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पंचम सीमांत पर्वतीय जनपद बाल विज्ञान महोत्सव का मुख्यमंत्री ने किया शुभारंभ जानिए सभी समाचार

Pahado Ki Goonj

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LIVE: बागेश्वर में आयोजित पंचम सीमान्त पर्वतीय जनपद बाल विज्ञान महोत्सव-2026

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पंचम सीमांत पर्वतीय जनपद बाल विज्ञान महोत्सव का मुख्यमंत्री ने किया शुभारंभ, 240 बाल वैज्ञानिक कर रहे प्रतिभाग*

*सीमांत जनपद विज्ञान महोत्सव एवं संबंधित कार्यक्रमों के लिए एक करोड़ रुपये देने की घोषणा*

*राज्य की STEM लैब्स को एआई से जोड़ने और सभी विकासखंडों में लैब ऑन व्हील्स स्थापित करने की दिशा में होगा कार्य*

*प्रदेश के सभी जनपदों में विज्ञान एवं नवाचार केंद्र स्थापित करने की घोषणा*

*मुख्यमंत्री ने बाल वैज्ञानिकों से किया संवाद, उनकी जिज्ञासाओं के दिए उत्तर*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को बागेश्वर के मंडलसेरा स्थित विवेकानंद विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) के तत्वावधान में आयोजित पंचम सीमांत पर्वतीय जनपद बाल विज्ञान महोत्सव का शुभारंभ किया। दो दिवसीय इस महोत्सव में चमोली, चंपावत, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, उत्तरकाशी एवं पिथौरागढ़ के 240 चयनित बाल वैज्ञानिक प्रतिभाग कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए सीमांत जनपद विज्ञान महोत्सव एवं संबंधित कार्यक्रमों हेतु एक करोड़ रुपये देने की घोषणा की। उन्होंने राज्य की STEM लैब्स को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जोड़ने तथा सभी विकासखंडों में एक-एक लैब ऑन व्हील्स स्थापित करने की दिशा में कार्य किए जाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी जनपदों में विज्ञान एवं नवाचार केंद्र स्थापित करने की भी घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विद्यालयों में विज्ञान एवं तकनीक आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित करने के साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रोबोटिक्स और ड्रोन तकनीक को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उन्हें भविष्य की चुनौतियों और संभावनाओं के लिए तैयार करना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने महोत्सव में प्रतिभाग कर रहे बाल वैज्ञानिकों से संवाद किया और उनकी जिज्ञासाओं के उत्तर दिए। उन्होंने विद्यार्थियों को खूब पढ़ने, नए विचारों पर काम करने और सवाल पूछने की प्रवृत्ति बनाए रखने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के बाल वैज्ञानिक ही भविष्य में देश के प्रमुख वैज्ञानिक, इंजीनियर और शोधकर्ता बनेंगे। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में युवा पीढ़ी की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमांत एवं पर्वतीय क्षेत्रों में आयोजित इस प्रकार के विज्ञान महोत्सव विद्यार्थियों की प्रतिभा को मंच प्रदान करने के साथ ही उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मकता और नवाचार की भावना विकसित करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के आदर्शों से प्रेरणा लेकर विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने और देश एवं प्रदेश के विकास में योगदान देने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने विद्यालयी शिक्षा में आधुनिक तकनीक के समावेश पर जोर देते हुए रोबोटिक्स एवं ड्रोन तकनीक को शिक्षा से जोड़ने तथा महिला विकास एवं विज्ञान विषय पर सम्मेलन आयोजित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि विज्ञान एवं तकनीक के माध्यम से प्रदेश में नवाचार, सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और स्मार्ट कृषि को बढ़ावा दिया जा रहा है। देहरादून में साइंस सिटी और चंपावत में साइंस सेंटर विकसित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने के लिए हाउस ऑफ हिमालयाज ब्रांड के माध्यम से प्रयास कर रही है। इसके साथ ही कृषि, बागवानी, मत्स्य पालन, मौन पालन और होमस्टे जैसे क्षेत्रों में स्वरोजगार की संभावनाओं को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

