
लोकसभा में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े बिल पेश
प्रधानमंत्री बोले महिला आरक्षण बिल का राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं
विपक्ष ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ को लागू करने की अपील की, परिसीमन प्रक्रिया पर आपत्ति जताई
नई दिल्ली। संसद के विस्तारित बजट सत्र का तीन दिनों का विशेष अधिवेशन आज से शुरू। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को लोकसभा में सभी राजनीतिक दलों से महिला आरक्षण अधिनियम संबंधी संविधान संशोधन विधेयक का समर्थन करने की अपील करते हुए कहा कि इसे राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं है और जो भी इसका विरोध करेंगे उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ पर यह भी कहा कि इस विषय को राजनीति के तराजू से नहीं तौलना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘राष्ट्र के जीवन में कुछ महत्वपूर्ण पल आते हैं और उस समय समाज की मनःस्थिति और नेतृत्व क्षमता उस पल को ‘कैप्चर’ करके एक राष्ट्र की अमानत और धरोहर बना देती है। संसदीय इतिहास में आज ऐसा ही एक पल है।’’
मोदी ने कहा कि महिला को मिलने वाले अधिकार का जिस-जिस ने विरोध किया, महिलाओं ने उन्हें माफ नहीं किया, उनका बुरा हाल हुआ। 2024 के चुनाव में यह नहीं हुआ, क्योंकि (2023 में) सबने मिलकर इसे पारित किया था।’’ उन्होंने कहा कि जिन्हें इसमें राजनीतिक बू आ रही है, वे पहले के परिणामों को देख लें। उन्होंने कहा कि ‘‘मैं समझता हूं कि इसे राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं है।’’ मोदी ने कहा कि जो विरोध करेंगे उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। इस विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन पर फोकस किया जाएगा।
विपक्षी पार्टियों की चिंताओं का जवाब देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को साफ किया कि परिसीमन आयोग हर राजनीतिक पार्टी से सलाह-मशविरा करेगा। विपक्ष ने साफ किया कि वह महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है और उसने सरकार से ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ को लागू करने की अपील की, लेकिन उसने परिसीमन प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। विपक्ष का मानना है कि इस प्रक्रिया से लोकसभा में दक्षिणी और पूर्वाेत्तर राज्यों का प्रतिनिधित्व कमजोर होगा।
लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन पर बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा के मैं उन लोगों को भी सलाह देना चाहूंगा जो केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से सोचते हैं। हमारे देश में जब से महिला आरक्षण पर चर्चा शुरू हुई है, और उसके बाद हुए हर चुनाव में, जिसने भी महिलाओं के इस अधिकार का विरोध किया है, देश की महिलाओं ने उन्हें माफ नहीं किया है। हम इसे पहले ही विलंबित कर चुके हैं। कारण चाहे जो भी हो, जो भी जिम्मेदार हो, हमें इस वास्तविकता को स्वीकार करना होगा। मुझे पता है कि जब यह प्रक्रिया चल रही थी, तब सभी पक्षों से परामर्श किया गया था। एक पक्ष को छोड़कर, जिनसे भी हम मिले, किसी ने भी सैद्धांतिक विरोध नहीं उठाया। बाद में जो भी हुआ हो, अब एक राजनीतिक दिशा तय की जा रही है।ष्
लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैंने शुरुआत में ही कहा था कि हम सभी भाग्यशाली हैं कि हमें देश की आधी आबादी से जुड़े इस महत्वपूर्ण, राष्ट्र निर्माण प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर मिला है। हम सांसदों को इस महत्वपूर्ण अवसर को हाथ से नहीं जाने देना चाहिए। हम भारतीय मिलकर देश को एक नई दिशा देंगे। हम अपनी शासन प्रणाली में संवेदनशीलता लाने के लिए सार्थक प्रयास करेंगे। यह न केवल देश की राजनीति को आकार देगा, बल्कि देश की दिशा और स्थिति को भी निर्धारित करेगा।ष्
लोकसभा की कुल संख्या बढ़कर 815 होगी, 272 सीटें महिलाओं के लिए होंगी
नई दिल्ली। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने गुरुवार को कहा कि लोकसभा की संख्या बढ़ाकर 815 कर दी जाएगी, जिसमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी और इस कोटा के लागू होने से न तो पुरुषों को और न ही किसी राज्य को कोई नुकसान होगा।
महिला आरक्षण कानून में संशोधन और परिसीमन आयोग की स्थापना से संबंधित तीन विधेयकों पर लोकसभा में अपने प्रारंभिक संबोधन में मेघवाल ने यह भी कहा कि सदन की 815 सीटों में से 272 सीटें महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का सरल सूत्र है।
मंत्री ने कहा, ष्महिला आरक्षण विधेयक के अनुसार, लोकसभा की संख्या बढ़ाकर 815 कर दी जाएगी, जिसमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।ष्प्रस्तावित विधेयकों के अनुसार, लोकसभा की वर्तमान संख्या में 50 प्रतिशत की वृद्धि होगी।उन्होंने कहा, ष्महिला आरक्षण लागू होने के बाद न तो पुरुषों को और न ही किसी राज्य को कोई नुकसान होगा।ष्
मेघवाल ने यह भी कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिला कोटा के अंतर्गत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति श्रेणियों की महिलाओं के लिए आरक्षण होगा।मंत्री ने कहा कि यदि नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023, अपने वर्तमान स्वरूप में बना रहता है, तो 2029 में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए निर्वाचन क्षेत्रों का आरक्षण संभव नहीं होगा, क्योंकि यह जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होगा जो 2026 के बाद उपलब्ध होंगे। इसलिए संविधान संशोधन विधेयक लाया गया।
समय की मांग है कि देश की 50 प्रतिशत आबादी नीति निर्माण में भागीदार बने
