लखनऊ में सर्वजन सनातन पार्टी ने उत्तर प्रदेश के सभी क्षेत्रों में चुनाव लड़ने की घोषणा की
*लखनऊ।* उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आज सर्वजन सनातन पार्टी की प्रेस वार्ता आयोजित की गई। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री एम. नागेश्वर राव ने पार्टी के उद्देश्यों को प्रस्तुत करते हुए आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पूरे प्रदेश में चुनाव लड़ने की घोषणा की।
श्री एम. नागेश्वर राव पूर्व में भारत की सर्वोच्च जाँच एजेंसी *केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के कार्यकारी निदेशक* के रूप में कार्य कर चुके हैं। उन्हें *राष्ट्रपति पदक एवं विशिष्ट सेवा पदक* सहित अनेक अन्य सम्मानों से भी कई बार सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में आगामी चुनाव की तैयारियों के संबंध में शीघ्र ही प्रदेश की राजधानी में भी प्रेस वार्ता आयोजित की जाएगी।
इस अवसर पर पार्टी के विभिन्न पदाधिकारियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। उत्तराखंड से श्री अनुसूया प्रसाद उनियाल को *राष्ट्रीय संगठन मंत्री तथा श्री प्रमोद चंद्र को उत्तराखंड प्रदेश प्रभारी* का दायित्व सौंपा गया।
पार्टी ने सुलभ एवं उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा, निःशुल्क उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएँ, सबके लिए सुनिश्चित रोजगार तथा *सनातन सभ्यता के पुनरुत्थान* को अपने प्रमुख उद्देश्यों के रूप में रेखांकित किया।
सर्वजन सनातन पार्टी ने सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता और जनकल्याण को केंद्र में रखकर राजनीति करने तथा जनसामान्य के समक्ष एक सशक्त राजनीतिक विकल्प प्रस्तुत करने का संकल्प व्यक्त किया।
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माउंट मुकुट ईस्ट का ऐतिहासिक आरोहण कर लौटे भारतीय तटरक्षक बल एवं एचएमआई के संयुक्त अभियान दल का मुख्यमंत्री ने किया फ्लैग-इन*
*भारतीय तटरक्षक बल के इतिहास में पहली बार 7,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली पर्वत चोटी का सफल आरोहण, मुख्यमंत्री ने दी बधाई*
*उत्तराखंड के 25 गौरवशाली वर्षों को समर्पित अभियान में शिखर पर फहराया गया 2,500 वर्ग फुट का विशाल ध्वज*
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुख्यमंत्री आवास में भारतीय तटरक्षक बल एवं हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट (एचएमआई), दार्जिलिंग के संयुक्त पर्वतारोहण अभियान दल का फ्लैग-इन किया। एचएमआई के प्राचार्य कर्नल रजनीश जोशी के नेतृत्व में संयुक्त दल ने 7,045 मीटर ऊंचे माउंट मुकुट ईस्ट का सफल आरोहण कर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। यह भारतीय तटरक्षक बल के इतिहास में 7,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली किसी पर्वत चोटी का पहला सफल आरोहण है।
मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि के लिए अभियान दल के सभी सदस्यों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि हिमालय की दुर्गम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में इस प्रकार की सफलता पर्वतारोहियों के अदम्य साहस, दृढ़ संकल्प, अनुशासन और टीम भावना का परिचायक है। यह उपलब्धि भारतीय तटरक्षक बल के साथ ही पूरे देश के लिए गौरव का विषय है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान साहस, शौर्य और समृद्ध पर्वतारोहण परंपरा से जुड़ी रही है। इस अभियान को उत्तराखंड राज्य स्थापना के 25 गौरवशाली वर्षों को समर्पित किया जाना विशेष महत्व रखता है। अभियान दल द्वारा माउंट मुकुट ईस्ट के शिखर पर 2,500 वर्ग फुट का विशाल उत्तराखंड ध्वज फहराया जाना प्रदेश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य की गौरवशाली यात्रा और हिमालय के साथ उसके गहरे जुड़ाव को भी प्रदर्शित करती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन और पर्वतारोहण की अपार संभावनाएं हैं। राज्य सरकार साहसिक पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ ही युवाओं को पर्वतारोहण और अन्य साहसिक खेलों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इस प्रकार के अभियान युवाओं को कठिन परिश्रम, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण की प्रेरणा देते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय तटरक्षक बल देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। बल के जवानों द्वारा हिमालय की ऊंचाइयों पर इस प्रकार की उपलब्धि हासिल करना उनकी साहसिक क्षमता और उत्कृष्ट प्रशिक्षण को दर्शाता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि माउंट मुकुट ईस्ट अभियान से प्राप्त अनुभव वर्ष 2027 में प्रस्तावित माउंट एवरेस्ट अभियान की सफलता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इस अवसर पर एचएमआई, दार्जिलिंग के प्राचार्य एवं अभियान दल के नेतृत्वकर्ता कर्नल रजनीश जोशी ने अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय तटरक्षक बल वर्ष 2027 में अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण करने जा रहा है। स्वर्ण जयंती के अवसर पर प्रस्तावित माउंट एवरेस्ट अभियान की तैयारियों के अंतर्गत यह पर्वतारोहण अभियान आयोजित किया गया। इसके लिए पर्वतारोहियों के चयन एवं प्रशिक्षण की जिम्मेदारी हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट, दार्जिलिंग को सौंपी गई है।
कर्नल जोशी ने बताया कि 15 सितंबर से 9 अक्टूबर 2026 तक संचालित अभियान के अंतर्गत संयुक्त दल ने माउंट मुकुट ईस्ट का सफल आरोहण किया। इस अभियान को उत्तराखंड के 25 गौरवशाली वर्षों को समर्पित करते हुए शिखर पर 2,500 वर्ग फुट का विशाल ध्वज फहराया गया। उन्होंने बताया कि माउंट एवरेस्ट अभियान की तैयारियों के क्रम में दल द्वारा इससे पूर्व सिक्किम हिमालय में माउंट बी.सी. रॉय और माउंट थिंचेनखांग का भी सफल आरोहण किया जा चुका है। इन अभियानों से पर्वतारोहियों को उच्च हिमालयी परिस्थितियों में अनुकूलन, तकनीकी दक्षता और सामूहिक समन्वय का महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त हुआ है।
