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दिल्ली में गायत्री परिवार के जन्मशताब्दी महोत्सव का शंखनाद, 20 हजार श्रद्धालुओं की मौजूदगी में गूंजा संस्कृति और राष्ट्र निर्माण का संदेश

Pahado Ki Goonj

दिल्ली में गायत्री परिवार के जन्मशताब्दी महोत्सव का शंखनाद, 20 हजार श्रद्धालुओं की मौजूदगी में गूंजा संस्कृति और राष्ट्र निर्माण का संदेश

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किया माताजी की स्मृति में विशेष डाक टिकट का अनावरण, डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने बताया ऐतिहासिक त्रिवेणी संगम

हरिद्वार/नई दिल्ली, 31 अक्टूबर। वैदिक मंत्रों की गूंज, ध्वजारोहण और हजारों श्रद्धालुओं के उत्साह के बीच अखिल विश्व गायत्री परिवार के तीन दिवसीय जन्मशताब्दी महोत्सव का शनिवार को दिल्ली में भव्य शुभारंभ हुआ। इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित समारोह में 20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लेकर आध्यात्मिक चेतना, भारतीय संस्कृति और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को मजबूती दी।

कार्यक्रम का शुभारंभ समारोह के दलनायक एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पण्ड्या और दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने संयुक्त रूप से ध्वजारोहण कर किया। इस दौरान शांतिकुंज के आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चारण किया।

समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गायत्री परिवार के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संगठन व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण और राष्ट्र निर्माण के माध्यम से समाज में नई चेतना जागृत कर रहा है। उन्होंने अखंड दीप की शताब्दी को ज्ञान और संस्कार का प्रकाश जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर बताया।

वहीं केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मातृत्व, भाईचारे, नारी सम्मान और भारतीय संस्कृति के संरक्षण के संकल्प दिलाए। इस अवसर पर उन्होंने वंदनीया माताजी की जन्मशताब्दी की स्मृति में विशेष डाक टिकट का अनावरण किया। यह गायत्री परिवार की सौ वर्षों की साधना, तप, सेवा और लोकमंगल के कार्यों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देने वाला महत्वपूर्ण अवसर रहा।

गौरतलब है कि इससे पहले वर्ष 1991 में युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य और वर्ष 2021 में शांतिकुंज की स्थापना की स्वर्ण जयंती पर भी डाक टिकट जारी किया जा चुका है। माताजी की स्मृति में जारी यह तीसरा डाक टिकट है।

इस मौके पर डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि यह महोत्सव वंदनीया माताजी की जन्मशताब्दी, युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य की तप-साधना और अखंड दीप के सौ वर्षों का ऐतिहासिक त्रिवेणी संगम है। उन्होंने कहा कि लोकमंगल और समाज के नैतिक उत्थान के लिए शक्ति और आध्यात्मिक चेतना का समन्वय बेहद जरूरी है।

महोत्सव में देव संस्कृति विश्वविद्यालय के करीब 650 विद्यार्थी विभिन्न व्यवस्थाओं में सेवाएं दे रहे हैं। वहीं प्रज्ञा योग और लोकनृत्यों की शानदार प्रस्तुतियों ने भारतीय संस्कृति की विविधता और आध्यात्मिक परंपरा को जीवंत कर दिया।

हरिद्वार के बाद दिल्ली में आयोजित महोत्सव के इस दूसरे चरण में व्यक्ति, परिवार और राष्ट्र निर्माण के संकल्पों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। दो नवंबर तक चलने वाले इस आयोजन में नारी जागरण, विश्व बंधुत्व और युग निर्माण का संदेश दिया जाएगा।

समारोह में केंद्रीय कैबिनेट मंत्री मनसुख मांडविया, दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा, महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री सुधीर मुनगंटीवार सहित विभिन्न राज्यों के गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

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