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शांतिकुंज: आपदा की घड़ी में सेवा का सशक्त प्रतीक ।

Pahado Ki Goonj

शांतिकुंज: आपदा की घड़ी में सेवा का सशक्त प्रतीक ।

मदन पैन्यूली बडकोट उतरकाशी ।

भारत में जब भी कोई आपदा आती है, भूकंप हो, बाढ़ हो, अग्निकांड हो या तूफान। तब केवल सरकारी तंत्र ही नहीं, कुछ स्वयंसेवी संस्थाएँ भी अग्रिम पंक्ति में आकर सेवा कार्यों को संभालती हैं। ऐसी ही एक संस्था है हरिद्वार स्थित शांतिकुंज, जो अखिल विश्व गायत्री परिवार का मुख्यालय एवं युग निर्माण योजना का केंद्र है। यह संस्थान आध्यात्मिक जागरण के साथ ही आपदा राहत, सामाजिक सुधार और मानवीय सेवा में भी अद्वितीय भूमिका निभा रही है।

संस्थापक के आदर्शों से प्रेरित सेवा
शांतिकुंज की स्थापना युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य और वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा ने वर्ष 1971 में की थी, जिनके ध्येय सूत्र था- हम सुधरेंगे-युग सुधरेगा, हम बदलेंगे-युग बदलेगा। उनके द्वारा प्रारंभ किया गया यह अभियान आज लाखों-करोडों लोगों को दुराचार, नशा, अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों से मुक्त कर, उन्हें आध्यात्मिक और सद्गुणयुक्त जीवन की दिशा में प्रेरित कर रहा है।

आपदा राहत में तत्परता और समर्पण
गायत्री परिवार के सेवाकार्य केवल संस्थान तक सीमित नहीं हैं। आपदा राहत के क्षेत्र में संस्था ने कई बार अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। गुजरात भूकंप में न केवल राहत सामग्री भेजी गई, बल्कि घायल पीड़ितों के लिए स्वास्थ्य शिविर और बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था भी की गई। ओडिशा तूफान में हजारों बेघर लोगों को भोजन, वस्त्र और आवश्यक सामग्री प्रदान की गई। हरिद्वार-लक्सर बाढ़ में प्रभावितों को राशन, बर्तन, टेंट, पशुओं के लिए चारा तक पहुँचाया गया। लालढांग व कनखल अग्निकांड में प्रभावित परिवारों के लिए आवश्यक राहत सामग्री वितरित की गई। हर वर्ष सर्दियों में गरीबों, साधुओं और तीर्थयात्रियों को कंबल वितरण का कार्य भी शांतिकुंज द्वारा नियमित रूप से किया जाता है।

उत्तरकाशी आपदा में त्वरित सहायता
हाल ही में उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद के धराली गाँव में आई प्राकृतिक आपदा के बाद शांतिकुंज ने एक बार पुनः अपनी तत्परता दिखाई। 7 अगस्त 2025 को संस्था की ओर से एक विशेष आपदा राहत दल धराली के लिए रवाना हुआ। इस दल में  इंद्रजीत सिंह, दिनेश मैखुरी के नेतृत्व में एक आपदा प्रबंधन से प्रशिक्षित 8 लोग शामिल थे। ये लोग आवश्यक दवाइयाँ, सूखा राशन, खाद्य सामग्री और राहत उपकरण लेकर उत्तरकाशी पहुँचे। वहाँ से सामग्री रातों-रात हेलीकॉप्टर द्वारा बेस कैंप तक पहुँचाई गई। इस राहत कार्य का संचालन व्यवस्थापक  योगेंद्र गिरी जी के मार्गदर्शन में किया गया, जिसमे स्थानीय परिजन जिला समन्वयक जय स्वरूप बहुगुणा,,पत्रकार सी पी बहुगुणा,राधाबलभ नौटियाल आदि परिजनों के माध्यम से राहत सामग्री आपदा प्रबंधन अधिकारीयो को सौंपी गई ।

जिसमें स्थानीय प्रशासन, सेना, बीआरओ, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के साथ मिलकर सहयोग किया गया।

देशभर में सक्रिय राहत नेटवर्क
शांतिकुंज ने देश के हर प्रांत में आपदा राहत दलों का गठन किया है, जो किसी भी आपदा की सूचना मिलने पर तुरंत सेवा कार्यों में जुट जाते हैं। इन स्वयंसेवकों को न केवल सेवा की भावना से प्रशिक्षित किया गया है, बल्कि उन्हें आपातकालीन परिस्थिति में निर्णय लेने, राहत सामग्री का वितरण, चिकित्सा सहायता और पुनर्वास जैसे कार्यों में भी दक्ष किया गया है।

एक सेवा परंपरा का जीवंत उदाहरण
गायत्री परिवार यह सिद्ध करता है कि अध्यात्म केवल पूजा-पाठ या ध्यान-योग तक सीमित नहीं है, बल्कि दीन-दुखियों की सेवा, पीड़ित मानवता के लिए कार्य और राष्ट्र के प्रति समर्पण भी सच्चे अध्यात्म के अंग हैं।

संस्था की अधिष्ठात्री श्रद्धेया शैल बाला पंड्या, संरक्षक श्रद्धेय डॉ. प्रणव पंड्या, और देवसंस्कृति विश्व विद्यालय के प्रतिकुलपति युवा आइकॉन डॉ. चिन्मय पंड्या के नेतृत्व में शांतिकुंज एक ऐसी सेवा परंपरा को आगे बढ़ा रहा है जो समाज को जागरूक, सशक्त और संवेदनशील बना रही है।

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