महोत्सव के दौरान विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षक कविता हरकोटिया, दीप चंद जोशी, हरिमोहन ऐठाणी एवं ख्याली दत्त को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर कपकोट विधायक श्री सुरेश गड़िया, बागेश्वर विधायक श्रीमती पार्वती दास, दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री श्री शिव सिंह बिष्ट, श्री भूपेश उपाध्याय, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शोभा आर्या, भाजपा प्रदेश महामंत्री श्री कुंदन सिंह परिहार, यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत, जिलाधिकारी श्रीमती अपूर्वा पाण्डे, पुलिस अधीक्षक श्री जितेंद्र मेहरा, मुख्य विकास अधिकारी श्री नरेश कुमार, विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री अव्वल सिंह तोपाल सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, अधिकारी, शिक्षक एवं बाल वैज्ञानिक उपस्थित रहे।
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मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में शुक्रवार को सचिवालय में नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (एनएचएलएमएल) के अंतर्गत उत्तराखण्ड रोपवे डेवलपमेंट लिमिटेड के निदेशक मंडल की बैठक संपन्न हुई। इस अवसर पर बोर्ड द्वारा विभिन्न प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई।

बैठक के दौरान केदारनाथ रोपवे की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने सम्बन्धित अधिकारियों को परियोजना के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने केदारनाथ रोपवे से सम्बन्धित वन स्वीकृति के प्रस्ताव पोर्टल पर शीघ्र अपलोड किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इस सम्बन्ध में चिह्नित प्रतिपूरक वनीकरण (सीए) भूमि का समानांतर रूप से पुनः सत्यापन सुनिश्चित किए जाने के भी निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि परियोजना की निर्धारित अलाइनमेंट के अनुसार प्रत्येक गतिविधि का विस्तृत कार्ययोजना चार्ट (पर्ट चार्ट) तैयार कर बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने कहा कि जहां राजस्व भूमि पर टावर का निर्माण होना है, और वन स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है, वहाँ टावर की नींव का कार्य प्रारंभ कर लिया जाए। साथ ही, यूटिलिटी शिफ्टिंग से सम्बन्धित कार्यों में भी तेजी लाई जाए। उन्होंने प्रत्येक टावर के कार्य प्रारंभ होने एवं पूर्ण होने की तिथि निर्धारित करते हुए कैलेंडर तैयार कर प्रस्तुत किये जाने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने गौरीकुंड एवं सोनप्रयाग के निकट पार्किंग, जनसुविधाओं तथा आवासीय सुविधाओं के विकास के लिए समुचित योजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पार्किंग सहित विभिन्न जनसुविधाओं के लिए उचित भूमि भी चिन्हित कर योजना में शामिल करते हुए कार्य प्रारंभ कर लिया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि यात्रा के व्यस्ततम समय में भी निर्माण कार्य जारी रहने के कारण यात्रा संचालन प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक मार्ग एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं पहले से सुनिश्चित कर ली जाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि सम्बन्धित जिलाधिकारियों एवं प्रभागीय वनाधिकारियों (डीएफओ) को भी बैठक में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया जाए, ताकि भूमि, वन स्वीकृति एवं अन्य सम्बन्धित विषयों पर समन्वय के साथ समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

इस अवसर पर सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. रणवीर सिंह चौहान, श्री धीराज सिंह गर्ब्याल, अपर सचिव श्री विनीत कुमार एवं एनएचएलएमएल के अधिकारी उपस्थित थे।
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व्यापारी प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़, उनके सम्मान, सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री*

*प्रांतीय व्यापारी सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने कीं व्यापारी हितों से जुड़ी आठ महत्वपूर्ण घोषणाएं*

*व्यापारियों की समस्याओं के समाधान और व्यापारिक प्रक्रियाओं के सरलीकरण पर विशेष जोर*