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 21वीं सदी में भारत नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। आज हम सभी विश्व में भारत की स्वीकृति को महसूस कर रहे हैं। यह हम सभी के लिए गर्व का क्षण है। मेरा मानना है कि विकसित भारत का अर्थ केवल रेलवे, सड़कें, बुनियादी ढांचा या आर्थिक या प्रगति के आंकड़े नहीं हैं। हम श्विकसित भारतश् की ऐसी सीमित सोच रखने वाले लोग नहीं हैं। हम एक ऐसा विकसित भारत चाहते हैं, जहां नीति निर्माण में श्सबका साथ, सबका विकासश् का मंत्र सही मायने में समाहित हो। यह समय की मांग है कि देश की 50 प्रतिशत आबादी नीति निर्माण में भागीदार बने।
यह महिलाओं का अधिकार है, हमने इसे कई दशकों तक रोक रखा
लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा के मैं सदन के सभी सदस्यों से यह भी कहना चाहता हूं कि हमें किसी भ्रम या अहंकार में नहीं जीना चाहिए। मैं हम शब्द का प्रयोग कर रहा हूं, मैं ‘मैंश् और आप’ के संदर्भ में नहीं बोल रहा हूं। हमें इस भ्रम में नहीं जीना चाहिए कि हम देश की नारी शक्ति को कुछ दे रहे हैं। यह उनका अधिकार है और हमने इसे कई दशकों तक रोक रखा है और आज हमारे पास इस पाप से मुक्त होने का अवसर है।
मोदी बोले भेदभाव नहीं होगा, यह मेरी गारंटी
लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ष्यदि श्गारंटीश् शब्द की आवश्यकता हो, तो मैं श्गारंटीश् शब्द का प्रयोग करता हूं। यदि आप किसी वादे की बात करते हैं, तो मैं श्वादाश् शब्द का प्रयोग करता हूं। यदि तमिल में इससे बेहतर कोई शब्द है, तो मैं उसका प्रयोग करने के लिए भी तैयार हूं। यदि इरादा स्पष्ट है, तो हमें शब्दों के साथ खिलवाड़ करने की आवश्यकता नहीं है।ष्
हमारी नीयत साफ है, जिनमें खोट है, उन्हें नारी माफ नहीं करेगी
लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारी नीयत की खोट, देश की नारी शक्ति कभी माफ नहीं करेगी मैं आज आप सभी से यह अपील करने आया हूं कि इसे राजनीति के तराजू पर न तौलें आज पूरा देश, विशेषकर नारी शक्ति, हमारे फैसलों को जरूर देखेगी, लेकिन फैसलों से कहीं ज्यादा वे हमारी मंशा को देखेंगी।
संसदीय इतिहास का यह महत्वपूर्ण क्षण
इस महत्वपूर्ण विधेयक पर आज सुबह चर्चा शुरू हुई। कई सदस्यों ने विभिन्न मुद्दे उठाए हैं, और हम सदन को उन मामलों पर विस्तृत और सटीक जानकारी प्रदान करेंगे। इसीलिए मैं उन विशिष्ट बातों में नहीं जाना चाहता। किसी देश के जीवन में कुछ महत्वपूर्ण क्षण आते हैं। ऐसे समय में, समाज की मानसिकता और नेतृत्व की क्षमता उस क्षण को भुनाकर राष्ट्र के लिए एक संपत्ति में तब्दील कर देती है, जिससे एक मजबूत विरासत का निर्माण होता है। भारत के संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में, ये ऐसे ही क्षण हैं।
महिला आरक्षण एक ऐसा विषय है जिस पर सभी दलों की सहमति हैः प्रफुल्ल पटेल
महिला आरक्षण बिल पर एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने कहा, श्आज का कामकाज सिर्फ सदस्यों के शपथ ग्रहण, कुछ शोक प्रस्तावों और कुछ अन्य दस्तावेजों को सदन पटल पर रखने तक ही सीमित था। महिला आरक्षण एक ऐसा विषय है जिस पर सभी दलों की सहमति है और परिसीमन भी उसी आनुपातिक प्रतिनिधित्व पर आधारित है जिसका लाभ इस समय लोकसभा में प्रत्येक राज्य को मिल रहा है।
महिला आरक्षण को एक बहाने के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहाः शशि थरूर
महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि यह मामला बहुत सीधा-सादा है। सरकार की एक योजना है जिसके तहत वे चुनाव क्षेत्रों का फिर से सीमांकन करेंगे और उन इलाकों में सीटों की संख्या बढ़ाएंगे जहाँ सत्ताधारी पार्टी मजबूत है। वे इस बदलाव को लाने के लिए महिला आरक्षण को एक बहाने के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके लिए वे उन संवैधानिक संशोधनों में बदलाव करने की कोशिश कर रहे हैं जिन्हें वे 2023 में पहले ही ला चुके थे।
विधेयकों का उद्देश्य महिलाओं के लिए आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन करवाना हैः गौरव गोगोई
लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि आप बार-बार महिला आरक्षण में रुकावटें डाल रहे हैं। अगर आपने 2023 में हमारी बात सुनी होती, तो महिला आरक्षण 2024 में ही लागू हो गया होता। हम यह आग्रह कर रहे हैं कि महिला आरक्षण को परिसीमन से न जोड़ा जाए। अगर आप ऐसा करते हैं, तो हम निश्चित रूप से इसका समर्थन करेंगे। यह बिल महिला आरक्षण के लिए नहीं है, बल्कि यह चोर दरवाज़े से परिसीमन के लिए है। महिलाओं के लिए आरक्षण लोकसभा की मौजूदा सदस्य संख्या 543 पर लागू होना चाहिए। इसे परिसीमन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। ऐसा लगता है कि सरकार महिलाओं के लिए आरक्षण के पक्ष में नहीं है, और इसीलिए वह बार-बार इसमें बाधाएँ खड़ी कर रही है। सरकार के विधेयकों का उद्देश्य महिलाओं के लिए आरक्षण नहीं, बल्कि श्चोर-रास्तेश् से परिसीमन करवाना है।
महिला आरक्षण के लिए दो कानून जरूरी हैः अमित शाह
लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, श्महिलाओं के लिए आरक्षण को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुँचाने के उद्देश्य से इन दोनों विधेयकों को एक साथ लाया गया है।श् गृह मंत्री, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव पर कांग्रेस सांसद वेणुगोपाल की आपत्ति का जवाब दे रहे थे।
विधेयक के पक्ष में 251 जबकि विरोध में 185 वोट पड़े।
महिलाओं के लिए आरक्षण कानून में बदलाव करने वाला संविधान संशोधन विधेयक, वोटों के विभाजन के बाद लोकसभा में पेश किया गया। विधेयक के पक्ष में 251 वोट पड़े, जबकि विरोध में 185 वोट पड़े।
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राज्य कर्मचारियों ने मांगों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ भरी हुंकार
