*LIVE: काशीपुर में शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबन्धक कमेटी, अमृतसर द्वारा आयोजित नगर कीर्तन*
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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को मसूरी रोड स्थित एक होटल में हिन्दुस्तान समाचार पत्र द्वारा आयोजित ’’हिमालय बचाओ अभियान-2025’’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने हिमालय और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने वालों को सम्मानित भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय की रक्षा के लिए प्रत्येक व्यक्ति को जागरूक करने के लिए हिन्दुस्तान अखबार द्वारा वर्ष 2012 में “हिमालय बचाओ अभियान“ की शुरूआत की गई थी। यह अभियान अब जन-जन का अभियान बन चुका है। जिससे जुड़कर लोग हिमालय की रक्षा करने के प्रति जागरूक हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिमालय हमारे देश की आत्मा, संस्कृति और प्रकृति की अनुपम धरोहर है। इससे निकलने वाली जीवनदायिनी नदियां करोड़ों लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराने के साथ ही ऊर्जा का प्रमुख स्रोत भी हैं। हिमालय में पाई जाने वाली दुर्लभ वनस्पतियां और जीव-जंतु भी हमारे पर्यावरण की महत्वपूर्ण धरोहर हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय के संरक्षण के लिए विकास के साथ पर्यावरण का संतुलन जरूरी है, जिस दिशा में राज्य सरकार द्वारा प्रयास किये जा रहे हैं। आज जलवायु से परिवर्तन एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हिमालयी क्षेत्रों में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए वन संरक्षण, जल संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के स्रोतों को बढ़ावा देने के लिए भी कार्य कर रही है। पौधारोपण, जल संरक्षण अभियान और पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से हम हिमालय के संरक्षण की दिशा में नियमित प्रयास किये जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में पर्यटन एक प्रमुख आर्थिक गतिविधि है। राज्य सरकार द्वारा सस्टेनेबल टूरिज्म को बढ़ावा देने के साथ ही राज्य में प्लास्टिक वेस्ट के प्रबंधन के लिए डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम प्रारम्भ किया गया। इस एक छोटी सी पहल से हिमालयी क्षेत्र में 72 टन कार्बन उत्सर्जन को कम करने में सफलता मिली।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय को संरक्षित करने के लिए हमें और अधिक कार्य करने होंगे। हिमालयी क्षेत्र में रहने वाले हमारे लोगों की ज्ञान, परंपराएं और जीवनशैली कि प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर जीवन जीना सिखाती है। उनके अनुभवों और पारंपरिक ज्ञान को पर्यावरण संरक्षण नीति में भी सम्मिलित करना चाहिए। जब प्रत्येक व्यक्ति हिमालय संरक्षण के प्रति जागरूक होकर अपनी जिम्मेदारी समझेगा, तभी हम इस अनमोल धरोहर को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रख पाएंगे।
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*हिमालय संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रही है सरकार – मुख्यमंत्री*
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि राज्य सरकार हिमालय संरक्षण को लेकर पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है, इस महत्वपूर्ण काम में हम सभी को अपनी भूमिका निभानी होगी।