*26 प्रमुख विभागों की 206 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध, प्रदेश में निवेश और उद्यमिता को दिया जा रहा बढ़ावा*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को हल्द्वानी के राजकीय मेडिकल कॉलेज सभागार में आयोजित प्रांतीय व्यापारी सम्मेलन का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर व्यापारियों के हितों से जुड़ी आठ महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि व्यापारी वर्ग प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। व्यापारियों की सुरक्षा, सम्मान और हितों की रक्षा राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशभर से आए व्यापारियों को संबोधित करते हुए कहा कि व्यापारी केवल वस्तुओं के क्रय-विक्रय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रोजगार सृजन, स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने और प्रदेश की आर्थिक प्रगति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बड़े उद्योगों से लेकर छोटे दुकानदारों तक, प्रत्येक व्यापारी राज्य के विकास में योगदान दे रहा है। कोविड-19 जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी व्यापारियों ने आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित कर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार व्यापारियों को केवल करदाता नहीं, बल्कि विकास का महत्वपूर्ण भागीदार मानती है। सरकार का प्रयास है कि व्यापारियों को भयमुक्त, सुरक्षित और पारदर्शी वातावरण मिले तथा उन्हें अनावश्यक प्रक्रियाओं और कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। व्यापारियों की समस्याओं के समयबद्ध समाधान और उनके साथ निरंतर संवाद पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने व्यापारी हितों से जुड़ी आठ महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं—

1. प्राकृतिक आपदा अथवा अन्य आपदाओं से प्रभावित व्यापारियों को नियमानुसार उचित राहत उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

2. व्यापारियों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए राज्य एवं जिला स्तर पर उद्योग मित्र समितियों का पुनर्गठन कर नियमित बैठकें आयोजित कराई जाएंगी।

3. जीएसटी में पंजीकृत व्यापारियों के दुर्घटना बीमा से संबंधित जानकारी का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा, ताकि पात्र व्यापारियों के आश्रित समय पर बीमा दावे की प्रक्रिया पूरी कर सकें।

4. पर्यटन व्यवसाय को प्रोत्साहित करने के लिए पंजीकरण प्रक्रिया सरल बनाई जाएगी तथा सिंगल विंडो व्यवस्था लागू की जाएगी।

5. पर्यटन बहुल क्षेत्रों और जिला मुख्यालयों में होमस्टे सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, जिससे स्थानीय लोगों को स्वरोजगार एवं अतिरिक्त आय के अवसर मिल सकें।

6. चारधाम यात्रा मार्ग पर आवश्यक स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे यात्रियों और व्यापारियों को सुविधा मिल सके।

7. राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य मार्गों तथा अन्य प्रमुख मार्गों से जुड़े बाजारों में सड़कों एवं नालियों के निर्माण और मरम्मत कार्यों को प्राथमिकता से कराया जाएगा।

8. व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में काम करने वाले श्रम विभाग में पंजीकृत श्रमिकों को कर्मकार कल्याण बोर्ड की योजनाओं एवं सुविधाओं का लाभ दिलाया जाएगा।

व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए प्रक्रियाओं का सरलीकरण

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में व्यापार, उद्यमिता, डिजिटल लेन-देन और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिला है। उत्तराखण्ड में भी व्यापार और निवेश से संबंधित प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा रहा है। सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से 26 प्रमुख विभागों की 206 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं। निवेशकों और उद्यमियों की समस्याओं के समाधान के लिए ‘निवेश मित्र’ व्यवस्था की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में स्टार्टअप और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए उत्तराखण्ड स्टार्टअप नीति तथा 200 करोड़ रुपये के वेंचर फंड की व्यवस्था की गई है। सरकार औद्योगिक विकास को केवल मैदानी क्षेत्रों तक सीमित न रखकर पर्वतीय क्षेत्रों में भी उद्यमिता और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए कार्य कर रही है। चमोली, पौड़ी और अल्मोड़ा में छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विशेष औद्योगिक पार्कों के लिए भूमि चिह्नित की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में स्थानीय व्यापार, पर्यटन, लघु उद्योग और स्वरोजगार की महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के व्यापारियों को स्थानीय बाजारों के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी पहचान स्थापित करने के अवसर मिलें। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड को आध्यात्मिक शक्ति के साथ आर्थिक शक्ति का भी प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने व्यापारियों से प्रदेश के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान करते हुए कहा कि उनके सहयोग से विकसित, आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त उत्तराखण्ड का संकल्प साकार होगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल की स्मारिका का विमोचन किया तथा व्यापार मंडल की विभिन्न इकाइयों के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया।