राज्य निगम कर्मचारी अधिकारी महासंघ 23 अप्रैल को देगा धरना
10 सूत्रीय मांगों को लेकर महासंघ सड़कों पर लड़ेगा लड़ाई
देहरादून। राज्य कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ हुंकार भर दी है। राज्य निगम कर्मचारी अधिकारी महासंघ ने शासन और सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। अब महासंघ की दस सूत्रीय मांगों को नहीं माना गया तो महासंघ आर पार की लड़ाई लड़ने के लिये सड़कों पर उतरेगा।
गुरुवार को महासंघ के प्रदेश महासचिव एसएस नेगी व अन्य पदाधिकारियों ने बताया कि उत्तराखंड राज्य में करीब 40,000 कर्मचारी हैं। जिनकी मांगे मानने के लिए सरकार और शासन तैयार नजर नहीं आ रहा है। यही कारण है कि महासंघ काफी अधिक आक्रोशित है। शासन-सरकार से आर पार की लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है। इसके तहत 23 अप्रैल को हल्द्वानी बस अड्डे पर धरना प्रदर्शन कार्यक्रम किया जाएगा।
इसी के साथ 30 अप्रैल को गढ़वाल मंडल विकास निगम कार्यालय हरिद्वार में धरना प्रदर्शन करेंगे। इसी कड़ी में 12 मई से देहरादून के एकता विहार में क्रमिक अनशन शुरू किया जाएगा। सरकार से आर पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कार्य बहिष्कार करने से भी अब महासंघ पीछे हटने वाला नहीं है। उन्होंने कहा मांगों को लेकर एक बार मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बैठक भी हो चुकी है। इसके बावजूद आज भी उनकी मांगे लंबित हैं।
महासंघ प्रदेश महासचिव एसएस नेगी ने कहा उनकी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर एक बार फिर मुख्यमंत्री को मांग पत्र भेजा जा रहा है। उनकी इन मांगों में मुख्य रूप से सार्वजनिक निगमों में जॉब वर्क के नाम पर जो ठेका प्रथा चली आ रही है उसे समाप्त किया जाना चाहिए। इसी के साथ सार्वजनिक निगम, निकाय, संस्थाओं, उपक्रमों में संरचनात्मक ढांचों का पुनर्गठन करते हुए रिक्त पदों को जल्द भरा जाए। उनकी मांगों में मुख्य रूप से एमएसीपी में रुपए 1900 ग्रेड पे को समाप्त कर 2000 किए जाने तथा सार्वजनिक निकायों निगम संस्थानों में वर्ष 2014 के पश्चात कार्यरत सभी कार्मिकों को पेंशन लागू किया जाना शामिल है।
सार्वजनिक निगम, निकाय, संस्थान, उपक्रमों में कार्यरत संविदा, उपनल, आउटसोर्स विशेष श्रेणी, दैनिक वेतन, पीटीसी कार्मिकों को जल्द नियमित किया जाये। सभी को सामाजिक सुरक्षा भी प्रदान करने की जाये। उनकी ये ही मांगे हैं।
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नैनीताल। हाईकोर्ट ने हल्द्वानी बनभूलपुरा कांड के साजिशकर्ता मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक की जमानत याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने उनके खिलाफ इस मामले में दर्ज मुकदमों में उन्हें जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। आज मामले की सुनवाई न्यायमूर्ती आलोक कुमार वर्मा और न्यायमूर्ती आलोक महरा की खण्डपीठ में हुई।
पिछली तिथि को कोर्ट ने सरकार और आरोपी के अधिवक्ता से पूछा था कि इनके खिलाफ जो अन्य सात मुकदमें हैं उनकी वर्तमान स्थिति क्या है? कितने केसों में बरी हो चुके और कितने विचाराधीन हैं? राज्य सरकार की तरफ से कोर्ट को अवगत कराया कि जांच के दौरान इनके खिलाफ इन केसों के अलावा अन्य सात मुकदमे दर्ज होने की पुष्टि हुई है। कई मामलों में ये बरी हो चुके हैं। कुछ का पता अभी नहीं चल सका है। मुकदमों की कोई पुष्टि न होने के कारण आज इस दंगे वाले मुकदमे से कोर्ट ने उन्हें जमानत पर रिहा करने को कहा है। दंगे में इनके खिलाफ चार मुकदमे दर्ज थे। एक मे उन्हें पहले जमानत मिल चुकी थी। तीन में में आज मिल गयी है।
मामले के अनुसार मलिक को राजकीय भूमि को खुर्द बुर्द करने के का आरोप होने के साथ साथ मामले में सरकारी काम में व्यवधान करने के आरोप हैं। मामले के अनुसार मलिक सहित अन्य के खिलाफ बनभूलपुरा दंगे के समय चार मुकदमे दर्ज हुए थे। जिसमें से एक मामला ये भी था कि मलिक ने कूटरचित , झूठे शपथपत्र के आधार पर राजकीय भूमि को हड़पने का कार्य किया।
यही नहीं उनके द्वारा नजूल भूमि पर कब्जा करके प्लॉटिंग, अवैध निर्माण करके उसे बेचा गया। राज्य सरकार की तरफ से उनकी जमानत प्रार्थनपत्र का विरोध करते हुए कहा कि बनभूलपुरा कांड की शुरुआत यही से हुई थी। जब प्रशासन इस अवैध अतिक्रमण को हटाने गया तो उनके ऊपर पथराव किया गया। बाद में इसने दंगा का रूप ले लिया। इसी दंगे में सरकारी, पुलिस व अन्य लोग घायल हो गए। कईयों की जान तक चली गयी।
दंगे से संबंधित मामलों में इनकी जमानत नहीं हुई है, इसलिए इनकी जमानत निरस्त की जाये। आरोपियों का कहना है कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। एफआईआर में उनका नाम नहीं है। पुलिस ने उन्हें जबरन इस मामले में फंसाया है। उन्हें जमानत पर रिहा किया जाये। दंगे में शामिल सौ से अधिक लोगो को जमानत पहले ही कोर्ट से मिल चुकी है।
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छात्रवृत्ति योजनाओं में किसी भी तरह की त्रुटि बर्दाशत नहीं की होगीः खजान दास
समाज कल्याण मंत्री ने विभागीय अधिकारियों के साथ की समीक्षा बैठक
देहरादून। मंत्री ने समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत चल रही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि विभाग के समस्त कर्मचारीगण आपसी समन्वय तथा जिम्मेदारी से अपनी योग्यता के अनुसार कार्य करें जिससे विभाग की प्रगति में सुधार लाया जा सके। उन्होंने पेंशन योजनाओं के तहत विधवा एवं दिव्यांग पेंशन को 1500 रूपये से 25 प्रतिशत बढ़ाकर 1875 रूपये कर दी गई है। तथा बौना पेंशन तथा तीलू रौतेली पेंशन को 1200 रूपये से बढ़ाकर 1500 रूपये करने तथा दिव्यांग भरण-पोषण अनुदान को 700 रूपये को बढ़ाकर 1000 रूपये करने के लिए अधिकारियों को जरूरी प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिये।