मंगलवार को आईआरडीटी सभागार में आयोजित हिमालय दिवस समारोह में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी को हिमालय दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हिमालय मात्र बर्फीली चोटियों और विस्तृत पर्वतमालाओं का समूह नहीं है बल्कि ये सम्पूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप का जीवन स्त्रोत भी है। हिमालय न केवल भारत के उत्तर में अटल प्रहरी का काम करता है, बल्कि इसकी पर्वतीय नदियाँ पूरे देश की जीवनधारा हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय की ऊंची चोटियां, विस्तृत ग्लेशियर, नदियां और जैव विविधता से भरपूर वन हमें न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव कराते हैं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर जहां हिमालय से निकलने वाली नदियां देश के करोड़ों लोगों की प्यास बुझाती हैं वहीं इस पर पाए जानी वाली दुर्लभ जड़ी बूटियां आयुर्वेद का आधार हैं।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज हमारी इस अमूल्य धरोहर को गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है। जलवायु परिवर्तन, अनियंत्रित विकास, और प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन हिमालय के संतुलन को बिगाड़ रहे हैं। इसके ग्लेशियर पिघल रहे हैं, जो आने वाले समय में गंभीर जल संकट और पारिस्थितिकीय असंतुलन की बड़ी चुनौती बन सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब हिमालयी क्षेत्र में वर्षा की तीव्रता लगातार बढ़ रही है और अप्रत्याशित क्लाउड बर्स्ट तथा उनके परिणामस्वरूप भूस्खलन जैसी आपदाएँ बार-बार घटित हो रही हैं। इन घटनाओं की आवृत्ति और उनके प्रभाव दिन प्रति दिन बढ़ते जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में हमारे राज्य को कई भीषण प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ा है। इन गंभीर चुनौतियों से प्रभावी रूप से निपटने के लिए वैज्ञानिक संस्थानों और विशेषज्ञों के बीच समन्वय स्थापित करना अत्यंत आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी को ध्यान में रखते हुए, गत वर्ष सरकार ने उच्च स्तरीय समिति के गठन के लिए निर्देश जारी किए थे। अब इस वर्ष नवंबर में राज्य में जलवायु परिवर्तन पर ‘विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन’ का भी आयोजन किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि हिमालय की सुरक्षा केवल सरकार का ही कार्य नहीं है, बल्कि ये देश के प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। इसलिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के सहयोग एवं मार्गदर्शन में राज्य सरकार हिमालय संरक्षण को लेकर पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। इसी क्रम में सरकार डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम, ग्लेशियर रिसर्च सेंटर, जल स्रोत संरक्षण अभियान और जनभागीदारी कार्यक्रमों के माध्यम से हिमालय के दीर्घकालिक संरक्षण की दिशा में कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य में प्लास्टिक वेस्ट के प्रबंधन के लिए “डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम” प्रारम्भ किया गया है। इस एक छोटी सी पहल से हिमालयी क्षेत्र में 72 टन कार्बन उत्सर्जन को कम करने में सफलता मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें पर्यटन क्षेत्र में भी पर्यावरणीय संरक्षण की दिशा में ध्यान देना होगा क्योंकि अनियंत्रित और असंवेदनशील पर्यटन हिमालय के पर्यावरण के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है। इसके लिए हमें ‘’सस्टेनेबल टूरिज्म’’ को बढ़ावा देना होगा, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना पर्यटन का विकास किया जा सके।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में रहने वाले लोगों की इस कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका है। उनका ज्ञान, परंपराएं और जीवनशैली हमें सिखाती हैं कि किस प्रकार हम प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर जीवन जी सकते हैं। हमें उनके अनुभवों और पारंपरिक ज्ञान का सम्मान करते हुए उसे भी अपनी पर्यावरण संरक्षण नीति में सम्मिलित करना चाहिए। छोटे-छोटे प्रयास, जैसे पानी की बचत, पेड़ों को लगाना और प्लास्टिक का कम से कम उपयोग करना, हिमालय की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी क्रम में सरकार ने दो से नौ सितंबर तक प्रतिवर्ष हिमालय जनजागरुकता सप्ताह मनाने का निर्णय लिया है।