इस अवसर पर भारतीय तटरक्षक बल के अपर महानिदेशक श्री आनंद प्रकाश बडोला, उप महानिरीक्षक श्री हिमांशु नौटियाल, उप महानिरीक्षक श्री डी.एस. चौहान, कमांडेंट श्री अमित उनियाल, कमांडेंट श्री विश्वजीत सिंह, एचएमआई के श्री पासांग तेनजिंग शेरपा सहित अभियान दल के अन्य सदस्य उपस्थित थे।
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कैबिनेट के महत्वपूर्ण निर्णय*
दिनांक 12 अक्टूबर, 2026
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सोमवार को मंत्रीमण्डल की बैठक मेला नियंत्रण सभागार हरिद्वार में आयोजित की गई। उत्तराखण्ड मंत्रिमंडल द्वारा राज्य के समग्र विकास, आधारभूत ढांचे के सुदृढ़ीकरण, जनहितकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, प्रशासनिक सुधारों तथा युवाओं के हित में विभिन्न महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर अनुमोदन प्रदान किया गया।

*1. उत्तराखण्ड के विकास में निरंतर सहयोग के लिए प्रधानमंत्री एवं भारत सरकार का आभार (विवरण अलग से प्रेषित)*
उत्तराखण्ड के समग्र विकास के लिए विभिन्न क्षेत्रों में भारत सरकार द्वारा प्रदान किए जा रहे निरंतर सहयोग के प्रति प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं भारत सरकार का हार्दिक आभार व्यक्त किया गया। राज्य की विशिष्ट पर्वतीय, सीमावर्ती एवं सामरिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए भविष्य में भी विकास संबंधी प्राथमिकताओं और आवश्यकताओं के अनुरूप केंद्र सरकार से निरंतर सहयोग की अपेक्षा व्यक्त की गई।
*2. श्री मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान के विकास के लिए सोसायटी गठन को सैद्धांतिक अनुमोदन*
हरिद्वार के ऋषिकुल स्थित श्री मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान के समग्र विकास एवं विस्तार के लिए सोसायटी के गठन को सैद्धांतिक अनुमोदन प्रदान किया गया। संस्थान को योग एवं ध्यान केंद्र, आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान केंद्र, ज्योतिष एवं प्राच्य अध्ययन केंद्र, ललित कला केंद्र, हिन्दू अध्ययन एवं दर्शन केंद्र तथा आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा, प्राचीन विज्ञान, संस्कृति एवं आधुनिक शोध को बढ़ावा देना है।
*3. उत्तराखण्ड निवेश और आधारिक संरचना विकास से संबंधित अधिनियम की अनुसूची में संशोधन को मंजूरी*
उत्तराखण्ड निवेश और आधारिक संरचना (विकास और विनियम) अधिनियम, 2023 की धारा 49 के अंतर्गत अनुसूची-3 में संशोधन को मंजूरी दी गई। इसके अंतर्गत सार्वजनिक अभिकरणों, स्थानीय निकायों, राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों तथा वित्तीय रूप से स्वायत्त संस्थाओं की परिसंपत्तियों के विनिवेश एवं मुद्रीकरण से प्राप्त आय का 92 प्रतिशत हिस्सा संबंधित सार्वजनिक अभिकरणों को प्रदान किए जाने का प्रावधान किया गया है। इससे परिसंपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और आधारभूत ढांचा विकास को गति देने में सहायता मिलेगी।
*4. द्वितीय उत्तराखण्ड जन विश्वास संशोधन विधेयक, 2026 को विधानसभा में प्रस्तुत करने की मंजूरी*
प्रदेश में व्यापारिक गतिविधियों को सरल बनाने और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रस्तावित द्वितीय उत्तराखण्ड जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2026 को विधानसभा में प्रस्तुत करने की स्वीकृति दी गई। इसके माध्यम से छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने, मामूली तकनीकी एवं प्रक्रियात्मक त्रुटियों के लिए नागरिक दंड तथा प्रशासनिक कार्रवाई का प्रावधान करने और कानूनों के अप्रचलित एवं अनावश्यक प्रावधानों को हटाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
*5. उत्तराखण्ड बाढ़ मैदान परिक्षेत्रण नियमावली, 2026 को मंजूरी*
बाढ़ संभावित क्षेत्रों में भूमि के उपयोग एवं विकास गतिविधियों को विनियमित करने के उद्देश्य से उत्तराखण्ड बाढ़ मैदान परिक्षेत्रण नियमावली, 2026 को मंजूरी दी गई। इसके अंतर्गत उत्तराखण्ड बाढ़ मैदान परिक्षेत्रण अधिनियम, 2012 के प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए विस्तृत प्रक्रिया, मानक एवं कार्यप्रणाली निर्धारित की जाएगी। इसका उद्देश्य बाढ़ के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखते हुए जन-धन, संपत्ति एवं महत्वपूर्ण अवस्थापनाओं को संभावित बाढ़ क्षति से सुरक्षित रखना है।
*6. उत्तराखण्ड की पंचम विधानसभा के वर्ष 2026 के तृतीय सत्र को आहूत करने की मंजूरी*
म्ंत्रिमण्डल ने उत्तराखण्ड की पंचम विधानसभा के वर्ष 2026 के तृतीय सत्र को आहूत करने की मंजूरी प्रदान की है। विधानसभा सत्र की तिथि एवं स्थान निर्धारित करने के लिए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी को अधिकृत किया गया।
*7. उत्तराखण्ड अग्निशमन एवं आपात सेवा विधेयक, 2026 को विधानसभा में प्रस्तुत करने की मंजूरी*
प्रदेश में अग्निशमन एवं आपात सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए उत्तराखण्ड अग्निशमन एवं आपात सेवा विधेयक, 2026 को विधानसभा में प्रस्तुत करने की मंजूरी दी गई। यह विधेयक भारत सरकार के मॉडल फायर सर्विस बिल, 2019 के अनुरूप तैयार किया गया है। इसके अंतर्गत भविष्य में बढ़ते औद्योगिक विकास, नगरीकरण, आपदाओं तथा संभावित अग्नि दुर्घटनाओं की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए वर्तमान अग्निशमन संबंधी अधिनियम को पुनरीक्षित कर नया कानून लाने का प्रस्ताव है।
*8. सेवामुक्त अग्निवीरों के लिए समूह ‘ग’ के वर्दीधारी पदों पर भर्ती संबंधी नई नियमावली को मंजूरी*
उत्तराखण्ड की राज्याधीन सेवाओं में समूह ‘ग’ के सीधी भर्ती के वर्दीधारी पदों पर सेवामुक्त अग्निवीरों के सेवायोजन के लिए क्षैतिज आरक्षण नियमावली, 2026 को मंजूरी दी गई। पूर्व में वर्ष 2025 की नियमावली के अंतर्गत सेवामुक्त अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण तथा अधिकतम आयु सीमा और शारीरिक दक्षता परीक्षा में छूट का प्रावधान किया गया था। केंद्र सरकार के नवीन दिशा-निर्देशों के अनुरूप भर्ती प्रक्रिया में आवश्यक संशोधन एवं छूट के प्रावधानों को शामिल करने के उद्देश्य से पूर्व नियमावली को अधिक्रमित करते हुए नई नियमावली तैयार की गई है, जिसमें लिखित परीक्षा एवं शारीरिक मानक परीक्षा में छूट प्रदान की गई है।
