्चट्टी के पास अतिरिक्त हेलीपैड बनाया जा रहा है।

बैठक में जानकारी दी गई कि पंतनगर और जौलीग्रांट एयरपोर्ट के विस्तार से संबंधित कार्य किए जा रहे हैं। पंतनगर एयरपोर्ट विस्तार कार्य 2027-28 तक पूरा होने की उम्मीद है। इसी तरह वर्ष 2026 तक जौलीग्रांट एयरपोर्ट को इंटरनेशनल मानकों के अनुसार विकसित किया जा रहा है। गुंजी, मुनस्यारी, आदि कैलाश क्षेत्र की आवश्यकताओं एवं पर्यटन विकास की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए पिथौरागढ़ हवाई पट्टी को रीजनल हब सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है। साथ ही भारतीय सेना के सहयोग से सीमांत क्षेत्रों में नए हेलीपैड भी बनाए जाने की योजना है।

बैठक में अवस्थापना अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष श्री विश्वास डाबर, मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन प्रमुख सचिव श्री आर.के. सुधांशु, श्री आर.मीनाक्षी सुंदरम, सचिव श्री सचिन कुर्वे, उकाडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री आशीष चौहान , अपर सचिव श्री विनीत कुमार, उकाडा के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजय टोलिया एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सचिवालय में आयोजित उद्योग विभाग की गेमचेंजर योजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन्वेस्टर्स समिट में प्राप्त निवेश प्रस्तावों की ग्राउंडिंग की दिशा में और अधिक तेजी से कार्य किया जाय।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य में निवेश को बढावा देने के लिए निवेशकों की सुविधाओं और सहूलियतों का पूरा ध्यान रखा जाय। मुख्यमंत्री ने उच्चाधिकारियों को राज्य में निवेश करने वाले शीर्ष पचास निवेशकों से व्यक्तिगत रूप से नियमित संपर्क बनाए रखने के निर्देश देते हुए कहा कि निवेशकों की सुविधा हेतु निवेश मित्रों की तैनाती की जाय। मुख्यमंत्री ने ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस, उद्यम रजिस्ट्रेशन से लेकर जमीन आवंटन तक की प्रक्रिया की निरंतर मॉनिटरिंग करने तथा सिंगल विंडो सिस्टम को अधिक सरल बनाने के निर्देश भी दिए ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएम स्वरोजगार योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या में और अधिक वृद्धि की जाय। राज्य में यह योजना काफी कारगर साबित हो रही है। इस योजना से अभी तक लगभग पैंतीस हजार लोग लाभान्वित हो चुके हैं। राज्य में लाई गई सभी नई नीतियों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के साथ ही अधिकाधिक युवाओं को इन नीतियों से लाभान्वित करने का प्रयास किया जाय। एक्सपोर्ट पॉलिसी के तहत राज्य के उत्पादों को बढावा देने के साथ ही निर्यात से जुड़ लोगों को भी प्रोत्साहन दिया जाय। मुख्यमंत्री ने पर्वतीय जिलों में हैंडलूम, होमस्टे और एग्रो-बेस्ड लघु उद्योगों को प्राथमिकता देने के साथ ही स्टार्टअप पॉलिसी को उद्योग विभाग के साथ जोड़कर यूथ इनक्यूबेशन सेंटर खोले जाने के भी निर्देश दिए।

बैठक में सचिव उद्योग श्री विनय शंकर पाण्डेय ने बताया कि अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रीयल कॉरीडोर के तहत खुरपिया फार्म में 1002 एकड़ क्षेत्रफल में विश्वस्तरीय अवस्थापना सुविधाओं से युक्त इंटीग्रेटेड मैन्यूफैक्चरिंग कलस्टर के निर्माण की महत्वाकांक्षी योजना के क्रियान्वयन ने लिए एसपीवी का गठन हो चुका है। 1265 करोड़ रूपये की लागत की इस परियोजना के बन जाने से लगभग 22 हजार लोगों को रोजगार मिल सकेगा। इस परियोजना के लिए केन्द्र सरकार के द्वारा रू. 207 करोड़ की धनराशि अवमुक्त की जा चुकी है। उद्यमिता को बढावा देने के लिए हरिद्वार में 280 यूनिट्स, पंतनगर में 18 यूनिट्स और सेलाकुई में 12 यूनिट्स की क्षमता वाली फ्लैटेड फैक्टरी निर्माण का कार्य प्रगति पर है।

बैठक में अवस्थापना अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष श्री विश्वास डाबर, मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन प्रमुख सचिव श्री आर.के. सुधांशु, श्री आर.मीनाक्षी सुंदरम एवं उद्योग विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में परिवहन विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना को शीघ्र शुरु करने के निर्देश दिए हैं।