इस मौके पर पद्मभूषण डॉ अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि इस साल समूचे हिमालयी क्षेत्र में आपदाएं आई हैं, अब साल दर साल इस तरह की घटनाओं से मानूसन काल डराने लगा है। हमें हिमालय के पर्यावरण को बचाने के लिए नए सिरे से सोचना होगा।
इस मौके पर विधायक श्री किशोर उपाध्याय, मेयर श्री सौरभ थपलियाल, दर्जाधारी श्रीमती मधु भट्ट, महानिदेशक यूकॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, श्री सूर्यकांत धस्माना सहित प्रमुख लोग शामिल हुए।
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मुुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में उत्तराखंड निवेश और आधारिक संरचना विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) की कार्यकारिणी समिति की बैठक में राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़ी परियोजनाओं के नियोजन एवं क्रियान्वयन से जुड़े कामों को तत्परता से संचालित करने पर जोर दिया गया। बैठक में यूआईआईडीबी के संगठनात्मक ढांचे का सुदृढीकरण करने तथा विभिन्न स्तरों पर अधिकारों के विकेन्द्रीकरण के संबंध में भी विस्तार से चर्चा कर इससे जुड़े प्रस्ताव बोर्ड की आगामी बैठक में रखने का निश्चय किया गया।
यूआईआईडीबी की कार्यकारिणी समिति की 8वीं बैठक सचिवालय स्थित मुख्य सचिव सभागार में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने यूआईआईडीबी के कार्यों की विस्तार से समीक्षा कर शारदा कॉरीडोर, ऋषिकेश कॉरीडोर एवं हरिद्वार कॉरीडोर परियोजनाओं के़े कार्यों पर विशेष ध्यान दिए जाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि ऋषिकेश में त्रिवेणीघाट परियोजना के तहत घाट पर गंगाजल की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाय। इसके लिए हाइड्रोलॉजीकल अध्ययन कराते हुए विशेषज्ञों द्वारा सुझाए जाने वाले आवश्यक उपाय अमल में लाए जायें। ऋषिकेश में पुराने रेलवे स्टेशन की भूमि पर भूमिगत पार्किंग की व्यवस्था सहित हरित पार्क एवं हेरीटेज फारेस्ट वाक-वे के निर्माण की परियोजना के प्रस्तावों की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि इस परियोजना के रख-रखाव एवं संचालन की व्यवहार्यता का समुचित आकलन कर लिया जाय। मुख्य सचिव ने कहा कि हऱिद्वार-ऋषिकेश तक रैपिड रेल ट्रांसपोर्ट सिस्टम के विस्तार एवं ऋषिकेश से देहरादून के मध्य रेलवे लाईन के निर्माण किए जाने की संभावनाओं को देखते हुए ऋषिकेश में रेलवे स्टेशन व इसके निकटवर्ती क्षेत्रों में भविष्य की आवश्यकताओं का ध्यान रख जरूरी अवस्थापना सुविधाएं विकसित करने के प्राविधान भी शामिल किये जायें। मुख्य सचिव ने ऋषिकेश में शहर के अंदर भीड़ एवं यातायात के अत्यधिक दबाव को देखते हुए आईएसबीटी और चारधाम यात्रा पंजीकरण केन्द्र को उपयुक्त स्थल पर पुनर्स्थापित करने के मामले में मंडलायुक्त, पुलिस, जिला प्रशासन, पर्यटन, परिवहन, संयुक्त रोटेशन व्यवस्था समिति सहित सभी संबद्ध हितधारकों से विचार-विमर्श कर प्रस्ताव तैयार किए जाने के निर्देश दिए।
हरिद्वार कॉरीडोर की परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि आगामी कुंभ मेला को देखते हुए इस परियोजना के स्वीकृत कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाय। मुख्य सचिव ने हरिद्वार में सुरक्षा, यातायात एवं भीड़ प्रबंध के लिए उच्च तकनीकी व आधुनिक सुविधाओं से युक्त इंटीग्रेटेड कमांड एवं कंट्रोल सेंटर बनाए जाने के लिए मेला नियंत्रण कक्ष के निकट उपयुक्त स्थान की व्यवस्था किए जाने के साथ ही इस परियोजना के प्रस्तावों में मेलाधिकारी, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक के सुझावों को शामिल किए जाने की हिदायत दी। हरिद्वार में घाटों के विस्तार, पार्किंग, रोपवे, पैदल मार्गों के निर्माण तथा परिवहन, सार्वजनिक प्रसारण व्यवस्था, विभिन्न प्रकार की नागरिक सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन किए जाने के निर्देश देते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि चंडीघाट में सांस्कृतिक केन्द्र और मल्टी मॉडल टूरिज्म निर्माण की महत्वाकांक्षी योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए भी तेजी से आगे बढा जाये। मुख्य सचिव ने देहरादून में यमुना कॉलोनी के पुनर्विकास, नए ग्रीनफील्ड शहरों का विकास की योजना सहित यूआईआईडीबी द्वारा प्रस्तावित अन्य योजनाओं के लिए भी समुचित प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव श्री आर.