*9. संस्कृति विभाग में वित्तीय अधिकारों से संबंधित व्यवस्था में संशोधन को मंजूरी*
उत्तराखण्ड वित्तीय हस्त पुस्तिका खण्ड-1 (वित्तीय अधिकारों का प्रतिनिधायन) के संबंधित प्रावधान में संशोधन को मंजूरी दी गई। इसके अंतर्गत संस्कृति विभाग के विभागाध्यक्ष के रूप में पूर्व में अंकित निदेशक, कला एवं संस्कृति विभाग के स्थान पर महानिदेशक, संस्कृति निदेशालय, उत्तराखण्ड को प्रतिस्थापित किया जाएगा। इससे विभागीय प्रशासनिक व्यवस्था के अनुरूप वित्तीय अधिकारों का संचालन सुनिश्चित हो सकेगा।
*10. स्वजल एवं राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन के 215 पदों की निरंतरता को मंजूरी*
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत परियोजना प्रबंधन इकाई, स्वजल तथा राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन में कुल 215 पदों की निरंतरता को 1 मार्च, 2026 से 28 फरवरी, 2027 तक बढ़ाने की मंजूरी दी गई। इनमें स्वजल के 189 तथा राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन के 26 पद शामिल हैं। संबंधित कार्मिकों को पूर्व की भांति वेतन एवं मानदेय का भुगतान राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन द्वारा किया जाएगा।
*11. हरिद्वार में किफायती आवासीय परियोजना के पहुंच मार्ग की चौड़ाई में शिथिलता को मंजूरी*
जनपद हरिद्वार की भगवानपुर तहसील के ग्राम सिसौना में प्रधानमंत्री आवास योजना एवं केंद्र तथा राज्य सरकार की आवास नीति के अनुरूप प्रस्तावित किफायती आवासीय परियोजना के लिए पहुंच मार्ग की निर्धारित न्यूनतम चौड़ाई में शिथिलता को मंजूरी दी गई। लगभग 8.1169 हेक्टेयर भूमि पर प्रस्तावित परियोजना के तलपट मानचित्र की स्वीकृति के लिए निर्धारित 9 मीटर चौड़े पहुंच मार्ग के स्थान पर उपलब्ध 6 मीटर चौड़े मार्ग को देखते हुए 3 मीटर की शिथिलता प्रदान की गई है।
*12. ऊधमसिंह नगर में भू-उपयोग परिवर्तन संबंधी शासनादेश में खसरा संख्या की त्रुटि सुधार को मंजूरी*
जनपद ऊधमसिंह नगर की बाजपुर तहसील के ग्राम भौना इस्लामनगर में कुल 24,280 वर्गमीटर भूमि के औद्योगिक से आवासीय भू-उपयोग परिवर्तन संबंधी शासनादेश दिनांक 10 नवम्बर, 2023 में अंकित खसरा संख्या की त्रुटि सुधार को मंजूरी दी गई। इसके अंतर्गत शासनादेश में त्रुटिवश अंकित खसरा संख्या 321/1अ के स्थान पर सही खसरा संख्या 321/2अ अंकित की जाएगी।
*13. मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार योजना को मंजूरी*
प्रदेश के साहसी एवं बहादुर बच्चों को सम्मानित करने के लिए मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार योजना को मंजूरी दी गई। इस योजना के अंतर्गत विपरीत परिस्थितियों में धैर्यपूर्वक कार्य करने, असाधारण साहस, पराक्रम, मानवीय संवेदना एवं वीरता का परिचय देने वाले बच्चों को सम्मानित किया जाएगा। योजना का उद्देश्य ऐसे बच्चों को प्रोत्साहित करने के साथ अन्य बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत बनाना है।
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सरकार प्रमुख के रूप में राष्ट्रसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने पर उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने पारित किया धन्यवाद प्रस्ताव*
*प्रधानमंत्री के 25 वर्षों के सेवाकाल को सेवा, सुशासन, समर्पण और ‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प की यात्रा बताया*
*उत्तराखंड के प्रति प्रधानमंत्री के विशेष लगाव, विकास कार्यों और आपदा के समय निरंतर सहयोग के लिए जताया आभार*
*प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तराखंड में 2.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की अवस्थापना परियोजनाओं पर हो रहा कार्य*
*हरिद्वार, 12 अक्टूबर 2026*
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सोमवार को हरिद्वार में गंगा तट पर स्थित मेला नियंत्रण भवन में आयोजित प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सरकार प्रमुख के रूप में राष्ट्रसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया गया। मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री के 25 वर्षों के सेवाकाल को सेवा, सुशासन, संकल्प, समर्पण और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना का प्रतीक बताते हुए उनके नेतृत्व में देश और उत्तराखंड में हुए विकास कार्यों तथा जनकल्याणकारी पहलों की सराहना की। मंत्रिमंडल ने प्रदेश की जनता की ओर से प्रधानमंत्री को इस महत्वपूर्ण अवसर पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
धन्यवाद प्रस्ताव में उल्लेख किया गया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपनी यात्रा शुरू की थी। सरकार के प्रमुख के रूप में 25 वर्षों की इस निरंतर यात्रा में उन्होंने देशहित और जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। प्रधानमंत्री ने राजनीति को जनसेवा का माध्यम बनाते हुए सदैव राष्ट्रनीति को राजनीति से ऊपर रखा है। उनका अनुशासन, अथक परिश्रम, कार्य के प्रति समर्पण और बिना रुके, बिना थके राष्ट्रसेवा की प्रतिबद्धता सभी के लिए प्रेरणादायी है।
मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में जनकल्याण, बुनियादी ढांचे, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और रक्षा क्षेत्र में हुए महत्वपूर्ण कार्यों की सराहना की। प्रधानमंत्री ने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ को शासन का आधार बनाया है। जनधन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं से करोड़ों लोगों को लाभ मिला है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में लगभग 60 करोड़ जनधन खाते खोले गए हैं और चार करोड़ से अधिक पक्के आवास उपलब्ध कराए गए हैं। वर्ष 2013-14 से 2022-23 के बीच लगभग 25 करोड़ देशवासी बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले हैं। महिलाओं, किसानों और युवाओं के सशक्तिकरण के साथ ही डिजिटल इंडिया, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और यूपीआई जैसी पहलों ने नागरिक सुविधाओं को अधिक सुगम बनाने तथा शासन व्यवस्था में पारदर्शिता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