इस अवसर पर सांसद श्री अजय भट्ट, कैबिनेट मंत्री श्री राम सिंह कैड़ा, विधायक श्री बंशीधर भगत एवं श्रीमती सरिता आर्या, महापौर श्री गजराज सिंह बिष्ट, प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रदेश अध्यक्ष श्री नवीन वर्मा, प्रदेश महामंत्री श्री प्रकाश मिश्रा, भाजपा जिलाध्यक्ष श्री प्रताप बिष्ट, दर्जाधारी राज्यमंत्री डॉ. अनिल कपूर डब्बू, जिलाधिकारी श्री ललित मोहन रयाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टी.सी., मुख्य विकास अधिकारी श्री अरविंद कुमार पाण्डेय, अपर जिलाधिकारी श्री विवेक राय सहित व्यापारी संगठनों के पदाधिकारी एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
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दोपहर 12 बजे बाजपुर में हुई भीषण ओलावृष्टि, सूचना मिलते ही प्रभावित किसानों के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री धामी*

*हल्द्वानी से देहरादून लौटते समय मिली भीषण ओलावृष्टि की सूचना, खराब मौसम के बावजूद मुख्यमंत्री ने हेलीकॉप्टर का रुख बाजपुर की ओर कराया*

*ओलावृष्टि के कुछ ही समय बाद प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण, बाजपुर में उतरकर किया स्थलीय निरीक्षण*

*प्रभावित किसानों से मुलाकात कर सुनी समस्याएं, हरसंभव सहायता का दिया आश्वासन*

*अधिकारियों को फसलों के नुकसान का तत्काल आकलन कर समयबद्ध राहत कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश*

बाजपुर, 9 अक्टूबर। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को बाजपुर क्षेत्र में हुई भीषण ओलावृष्टि की सूचना मिलते ही प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण एवं स्थलीय निरीक्षण कर फसलों को हुए नुकसान का जायजा लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रभावित किसानों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया।

शुक्रवार को दोपहर लगभग 12 बजे बाजपुर क्षेत्र में अचानक भीषण ओलावृष्टि हुई, जिससे किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा। इसी दौरान मुख्यमंत्री श्री धामी हल्द्वानी से देहरादून लौट रहे थे। जैसे ही उन्हें ओलावृष्टि और फसलों को हुए नुकसान की जानकारी मिली, उन्होंने खराब मौसम के बावजूद पायलट को हेलीकॉप्टर बाजपुर की ओर ले जाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने पहले हेलीकॉप्टर से ओलावृष्टि प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद बाजपुर में उतरकर प्रभावित खेतों का स्थलीय निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने किसानों से सीधे संवाद कर फसलों को हुए नुकसान, उनकी समस्याओं और कठिनाइयों की जानकारी प्राप्त की तथा उन्हें हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया।

मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिए कि ओलावृष्टि से प्रभावित फसलों का विस्तृत सर्वेक्षण एवं नुकसान का आकलन प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभावित किसानों को नियमानुसार राहत उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई समयबद्ध ढंग से सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि प्राकृतिक आपदा की इस घड़ी में राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ किसानों के साथ खड़ी है। किसानों के हितों की रक्षा और उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रभावित किसानों की समस्याओं के समाधान में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी न हो और नुकसान के आकलन से लेकर राहत संबंधी कार्रवाई तक पूरी तत्परता एवं संवेदनशीलता के साथ कार्य किया जाए।

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**मुख्यमंत्री धामी ने नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद दिनेश आर्य को दी बधाई एवं शुभकामनाएं**

