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संवैधानिक संस्थाओं में हो रहा हैं त्राहिमाम, त्राहिमाम, त्राहिमाम

Pahado Ki Goonj

संविधान संरक्षक “राष्ट्रपति” निर्णय ले ….

देहरादून,दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में सभी स्तम्भों सहित संस्थानों के अन्दर त्राहिमाम, त्राहिमाम, त्राहिमाम हो रहा हैं । इस त्राहिमाम का एक ही कारण हैं “मीडिया” ।

मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहां जाता हैं परन्तु इसे कोई संवैधनिक चेहरा व जवाबदेही वाला कानूनी अधिकार नहीं दे रखा हैं । इस कारण कार्यपालिका सहित सभी सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं में भ्रम की स्थिति बन गई हैं उन्हें समझ में ही नहीं आ रहा हैं कि मीडिया की खबर सच हैं, झूठ हैं, अफवाह हैं, प्रोपेगंडा हैं या अपराधियों एवं निजी स्वार्थ के लिए धन द्वारा प्रयोजित हैं । यहां तक की मीडिया असली हैं या रजिस्टर्ड नाम का इस्तेमाल कर कोई अपने एजेंडे की बात खबर में परोस गया ।

प्रत्येक संवैधानिक संस्था के प्रमुख सामने आकर सार्वजनिक रूप से बोल रहे हैं । इनमें से कुछ के बयान इस प्रकार हैं ।

न्यायपालिका वाला स्तम्भ :-

इसके प्रमुख न्यायाधीश एन वी रमण ने पद पर रहते हुए 23 जुलाई, 2022 को अपने एक दिन के झारखंड प्रवास के दौरान कहां – न्यायिक मुद्दों पर गलत सूचना और एजेंडा चलाना लोकतन्त्र के लिए हानिकारक साबित हो रहा हैं । मीडिया कंगारू अदालतें चला रहा हैं । इसके चलते कई बार अनुभवी न्यायाधीशों को भी सही और गलत का फैसला करना मुश्किल हो जाता हैं । यह लोकतंत्र को कमजोर कर व्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहा हैं । इलेक्ट्रानिक मीडिया अपनी हद से आगे बढकर और जिम्मेदारी से पीछे हटकर हमारे लोकतन्त्र को दो कदम पीछे ले जा रहा हैं ।

कार्यपालिका वाला स्तम्भ :-

लोकतन्त्र कमजोर हो रहा हैं इसे मजबूत करने के लिए मीडिया को जवाबदेही वाले अधिकार देकर शक्तिशाली बनाना पडेंगा यह बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 9-10 दिसम्बर, 2021 को अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाईडेन की अध्यक्षता में 110 देशों के प्रमुखों के साथ हुई वर्चुअल मीटिंग में कही । राज्य सरकारें भी समय – समय पर यह चिंता जताती रहती हैं ।

अब तो देश के मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने 6 नवम्बर, 2022 को कहां कि फर्जी इंटरनेट मीडिया पोस्ट से स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष चुनाव प्रभावित होता हैं इसलिए यह चुनाव प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती बन गया हैं । चुनाव में आम लोगों के वोटों पर ही तो लोकतंत्र टीका हैं ।

विधायिका वाला स्तम्भ :-

संसद के दोनों सदन लोकसभा और राज्यसभा के माननीय सदस्य आये दिन सदन के अन्दर और बाहर मीडिया की बेरूखी के बारे में बोलते रहते हैं, यहां तक की कई सदस्य धरना भी दे चुके हैं । देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी ने तो न्यूज़ चैनलों की डिबेट में जाना ही छोड दिया हैं और अधिकांश राजनैतिक दलों के सदस्य चयनित मीडिया हाऊस के प्रोग्राम में जाने लगे हैं ।

मीडिया वाला सिर्फ कहे जाना वाला स्तम्भ :- इसने तो “गोदी मीडिया” के नाम से एक नई पहचान व स्तम्भ खड़ा कर लिया हैं । इससे क्षेत्र से जुड़े लोग एक बार इसका उच्चारण करे बिना रह नहीं सकते चाहे अच्छाई करो या बुराई । राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित कई माननीय लोग सच्ची खबरों को रोकने व स्वतंत्रता की बात कर एक संस्थान से दूसरी संस्थान में जा रहे हैं ।

राष्ट्रपति के फैंसले से ही खत्म होगा हाहाकार :-

देश में मचे इस हाहाकार को राष्ट्रपति संविधान के भाग 5 में अनुच्छेद 143 की शक्ति का इस्तेमाल करते हुए उच्चतम न्यायालय से परामर्श मांग उस के तत्वाधान में फैसला लेकर ही खत्म कर सकती हैं । इसके लिए सरकारी प्रक्रियाओं के तहत वो युवा वैज्ञानिक शैलेन्द्र कुमार बिराणी के असली एडी-सिरिंज की आविष्कार वाली फाईल से अन्तिम निर्णय लेने के लिए अधिकृत हो चुकी हैं ।

इसका प्रमाण के साथ दस्तावेज युवा वैज्ञानिक शैलेन्द्र कुमार बिराणी ने अपने पेटेन्टेट आविष्कार एडी-सिरिंज के आविष्कार वाली फाईल के साथ 19 अगस्त 2011 को राष्ट्रपति जो संविधान के संरक्षक भी हैं उन्हें भेजा (Letter Ref. No. P1/D/1908110208) । इस पर राष्ट्रपति सचिवालय की मोहर व आधिकारिक साईन मौजूद व
इस दस्तावेज से पूर्णतया स्पष्ट था कि भारतीय मीडिया को संवैधानिक चेहरे व कानूनी अधिकार से वंचित रखा गया हैं । संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों की सिर्फ बातों व ख्यालों में लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ का झूठा तमगा लगा मीडियाकर्मियों के माध्यम से हर रोज आम जनता की पीड़ा, पुकार व समस्याओं को अखबारों की रद्दी व न्यूज चैनलों पर मनोरंजन का साधन बना रहे हैं

इस फैंसले के साथ सबसे बडें पद की संवैधानिक कुर्सी का लंगडापन भी दुर हो जायेगा ।

राष्ट्रपति फैसला लेने में जितना समय लगायेगी उतने समय तक लोकतंत्र की मालिक देश की जनता को हर रोज हेट स्पीच के रूप में टीवी, अखबारों और सोशियल मीडिया के माध्यम से गालियां / अपशब्द / धमकियां सुननी पडेंगी । यही संविधान की प्रस्तावना व आजादी का प्रतिफल बनकर रह जायेगा ।

 

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