के. सुधांशु, श्री आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव श्री शैलेश बगौली, डॉ. वी. षणमुगम, श्री युगल किशोर पंत, सीसीएफ डॉ. पराग मधुकर धकाते, रेजिडेंट कमिश्नर श्री अजय मिश्रा, जिलाधिकारी हरिद्वार मयूर दीक्षित एवं मेलाधिकारी श्रीमती सोनिका, अपर सचिव श्री अभिषेक रूहेला सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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*मुख्यमंत्री ने पंडित गोविंद बल्लभ पंत की जयंती पर किया उनका भावपूर्ण स्मरण*
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने भारत रत्न पं.गोविन्द बल्लभ पंत का उनकी जयंती पर भावपूर्ण स्मरण किया है। पं.गोविन्द बल्लभ पंत जयंती की पूर्व संध्या पर जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने उन्हें महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, देशभक्त, समाजसेवी तथा कुशल प्रशासक बताया। उन्होंने कहा कि पं. पंत ने देश को नई दिशा देने के साथ ही कुली बेगारी प्रथा तथा जमींदारी उन्मूलन के लिए निर्णायक संघर्ष कर समाज में व्याप्त इन बुराइयों को मिटाने में अहम भूमिका निभाई।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हिन्दी को राजभाषा के रूप में प्रतिष्ठित कराने तथा उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री एवं देश के गृहमंत्री रहते आधुनिक भारत के निर्माण में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पं. गोविन्द बल्लभ पंत का प्रेरणादायी नेतृत्व देशवासियों के लिये सदैव प्रेरणादायी रहेगा।
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रुद्रप्रयाग
दिनांक: 09 सितम्बर 2025।
*अंतर-मंत्रालय केंद्रीय टीम ने जनपद के आपदा-प्रभावित क्षेत्रों का किया स्थलीय निरीक्षण*
*तहसील बसुकेदार क्षेत्र के अंतर्गत आपदा प्रभावित क्षेत्रों में भारत सरकार की अंतरमंत्रालयीय टीम ने हवाई सर्वे कर लिया क्षति का विस्तृत जायजा*
*जिलाधिकारी ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से जनपद में हुयी विभिन्न परिसंपत्तियों की क्षति से टीम को अवगत कराया*
*टीम ने तालजामण, उछोला, स्यूर बांगर सहित अन्य आपदा प्रभावित क्षेत्र में हो रहें भू-धसाव का किया हवाई सर्वे*
*टीम ने बड़ेथ में आपदा प्रभावित स्थानीय निवासियों से बात कर आपदा से हुयी क्षति की जानकारी ली*
*प्रभावितों के जान–माल को हुए नुकसान की समीक्षा कर सरकार को जल्द भेजेंगे रिपोर्ट*
केंद्र सरकार द्वारा जनपद के आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए गठित उच्च-स्तरीय अंतर-मंत्रालय केंद्रीय टीम (IMCT) ने मंगलवार को जनपद के तहसील बेसुकेदार क्षेत्र अंतर्गत आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थलीय निरीक्षण किया।
टीम के निरीक्षण का उद्वेश्य आपदा के कारण हुए नुकसान का विस्तृत आकलन करना और राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे राहत और पुनर्वास कार्यों की समीक्षा करना रहा।
टीम के सदस्य कल देर शाम अगस्तमुनि हेलीपेड पहुंचे जहां जिलाधिकारी प्रतीक जैन द्वारा उनका स्वागत किया गया। तत्पश्चात जिलाधिकारी द्वारा टीम को जिला कार्यालय सभागार में जनपद में आपदा के दौरान परिसंपत्तियों को हुए नुकसान तथा जन हानि से सम्बंधित आंकड़ों की विस्तृत जानकारी दी गई।
आज प्रातः टीम द्वारा बड़ेथ तक सड़क मार्ग से आपदा प्रभावित इलाकों का स्थलीय निरीक्षण किया गया तथा स्थानीय लोगों, प्रशासन एवं संबंधित विभागीय अधिकारियों से क्षति और पुननिर्माण कार्यों के आंकलन की जानकारी ली गयी।