धन्यवाद प्रस्ताव में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने, पूर्व सैनिकों के लिए वन रैंक वन पेंशन लागू करने और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद सृजित करने जैसे महत्वपूर्ण निर्णयों का भी उल्लेख किया गया। चंद्रयान-3 की सफलता, स्वदेशी तकनीक को प्रोत्साहन और वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका को देश की बढ़ती सामर्थ्य और आत्मविश्वास का प्रतीक बताया गया। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ‘विकास भी, विरासत भी’ की भावना के साथ देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं।
मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के उत्तराखंड के प्रति विशेष आत्मीय और आध्यात्मिक लगाव का उल्लेख करते हुए उनके निरंतर सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड को केवल धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रदेश के रूप में ही नहीं, बल्कि सामरिक महत्व और विकास की अपार संभावनाओं वाले राज्य के रूप में भी विशेष प्राथमिकता दी है। बाबा केदार की धरती से प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया था कि 21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा। उनके मार्गदर्शन तथा केंद्र और राज्य सरकार के बेहतर समन्वय से प्रदेश में विकास कार्यों को निरंतर गति मिल रही है।
धन्यवाद प्रस्ताव में उत्तराखंड की विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए सहयोग और मार्गदर्शन का विशेष रूप से उल्लेख किया गया। प्रदेश में जब भी कोई बड़ी आपदा आई, प्रधानमंत्री ने स्वयं संपर्क कर परिस्थितियों की जानकारी ली और राहत एवं बचाव कार्यों के लिए हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराया। संकट के समय प्रधानमंत्री ने एक अभिभावक की तरह प्रदेश के साथ खड़े रहकर समस्याओं के समाधान के लिए भी मार्गदर्शन दिया।
नवंबर 2023 में उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों को सुरक्षित निकालने के लिए चले 17 दिवसीय बचाव अभियान के दौरान प्रधानमंत्री लगातार जानकारी लेते रहे और केंद्र की संबंधित एजेंसियों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इसी प्रकार वर्ष 2024 में सहस्त्रताल और केदारनाथ यात्रा मार्ग पर आई आपदाओं के दौरान केंद्र सरकार एवं भारतीय वायुसेना ने बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण सहयोग दिया। अगस्त 2025 में उत्तरकाशी के धराली क्षेत्र में आई भीषण आपदा के समय भी प्रधानमंत्री ने तत्काल स्थिति की जानकारी ली और हरसंभव सहायता का भरोसा दिया। मंत्रिमंडल ने आपदा की प्रत्येक घड़ी में प्रधानमंत्री के सहयोग को प्रदेश के प्रति उनकी आत्मीयता और संवेदनशीलता का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।
धन्यवाद प्रस्ताव में प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तराखंड में संचालित विकास परियोजनाओं का विशेष उल्लेख किया गया। प्रदेश में 2.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की अवस्थापना परियोजनाओं पर कार्य हो रहा है। इनमें सड़क, रेल, रोपवे, ऊर्जा, स्वास्थ्य, उद्योग और पर्यटन से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं।
प्रधानमंत्री ने 14 अप्रैल 2026 को दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे का लोकार्पण किया। लगभग 213 किलोमीटर लंबे इस आर्थिक गलियारे के शुरू होने से दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा का समय छह घंटे से अधिक से घटकर लगभग ढाई घंटे रह गया है। इससे प्रदेश में पर्यटन, व्यापार, उद्योग और रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।
लगभग 12,595 करोड़ रुपये की चारधाम महामार्ग विकास परियोजना से चारधाम यात्रा की कनेक्टिविटी बेहतर हो रही है। वहीं, 125 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना पर्वतीय क्षेत्रों तक रेल पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। लगभग 4,081 करोड़ रुपये की सोनप्रयाग-केदारनाथ रोपवे परियोजना और 2,730 करोड़ रुपये की गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजना को मिली स्वीकृति से भविष्य में श्रद्धालुओं की यात्रा अधिक सुगम होगी। केदारनाथ पुनर्निर्माण और बदरीनाथ धाम के मास्टर प्लान के अंतर्गत किए जा रहे कार्य भी प्रधानमंत्री के ‘विकास भी, विरासत भी’ के संकल्प को आगे बढ़ा रहे हैं।
प्रधानमंत्री के सहयोग से दशकों से लंबित जमरानी बांध, लखवाड़ और किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। टिहरी में 1,000 मेगावाट क्षमता का पंप्ड स्टोरेज प्लांट ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। ऊधमसिंह नगर के खुरपिया में विकसित किए जा रहे एकीकृत विनिर्माण क्लस्टर से निवेश और रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी। किच्छा में एम्स ऋषिकेश का सैटेलाइट सेंटर विकसित होने से कुमाऊं और तराई क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री की आदि कैलाश यात्रा और शीतकालीन पर्यटन को दिए गए प्रोत्साहन का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री की आदि कैलाश यात्रा के बाद सीमांत क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को नई पहचान मिली है। आदि कैलाश और ॐ पर्वत क्षेत्र में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से स्थानीय होमस्टे, परिवहन, हस्तशिल्प और स्वरोजगार को प्रोत्साहन मिला है। प्रधानमंत्री ने सीमांत गांवों को देश के अंतिम गांव के बजाय प्रथम गांव के रूप में नई पहचान दी है। वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के 51 सीमांत गांवों को प्राथमिकता के आधार पर शामिल किया गया है।