**मुख्यमंत्री आवास में राज्यसभा सांसद दिनेश आर्य ने मुख्यमंत्री से की शिष्टाचार भेंट**

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से आज मुख्यमंत्री आवास में नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद श्री दिनेश आर्य ने शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद श्री महेंद्र भट्ट भी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने श्री दिनेश आर्य को राज्यसभा सांसद निर्वाचित होने पर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि श्री आर्य अपने अनुभव, कार्यकुशलता और जनसेवा के प्रति समर्पण के माध्यम से संसद में उत्तराखंड की जनभावनाओं और जनहित से जुड़े विषयों को प्रभावी ढंग से उठाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यसभा में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रदेश के विकास, जनकल्याण और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्वास जताया कि श्री आर्य प्रदेश के विकास को नई गति देने तथा राज्य की आकांक्षाओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

मुख्यमंत्री ने श्री आर्य के सफल एवं उज्ज्वल संसदीय कार्यकाल की कामना करते हुए आशा व्यक्त की कि उनके प्रयासों से उत्तराखंड के विकास और जनकल्याण से जुड़े कार्यों को और मजबूती मिलेगी।

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  • उत्तराखण्ड में भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली का परीक्षण
  • 112 सायरनों पर मिला अलर्ट
  • राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से की गई निगरानी
  • सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास रहे एसईओसी में उपस्थित

उत्तराखण्ड में  भूकम्प के प्रति आमजन को जागरूक करने तथा राज्य में स्थापित भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली को परखने के उद्देश्य से शुक्रवार को पूर्वाह्न 11 बजे सायरन बजाकर परीक्षण किया गया। इस दौरान राज्य में स्थापित 112 सायरनों पर अलर्ट प्राप्त हुआ। इसके साथ ही भूदेव मोबाइल ऐप पर भी परीक्षण चेतावनी प्राप्त हुई। इस माॅक ड्रिल के माध्यम से भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली के अंतर्गत स्थापित सायरन और सेंसरों का परीक्षण किया गया। बता दें कि मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने प्रत्येक माह की 09 तरीख को पूर्वाह्न 11 बजे परीक्षण करने के लिए सायरन बजाने के निर्देश दिए हैं।

परीक्षण के दौरान सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) में उपस्थित रहे तथा माॅक ड्रिल की निगरानी की। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की के वैज्ञानिक ऑनलाइन माध्यम से एसईओसी से जुड़े रहे और परीक्षण की प्रक्रिया की निगरानी की। इस दौरान सायरनों की कार्यप्रणाली तथा मोबाइल ऐप पर प्राप्त चेतावनी का अवलोकन किया गया, ताकि प्रणाली की स्थिति का आकलन किया जा सके। सचिव श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली का परीक्षण काफी हद तक सफल रहा है। परीक्षण के दौरान जिन स्थानों पर सायरनों के संचालन में तकनीकी दिक्कतें सामने आई हैं, उन्हें आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों द्वारा चिन्हित किया जा रहा है। संबंधित कमियों का आकलन कर उन्हें दूर कराया जाएगा, ताकि सभी सायरन आवश्यकतानुसार प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें।

उन्होंने कहा कि इस परीक्षण का मुख्य उद्देश्य राज्य में स्थापित भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली की वास्तविक कार्यक्षमता का आकलन करना है। इसके माध्यम से भूकम्पीय गतिविधियों का पता लगाने के लिए स्थापित सेंसर और चेतावनी प्रसारित करने के लिए लगाए गए सायरन सही तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं, इसकी जांच की गई। नियमित परीक्षण से तकनीकी खामियों की पहचान करने तथा उन्हें समय रहते दूर करने में मदद मिलेगी। इससे वास्तविक भूकम्प की स्थिति में चेतावनी प्रणाली की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता को बेहतर बनाया जा सकता है।

श्री सुमन ने बताया कि वर्तमान में राज्य में भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली के अंतर्गत 169 सेंसर और 112 सायरन स्थापित किए गए हैं। इन उपकरणों के माध्यम से भूकम्पीय गतिविधियों की निगरानी और समय रहते चेतावनी प्रसारित करने की व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। सायरनों का नियमित परीक्षण इस व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि आवश्यकता पड़ने पर लोगों तक चेतावनी पहुंचाने में कोई तकनीकी बाधा न आए।