समाज कल्याण मंत्री ने छात्रवृत्ति योजनाओं से संबंधित सत्यापन के तरीके को सुदृढ़ बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि छात्रवृत्ति योजनाओं में किसी भी तरह की त्रुटि बर्दाशत नहीं की जायेगी। उन्होंने कहा कि जरूरतमंद लाभार्थी छात्रवृत्ति योजनाओं से वंचित न रहने पाएं। उन्होंने विभाग के संचालित अनुदान योजनाओं के बारे में भी समीक्षा की। मंत्री ने राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय तथा राजकीय औद्योगिक आस्थानों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि राजकीय औद्योगिक आस्थानों में नये ट्रेड शुरू किये जाएं तथा अनुभवी शिक्षकों, प्रशिक्षकों की नियुक्ति की जाए। मंत्री ने डॉ. बीआर अम्बेडकर अनुसूचित जाति छात्रावास की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रदेश में इस तरह के 14 छात्रावास संचालित किये जा रहे हैं।
मंत्री ने गर्लस इण्टर कॉलेज मसूरी के छात्रावास भवन का पुनर्निर्माण 3 माह में पूरा करने तथा माह सितम्बर 2026 तक छात्रावास के संचालन शुरू करने के निर्देश दिये। उन्होंने पेंशन एव अन्य कल्याणकारी योजनाओं में आय सीमा 4000 रूपये से बढ़ाकर 6000 रूपये किये जाने का प्रस्ताव भी तैयार करने के निर्देश दिये। मंत्री ने इंटरकास्ट मैरिज के लिए सामान्य जाति की विधवा एवं एससी-एसटी परिवारों को दिये जाने वाली शासकीय सहायता की समयसीमा वित्तीय वर्ष न रखते हुए 365 दिन (डेट टू डेट) की अवधि किये जाने के भी निर्देश दिये। मंत्री ने प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना के अंर्तगत संचालित आदर्श ग्राम योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि इस तरह की योजनाओं को विभाग द्वारा बढ़ावा देना चाहिए जिससे जनकल्याण का हमारा प्रयास पूर्ण हो सके। मंत्री ने अटल वयो अभ्युदय योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय वयो श्री योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वरिष्ठ नागरिकों को प्रदान किये जाने वाले निशुल्क सहायक उपकरणों जैसे छड़ी, व्हील चेयर, श्रवण यंत्र, चश्मा आदि का प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिये।
मंत्री ने राज्य में संचालित 6 वृद्धाश्रमों, एससी-एसटी (अत्याचार निवारण ) अधिनियम के अंर्तगत वित्तीय सहायता, एससी-एसटी के छात्रों के लिए परीक्षा पूर्व निशुल्क कोचिंग, एससी उपघटक योजना के तहत अवस्थापनों का विकास आदि पर विषयों पर विस्तृत चर्चा करते हुए अधिकारियों को उचित कार्यवाही करने के निर्देश दिये। मंत्री ने दिव्यांग कल्याण के अंर्तगत किये जा रहे कार्यों पर अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि 13 जनपदों के आधार पर प्रस्ताव तैयार किये जाएं तथा एससी-एसटी बाहुल्य क्षेत्रों को ध्यान में रखकर कार्ययोजना बनाई जाए। उन्होंने कहा कि कार्य गुणवत्तापरक हों तथा ससमय पूर्ण किये जाएं।
मंत्री ने समाज कल्याण विभाग के अंर्तगत बहुउद्देशीय वित्त विभाग निगम द्वारा संचालित स्माईल परियोजना, शिल्पी ग्राम योजना, नमस्ते योजना आदि की समीक्षा करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों को भी समान रूप से इन योजनाओं से लाभान्वित किया जाए। उन्होंने जनजाति कल्याण की भी समीक्षा की।
इस अवसर पर समाज कल्याण सचिव श्रीधर बाबू, अपर सचिव प्रकाश चन्द्र, निदेशक संदीप तिवारी, निदेशक जनजाति कल्याण संजय टोलिया एवं समस्त जनपदों के जिला समाज कल्याण अधिकारी तथा अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
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भारतीय ज्ञान परंपरा एक जीवंत परंपरा: प्रो. सुनीता
भारतीय परंपरा और एनईपी-2020 के संगम पर गढ़वाल विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर गढ़वाल के बिड़ला परिसर में गुरूवार को “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विशेष संदर्भ में भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य शुभारंभ हुआ। संगोष्ठी भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (आईसीएचआर) की वित्त पोषित है, उद्घाटन सत्र गरिमामय, सुव्यवस्थित एवं शैक्षणिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा, जिसका उद्देश्य समकालीन संदर्भ में भारतीय ज्ञान परंपरा की उपयोगिता को रेखांकित करना तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के साथ उसके समन्वय पर सार्थक विमर्श का मंच तैयार करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 10 बजे मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात विश्वविद्यालय कुलगीत की प्रस्तुति ने पूरे सभागार में गरिमा और एकता का वातावरण स्थापित किया। मंचासीन अतिथियों का स्वागत अंगवस्त्र एवं तुलसी पौधा भेंट कर भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का निर्वहन किया गया। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. अनु राही ने किया।
स्वागत भाषण में शिक्षा संकायाध्यक्ष प्रो. सुनीता गोदियाल ने भारतीय ज्ञान परंपरा को एक जीवंत परंपरा बताते हुए वर्तमान शिक्षा प्रणाली में इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। संगोष्ठी के संयोजक डॉ. अमरजीत सिंह ने विषय की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए शोधार्थियों को प्रेरित किया कि वे भारतीय ज्ञान परंपरा पर विश्वास रखते हुए निरंतर शोध कार्य करें। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनरुत्थान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कहा कि इस राष्ट्रीय संगोष्ठी की रूपरेखा भारतीय ज्ञान परंपरा की समकालीन प्रासंगिकता को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों का विश्लेषण करना, शैक्षिक विमर्श को समृद्ध करना तथा शोधार्थियों एवं शिक्षाविदों के लिए एक सशक्त अकादमिक मंच प्रदान करना है।