टीम ने आपदा में प्रभावित क्षेत्र में कार्यरत अधिकारियों और स्थानीय प्रभावित लोगों के साथ ग्राम बड़ेथ में बातचीत कर स्थिति की समीक्षा की। स्थानीय लोगों ने टीम के समक्ष अपनी समस्याएं रखी तथा उनके निराकरण किए जाने का अनुरोध किया। आपदा प्रभावित लोगों ने उनके मकानों,फसलों और व्यवसायों सहित विभिन्न परिसंपत्तियों को हुए नुकसान की जानकारी दी तथा टीम से क्षेत्र में हेलीपैड निर्माण, पुनर्वास, भूगर्भीय सर्वेक्षण कराने, रोजगार, पुर्नस्थापन और परिस्थिति क्षतिपूर्ति (मुआवजा) स्वास्थ्य सुविधाएं आदि जल्द उपलब्ध कराने की मांग की।
स्थानीय ग्रामीणों ने आपदा प्रबंधन एवं राहत कार्यों में जिला प्रशासन, पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, डीडीआरएफ तथा अन्य एजेंसियों द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई की सराहना की। साथ ही, उन्होंने विभागीय अधिकारियों से पुनर्वास कार्यों, प्रभावित परिवारों को दी जा रही सहायता, राशन व चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता, अस्थायी आश्रयों की व्यवस्था तथा सड़क मार्गों को शीघ्र खोलने के प्रयासों की सराहना की।
टीम द्वारा स्थलीय निरीक्षण के साथ हवाई सर्वे कर आपदा से प्रभावित क्षेत्रों छैनागाड़,तालजमण, बगड़तोक,जौला, डुंगर भटवाड़ी, स्यूर आदि की स्थिति का बारीकी से अध्ययन किया, निरीक्षण के दौरान टीम द्वारा बुनियादी ढाँचे की क्षति, सड़कों, पुलों, सार्वजनिक भवनों, बिजली एवं जल आपूर्ति लाइनों को हुए नुकसान के आकलन के साथ साथ कृषि, फसलों, पशुधन और स्थानीय आजीविका के अन्य साधनों को हुए नुकसान का जायज़ा लिया। टीम ने निरीक्षण के दौरान आपदा के समय की गई भोजन, पेयजल, चिकित्सा सहायता और अस्थायी आश्रयों की उपलब्धता जैसे राहत बचाव कार्यों की जानकारी भी ली।
अंतर मंत्रालय केंद्रीय टीम का नेतृत्व कर रहें संयुक्त सचिव भारत सरकार डॉ.आर. प्रसन्ना ने कहा कि उनके इस दौरे का मुख्य उद्देश्य आपदा से हुई वास्तविक क्षति का आकलन करना है ताकि भारत सरकार को प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित क्षेत्रों के लिए आवश्यक सहायता एवं पुनर्निर्माण कार्यों की योजना शीघ्र बनाई जा सके।
उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावितों के जान–माल को हुए नुकसान की जानकारी स्थानीय प्रशासन के माध्यम से ली जा रही है। टीम द्वारा किए गए हवाई सर्वेक्षण, स्थलीय निरीक्षण एवं प्रशासन से हुई विस्तृत चर्चा से प्राप्त जानकारी को संकलित कर विस्तृत रिपोर्ट भारत सरकार को भेजी जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर आपदा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, बुनियादी ढाँचे की बहाली तथा दीर्घकालिक सुरक्षा उपायों के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
टीम प्रभावितों के मकान , आजीविका, जमीनों, फसलों आदि परिसंपत्तियों को हुए नुकसान से संबंधित रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी तथा उसके बाद राहत पैकेज की घोषणा की जाएगी।
जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने कहा कि यह निरीक्षण आपदा प्रबंधन और प्रभावित लोगों को त्वरित सहायता प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने लोगों की प्रमुख समस्याओं के निराकरण हेतु किए जा रहे कार्यों की जानकारी लोगो को दी उन्होंने इस क्षेत्र की प्रमुख मांग हेलीपैड निर्माण हेतु बड़ेथ के पास मिनी स्टेडियम को हेलीकॉप्टर लैंडिंग हेतु विकसित करने का आश्वासन दिया। उन्होंने छैनागाड़ में गुमशुदा लोगों की तलाश करने हेतु खोज बचाव कार्यों में तेजी से कार्य करने का आश्वासन दिया, उन्होंने बताया कि मा० मुख्यमंत्री द्वारा आपदा के कारण पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त आवासों के मुआवजे की राशि को 2 लाख से बड़ा कर 05 लाख कर दिया गया है और प्रभावितों को मुआवजा देने का कार्य निरंतर गतिमान है, उन्होंने स्थानीय लोगों की मांग पर अधिकारियोंको प्रभावित क्षेत्रों में पुनः क्षति का आकलन करने तथा भूगर्भीय सर्वेक्षण कराने के निर्देश दिए, उन्होंने तालजामण तक वैकल्पिक मार्ग बस्टी से सुचारू करने के कार्य की जानकारी दी,उन्होंने कहा कि टीम अपनी सिफारिशों की विस्तृत रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगी, जिस पर सरकार द्वारा अंतिम निर्णय लिया जाएगा। टीम का यह दौरा आपदा के बाद पुनर्निर्माण और जन जीवन बहाली सुनिश्चित करने तथा केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोगात्मक प्रयासों का हिस्सा है। जिलाधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने मानसून काल के दौरान जनपद में हुई आपदा से क्षति तथा पुनर्वास कार्यों हेतु 1850 करोड रुपए का प्रस्ताव समिति के सम्मुख रखा है।