साथ ही राज्य में इलेक्ट्रिक वाहन (ई-वी) चार्जिंग अवसंरचना स्थापना कार्यों को भी समयबद्ध तरीके से पूरा करने को कहा है। सीएम ने कहा कि दूसरे राज्यों से आने वाले वाहनों पर ग्रीन सेस लागू करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाय तथा निर्माणाधीन बस अड्डों के कार्यों को समयबद्ध रूप से पूर्ण किया जाय।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बस अड्डों, पार्किंग स्थलों, राजकीय भवनों एवं गेस्ट हाउस, पेट्रोल पंपो के समीप चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना की जाय, ताकि वाहन चालकों को सहजता से चार्जिंग की सुविधा मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि परिवहन निगम की आय बढाने पर विशेष ध्यान दिया जाय।

इस अवसर पर प्रबंध निदेशक परिवहन निगम श्रीमती रीना जोशी ने जानकारी दी कि देहरादून और हरिद्वार में प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना शुरु की जाएगी। जिसके तहत 150 इलेक्ट्रिक वाहन संचालित किए जाएंगे। योजना का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को सुगम, सुलभ एवं पर्यावरण अनुकूल यातायात सुविधा प्रदान करना है। योजना से लगभग 750 रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने एवं वायु प्रदूषण में कमी लाने के उद्देश्य से ई-वी चार्जिंग अवसंरचना के विकास पर विशेष बल दिया जा रहा है। योजना के प्रथम चरण के अंतर्गत में 28 स्थलों पर ई-वी चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना की गई है।

बैठक में अवस्थापना अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष श्री विश्वास डाबर, मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन प्रमुख सचिव श्री आर.के. सुधांशु, श्री आर.मीनाक्षी सुंदरम एवं परिवहन विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

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देहरादून, 22 जुलाई।

*धामी सरकार ने नशे के खिलाफ छेड़ी बड़ी मुहिम, जिलाधिकारियों को सौंपी गई निगरानी की कमान, नशा मुक्ति केंद्रों पर चलेगा राज्यव्यापी निरीक्षण अभियान*

*बिना वैध पंजीकरण संचालित केन्द्रों पर लगेगा आर्थिक दंड और होगी तत्काल बंदी की कार्रवाई : डॉ. आर. राजेश कुमार*

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालने और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए निर्णायक कदम उठाया है। शासन ने राज्य के सभी जिलों में मानसिक स्वास्थ्य पुनर्विलोकन बोर्ड (Mental Health Review Boards) को सक्रिय करने का फैसला लिया है, साथ ही नशा मुक्ति और पुनर्वास केंद्रों पर राज्यव्यापी निरीक्षण अभियान शुरू किया गया है। स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में मानसिक स्वास्थ्य और नशामुक्ति सेवाओं को सुधारने के लिए एक ठोस नीति और सख्त अमल की शुरुआत कर दी है। यह अभियान प्रदेश में स्वस्थ, सुरक्षित और नशामुक्त वातावरण की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। मुख्यमंत्री के दिशा निर्देशों पर यह अभियान मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम-2017 और 24 जुलाई 2023 की अधिसूचना के प्रावधानों के तहत संचालित किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना और नशा मुक्ति केंद्रों की पारदर्शिता एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करना है।

*प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त जिम्मेदारी*
स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने जानकारी देते हुए कहा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर प्रदेशभर में नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों का सघन निरीक्षण अभियान शुरू हो गया है। सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने जिलों में संचालित केंद्रों की स्थिति, पंजीकरण और सुविधाओं की नियमित जांच सुनिश्चित करें। इसके लिए जिलास्तरीय टीमें गठित कर दी गई हैं। जो केंद्र निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरते, उन्हें चिन्हित कर आर्थिक दंड और तत्काल बंदी की कार्रवाई की जाएगी। शासन ने साफ किया है कि अब गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा। स्वास्थ्य सचिव ने साफ कर दिया है कि इस विषय में कोई लापरवाही या शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण को निर्देशित किया है कि प्रदेशभर में संचालित सभी नशा मुक्ति केंद्रों पर कड़ी निगरानी रखी जाए और निरंतर निरीक्षण किए जाएं। उनके निर्देश के बाद जिलास्तरीय निरीक्षण टीमें प्रदेशभर में सक्रिय हो चुकी हैं। निरीक्षण के दौरान इन संस्थानों की पंजीकरण स्थिति, मानकों की पूर्ति, सुविधाएं, कर्मचारियों की उपलब्धता और मरीजों के उपचार की गुणवत्ता जैसे बिंदुओं की गहन जांच की जा रही है। ऐसे सभी केंद्र जो निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करते या बिना वैध पंजीकरण के कार्यरत हैं, उन्हें चिन्हित कर आर्थिक दंड और तत्काल बंदी की कार्रवाई की जाएगी।