उन्होंने आगे कहा कि यह आयोजन बहुआयामी संवाद, अंतरविषयी दृष्टिकोण एवं नवाचारपरक विचारों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करेगा, जिससे भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में पुनर्स्थापित करने की दिशा में ठोस पहल संभव हो सकेगी। साथ ही, यह संगोष्ठी युवा शोधार्थियों में अनुसंधान के प्रति रुचि विकसित करने तथा उन्हें समसामयिक शैक्षिक चुनौतियों के समाधान के लिए प्रेरित करने का भी कार्य करेगी।
मुख्य अतिथि के रूप में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति प्रो. मुरली मनोहर पाठक ने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पूरी तरह भारतीय मूल्यों पर आधारित है, जो बौद्धिक, नैतिक एवं आध्यात्मिक विकास को समान महत्व देती है। उन्होंने ‘मेधा’, ‘विवेक’ एवं ‘नैतिकता’ को भारतीय शिक्षा का आधार बताते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति का सर्वांगीण विकास करना है और उसे अपनी संस्कृति से जोड़ना है। उन्होंने यह भी कहा कि यह नीति वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
विशिष्ट अतिथि प्रो. राज शरण शाही ने अपने उद्घाटन व्याख्यान में भारतीय ज्ञान परंपरा की दार्शनिक गहराई एवं व्यावहारिक उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय चिंतन में ज्ञान और विज्ञान का अद्भुत समन्वय निहित है, जो व्यक्ति के समग्र विकास में सहायक है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रकाश सिंह ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने प्रेरणादायक शब्दों में कहाकृ “जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना, अंधेरा धरा पर कहीं रह न जाए,” और भारतीय ज्ञान को समाज में प्रकाश फैलाने वाली शक्ति बताया। कार्यक्रम के अंत में प्रो. अनिल कुमार नौटियाल ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के अदिति महाविद्यालय की प्रो. डॉ. पुनीता गुप्ता द्वारा “उत्तराखंड की रामलीलाः एक दृश्य यात्रा” विषय पर विशेष प्रदर्शनी भी प्रस्तुत की गई। इस प्रदर्शनी में रामलीला की विविध शैलियों, वेशभूषा, रंग-रूप, मंचन परंपराओं तथा महिलाओं की बढ़ती सहभागिता को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया गया, जिसने उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सजीव रूप में प्रस्तुत किया। प्रो. एम. एस. पंवार ने संगोष्ठी को भारत के भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक एवं अनिवार्य बताते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का समन्वय ही देश को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
संगोष्ठी के सह-संयोजक डॉ. पुनीत वालिया कहा कि इस संगोष्ठी का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में पुनः स्थापित करना तथा शोधार्थियों और शिक्षाविदों के बीच सार्थक संवाद को बढ़ावा देना है। डॉ. शंकर सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि यह राष्ट्रीय संगोष्ठी भारतीय ज्ञान परंपरा की वर्तमान संदर्भ में प्रासंगिकता का शैक्षिक एवं वैचारिक विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए, उसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सिद्धांतों के साथ एकीकृत करने की दिशा में एक सार्थक पहल है।
उद्घाटन सत्र में देशभर से आए विद्वानों, शोधार्थियों, प्राध्यापकों एवं छात्रों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। यह सत्र अत्यंत प्रेरणादायक एवं ज्ञानवर्धक रहा, जिसने भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा के समन्वय की आवश्यकता को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया। अंत में वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस अवसर पर डॉ. मुकुल पंत, प्रो. रमा मैखुरी, प्रो. गीता खंडूरी, कुलसचिव प्रो. वाई. पी. रावणी, वित्त अधिकारी डॉ. मोहित, प्रो. दीपक कुमार सहित लगभग 150 से अधिक प्रतिभागियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
प्रो. राकेश मैखुरी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा से जोड़ना आज की अनिवार्य आवश्यकता है, क्योंकि यह हमारी समृद्ध भारतीय जीवन-पद्धति, मूल्यपरक सोच एवं सांस्कृतिक आधार से गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि जब शिक्षा प्रणाली भारतीय जीवन-दृष्टि के अनुरूप विकसित होगी, तभी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों को प्रभावी रूप से साकार किया जा सकेगा तथा विद्यार्थियों का समग्र एवं संतुलित विकास सुनिश्चित होगा।
इस सत्र के अध्यक्ष प्रो. डी. एस. नेगी ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा हमारी शैक्षिक विरासत की मूल आधारशिला है, जिसे समकालीन शिक्षा के साथ समन्वित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बल देते हुए कहा कि इस प्रकार के अकादमिक आयोजन न केवल वैचारिक विमर्श को समृद्ध करते हैं, बल्कि शिक्षा को मूल्यपरक एवं जीवनोपयोगी बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रो. आर. एस. फर्तियाल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित वैज्ञानिकता, तार्किकता एवं अनुभवजन्य दृष्टिकोण आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि इसे आधुनिक शोध एवं नवाचार के साथ जोड़कर शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए जा सकते हैं, जिससे विद्यार्थियों में समग्र सोच एवं रचनात्मकता का विकास होगा।
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हार्टअटैक के मरीज को हेली से एम्स पहुंचाकर बचाई जान