प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड में शीतकालीन यात्रा को भी विशेष प्रोत्साहन दिया है। 6 मार्च 2025 को प्रधानमंत्री स्वयं माँ गंगा के शीतकालीन प्रवास स्थल मुखवा पहुंचे और हर्षिल से देशवासियों को शीतकाल में उत्तराखंड आने का आह्वान किया। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। शीतकालीन यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या लगभग 80 हजार से बढ़कर डेढ़ लाख तक पहुंच गई है। प्रधानमंत्री की लखपति दीदी की परिकल्पना से प्रदेश में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को भी नई दिशा मिली है।
मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड के विकास, विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, अवस्थापना परियोजनाओं तथा प्राकृतिक आपदाओं के समय निरंतर सहयोग एवं मार्गदर्शन के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री के इस योगदान और उत्तराखंड के प्रति विशेष स्नेह के लिए उन्हें आभार पत्र भी भेजा जाएगा।
धन्यवाद प्रस्ताव में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सरकार प्रमुख के रूप में राष्ट्रसेवा के 25 वर्षों को देश के विकास, जनकल्याण और राष्ट्रीय आत्मविश्वास की यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया गया। मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में विकास और विरासत, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण तथा आधुनिकता और संस्कृति के बीच संतुलन स्थापित करते हुए उत्तराखंड को विकसित राज्य बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में विकसित उत्तराखंड अपनी पूरी सामर्थ्य के साथ योगदान देगा।
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राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ प्रधानमंत्री ने 25 वर्ष तक की राष्ट्रसेवा: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी*
*प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उत्तराखंड में 2.25 लाख करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं पर काम जारी*
*कैबिनेट बैठक से पहले मां गंगा का पूजन कर प्रधानमंत्री के दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना की*
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सरकार प्रमुख के रूप में लगातार 25 वर्ष की राष्ट्रसेवा सेवा, सुशासन, संकल्प और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने सदैव राष्ट्रनीति को राजनीति से ऊपर रखते हुए देशहित और जनकल्याण को प्राथमिकता दी है। मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की जनता की ओर से प्रधानमंत्री को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
हरिद्वार में आयोजित कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत की थी। उनके नेतृत्व में भारत विकास, आत्मनिर्भरता और वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान उत्तराखंड को अनेक महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं की सौगात मिली है। इसी के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए राज्य मंत्रिमंडल ने मां गंगा का पूजन कर प्रधानमंत्री के दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत ने आर्थिक शक्ति के रूप में अपनी पहचान मजबूत करने के साथ रक्षा, विज्ञान, नवाचार, खेल और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। इससे देशवासियों का आत्मविश्वास बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने हमेशा समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के कल्याण को प्राथमिकता दी है। युवाओं के लिए स्टार्टअप और कौशल विकास की योजनाएं शुरू की गई हैं, वहीं महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए लखपति दीदी और ड्रोन दीदी जैसी पहल की गई हैं। जनधन योजना, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, जल जीवन मिशन और एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय जैसी योजनाओं से करोड़ों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।
*रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता से मजबूत हुआ भारत*
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने सेना और सैनिकों की जरूरतों को प्राथमिकता दी है। चार दशक के इंतजार के बाद सैनिकों को वन रैंक, वन पेंशन योजना का लाभ मिला। उन्होंने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों के माध्यम से भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी दृढ़ कार्रवाई का संदेश दिया है। पहले भारत रक्षा सामग्री के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर था, जबकि अब देश अनेक देशों को रक्षा उपकरणों का निर्यात भी कर रहा है।
*उत्तराखंड में कनेक्टिविटी और पर्यटन को मिली गति*
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तराखंड में सड़क, रेल, हवाई संपर्क और धार्मिक पर्यटन से जुड़ी परियोजनाओं को गति मिली है। ऑल वेदर रोड के निर्माण से चारधाम यात्रा को सुविधाजनक बनाने में मदद मिली है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस वर्ष की चारधाम यात्रा में अब तक 58 लाख से अधिक तीर्थयात्री पहुंच चुके हैं। प्रधानमंत्री के आदि कैलाश दौरे के बाद इस क्षेत्र में तीर्थाटन को बढ़ावा मिला है। वहीं, हर्षिल से शीतकालीन यात्रा को प्रोत्साहन मिलने से राज्य में वर्षभर पर्यटन की संभावनाएं मजबूत हुई हैं, जिससे स्थानीय लोगों की आजीविका को लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने माणा गांव पहुंचकर सीमांत गांवों को देश के प्रथम गांव के रूप में पहचान दिलाने का संदेश दिया। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
*हर मुश्किल समय में मिला सहयोग*
