रुद्र्रप्रयाग। देवस्थानम बोर्ड को भंग करने और मास्टर प्लान के विरोध में जून महीने से कम कपड़े पहनकर धरना दे रहे आचार्य संतोष त्रिवेदी केदारनाथ पहुंचे, जहां तीर्थ-पुरोहितों ने उनका जोरदार स्वागत किया। इस दौरान रुद्राभिषेक पाठ किया गया और उन्हें वस्त्र पहना कर शाॅल भेंट की गई। तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि आचार्य त्रिवेदी ने तीर्थ पुरोहितों के हक के लिए जो लड़ाई लड़ी है, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता है। दरअसल चारधामों सहित अन्य मठ और मंदिरों को देवस्थानम बोर्ड में शामिल करने से तीर्थ पुरोहित समाज में काफी आक्रोश है। उनका कहना है कि देवस्थानम बोर्ड के गठन के बाद से उनका हक छीना जा रहा है। इसी को लेकर पुरोहित, आचार्य संतोष त्रिवेदी ने केदारनाथ धाम में जून महीने से ही आंदोलन शुरू कर दिया था। उन्होंने भारी बर्फबारी और बारिश के बीच भी अपना आंदोलन जारी रखा। पिछले महीने उनकी तबीयत खराब हो गई थी। उन्हें एयर लिफ्ट कर ऋषिकेश एम्स में भर्ती कराया गया। इसके बाद दूसरे दिन उन्होंने त्रिवेणी घाट पर अपना धरना फिर शुरू कर दिया। उन्होंने करीब 111 दिनों तक देवस्थानम बोर्ड के खिलाफ आंदोलन जारी रखा। बुधवार को उनसे मिलने चारधाम विकास परिषद के उपाध्यक्ष शिव प्रसाद ममगाई पहुंचे और उन्हें पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ले जाकर जूस पिलाया और लिखित आश्वासन दिया, कि उनकी मांगों पर जल्द अमल किया जाएगा। इसके बाद आचार्य संतोष त्रिवेदी ने अपना आंदोलन समाप्त किया। आचार्य संतोष केदारनाथ पहुंचे। यहां पर तीर्थ-पुरोहितों ने उनका जोरदार स्वागत किया। वहीं, आचार्य संतोष त्रिवेदी ने कहा कि देवस्थानम बोर्ड के खिलाफ उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा, सरकार जब तक इम मामले में जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लेती। केदारसभा के अध्यक्ष विनोद शुक्ला का कहना है कि आचार्य संतोष त्रिवेदी के आंदोलन को तीर्थ-पुरोहित हमेशा याद रखेंगे। उन्होंने कहा कि भगवान केदारनाथ सरकार को सद्बुद्धि प्रदान करें और जल्द से जल्द देवस्थानम बोर्ड को भंग किया जाए, अन्यथा चारधामों में तीर्थ पुरोहित उग्र आंदोलन करने को विवश होंगे।
उत्तराखण्ड क्रांति दल ने मुजफरनगर गोली कांड कें शहीदों को दी श्रधांजलि
Fri Oct 2 , 2020
देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य निर्माण की मांग को लेकर शांतिपूर्ण रूप से 2 अक्टूबर 1994 को दिल्ली जा रहे आन्दोलनकरियों पर तत्कालीन उत्तर प्रदेश व भारत सरकार ने मुज्जफरनगर के रामपुर तिराहा पर गोलियां बरसा दी थी। जिसमे कई आंदोलन कारी घायल हो गये थे जबकि कई आन्दोलनकरियों को मार दिया […]

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