टीम का नेतृत्व संयुक्त सचिव भारत सरकार आर. प्रसन्ना ने किया तथा टीम के अन्य सदस्य निदेशक वित्त शैलेश कुमार,मुख्य अभियंता पंकज सिंह, उपनिदेशक विकास सचान, मोहित पूनिया प्रमुख सलाहकार (ULMMC)उपस्थित रहे।
इस दौरान जिलाधिकारी प्रतीक जैन, पुलिस अधीक्षक अक्षय प्रलाद कोंडे, सीडीओ राजेंद्र सिंह रावत, एडीएम श्याम सिंह राणा, एसडीएम उखीमठ भगत सिंह फोनिया, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार, खंड विकास अधिकारी अगस्तमुनि प्रवीण भट्ट, अधिशासी अभियंता लोनिवि,सिंचाई सीएमओ डॉ राम प्रकाश सहित संबंधित जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
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*✍🏻अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल ने पौड़ी में किया आपदा प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण*
*✍🏻सैंजी गांव में ग्रामीणों से संवाद; राहत कार्यों की सराहना*
*✍🏻आपदा की क्षति का केंद्रीय स्तर पर आकलन, भारत सरकार को भेजी जाएगी विस्तृत रिपोर्ट*
*पौड़ी/09 सितंबर 2025:*
मानसून के दौरान उत्तराखंड में आयी दैवीय आपदा से हुए नुकसान का वैज्ञानिक आकलन करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा गठित अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल ने मंगलवार को जनपद पौड़ी गढ़वाल का दौरा कर आपदा प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान दल ने तहसील पौड़ी अंतर्गत सैंजी गांव का भ्रमण कर ग्रामीणों से संवाद किया तथा राहत कार्यों, आवश्यकताओं और समस्याओं का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।
दल ने क्षतिग्रस्त घरों, सड़कों, पुलों, सार्वजनिक भवनों, पेयजल योजनाओं, विद्युत लाइनों, कृषि भूमि, फसलों, पशुधन, आजीविका से जुड़े संसाधनों की क्षति तथा व्यक्तिगत क्षति का गहन अध्ययन किया। निरीक्षण के दौरान दल ने आपदा के समय उपलब्ध कराई गई खाद्यान्न सामग्री, पेयजल, चिकित्सा सहायता, अस्थायी आश्रयों, बचाव कार्यों तथा अन्य मूलभूत सेवाओं की जानकारी प्राप्त की। साथ ही उन्होंने गांव में हुई क्षति का ड्रोन से किए गए सर्वे का अवलोकन किया। दल ने प्रशासन द्वारा राहत कार्यों में की गई त्वरित कार्रवाई की भी सराहना की और संतोष व्यक्त किया।
केंद्रीय दल के नेतृत्वकर्ता संयुक्त सचिव आर. प्रसन्ना ने बताया कि यह निरीक्षण आपदा से हुई वास्तविक क्षति का तथ्यात्मक आकलन करने तथा एक विस्तृत प्रतिवेदन केंद्र सरकार को सौंपने के लिए किया गया। उन्होंने कहा कि इससे प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्निर्माण तथा जनजीवन सामान्य करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने कहा कि दल द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार द्वारा आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे। यह प्रयास केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय बढ़ाकर पुनर्निर्माण कार्यों को गति प्रदान करेगा।
केंद्रीय दल का नेतृत्व भारत सरकार के संयुक्त सचिव आर. प्रसन्ना ने किया। दल में उप निदेशक विकास सचान, मुख्य अभियंता पंकज सिंह तथा वित्त निदेशक शैलेश कुमार शामिल थे।
इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी अनिल गर्ब्याल, जिला विकास अधिकारी मनविंदर कौर, पुलिस क्षेत्राधिकारी त्रिवेंद्र सिंह राणा एवं संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