रुद्रप्रयाग। जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग की तत्परता से एक गंभीर हृदय रोगी की जान बचाने में सफलता मिली। हार्ट अटैक से पीड़ित मरीज को समय रहते हेली सेवा के माध्यम से उच्च चिकित्सा संस्थान एम्स ऋषिकेश पहुंचाया गया। वहीं वर्तमान में मरीज की हालत स्थिर बताई जा रही है और आगे का उपचार जारी है।

जखोली निवासी 41 वर्षीय कुंदीलाल को हार्टअटैक आने पर जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग लाया गया, जहां चिकित्सकों ने तुरंत प्राथमिक उपचार शुरू किया। मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने थ्रोम्बोलिसिस एवं इंट्यूबेशन जैसी आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रियाएं की गईं। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल यूकाडा के सहयोग से हेली एम्बुलेंस की व्यवस्था की। इसके तहत मरीज को गुलाबराय हेलीपैड से एयरलिफ्ट कर एम्स ऋषिकेश के लिए रवाना किया गया।
हेली एम्बुलेंस टीम ने पूरे रास्ते मरीज की स्थिति पर नजर रखते हुए आवश्यक उपचार जारी रखा और सुरक्षित रूप से एम्स ऋषिकेश की इमरजेंसी में भर्ती कराया। वहां चिकित्सकों ने मरीज की स्थिति को स्थिर किया। वर्तमान में मरीज की हालत स्थिर बताई जा रही है और आगे का उपचार जारी है।
हेली एम्बुलेंस में मौजूद विशेषज्ञ मेडिकल टीम ने पूरे सफर के दौरान मरीज की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखी और आवश्यक चिकित्सकीय सहायता प्रदान की, जिससे मरीज की हालत स्थिर बनी रही। एम्स ऋषिकेश पहुंचने पर मरीज को तुरंत इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने आगे का उपचार शुरू किया। वर्तमान में मरीज की स्थिति स्थिर बताई जा रही है और वह चिकित्सकीय निगरानी में है।
इस सफल जीवनरक्षक अभियान में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ। रामप्रकाश, जिला चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ। अथिरा और डॉ। दीपिका कांडपाल, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार, कैप्टन राजेश भारद्वाज तथा विक्रांत भारद्वाज सहित पूरी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सभी विभागों के बीच बेहतरीन तालमेल और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता के चलते यह संभव हो सका।
यह घटना न केवल आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि यदि समय पर सही निर्णय और समन्वय हो, तो दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में भी गंभीर मरीजों की जान बचाई जा सकती है। हेली सेवा जैसी सुविधाएं ऐसे क्षेत्रों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं, जो समय पर जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय कर सकती है।
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उत्तराखंड में सेना का वाहन दुर्घटनाग्रस्त, दो जवान घायल
एक को एयरलिफ्ट कर भेजा गया हायर सेंटर

चमोली। जिले में बड़ा सड़क हादसा हुआ है। जहां गोपेश्वर-चोपता मोटर मार्ग पर सेना का एक वाहन अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरा। इस हादसे में दो जवान गंभीर रूप से घायल हो गए। जिन्हें गोपेश्वर जिला अस्पताल ले जाया गया। जिसके बाद एक की गंभीर हालत को देखते हुए सेना के हेलीकॉप्टर से एयरलिफ्ट कर हायर सेंटर भेज दिया गया है।
जानकारी के मुताबिक, आज गुरुवार को गोपेश्वर-चोपता मोटर मार्ग सेना का वाहन अचानक नियंत्रित हो गया। जिससे वाहन करीब 500 मीटर गहरी खाई में जा गिरा। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस प्रशासन को अवगत कराया। इसी बीच स्थानीय युवक प्रदीप रमोला, राहुल और अजय पंवार ने साहस एवं तत्परता का परिचय देते हुए राहत कार्य शुरू किया।
उन्होंने दोनों घायल जवानों को खाई से बाहर निकालकर अपनी निजी वाहन से जिला अस्पताल गोपेश्वर पहुंचाया, जिससे समय रहते उन्हें उपचार मिल सका। जिसमें दो जवान जांबाज सिंह और धवन सिंह गंभीर घायल हैं। अस्पताल में डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद बताया कि जांबाज सिंह के सिर में हल्की चोट आई हैं। जबकि, धवन सिंह के सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आई हैं। वो बेहोशी की हालत में है। हादसे में घायल जवानों में जांबाज सिंह पुत्र जय भगवान सिंह (उम्र 29 वर्ष), निवासी- भिवानी, हरियाणा धवन सिंह (उम्र 28 वर्ष) शामिल है।
स्थिति गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने धवन सिंह को तत्काल हायर सेंटर रेफर कर दिया। सेना ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घायल जवान को एयरलिफ्ट कर उच्च चिकित्सा केंद्र भेज दिया है। बताया जा रहा है कि धवन सिंह अग्निवीर के रूप में देश की सेवा कर रहे हैं। दोनों जवान सिग्नल कंपनी, ज्योतिर्मठ में तैनात हैं।
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एचडीएफसी बैंक परिवर्तन ने 15,200 से ज्यादा जल निकायों का निर्माण किया
देहरादून। एचडीएफसी बैंक के मुख्य कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) कार्यक्रम, एचडीएफसी बैंक परिवर्तन ने घोषणा की है कि उसने पूरे भारत में कुल मिलाकर 15,289 से ज़्यादा जल निकायों का निर्माण किया हैं और उनकी मरम्मत की है। ये निकायें 10,430 से ज़्यादा गाँवों में फैले हैं और इनसे 14.92 लाख परिवारों को मदद मिली है। इसके श्स्वास्थ्य और स्वच्छताश् ( हेल्थ एंड हाइजीन) स्तंभ के तहत, 950 से ज़्यादा गांवों को सामुदायिक शुद्धिकरण प्रणालियों के माध्यम से सुरक्षित पेयजल भी उपलब्ध कराया गया है।
