गविष्ठि (गोरक्षार्थ धर्मयुद्ध) — जिला मुजफ्फरनगर व बिजनौर में जगद्गुरु शंकराचार्य जी का भव्य स्वागतGavishti (Religious war for cow protection) — Grand welcome of Jagadguru Shankaracharya Ji in Muzaffarnagar and Bijnor districts
*’केवल सनातन धर्म है—बाकी सब उसी के मट्ठे में अपना पानी मिला-मिला करके चला रहे हैं’*

*’1917: खतौली की नत्थू देवी रेल की पटरी पर बैठ गईं — कहा: ट्रेन चढ़ा दो, लेकिन गायें नहीं छोड़ोगे’*
*’भाजपा का पहला पोस्टर: मोदी को मतदान = गौ माता को जीवन दान — फिर भी 80,000 गायें रोज कत्लखाने में’*
*’कत्लखाने करोड़ों रुपए पार्टियों को चंदा देते हैं-आपका vote इस चक्र को पूरा करता है’*
*’गौमांस न खाना हिन्दू की आखिरी पहचान — धर्मांतरण हमेशा यहीं से शुरू होता है’*
जिले: मुजफ्फरनगर एवं बिजनौर, उत्तर प्रदेश | मूल मंत्र: “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ”
*”1917 में नत्थू देवी—खतौली की एक साधारण गांव की महिला, बहुत पढ़ी-लिखी भी नहीं -अकेली रेल की पटरी पर बैठ गईं। अंग्रेजों की पुलिस आई तो बोलीं: ट्रेन चढ़ा दो, जब तक इस ट्रेन से गायें छोड़ी नहीं जाएंगी, हम नहीं हिलेंगे। लाठी मारी गईं, माथे से खून बहा, फिर भी नहीं हटीं। आप उसी धरती की विरासत हो।”— ‘परमाराध्य’ परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर अनन्तश्रीविभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती ‘१००८’*
मुजफ्फरनगर–बिजनौर। ऐतिहासिक 81 दिवसीय ‘गविष्ठि (गोरक्षार्थ धर्मयुद्ध)’ (3 मई – 24 जुलाई 2026) के क्रम में ‘परमाराध्य’ परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर अनन्तश्रीविभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती ‘१००८’ का जिला मुजफ्फरनगर एवं बिजनौर में जगह-जगह भव्य स्वागत किया गया। प्रत्येक स्थान पर उपस्थित जनसमूह ने वैदिक मंत्र “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ” का सामूहिक उच्चारण करते हुए गौ रक्षा का संकल्प लिया।
‘केवल सनातन धर्म है — बाकी सब उसी मट्ठे में अपना पानी मिलाए हुए’
महाराजश्री ने एक कहानी से मूलभूत स्पष्टता दी। एक गुरु और शिष्य यात्रा पर थे। एक सूखे-पड़े गांव में रुके। पूरे गांव के पास खाने को कुछ नहीं था। केवल मुखिया के घर में भैंस थी। उससे थोड़ा दूध होता था जिसका वह मट्ठा बनाकर सबको देता था। लोग उस मट्ठे में अपना-अपना पानी मिलाकर घर वालों और अतिथियों को देते थे। जब शिष्य मट्ठा लेकर लौटे तो एक बर्तन का मट्ठा गाढ़ा था, बाकी सब पानी-पानी। बुजुर्ग ग्रामीण ने बताया: मट्ठा एक ही घर से आता है — मुखिया के घर से। सबने उसमें अपना-अपना पानी मिला लिया।
महाराजश्री ने कहा: ‘ठीक ऐसे ही दुनिया के सभी धर्म एक ही मूल स्रोत से आते हैं — सनातन धर्म। इस्लाम, ईसाइयत, सबने सनातन के कुछ सिद्धांत लिए और उनमें अपना-अपना पानी मिला दिया। गाढ़ा, असली मट्ठा सनातन धर्म है, बाकी उसी में मिलाया हुआ पानी है। इसलिए यह मत कहो कि सनातन सबसे बड़ा धर्म है — कहो: सनातन एकमात्र धर्म है।’
उन्होंने एक प्रत्यक्ष अनुभव सुनाया: ‘एक सर्वधर्म सम्मेलन में गया। मैंने नारा लगाया “धर्म की जय हो!” सारी सभा बोली — सिवाय मुस्लिम प्रतिनिधियों के। सात-आठ बार दोहराया। ईसाई बोले, बाकी सब बोले। मुसलमान नहीं बोले। इससे यह सिद्ध हुआ: इस्लाम धर्म नहीं है — मजहब है। धर्म संस्कृत शब्द है, उनकी भाषा का नहीं। यह उनकी बेरुखी नहीं थी — यह उनकी सच्चाई थी।’
‘1917: खतौली की नत्थू देवी रेल की पटरी पर — कहा ट्रेन चढ़ा दो लेकिन गायें नहीं छोड़ोगे’
महाराजश्री ने खतौली क्षेत्र के अपने गौ रक्षा के इतिहास को सम्मान दिया। 1917 में खतौली रेलवे स्टेशन के सामने एक कत्लखाना खोला गया। ट्रेन में गायें भरकर लाई जाती थीं, स्टेशन पर उतारकर कत्लखाने ले जाया जाता और काटा जाता था। अंग्रेज पुलिस का पहरा था। किसी में हिम्मत नहीं थी।
तब एक साधारण ग्रामीण महिला नत्थू देवी उठ खड़ी हुईं। उन्होंने कहा: ‘मेरी आँखों से यह दृश्य नहीं देखा जाता। मैं ऐसे समाज में रहना स्वीकार नहीं करती जो यह चुपचाप सहे। मैं जा रही हूँ — चाहे मुझे भी गाय के साथ काट दो।’ जब वो अकेली निकलीं तो पूरे समाज को चोट लगी। हजारों लोग उनके पीछे चले गए। वो रेल की पटरी पर बैठ गईं। पुलिस आई: पटरी खाली करो। नत्थू देवी बोलीं: ट्रेन चढ़ा दो — लेकिन इस ट्रेन से गायें छोड़े बिना हम नहीं हटेंगे।