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भारत सरकार की अंतर मंत्रालय केंद्रीय टीमों द्वारा आज जनपद रुद्रप्रयाग, पौढ़ी और नैनीताल में संबंधित जिला प्रशासन, स्थानीय जनमानस और संबंधित पक्षों से वार्तालाप करते हुए मानसून काल में हुई आपदा की क्षति का आकलन करने हेतु स्थलीय निरीक्षण किया गया।
जनपद नैनीताल द्वारा मानसून काल में लगभग 443.42 करोड़ के नुकसान, जिसमें आपदा न्यूनीकरण मद में रुपए 285 करोड़ एवं विभिन्न विभागीय परिसंपत्तियों को लगभग रु 158 करोड़ होने का नुकसान का आकलन किया गया।
इसी प्रकार जनपद रुद्रप्रयाग और पौड़ी द्वारा भी विभिन्न परिसंपत्तियों के नुकसान से केंद्रीय टीम को अवगत कराया गया।
इस दौरान केंद्रीय टीमों द्वारा स्थानीय लोगों तथा संबंधित पक्षों से भी आपदा से हुए नुकसान के संबंध में फीडबैक प्राप्त की।
केंद्रीय दल के नेतृत्वकर्ता संयुक्त सचिव भारत सरकार आर प्रसन्ना ने अवगत कराया है कि यह निरीक्षण राज्य में आपदा से हुई वास्तविक क्षति का तथ्यात्मक आकलन करने तथा एक विस्तृत प्रतिवेदन केंद्र सरकार को सौंपने के लिए किया गया है। उन्होंने कहा कि इससे प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्निर्माण, पुनर्वास तथा जनजीवन को सामान्य करने के लिए प्रभावी कदम उठाने में सहायता मिलेगी।
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मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने समृद्ध जैव विविधता से परिपूर्ण उत्तराखंड राज्य में वन पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए अभिनव प्रयास किए जाने और ईको टूरिज्म के विकास हेतु चयनित स्थलों के वन विश्राम गृहों को ईको एवं नेचर कैंप के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने कहा है कि नंदा देवी शिखर को पर्वतारोहण अभियानों के लिए खोले जाने के प्रस्ताव के संबंध में केन्द्रीय गृह मंत्रालय से आग्रह किया जाएगा। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को राज्य की पर्वतारोहण की नीति की समीक्षा कर आवश्यकतानुसार नई नीति बनाए जाने और ट्रैकिंग के नियमों को शीघ्र लागू कर इससे संबंधित अनुमति के लिए सिंगल विंडो सिस्टम को भी आगामी 15 नवंबर तक संचालित करने की हिदायत दी है।
मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने ईको टूरिज्म के विकास के लिए गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) की सचिवालय स्थित सभागार में मंगलवार को आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि राज्य में ईको टूरिज्म के विकास की बेहतर संभावनाओं को साकार करने के लिए चिन्हित 25 नई योजनाओं पर तेजी से काम किया जाय। इन स्थलों को जबरखेत मॉडल की तर्ज पर विकसित कर इनमें वनों से अनुराग रखने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षक सुविधाएं जुटाई जांय। ताकि फॉरेस्ट टूरिस्ट यहां लंबे समय तक टिके रहें और बेहतर अनुभव के साथ वापस लौटें।
मुख्य सचिव ने ऋषिकेश के निकट बीटल्स आश्रम के रूप में विख्यात चौरासी कुटिया का पर्यटन के दृष्टिकोण से पुनर्विकास किए जाने की योजना पर भी समयबद्ध ढंग से काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस आश्रम से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों एवं अन्य संदर्भों को ऋषिकेश एवं कोलकाता से संकलित कर प्रदर्शित करने की व्यवस्था की जाय।
बैठक में मुख्य वन संरक्षक श्री पी.के. पात्रो ने ईको टूरिज्म विकास की परियोजनाओं की प्रगति तथा प्रस्तावित योजनाओं की जानकारी दी।
बैठक में सचिव वन सी रविशंकर, अपर सचिव श्री विनीत कुमार, अपर प्रमुख वन संरक्षक (वन्य जीव) श्री विवेेक पाण्डेय, मुख्य वन संरक्षक श्री पी.के. पात्रो, अपर निदेशक पर्यटन पूनम चंद सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहेे।
[09/09, 8:17 pm] +91 94101 89723: *मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मैक्स हॉस्पिटल में जाकर पूर्व मुख्यमंत्री श्री भुवन चंद्र खंडूरी के स्वास्थ्य का हालचाल जाना*