बैंक ने इन सभी क्षेत्रों में जल से जुड़े कई तरह के संसाधनों का निर्माण के साथ-साथ उनकी मरम्मत की है। इनमें खेतों में तालाब ( फार्म पोंडस), चेक डैम, पानी के बंटवारे के लिए जल मीनार, और स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों तथा घरों पर वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) प्रणालियाँ शामिल हैं। मध्य भारत में, वाटर पहल के माध्यम से लिफ्ट सिंचाई और रीचार्ज कुओं ने आदिवासी किसान समुदायों तक पानी की पहुँच बढ़ाई है। पेयजल के लिए, बैंक ने स्थानीय जल स्रोतों के विश्लेषण के आधार पर यूवी, आरओ या कई चरणों वाली शुद्धिकरण (मल्टी स्टेज फिल्ट्रेशन) तकनीक का उपयोग करके छोटे शुद्धिकरण संयंत्र लगाए हैं। इन्हें सामुदायिक जल टैंक, नल के कनेक्शन और पानी की गुणवत्ता की निगरानी करने वाली प्रणालियों का भी सहयोग मिला है।
केवल जल निकायें बनाने से ही खेती में बदलाव नहीं आता। एचडीएफसी बैंक परिवर्तन हर संरचनात्मक निवेश के साथ कृषि संबंधी सहायता भी देता है। इसमें सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियाँ माइक्रो इरिगेशन सिस्टमस), श्शेड नेट हाउसश्, श्जैव-इनपुट संसाधन केंद्रश् ( बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर्स) और श्बहु-स्तरीय खेतीश् (मल्टी लेयर फार्मिंग) के तरीके शामिल हैं। इन सभी के मिले-जुले प्रयासों से सिंचाई के अंतर्गत आने वाला क्षेत्र बढ़ा है, अनियमित वर्षा पर निर्भरता कम हुई है, और छोटे किसानों की फ़सलों की पैदावार में सुधार हुआ है। जल का उपयोग करने वाले सामुदायिक समूहों को श्जल बजटश् बनाने और पानी का समझदारी से उपयोग करने का प्रशिक्षण दिया जाता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि कोई भी जल संरचना बनने के लंबे समय बाद तक भी उपयोगी बनी रहे।
इस कार्यक्रम की रूपरेखा में सामुदायिक स्वामित्व (कम्युनिटी ओनरशिप) को केंद्रीय महत्व दिया गया है। श्महिला स्वयं-सहायता समूहोंश् और श्जल उपयोगकर्ता संघोंश् के साथ मिलकर तैयार की गई श्सहभागी ग्राम कार्य योजनाएँश् ( पार्टिसिपेटरी विलेज एक्शन प्लांस ) यह सुनिश्चित करती हैं कि हर निवेश स्थानीय प्राथमिकताओं के अनुरूप हो। जीआईएस -आधारित नियोजन प्लानिंग से किसी भी स्थान का चयन पूरी सटीकता के साथ किया जाता है। श्मनरेगाश् जैसी सरकारी योजनाओं के साथ तालमेल बिठाने से इस कार्यक्रम का प्रभाव और भी गहरा होता है, और काम की पुनरावृत्ति (डुप्लीकेशन) से बचा जा सकता है।
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बड़ी संख्या में सीमांत क्षेत्र पूर्व सैनिकों ने भाजपा ज्वाइन की
देहरादून। सीमांत क्षेत्र से संख्या में आए पूर्व सैनिकों ने आज भाजपा सदस्यता ग्रहण की है। इस अवसर सभी ने एक स्वर में स्वीकारा कि सैनिक के नाते वे हमेशा से राष्ट्रवादी विचारों के साथ रहे हैं और नई भूमिका में अब औपचारिक रूप से पार्टी ज्वाइन कर रहे हैं।
भाजपा मुख्यालय में हुए इस ज्वाइनिंग कार्यक्रम में प्रदेश महामंत्री तरुण बंसल और दीप्ति रावत ने धारचूला विधानसभा से आए सभी पूर्व सैनिकों को पटका पहनाकर पार्टी में स्वागत किया। इस दौरान अपने सम्बोधन में श्री बंसल ने सभी के सम्मान की जिम्मेदारी लेते हुए, राष्ट्रनिर्माण में पार्टी संग जुटने का आह्वाहन किया। वहीं जिक्र किया कि जब जॉइनिंग की ये बात सामने आई, तो हमे लगा कि सैनिक तो हमेशा भाजपा के रहे हैं। उन्होंने वैचारिक एवं मतदाता ने नाते प्रत्येक मौके पर पार्टी का साथ दिया है। लेकिन अब सेना में अपनी सेवा पूरी करने के बाद आप भाजपा के साथ राष्ट्र निर्माण में सहभागी करना चाहते हैं, तो इससे बेहतर खुशी की बात हमारे लिए नही हो सकती है।
प्रदेश महामंत्री दीप्ति रावत ने कहा कि आपने सेना में रहकर देश की सेवा की है, अब भाजपा में आकर काम करना भी देश सेवा का नया स्वरूप है। क्योंकि भाजपा ही वह पार्टी है जिसके लिए राष्ट्रभक्ति ही सर्वाेपरि है। इसलिए में विश्वासपूर्वक कह सकती हूं कि आप सही जगह आए हैं। पार्टी आपकी कार्यशैली पार्टी की संगठनात्मक क्षमता को बेहतर करने में उपयोग करेगी।
स्वामी1008 वीरेंद्रानंद महाराज की प्रेरणा से भाजपा में शामिल होने वाले धारचूला से आए पूर्व सैनिकों में कैप्टन भूपाल सिंह रावल, अध्यक्ष गौरव सेनानी संगठन, सू. मेजर, दीवान सिरवाल, सूवेदार पुष्कर वम, सूबेदार धन सिंह, नायब सूबेदार नारायण सिंह, हवलदार, किशन सिंह रावत, नयन सिंह रौतेला, सम्भू, भूपेन्द सिंह, जगत धामी, कैलाश निह, चन्द्र सिंह, सिपाही किशन सिंह, सडक सिंह गणेश सिंह, नायक, प्रेम बल्भ भट्ट, हवल्दार भूवन चन्द, विनोद सिंह, ह्यात सिह, गजेन्द्र सिंह, रोहित सिंह दोपटी, प्रकाश रावत, पंकज रावत, हवलवार भुवन चंद, कमान सिंह, हरीश मेहता, गोविन्द सिंह, नरेन्द्र सिंह, महेश सिह, उमेद सिंह,डिगर सिंह बोहरा प्रमुख रूप से शामिल रहे।
इस मौके पर प्रदेश उपाध्यक्ष शैलेंद्र बिष्ट, सरकार में दायित्वधारी गणेश भंडारी, प्रदेश कार्यालय सचिव जगमोहन रावत, प्रदेश सह मीडिया प्रभारी राजेंद्र नेगी, प्रदेश सोशल मीडिया संयोजक हिमांशु संगथानी, जिला महामंत्री इंदर लूंठी, आशीष गिरी भी उपस्थित रहे।
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स्वास्थ्य विभाग में बढ़े पद, अब 180 की जगह 335 पदों पर होगी नियुक्ति
देहरादून। उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड ने स्वास्थ्य विभाग में महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की भर्ती को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पदों की संख्या में बड़ा इजाफा किया है। पहले जहां इस भर्ती के तहत 180 पदों के लिए विज्ञप्ति जारी की गई थी, वहीं अब संशोधित अधिसूचना के माध्यम से कुल 335 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। यह निर्णय राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है, खासकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में जहां महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।