लाठीचार्ज हुआ — इतिहास में दर्ज है। नत्थू देवी के माथे पर चोट लगी, खून बहा। फिर भी नहीं हटीं। तीन दिन तक ट्रेन नहीं चल पाई। तीसरे दिन अंग्रेजों ने झुककर ट्रेन के दरवाजे खोले और सभी गायें छोड़ दीं। उन्हीं मुक्त गायों को जहाँ पहली बार रखा गया — वहीं आज भी खतौली की गौशाला है।
महाराजश्री ने कहा: ‘नत्थू देवी के पास सेना नहीं थी, पार्टी नहीं थी। केवल संकल्प था कि माता को कष्ट नहीं होना चाहिए। उस संकल्प ने अंग्रेजों को झुका दिया। वही संकल्प आज की सरकार को भी झुका सकता है।’
‘भाजपा का पहला पोस्टर: मोदी को मतदान = गौ माता को जीवन दान — रोज 80,000 गायें कत्लखाने में’
महाराजश्री ने एक दर्ज वादे का उल्लेख किया: ‘जो लोग गौ भक्त होने का दावा करके सत्ता में आए, उनका पहला चुनावी poster था: “नरेन्द्र मोदी को मतदान, गौ माता को जीवन दान।” यह poster अभी भी internet पर खोजने से मिल जाएगा। आपने vote दिया। गौ माता को जीवन देने का वादा था। और आज? पूरे देश में रोज 80,000 गायें कत्लखानों में जाती हैं। एक भी दिन की छुट्टी नहीं। वादा किया था, हर दिन तोड़ा।’
उन्होंने आगे कहा: ‘यह केवल विफलता नहीं — यह जानबूझकर है। कत्लखाने करोड़ों रुपए पार्टियों को चंदे में देते हैं। वह चंदा चुनाव लड़ने में लगता है। जीत के बाद कत्लखानों को license और subsidy मिलती है। आपका vote इस चक्र की पहली कड़ी है। आपके vote के बिना वो जीत नहीं सकते। उनकी जीत के बिना यह पैमाना संभव नहीं है। आपका vote ही गो-हत्या की अर्थव्यवस्था को संभव बनाता है।’
‘गौमांस न खाना हिन्दू की आखिरी पहचान — धर्मांतरण हमेशा यहीं से शुरू होता है’
महाराजश्री ने एक ऐसी टिप्पणी की जो सभी बहसों को काट देती है: ‘हाँ, आज बहुत से हिन्दू मांसाहारी हो गए हैं। वह बदलाव हो गया। लेकिन यह देखो: उन हिन्दुओं में भी जो मांस खाते हैं — एक भी गौमांस नहीं खाता। वह सीमा कभी नहीं टूटी। और जो हिन्दुओं का धर्मांतरण करना चाहते हैं वे यह जानते हैं। हर धर्मांतरण का पहला कदम एक ही है: गौमांस खिलाओ। अगर खा लिया — धर्मांतरण पूर्ण माना जाता है। अगर मना कर दिया — धर्मांतरण असंभव मान लिया जाता है। वह एक कार्य पूरी पहचान का प्रतीक है। आपका गौमांस न खाने का संकल्प हिन्दू पहचान की आखिरी अखंड दीवार है। जब यह दीवार गिरेगी, बाकी सब प्रश्न एक ही दिशा में सुलझ जाएंगे। इस दीवार की रक्षा करो।’
सामूहिक संकल्प — चक्रधारी मुद्रा
महाराजश्री ने उपस्थित जनसमुदाय से सामूहिक घोषणा करवाई:
“आज मैं घोषणा करता/करती हूँ: गाय मेरी माता है — पशु नहीं। जो उन्हें पशु कहे वह मुझे चोट पहुँचाता है — उनसे मेरा संबंध टूटा। मेरा संकल्प: किसी भी गौ हत्यारी पार्टी या प्रत्याशी को vote नहीं दूँगा। केवल उस पार्टी या प्रत्याशी को vote दूँगा जो शपथपूर्वक गौ माता को माता घोषित करके मेरे दरवाजे आए।”
तत्पश्चात चक्रधारी मुद्रा में वैदिक संकल्प “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ” का सामूहिक उच्चारण कराया गया। महाराजश्री ने कहा: ‘जब बिना गौ माता की बात किए कोई चुनाव नहीं जीत पाएगा — तब वे गौ माता की बात करेंगे। नत्थू देवी ने अपने शरीर से अंग्रेजों की ट्रेन रोकी थी। आप अपने vote से आज की पार्टियों को रोक सकते हो। यही आपका अस्त्र है।’
24 जुलाई को लखनऊ में एक अक्षौहिणी सेना का महासंकल्प
3 मई 2026 को गोरखपुर से प्रारंभ हुई गविष्ठि यात्रा उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभाओं की परिक्रमा कर रही है। यदि यात्रा पूर्ण होने तक सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो 24 जुलाई 2026 को लखनऊ में एक अक्षौहिणी सेना — 2,18,700 धर्म सैनिकों के साथ अगले चरण की घोषणा की जाएगी।मीडिया टीम
‘परमाराध्य’ परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर अनन्तश्रीविभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती ‘१००८’
संपर्क सूत्र: +91 98396 42008
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