उन्होंने कहा कि इस तरह के परीक्षण का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य आमजन को सायरन की आवाज से परिचित कराना भी था। इससे लोग यह समझ सकेंगे कि सायरन बजने पर उन्हें सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज बजाया गया सायरन पूर्व निर्धारित परीक्षण का हिस्सा था, न कि किसी वास्तविक भूकम्प की चेतावनी।

सचिव श्री विनोद कुमार सुमन ने आमजन से अपील की है कि वे अपने मोबाइल फोन में भूदेव ऐप का अद्यतन संस्करण इंस्टॉल रखें और ऐप को लोकेशन की अनुमति प्रदान करें, ताकि वास्तविक आपात स्थिति में चेतावनी संदेश प्राप्त करने में सुविधा हो। उन्होंने कहा कि भूकम्प जैसी आपदा के प्रभाव को कम करने के लिए तकनीकी व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ जनजागरूकता और व्यक्तिगत सतर्कता भी आवश्यक है। राज्य सरकार भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने तथा तकनीकी कमियों को दूर करने के लिए संबंधित संस्थानों के सहयोग से निरंतर कार्य कर रही है।

इस अवसर पर अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन श्री प्रकाश चंद्र, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी श्री राजकुमार नेगी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री दिनेश कुमार पुनेठा आदि उपस्थित रहे।

हर माह होगी सायरन एवं प्रणाली की जांच
मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन के अनुसार प्रत्येक माह की 09 तारीख को पूर्वाह्न 11 बजे बजने वाला सायरन प्रणाली के नियमित परीक्षण का हिस्सा होगा। इस दौरान यह जांच की जाएगी कि राज्य में स्थापित सायरन सही ढंग से कार्य कर रहे हैं या नहीं। यदि किसी स्थान पर सायरन के संचालन में किसी प्रकार की तकनीकी समस्या पाई जाती है तो उसे तत्काल ठीक कराने की कार्रवाई की जाएगी। इस नियमित परीक्षण से तकनीकी खामियों की समय रहते पहचान की जा सकेगी और वास्तविक आपदा के समय चेतावनी प्रणाली के प्रभावी संचालन को सुनिश्चित किया जा सकेगा।

राज्य में 169 सेंसर और 112 सायरन स्थापित
सचिव श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि वर्तमान में उत्तराखण्ड राज्य में भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली के अंतर्गत 169 सेंसर तथा 112 सायरन स्थापित किए गए हैं। इन सेंसरों के माध्यम से भूकंपीय गतिविधियों की निगरानी की जाती है और निर्धारित प्रणाली के माध्यम से चेतावनी प्रसारित की जाती है। उन्होंने बताया कि यूएसडीएमए एवं आईआईटी रुड़की के सहयोग से भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली परियोजना के अंतर्गत और अधिक सेंसर स्थापित किए जाने का प्रस्ताव गतिमान है। अतिरिक्त सेंसर स्थापित होने से भविष्य में होने वाली भूकम्पीय घटनाओं की निगरानी और चेतावनी प्रणाली की क्षमता में और सुधार होगा तथा भूकम्पीय घटनाओं की चेतावनी/सूचना अधिक सटीकता से प्राप्त की जा सकेगी।

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उत्तराखण्ड के आपदा प्रबंधन माॅडल के रूबरू हुए एचपीएसडीएमए के  उपाध्यक्ष दीपक राठौर
  •  आपसी सहयोग और समन्वय की इच्छा व्यक्त की

हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मा0 उपाध्यक्ष श्री दीपक राठौर ने शुक्रवार को उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) का भ्रमण कर प्राधिकरण द्वारा आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली। इस अवसर पर उन्होंने दोनों पड़ोसी राज्यों के बीच आपदा प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए आपसी समन्वय एवं सहयोग को और सशक्त बनाने पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से विभिन्न आपदाओं के दौरान राज्य में किए जाने वाले राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी ली। वे उत्तराखण्ड की आईआरएस प्रणाली से भी रूबरू हुए। साथ ही यूएसडीएमए द्वारा निर्मित विभिन्न एसओपी का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने ग्लेशियर लेक आउटबस्र्ट फ्लड के खतरों को कम करने की दिशा में उत्तराखण्ड द्वारा किए जा रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी ली तथा इस दिशा में आपसी समन्वय व सहयोग को बढ़ाने की इच्छा जाहिर की।

श्री दीपक राठौर ने कहा कि उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील एवं समान प्रकृति वाले पर्वतीय राज्य हैं। दोनों राज्यों की सीमाएं भी आपस में जुड़ी हुई हैं, जिसके कारण प्राकृतिक आपदाओं की चुनौतियां भी लगभग समान हैं। उन्होंने कहा कि यदि दोनों राज्य आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में समन्वित रणनीति के साथ मिलकर कार्य करें, तो बेहतर एवं प्रभावी परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने विशेष रूप से भूस्खलन, अतिवृष्टि तथा पर्वतीय जोखिमों के प्रबंधन में संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।

इस दौरान उन्होंने उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा संचालित चारधाम यात्रा की मॉनिटरिंग एवं प्रबंधन प्रणाली को विस्तार से समझा। उन्होंने विशेष रूप से राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) के माध्यम से केदारनाथ यात्रा की लाइव मॉनिटरिंग, रियल-टाइम अलर्ट सिस्टम, भीड़ प्रबंधन, मौसम एवं मार्ग की सतत निगरानी तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच त्वरित समन्वय की व्यवस्था का अवलोकन किया।

इस दौरान सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने यूएसडीएमए के क्रियाकलापों एवं नवाचारों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विगत वर्षों में प्राधिकरण द्वारा विभिन्न आपदाओं का प्रभावी ढंग से सामना करते हुए त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित किए गए हैं। साथ ही, तकनीकी नवाचारों एवं सुदृढ़ संस्थागत तंत्र के माध्यम से आपदा प्रबंधन व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

इस अवसर श्री दीपक राठौर ने यूएसडीएमए द्वारा तहसील स्तर पर गठित क्विक रिस्पांस टीमों (क्यूआरटी) की विशेष सराहना की। उन्होंने क्यूआरटी की संरचना, कार्यप्रणाली एवं त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को नजदीक से समझा और इसे आपदा प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।

श्री दीपक राठौर राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) की कार्यप्रणाली से भी रूबरू हुए। इस दौरान उन्होंने विभिन्न स्रोतों तथा एजेंसियों से प्राप्त होने वाले अलर्ट तथा उन्हें समयबद्ध एवं व्यवस्थित ढंग से आम जनता तक पहुंचाए जाने की प्रक्रिया को समझा। इसके अतिरिक्त, उन्होंने यूएसडीएमए द्वारा तैयार की गई मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) एवं भूदेव एप की भी प्रशंसा की। उन्होंने विशेष रूप से भूस्खलन प्रबंधन के क्षेत्र में दोनों राज्यों के बीच संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता व्यक्त की।

इस अवसर अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन श्री प्रकाश चंद्र,, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी श्री राजकुमार नेगी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री दिनेश कुमार पुनेठा, यूएलएमएमसी के निदेशक डाॅ. शांतनु सरकार, यूप्रिपेयर के एपीडी श्री एसके बिरला, डाॅ. पीडी माथुर के साथ ही यूएसडीएमए के विशेषज्ञ आदि उपस्थित रहे।

