जनता दरवार से पूर्व मुख्यमंत्री बरबस याद आ गये हिमालय पुत्र हेमवती नन्दन बहुगुणा

जनता दरवार से पूर्व मुख्यमंत्री बरबस याद आ गये हेमवती नन्दन बहुगुणा 
उत्तरकाशी की उत्तरा बहुगुणा के मामले पर जिस तत्परता से पुलिस और शिक्षा विभाग ने कार्यवाही की वह कार्यपालिका की तत्परता की देश में नजीर है । पुलिस उठा ले गयी गिरफतारी हुई भला हुआ संविधान बनाने वालों का कि इस प्रकृया में न्यायालय बीच में है कोर्ट ने तुरन्त जमानत दे दी । इधर विभाग ने निलम्बन आदेश दे दिया । प्रकरण आपको पता ही है किन्तु ये सब देख सुन आज, स्व0 हेमवती नन्दन बहुगुणा की याद आ गयी ।
लखनउ की गहमागहमी, दुनिया के कई देशों से भी बड़ा राज्य, उसके मुख्यमंत्री हेमवती नन्दन बहुगुणा । चार बाग से दारूलशफा की ओर काफिले के साथ चल रहे थे । सहसा सामने जाम और कुछ कहासुनी मारपीट का माहौल , गाड़ी रूकवायी स्वयं कार से उतरे और चल दिये फसाद की तरफ । मामला आटीओ पुलिस और टैम्पो चालकों के बीच का था । कानून की आड में जबरन वसूली का आरोप लगाते टैम्पो चालक बहुगुणा की तरफ बढे । बहुगुणा ने आक्रोशित चालको की बात सुनी, बात थी पांच लोग बैठाने पर चालान करने की । बहुगुणा ने कहा टैम्पो लाओ , कोई मौजूद आम पांच लोग बैठ कर दिखाओ । उनसे पूछा कोई परेशानी है बैठने में, उन्होंने कहा नहीं । बहुगुणा ने कहा आज से पांच ही बैठेंगें । नियम लागू । बहुगुणा हाय हाय करने वाले, बहुगुणा जिन्दाबाद करते रहे, बहुगुणा चल दिये ।
दूसरा वाकया आद आया । पुराने लखनउ के नबाब साहेब टेलीफोन न लगने से बड़े परेशान थे । हर कोशिश कर हार के, चिढ़कर बहुगुण के पास जाने की ठानी , गुस्साये नबाब विधान सभा पहुचते कि गेट पर ही, बहुगुणा कहीं जाने के लिये कार में बैठते दिख गये । फरियादी नबाब ने आवाज दी, बहगुणा रूके और बोले आने का कारण नबाब साहब , नबाब बोले, दस महीने से टैलीफोन के कनेक्शन के लिये गुहार लगाये मारा मारा फिर रहा हूं…. बात पूरी हुई ना थी बहगुणा अपने पी एस को निहारते हुए नबाब से बोले, चलो नबाब साहब ! आपकी शिकायत शाम 6 बजे फोन पर सुनता हूं । और कार में बैठ चल दिये । बुजुर्ग नबाब बहुगुणा के तरीके से बौखला गये, और जो बन पड़ा मुंह से उगल गये – अजीब पगला मुख्यमंत्री है, मै कह रहा हू मेरा फोन कनेशन नहीं लग रहा, यो कह रहे कि फोन पर शिकायत सुनूगा ।
शाम के 6 बजे नबाब साहब के घर फोन बजा नबाब साहब ने फोन उठाया उधर से आवाज आयी, “सलाम नबाब साहब मै बहुगुणा !” बताइये क्या शिकायत थी ? नम आखों और रूंधे गले से नबाब साहब बोले सचमुच कमाल ही हो बहुगुणा ! मै जाने क्या क्या बक गया । बहुगुणा विनम्रता से बोले, नेता हूं गाली खाना मेरा धर्म है । सलाम ।

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