*133 संस्थान अनंतिम पंजीकरण पर, अंतिम सत्यापन अनिवार्य*
स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कहा प्रदेश में फिलहाल 133 मानसिक स्वास्थ्य संस्थान (जिसमें नशा मुक्ति केंद्र शामिल हैं) अनंतिम रूप से पंजीकृत हैं। अंतिम पंजीकरण से पहले इन सभी का स्थल निरीक्षण और दस्तावेज़ सत्यापन आवश्यक कर दिया गया है। Clinical Establishments Act-2010 के अंतर्गत पंजीकृत संस्थानों को भी अब मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम-2017 के तहत अंडरटेकिंग (Undertaking) देनी होगी, जिससे वे आवश्यक न्यूनतम मानकों का पालन सुनिश्चित करें।

*हर जिले में बोर्ड की अनिवार्य मासिक बैठक*
स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कहा हर जिले में पुनर्विलोकन बोर्ड को हर माह कम से कम एक बैठक आयोजित करनी होगी, ताकि निरीक्षण और निगरानी की प्रक्रिया निरंतर बनी रहे। वर्तमान में 7 जिलों में बोर्ड कार्यरत हैं, जबकि 6 अन्य जिलों में गठन प्रक्रिया प्रगति पर है। शासन ने निर्देशित किया है कि इन बोर्डों का गठन शीघ्र पूरा किया जाए।

*केवल योग्य संस्थानों को अनुमति*
स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कहा राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि बिना वैध पंजीकरण संचालित नशा मुक्ति केंद्रों को चिन्हित कर उन पर आर्थिक दंड, कानूनी कार्रवाई और तत्काल बंदी की कार्यवाही की जाए। भविष्य में केवल वही संस्थान कार्यरत रह सकेंगे जो न्यूनतम चिकित्सा, प्रशासनिक एवं सामाजिक मानकों को पूरी तरह पूरा करते हैं।

*देहरादून में औचक निरीक्षण, अव्यवस्थाएं उजागर*
स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कहा इसी क्रम में जनपद देहरादून में जन शिकायत प्राप्त होने पर बहादुरपुर रोड, वार्ड नंबर 9, सेलाकुई में संचालित एक नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र का औचक निरीक्षण किया गया। प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग की सम्मिलित टीम ने मौके पर पहुंचकर केंद्र में व्याप्त गंभीर अव्यवस्थाओं और खामियों का जायजा लिया। निरीक्षण दल ने पाया कि केंद्र में कई मानक पूरे नहीं किए गए थे। टीम ने रिपोर्ट तैयार कर आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को भेज दी है। यह कार्रवाई सरकार की उस नीति को दर्शाती है जिसमें सेवा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

*हरिद्वार में नशा मुक्ति केंद्र का औचक निरीक्षण*
जनपद हरिद्वार में स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की सम्मिलित टीम ने जीवन ज्योति नशा मुक्ति केंद्र का औचक निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान नशा मुक्ति केंद्रों की स्थिति, पंजीकरण, मानकों की पूर्ति की जांच की जा रही है । इन टीमों द्वारा प्रत्येक नशा मुक्ति केंद्र की गहन जांच की जा रही है तथा जो संस्थान निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करते या बिना पंजीकरण के कार्यरत हैं, उन्हें चिन्हित कर आर्थिक दंड और तत्काल बंदी की कार्रवाई की जाएगी। मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम के अनुसार केवल उन्हीं संस्थानों को कार्य करने की अनुमति दी जाए जो न्यूनतम मानकों को पूर्ण करते हैं।

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*राजभवन देहरादून 22 जुलाई, 2025*

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) से मंगलवार को राजभवन देहरादून में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मुलाकात की। इस दौरान राज्यपाल ने मुख्यमंत्री से वर्तमान मे चल रही कांवड़ यात्रा, चार धाम यात्रा की जानकारी सहित राज्य के विभिन्न समसामयिक विषयों एवं विकास योजनाओं पर चर्चा की।
*अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना में अनियमितताओं की जांच के लिए मुख्यमंत्री ने दिए एसआईटी गठित की करने के निर्देश*

*भ्रष्टाचारियों को बख्शा नहीं जाएगा- मुख्यमंत्री*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर पंजीकृत संस्थाओं द्वारा की गई अनियमितताओं एवं फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से छात्रवृत्ति राशि के गबन के गंभीर प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए विशेष जांच टीम (एसआईटी) के गठन के निर्देश दिए गए हैं।

प्रथम दृष्टया जांच में यह पाया गया है कि कुछ संस्थाओं ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति प्राप्त की है, जिनमें कुछ मदरसे, संस्कृत विद्यालय तथा अन्य शिक्षण संस्थाएं शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचारियों को बख्शा नहीं जाएगा।

केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए 2021-22 एवं 2022-23 सत्र के आंकड़ों के अनुसार राज्य की कुल 92 संस्थाएं संदेह के घेरे में हैं। इनमें से 17 संस्थाओं के विरुद्ध प्राथमिक जांच में छात्रवृत्ति गबन की पुष्टि हुई है। इन संस्थाओं में कुछ मामलों में विद्यार्थियों की संख्या, पहचान पत्र (आधार कार्ड), व निवास संबंधी दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं। उधम सिंह नगर जनपद में सरस्वती शिशु मंदिर हाई स्कूल तथा रुद्रप्रयाग में वासुकेदार संस्कृत महाविद्यालय जैसे संस्थानों में अनियमितता पाई गई है। इसके अतिरिक्त नैनीताल, हरिद्वार और अन्य जनपदों की संस्थाएं भी जांच के दायरे में हैं।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर एसआईटी इस मामले की गहराई से जांच करेगी, जिसमें संलिप्त संस्थाओं के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा की जाएगी। केंद्र सरकार द्वारा इस संबंध में सात बिंदुओं पर जांच के निर्देश दिए गए हैं, जिनमें फर्जी मामलों की पहचान कर संबंधित के विरुद्ध प्राथमिकी (FIR) दर्ज करना भी शामिल है।

*प्रदेश में छात्रवृत्ति जैसे कल्याणकारी कार्यक्रमों में किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।*
*पुष्कर सिंह धामी मुख्यमंत्री,उत्तराखंड*

*देहरादून 22 जुलाई, 2025
मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में वाइब्रेंट विलेज योजना से सम्बन्धित राज्य स्तरीय संचालन समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने वाइब्रेंट विलेज से सम्बन्धित योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने कहा कि योजनाओं को समयबद्धता से पूर्ण किए जाने हेतु केंद्र सरकार में सम्बन्धित मंत्रालयों से लगातार संवाद करते हुए प्रक्रिया में तेजी लायी जाए। उन्होंने कहा कि योजनाओं को समयबद्धता के साथ पूर्ण किए जाने हेतु लगातार मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने योजनाओं की प्राथमिकता तय किए जाने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिन योजनाओं के क्रियान्वयन में एक से अधिक विभागों की भूमिका है, ऐसी महत्त्वपूर्ण योजनाओं को समयबद्धता के साथ पूर्ण किए जाने हेतु सम्बन्धित विभागों से लगातार समन्वय बनाया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि योजनाओं के चयन में भी जनपदों द्वारा गम्भीरता से विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि वाईब्रेंट विलेज के दृष्टिकोण से अति महत्त्वपूर्ण योजनाओं पर जनपदों को विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। ऐसी योजनाएं तैयार की जाएं जिनसे वाईब्रेंट विलेज योजना के उद्देश्यों की पूर्ति हो। उन्होंने

मुख्य सचिव ने वाइब्रेंट विलेज एरिया में सिविल एवं आर्मी के मध्य सामंजस्य के लिए शीघ्र ही वर्कशॉप आयोजित किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि कार्यशाला में वाईब्रेंट विलेज के दृष्टिकोण से राज्य सरकार के महत्त्वपूर्ण विभागों, आईटीबीपी, भारतीय सेना, भारत सरकार के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए।

सचिव श्रीमती राधिका झा ने बताया कि योजना के तहत गृह मंत्रालय को 524 प्रोजेक्ट भेजे गए थे, जिसमें से 181 को स्वीकृति प्राप्त हो गयी है। उन्होंने बताया कि 181 प्रस्तावों में से 115 वाईब्रेंट विलेज एवं 66 को कन्वर्जेंस के माध्यम से फंडिंग की जाएगी। उन्होंने बताया कि जिन 93 कार्यों के लिए धनराशि जारी हो चुकी है, उनमें से चमोली जनपद के 18 में से 14 प्रोजेक्ट में कार्य शुरू किया जा चुका है। पिथौरागढ़ के 62 कार्यों में से 38 कार्य शुरू हो चुके हैं, जबकि शेष 24 कार्यों के लिए निविदा प्रक्रिया जारी है। उत्तरकाशी के 13 कार्यों में से उरेडा के 8 कार्य हैं जिनका 80 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है एवं 5 कार्य वन विभाग के हैं जिनका 60 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है।

इस अवसर पर विशेष प्रमुख सचिव श्री अमित सिन्हा, सचिव डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरूषोत्तम, श्री चंद्रेश कुमार यादव, श्री धीराज सिंह गर्ब्याल, आईजी आईटीबीपी श्री संजय गुंज्याल, आईजी श्री निलेश आनन्द भरणे, आईजी श्री करन सिंह नगन्याल, अपर सचिव डॉ. अहमद इकबाल, श्रीमती अनुराधा पाल सहित उत्तरकाशी, चमोली एवं पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी उपस्थित थे।

 

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