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मोर्चा के प्रयास से पूर्व सैनिकों को पिटकुल में समान कार्य-समान वेतन का हुआ फरमान जारी- नेगी #जल विद्युत निगम के पूर्व सैनिकों के लिए भी मोर्चा है संघर्षरत | विकासनगर-जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि मोर्चा के प्रयास से पिटकुल (पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड) में उपनल के माध्यम से कार्योजित पूर्व सैनिकों को समान कार्य- समान वेतन का लाभ दिए जाने के आदेश जारी हो गए हैं | उक्त हेतु मोर्चा ने प्रमुख सचिव, ऊर्जा श्री आर मीनाक्षी सुंदरम एवं एम डी, पिटकुल श्री प्रकाश ध्यानी का आभार व्यक्त किया है | नेगी ने कहा कि मोर्चा द्वारा कुछ समय पूर्व प्रमुख सचिव, ऊर्जा श्री आर. मीनाक्षी सुंदरम एवं एमडी, पिटकुल श्री प्रकाश ध्यानी से मुलाकात कर उपनल के माध्यम से पिटकुल में कार्योजित पूर्व सैनिकों को सामान कार्य- समान वेतन का लाभ दिलाने कि मांग रखी थी | नेगी ने कहा कि उपनल कर्मचारियों के मामले में जनहित याचिका संख्या 116/ 2018 कुंदन सिंह बनाम उत्तराखंड राज्य व अन्य आदि याचिका में मा.उच्च न्यायालय द्वारा उपनल के माध्यम से कार्योजित/ प्रायोजित कार्मिकों को समान कार्य- समान वेतन आदि देने के निर्देश दिए गए थे, जिसके क्रम में शासन द्वारा 3 फरवरी 2026 के द्वारा समान कार्य- समान वेतन दिए जाने के निर्देश सभी विभागों को दिए गए थे | उक्त निर्देशों का अनुपालन लगभग सभी विभागों/ निगमों द्वारा कर लिया गया था, लेकिन पूर्व सैनिकों को समान कार्य- समान वेतन आदि दिये जाने के निर्देश का अनुपालन नहीं हो पा रहा था | मोर्चा को भरोसा है कि बहुत जल्द जल विद्युत निगम में कार्यरत पूर्व सैनिकों को भी समान कार्य- समान वेतन का लाभ मिलने लगेगा|
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आम विद्युत उपभोक्ताओं पर गरमी एवं सरकारी उपभोक्ताओं पर नरमी बंद करे यूपीसीएल- मोर्चा #आम उपभोक्ता का ₹5000 बकाया होने पर काट लिया जाता है कनेक्शन ! #सरकारी महकमों पर है लगभग1300 करोड रुपए बकाया ! #सरकारी विभागों पर यूपीसीएल दिखाए सख्ती | विकासनगर- जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने आम विद्युत उपभोक्ताओं की पीड़ा एवं सरकारी विभागों द्वारा विद्युत बकाया भुगतान न करने पर उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक श्री प्रकाश चंद्र ध्यानी से मुलाकात कर विद्युत उपभोक्ताओं से समान व्यवहार करने का आग्रह किया, जिस पर श्री ध्यानी ने कार्यवाही का भरोसा दिलाया | नेगी ने कहा कि एक तरफ जहां आम विद्युत उपभोक्ता का ₹5000 बकाया होने पर विद्युत कनेक्शन काट दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर सरकारी विभागों पर लगभग 1300 करोड रुपए बकाया होने के बावजूद भी यूपीसीएल कनेक्शन काटने (हाथ डालने से) कतराता है | यह एक तरह से सौतेला व्यवहार है | जैसा कि सूत्र बताते हैं कि सरकारी विभागों की फेहरिस्त में जल निगम/ जल संस्थान पर 450 करोड़, सिंचाई विभाग पर 452 करोड़, नगर निगम/नगर पालिकाओं पर 76 करोड़, अन्य सरकारी विभागों पर 150 करोड़ , एमपी/ एमएलए आवासों का 45 करोड़ रुपए, एमएसएसवाई का 258 करोड रुपए तथा स्मार्ट सिटी का 45 करोड़ का बकाया है, लेकिन इन महकमों पर यूपीसीएल की खास मेहरबानी रहती है | सरकारी विभागों पर विद्युत बकाया होने के चलते हर वर्ष बिजली के दाम किसी न किसी प्रकार का अधिभार/टैक्स बढ़ा दिया जाता है, जिससे आम उपभोक्ता पिसता रहता है | जरूरत इस बात की है कि सरकारी विभागों पर सख्ती बरती जाये|

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