मुख्यमंत्री ने कहा कि सिलक्यारा सुरंग हादसे, धराली आपदा और सहस्रताल ट्रैक पर फंसे पर्यटकों को सुरक्षित निकालने जैसे कठिन अवसरों पर केंद्र सरकार ने उत्तराखंड को सहयोग दिया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय घटकर लगभग ढाई घंटे में पूरी हो रही है । भविष्य में हरिद्वार को भी इससे जोड़ने की योजना है। हरिद्वार में विकास कार्यों के साथ जल्द ही दूसरे मेडिकल कॉलेज को शुरू करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बदरीनाथ और केदारनाथ पुनर्विकास परियोजनाओं से तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाओं का विस्तार हुआ है। केदारनाथ और हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजनाओं के साथ सौंग, जमरानी और लखवाड़ बांध परियोजनाओं को भी मंजूरी मिली है।
*2.25 लाख करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं पर काम*
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में करीब 2.25 लाख करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं पर काम चल रहा है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेललाइन का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। जौलीग्रांट एयरपोर्ट से 45 से अधिक विमान सेवाएं संचालित हो रही हैं, जबकि पंतनगर एयरपोर्ट के विस्तार की दिशा में भी काम आगे बढ़ रहा है। किच्छा में एम्स के सैटेलाइट सेंटर को शुरू करने की तैयारी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री 28 से अधिक बार उत्तराखंड आ चुके हैं। विदेश दौरों के दौरान उत्तराखंड के उत्पादों को विदेशी मेहमानों को उपहार में देकर उन्होंने राज्य के स्थानीय उत्पादों और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में योगदान दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य मंत्रिमंडल ने प्रदेशवासियों की ओर से प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनके दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना की है।
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हरिद्वार कुंभ-2027 की पहचान को मिलेगा नया विस्तार, मुख्यमंत्री ने किया लोगो, वेबसाइट और गीत का लोकार्पण*
*आस्था, संस्कृति और आधुनिक संचार माध्यमों के जरिए देश-दुनिया तक पहुंचेगा कुंभ का संदेश*
*गंगा, हर की पैड़ी और सनातन परंपरा के प्रतीकों से सुसज्जित है कुंभ का आधिकारिक लोगो*
*‘कुंभ का पर्व आ गया’ गीत से गूंजेगा कुंभ के आगमन का संदेश*
*हरिद्वार, 12 अक्टूबर 2026*
हरिद्वार कुंभ मेला-2027 की धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कुंभ के आधिकारिक लोगो, वेबसाइट और गीत का लोकार्पण किया। इन तीनों माध्यमों के जरिए कुंभ की विशिष्ट पहचान को देश-दुनिया तक पहुंचाने, आयोजन से संबंधित सूचनाओं को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने और कुंभ के आगमन का संदेश जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया गया है।
सोमवार को मेला नियंत्रण भवन (सीसीआर) सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कुंभ-2027 के आधिकारिक लोगो, वेबसाइट और गीत का लोकार्पण करते हुए कहा कि कुंभ भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा, सनातन संस्कृति और जनआस्था का विराट उत्सव है। हरिद्वार कुंभ का करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व है। राज्य सरकार कुंभ मेला-2027 के दिव्य एवं भव्य आयोजन के लिए प्रतिबद्ध है। आयोजन को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुगम बनाने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि आधिकारिक लोगो, वेबसाइट और गीत कुंभ की पहचान को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के साथ श्रद्धालुओं और आमजन को इससे जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
*लोगो में समाहित हरिद्वार की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत*
हरिद्वार कुंभ-2027 का आधिकारिक लोगो हरिद्वार की धार्मिक पहचान, गंगा के प्रति श्रद्धा और सनातन परंपरा की विशेषताओं को एक साथ दर्शाता है। इसमें मां गंगा, हर की पैड़ी क्षेत्र, धनुष पुल और सूर्योदय की दिव्य छटा को दर्शाया गया है। साथ ही शिव प्रतिमा, साधु-संतों, सनातन परंपरा के प्रतीक त्रिशूल एवं डमरू तथा मां मनसा देवी और मां चंडी देवी की पहाड़ियों को भी स्थान दिया गया है।
लोगो में समाहित ये प्रतीक हरिद्वार की आध्यात्मिक महत्ता और कुंभ की सांस्कृतिक विरासत को अभिव्यक्त करते हैं। इसका उपयोग आयोजन से संबंधित प्रचार सामग्री, प्रकाशनों और डिजिटल मंचों पर किया जा सकेगा। इससे कुंभ की दृश्य पहचान को एकरूपता के साथ प्रस्तुत करने और आयोजन के प्रचार-प्रसार को व्यवस्थित स्वरूप देने में मदद मिलेगी।
कुंभ मेला-2027 का लोगो डिजाइन करने के लिए मेला प्रशासन द्वारा राज्य के युवाओं एवं विद्यार्थियों से प्रविष्टियां आमंत्रित की गई थीं। प्राप्त सैकड़ों प्रविष्टियों में से 13 श्रेष्ठ एवं मौलिक डिजाइनों पर चयन समिति ने विचारकरने के बाद विकास नगर, जगजीतपुर, हरिद्वार निवासी मधु शर्मा द्वारा प्रस्तुत सर्वश्रेष्ठ डिजाइन का चयन किया। इसी डिजाइन के आधार पर हरिद्वार कुंभ-2027 के आधिकारिक लोगो को अंतिम रूप दिया गया।
*आधिकारिक वेबसाइट से कुंभ संबंधी सूचनाओं तक होगी आसान पहुंच*
कुंभ मेला-2027 की आधिकारिक वेबसाइट https://haridwarkumbh.uk.gov.in के माध्यम से श्रद्धालुओं, आगंतुकों और आमजन तक कुंभ से संबंधित प्रामाणिक जानकारियां पहुंचाई जा सकेंगी।
डिजिटल मंच पर सूचनाओं की उपलब्धता से आयोजन संबंधी जानकारी को व्यवस्थित ढंग से प्रसारित करने और देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेशों में रहने वाले श्रद्धालुओं को भी कुंभ से जोड़ने में मदद मिलेगी। यह माध्यम कुंभ की तैयारियों और आयोजन से जुड़ी जानकारियों तक लोगों की पहुंच सुगम बनाने के साथ हरिद्वार की धार्मिक पहचान को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने में उपयोगी होगा।
*‘कुंभ का पर्व आ गया’ गीत में झलकेगा आस्था और उल्लास*
