
उत्तरकाशी जिला स्थापना दिवस – 24 फरवरी 1960 से 24 फरवरी 2026 तक अमर गौरव गाथा ।
। मदन पैन्यूली ।
आज 24 फरवरी 2026 को हिमालय की पुण्य धरा पर अवस्थित उत्तरकाशी जनपद अपना 66वाँ स्थापना दिवस मना रहा है। 24 फरवरी 1960 को तत्कालीन उत्तर प्रदेश राज्य के अंतर्गत टिहरी गढ़वाल से पृथक कर उत्तरकाशी को स्वतंत्र जिला घोषित किया गया। उस समय भारत के राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. सम्पूर्णानंद थे। सीमांत क्षेत्र के सुदृढ़ प्रशासन, विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से लिया गया यह निर्णय ऐतिहासिक और दूरदर्शी सिद्ध हुआ। उस समय जनसंख्या लगभग एक लाख के आसपास थी, जो आज बढ़कर लगभग साढ़े तीन लाख के समीप पहुँच चुकी है।
उत्तरकाशी केवल एक जिला नहीं, यह हिमालय की आत्मा और सनातन चेतना का जीवंत स्वर है। भागीरथी तट पर बसा यह नगर उत्तर की काशी कहलाता है। यहाँ स्थित पवित्र काशी विश्वनाथ मंदिर शिवभक्ति और आध्यात्मिक परंपरा का अखंड केंद्र है।
इसी जनपद में चारधामों में से दो दिव्य धाम स्थित हैं—
गंगोत्री मंदिर, जहाँ माँ गंगा के अवतरण की पावन गाथा गूँजती है, और
यमुनोत्री मंदिर, जहाँ से यमुना की जीवनदायिनी धारा प्रवाहित होती है।
यह भूमि भगीरथ की तपस्या, ऋषि-मुनियों की साधना और वेद-पुराणों की दिव्य परंपरा की साक्षी है। हर्षिल की शांति, दयारा बुग्याल की हरित चादर, डोडीताल की निर्मलता और नेलांग घाटी की विराटता इस जनपद को अनुपम बनाती है।
पर्यावरण की दृष्टि से उत्तरकाशी उत्तराखंड के सर्वाधिक हरित जनपदों में है। लगभग अस्सी प्रतिशत भूभाग वन क्षेत्र से आच्छादित है। देवदार, भोजपत्र और बुरांश के वन यहाँ की जैवविविधता और हिमालयी संतुलन की रक्षा करते हैं। गंगा और यमुना के उद्गम स्थल के रूप में यह जिला सम्पूर्ण भारत की जीवनरेखा का आधार है।
1960 में सीमित सड़कें, अल्प स्वास्थ्य सुविधाएँ और कठिन संचार व्यवस्था थी। आज चारधाम सड़क परियोजना, सुरंग निर्माण, आधुनिक विद्यालय, महाविद्यालय, स्वास्थ्य संस्थान, डिजिटल सेवाएँ और पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था ने विकास को नई गति दी है। युवाशक्ति सेना, प्रशासन, शिक्षा और खेल के क्षेत्र में देश का गौरव बढ़ा रही है। मातृशक्ति स्वावलंबन, संस्कृति और संस्कार की आधारशिला है।
आज आवश्यकता है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलें; पलायन की चुनौती को स्थानीय रोजगार और स्वरोजगार से अवसर में बदला जाए; सीमांत क्षेत्र की सुरक्षा और समृद्धि को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया जाए।
उत्तरकाशी भारत का एक जनपद भर नहीं, भारत की आत्मा का उज्ज्वल अंश है। यहाँ धर्म है पर धर्मान्धता नहीं; यहाँ आस्था है पर न्याय और निरपेक्षता के साथ; यहाँ सत्य है, शिव है, सुंदर है।
स्थापना दिवस के इस पावन अवसर पर जिले की समस्त मातृशक्ति, युवाशक्ति, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, किसान, सैनिक, व्यापारी, शिक्षक, विद्यार्थी और वरिष्ठ नागरिक—सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।
हे उत्तरकाशी,
तेरे हिमालय में राष्ट्र की अडिग शक्ति है,
तेरे जल में गंगा की पवित्रता है,
तेरी वादियों में ऋषियों का आशीष है।
तेरी पहचान तप, त्याग और अखंडता की ज्योति है।
तेरा विकास संतुलित हो,
तेरी एकता अक्षुण्ण रहे,
तेरा भविष्य उज्ज्वल बने,
और तू सदैव सत्य, शिवम, सुंदरम के आलोक से प्रकाशित रहे।
यह संदेश जनभावनाओं के सम्मान, सीमांत विकास, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक संरक्षण के उद्देश्य से समर्पित है।