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी आज देहरादून स्थित मैक्स हॉस्पिटल पहुंचे, जहां उन्होंने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ राजनेता श्री भुवन चंद्र खंडूरी के स्वास्थ्य की जानकारी प्राप्त की। श्री खंडूरी वर्तमान में स्वास्थ्य संबंधी कारणों से अस्पताल में उपचाररत हैं।
मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों से श्री खंडूरी के स्वास्थ्य की स्थिति की जानकारी ली और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
इस अवसर पर उत्तराखंड विधानसभा की अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खंडूरी भूषण भी उपस्थित रहीं। मुख्यमंत्री ने उनसे भी श्री खंडूरी के स्वास्थ्य एवं उपचार की जानकारी ली |
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पड़ोसी देश नेपाल के राजनैतिक हालातों के मद्देनजर नेपाल से लगी राज्य की सीमाओं की सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी समीक्षा बैठक ले रहे हैं।
बैठक में सीमा सुरक्षा बल के वरिष्ठ अधिकारीगण, मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, प्रमुख सचिव, एडीजी लॉ एंड ऑर्डर, एडीजी इंटेलिजेंस,कुमाऊं कमिश्नर, पुलिस महानिरीक्षक कुमांऊ,चंपावत, पिथौरागढ़ और उद्यम सिंह नगर जिले के जिलाधिकारी एवं पुलिस कप्तान भी उपस्थित हैं।
[09/09, 9:57 pm] +91 94101 89723: मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री आवास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पड़ोसी देश नेपाल में हाल के दिनों में उत्पन्न हुए राजनीतिक हालातों को ध्यान में रखते हुए राज्य के तीन सीमांत जनपदों—चंपावत, पिथौरागढ़ और उधम सिंह नगर—के जिला प्रशासन, सशस्त्र सीमा बल (SSB) के अधिकारियों एवं पुलिस प्रशासन के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में नेपाल से सटी उत्तराखण्ड की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर सुरक्षा को लेकर संपूर्ण स्थिति की समीक्षा की गई |
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नेपाल से लगी सीमाओं पर सघन चेकिंग अभियान चलाए जाएं और वहां किसी भी असामाजिक या उत्पाती तत्व की गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जाए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया की निगरानी भी सतत रूप से की जाए ताकि किसी भी प्रकार की अफवाह, भ्रामक सूचना या उकसाने वाले कंटेंट पर समय रहते कार्रवाई की जा सके। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि वे केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों एवं SSB के साथ निरंतर संपर्क व समन्वय बनाकर कार्य करें। सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों, स्थानीय ग्राम समितियों, पुलिस बल एवं वन विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर सामूहिक भागीदारी से निगरानी व्यवस्था को सशक्त बनाया जाए।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सीमाओं से लगे प्रवेश मार्गों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और सीमा पार से होने वाले आवागमन पर विशेष सतर्कता बरती जाए। उन्होंने भारत सरकार द्वारा जारी सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का कठोरता से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, साथ ही आवश्यकतानुसार अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती के भी आदेश दिए।
बैठक में सीमांत क्षेत्रों की सुरक्षा चुनौतियों, सामुदायिक भागीदारी, खुफिया सूचना तंत्र की मजबूती, तथा केंद्रीय एजेंसियों से तालमेल के विभिन्न पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
इस उच्चस्तरीय बैठक में राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, प्रमुख सचिव (गृह), एडीजी लॉ एंड ऑर्डर, एडीजी इंटेलिजेंस, कुमाऊं मंडलायुक्त, कुमाऊं परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक, तथा चंपावत, पिथौरागढ़ और उधम सिंह नगर जिलों के जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक व सशस्त्र सीमा बल के अधिकारी भी उपस्थित रहे।