कुंभ मेला-2027 के आधिकारिक गीत का लोकार्पण समारोह का प्रमुख आकर्षण रहा। ‘साधु और संतों के मन में हर्ष छा गया, कुंभ का पर्व आ गया’ पंक्तियों से शुरू होने वाला यह गीत कुंभ के आगमन की प्रसन्नता, साधु-संतों के उत्साह और श्रद्धालुओं की आस्था को स्वर देता है।
इस गीत की रचना, गायन और संगीत हरिद्वार निवासी गायक राघव राजा ने किया है। गीत के माध्यम से कुंभ के आगमन का संदेश जन-जन तक पहुंचाने और आयोजन के प्रति सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करने का उद्देश्य है। धार्मिक आयोजनों में गीत-संगीत जनभावनाओं की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम रहा है। इस दृष्टि से आधिकारिक गीत कुंभ की परंपरा, उल्लास और आध्यात्मिक वातावरण को आमजन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
*परंपरा की गरिमा के साथ आधुनिक संचार माध्यमों का समन्वय*
हरिद्वार कुंभ-2027 उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत, धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर है। आधिकारिक लोगो आयोजन को विशिष्ट दृश्य पहचान प्रदान करेगा, वेबसाइट सूचना के डिजिटल प्रसार का माध्यम बनेगी और गीत कुंभ के आगमन से जुड़ी भावनाओं को अभिव्यक्त करेगा। तीनों माध्यमों के समन्वित उपयोग से कुंभ की धार्मिक महत्ता, सांस्कृतिक वैभव और परंपराओं को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत किया जा सकेगा।
परंपरागत आध्यात्मिक गरिमा के साथ आधुनिक संचार माध्यमों का उपयोग कुंभ के संदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने में सहायक होगा। इन माध्यमों से हरिद्वार की धार्मिक पहचान और कुंभ की विशिष्टता को देश-दुनिया के श्रद्धालुओं के सामने प्रस्तुत करने में मदद मिलेगी।
*लोकार्पण समारोह में कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी रहे उपस्थित*
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी, श्री धन सिंह रावत, श्री सुबोध उनियाल, श्री सौरभ बहुगुणा, श्री खजान दास, श्री भरत सिंह चौधरी, श्री मदन कौशिक, श्री प्रदीप बत्रा एवं श्री राम सिंह कैड़ा सहित मेलाधिकारी श्रीमती सोनिका, जिलाधिकारी श्री मयूर दीक्षित, एसएसपी श्री नवनीत भुल्लर, महानिदेशक सूचना श्री वंशीधर तिवारी, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र, अपर मेलाधिकारी श्री दयानंद सरस्वती, अपर जिलाधिकारी श्री जितेन्द्र कुमार तथा उप मेलाधिकारी श्री आकाश जोशी एवं श्री मनजीत सिंह सहित मेला एवं जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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सीएम धामी ने केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान से की मुलाकात, उत्तराखंड में ग्रामीण सड़क कनेक्टिविटी को मिलेगी गति*
**उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों को सड़क सुविधा से जोड़ने की दिशा में बड़ी पहल, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-4 के तहत 315 मोटर मार्गों को शीघ्र स्वीकृति देने पर सहमति।**
**315 मोटर मार्गों की लंबाई 1,777 किलोमीटर, ₹2,526 करोड़ की लागत से होंगे निर्माण कार्य; 32 सेतुओं के निर्माण पर ₹182 करोड़ खर्च होने का प्रस्ताव।**
*₹2,708 करोड़ की लागत के सड़क एवं सेतु निर्माण कार्यों से 610 बसावटों को सड़क संपर्क से जोड़ने का लक्ष्य, दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों के विकास को मिलेगी नई रफ्तार।**
**उत्तराखंड के 213 अतिरिक्त सड़क प्रस्तावों, जिनकी लंबाई 1,360 किलोमीटर है, पर भी शीघ्र स्वीकृति के लिए विचार करने का आश्वासन; मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का जताया आभार।**
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर उत्तराखंड में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत ग्रामीण सड़क संपर्क के विस्तार, पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण तथा राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत सड़क एवं सेतु निर्माण के प्रस्तावों की स्वीकृति के संबंध में विस्तृत चर्चा की। इस दौरान प्रदेश में ग्रामीण कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण (PMGSY-IV) के अंतर्गत प्रस्तुत प्रस्तावों पर सकारात्मक सहमति बनी। केंद्रीय मंत्री ने राज्य के प्रस्तावों पर शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
*प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-4 के तहत ₹2,708 करोड़ के कार्यों को शीघ्र स्वीकृति देने पर सहमति*
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों, पर्वतीय क्षेत्रों में आवागमन की चुनौतियों तथा ग्रामीण आबादी की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण के अंतर्गत राज्य द्वारा व्यापक स्तर पर सड़क एवं सेतु निर्माण के प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे गए हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-4 के अंतर्गत उत्तराखंड के लिए **315 मोटर मार्गों, जिनकी कुल लंबाई 1,777 किलोमीटर है, के निर्माण हेतु ₹2,526 करोड़ की लागत के प्रस्ताव** प्रस्तुत किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, इन प्रस्तावों के अंतर्गत **32 सेतुओं के निर्माण के लिए ₹182 करोड़** की लागत प्रस्तावित है। इस प्रकार सड़क एवं सेतु निर्माण से संबंधित इन कार्यों की कुल प्रस्तावित लागत **₹2,708 करोड़** है।
बैठक में इन 315 मोटर मार्गों तथा 32 सेतुओं से संबंधित कार्यों को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने पर सहमति व्यक्त की गई। इन परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से प्रदेश के ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क संपर्क का विस्तार होगा और लंबे समय से बेहतर आवागमन की आवश्यकता महसूस कर रहे क्षेत्रों को लाभ मिलेगा।
*610 बसावटों को सड़क संपर्क से जोड़ने का लक्ष्य, ग्रामीण विकास को मिलेगी मजबूती*