बोर्ड की जारी नई जानकारी के अनुसार इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 21 अप्रैल से शुरू होगी, जबकि आवेदन करने की अंतिम तिथि चार मई तय की गई है। इच्छुक और योग्य अभ्यर्थी निर्धारित समय सीमा के भीतर आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों में पहले से ही काफी उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से इस प्रकार की भर्तियों का इंतजार किया जा रहा था।
इस भर्ती का एक अहम पहलू यह भी है कि जिन अभ्यर्थियों ने पहले जारी विज्ञप्ति के तहत आवेदन किया था, उन्हें दोबारा आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। उनके पुराने आवेदन स्वतः ही मान्य रहेंगे, जिससे उन्हें किसी अतिरिक्त प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। यह निर्णय अभ्यर्थियों के लिए राहत भरा है और इससे उनकी मेहनत और समय दोनों की बचत होगी।
राज्य सरकार और चयन बोर्ड का उद्देश्य इस भर्ती के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को जमीनी स्तर तक मजबूत करना है। महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता न केवल प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, बल्कि वे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण कार्यक्रमों, पोषण जागरूकता और विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी अहम योगदान देती हैं। ऐसे में पदों की संख्या बढ़ाना सीधे तौर पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार से जुड़ा हुआ कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस भर्ती से राज्य के उन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बेहतर होगी जहां अभी भी संसाधनों की कमी महसूस की जाती है। महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता स्थानीय समुदाय के साथ सीधे जुड़कर काम करती हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन संभव हो पाता है।
भर्ती प्रक्रिया के तहत चयन की पूरी पारदर्शिता बनाए रखने का भी आश्वासन दिया गया है। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे आवेदन से पहले पात्रता, आयु सीमा, शैक्षणिक योग्यता और अन्य आवश्यक शर्तों की जानकारी ध्यानपूर्वक पढ़ लें, ताकि किसी प्रकार की त्रुटि से बचा जा सके।
कुल मिलाकर यह भर्ती न केवल रोजगार के नए अवसर प्रदान करेगी, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आने वाले समय में इसका सकारात्मक प्रभाव राज्य के स्वास्थ्य संकेतकों पर भी देखने को मिल सकता है।
महिला-शक्ति का समय
यह देश की संसदीय प्रणाली में ‘महापरिवर्तन’ का दौर है। संसद का विशेष सत्र 16, 17, 18 अप्रैल को महिला आरक्षण कानून को लागू करने और नए परिसीमन कानून को पारित करने पर विमर्श करेगा। लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हों, इस प्रावधान का बिल और कानून बीते 30 सालों से लटका पड़ा है। 1996 में देवगौड़ा सरकार के दौरान सबसे पहले महिला आरक्षण बिल पेश किया गया, तो संसद अगड़ी-पिछड़ी, फैशनेबल, दलित महिलाओं के खांचों में बंट गई थी। बिल को फाड़ दिया गया था। ऐसे भय और ऐसी आशंकाएं मुलायम सिंह यादव, शरद यादव, उमा भारती, लालू यादव सरीखे संसदीय नेताओं ने व्यक्त कीं कि बालकटी, फैशनपरस्त और ऊंचे घरानों की ही महिलाएं, आरक्षण के जरिए, संसद तक पहुंचेंगी। नतीजतन बिल को लटकाया और भटकाया जाता रहा। सितंबर, 2023 में यह बिल मोदी सरकार ने ‘नारी शक्ति वंदन विधेयक’ के तौर पर पारित कराया। नवंबर, 2023 में राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह कानून बन गया, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया। सरकार 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भी इसे लागू कर सकती थी, क्योंकि 2011 की जनगणना को आधार बनाया जाना था। लोकसभा की मौजूदा सीटों की संख्या 1971 की जनगणना पर आधारित थी। लंबे 55 साल के बाद परिवर्तन अनिवार्य है, क्योंकि जनसंख्या के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था भी बदल चुकी है। चूंकि यह मामला 2026 तक ‘फ्रीज’ रखा गया था, लिहाजा अब सरकार नया परिसीमन आयोग बना रही है और संसद से कानून पारित कराएगी। महिला आरक्षण कानून 2029 के लोकसभा चुनाव और उसके बाद के विधानसभा चुनावों और उपचुनावों पर लागू किया जा सके, लिहाजा संसद में 131वां संविधान संशोधन लाया जाएगा। संविधान संशोधन बिल पारित कराने के लिए सरकार को 362 सांसदों का समर्थन चाहिए अथवा सदन में उपस्थित सांसदों का दो-तिहाई बहुमत होना चाहिए। विपक्ष के पाले में 233 सांसद हैं, लिहाजा सरकार के लिए चुनौती है।
विपक्ष इसे भी मुद्दा बना रहा है और परिसीमन कानून पर बिल के विरोध में मत-विभाजन मांग सकता है। परिसीमन कानून तो साधारण बहुमत से पारित किया जा सकता है, लेकिन महिला आरक्षण संविधान संशोधन का विषय है, लिहाजा दो-तिहाई बहुमत की दरकार है। बुधवार को विपक्ष की बैठक प्रस्तावित थी। तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल में मतदान से सिर्फ एक सप्ताह पहले ही संसद का विशेष सत्र क्यों बुलाया गया और महिला आरक्षण तथा परिसीमन कानूनों पर संविधान संशोधन पारित कराने की योजना सरकार ने क्यों बनाई, विपक्ष इसी सवाल से चिपका है। कुछ विशेषज्ञ ऐसी व्याख्याएं भी कर रहे हैं कि महिला आरक्षण कानून 2039 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू नहीं हो सकता, क्योंकि 2027 की जनगणना के बाद एक और परिसीमन की आवश्यकता हो सकती है या 2029 तक परिसीमन का काम सम्पन्न नहीं हो सकता। बहरहाल राजनीति तो इस देश की हरेक धडक़न में है, लेकिन यह देश के सामाजिक, राजनीतिक, लैंगिक और संसदीय परिदृश्य बदलने का समय है। जो प्रस्ताव संसद के विचाराधीन है, उसके मुताबिक, राज्यों से 815 सांसद चुन कर लोकसभा में आएंगे, जबकि संघशासित क्षेत्रों से 35 सांसद चुने जाएंगे, लिहाजा 2029 में लोकसभा में 850 सांसद दीख सकते हैं। अभी यह संख्या 543 है। आरक्षण 15 साल के लिए होगा।