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पर्यटन, कृषि और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने का महत्वपूर्ण आधार है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क का विशेष महत्व है। ऐसे में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत सड़क नेटवर्क का विस्तार राज्य की विकास प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने बताया कि प्रस्तावित सड़क परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश की **610 बसावटों को सड़क संपर्क से जोड़ने का लक्ष्य** है। इन क्षेत्रों में सड़क सुविधा उपलब्ध होने से स्थानीय निवासियों को दैनिक आवागमन में सहूलियत मिलेगी। विद्यार्थियों को शिक्षण संस्थानों तक पहुंचने, मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त करने तथा ग्रामीणों को रोजगार एवं आजीविका के अवसरों से जुड़ने में मदद मिलेगी।
सड़क संपर्क बेहतर होने से किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में सुविधा मिलेगी। स्थानीय उत्पादों की आपूर्ति व्यवस्था सुदृढ़ होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार एवं उद्यमिता की संभावनाओं को भी प्रोत्साहन मिलेगा। इसके साथ ही पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण ग्रामीण एवं पर्वतीय क्षेत्रों तक पहुंच आसान होने से स्थानीय पर्यटन गतिविधियों और उनसे जुड़े व्यवसायों को भी लाभ मिलने की संभावना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार राज्य के संतुलित एवं समावेशी विकास के लिए आवश्यक है। सड़क संपर्क के माध्यम से गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी तथा दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आएगा।
*213 अतिरिक्त सड़क प्रस्तावों पर भी शीघ्र स्वीकृति के लिए विचार करने का आश्वासन*
बैठक के दौरान उत्तराखंड में ग्रामीण सड़क नेटवर्क के विस्तार से संबंधित अतिरिक्त प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय मंत्री को राज्य की आवश्यकताओं से अवगत कराते हुए बताया कि प्रदेश में ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए आगे भी व्यापक स्तर पर कार्य किए जाने की आवश्यकता है।
इस क्रम में 213 अतिरिक्त सड़क कार्यों के प्रस्ताव, जिनकी कुल लंबाई 1,360 किलोमीटर है, पर भी चर्चा की गई। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने इन प्रस्तावों पर भी शीघ्र स्वीकृति के लिए विचार करने का आश्वासन दिया। इन अतिरिक्त प्रस्तावों पर सकारात्मक निर्णय होने से राज्य में ग्रामीण सड़क संपर्क के विस्तार को और गति मिलने की संभावना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पर्वतीय भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए सड़क परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन अत्यंत महत्वपूर्ण है। सड़क सुविधाओं का विस्तार न केवल गांवों को मुख्य मार्गों से जोड़ेगा, बल्कि स्थानीय आबादी के लिए आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता को भी अधिक सुगम बनाएगा। राज्य सरकार केंद्र सरकार के सहयोग से ग्रामीण आधारभूत संरचना को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
*पर्वतीय एवं सीमांत क्षेत्रों में विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी*
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड के अनेक गांव प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक विरासत, कृषि एवं स्थानीय उत्पादों की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। बेहतर सड़क संपर्क इन क्षेत्रों की क्षमताओं को विकसित करने में सहायक होगा। सड़क सुविधा मजबूत होने से स्थानीय युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसरों से जोड़ने, ग्रामीण पर्यटन को प्रोत्साहित करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि दुर्गम क्षेत्रों में सड़क संपर्क की उपलब्धता आपातकालीन परिस्थितियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बेहतर मार्गों से स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान होती है और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति अधिक सुगम बनती है। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं और जनकल्याणकारी सुविधाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाने में भी सहायता मिलती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि विकास का लाभ प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र तक पहुंचे और भौगोलिक कठिनाइयों के कारण कोई भी गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित न रहे। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत प्रस्तावित परियोजनाएं इस दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगी।
*मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का जताया आभार*
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड के सड़क एवं सेतु निर्माण प्रस्तावों पर सकारात्मक रुख अपनाने तथा उन्हें शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने की दिशा में सहयोग का आश्वासन देने के लिए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का भी आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से उत्तराखंड में आधारभूत सुविधाओं के विकास को निरंतर गति मिल रही है। राज्य सरकार पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुरूप सड़क नेटवर्क के विस्तार के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केंद्र एवं राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से उत्तराखंड में विकास कार्यों को नई गति मिल रही है। ग्रामीण सड़क संपर्क का विस्तार प्रदेश के समग्र विकास, ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती तथा आम नागरिकों के जीवन को अधिक सुगम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रस्तावित सड़क एवं सेतु परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति मिलने से राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा, दूरस्थ बसावटों की मुख्यधारा से कनेक्टिविटी मजबूत होगी और उत्तराखंड के समावेशी विकास के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।


