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गायत्री परिवार के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम के पावन अवसर पर हरिद्वार में भूमिरक्षक सम्मेलन सम्पन्न ।

Pahado Ki Goonj

गायत्री परिवार के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम के पावन अवसर पर हरिद्वार में भूमिरक्षक सम्मेलन सम्पन्न ।

हरिद्वार । रिपोर्ट मदन पैन्यूली 

गायत्री परिवार की संस्थापिका परम् वंदनीया माताजी के अवतरण के 100 वर्ष तथा परम् पूज्य गुरुदेव द्वारा प्रज्वलित अखंड दीपक की शताब्दी वर्ष के पावन उपलक्ष्य में आज हरिद्वार में गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी एवं आदरणीय शेफाली जीजी की अध्यक्षता में आदिवासी सम्मेलन का गरिमामय आयोजन सम्पन्न हुआ। यह सम्मेलन आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक पुनर्जागरण एवं राष्ट्र-निर्माण के संकल्प के साथ आयोजित किया गया।

अध्यक्षीय उद्बोधन में आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने कहा कि परम् पूज्य गुरुदेव एवं परम् वंदनीया माताजी ने अध्यात्म के प्रकाश को समाज की अंतिम पंक्ति तक पहुँचाने हेतु अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित किया। शताब्दी वर्ष की इस पावन वेला में प्रत्येक गायत्री परिजन का दायित्व है कि वह ऋषि युग्म के पवित्र प्रयासों को और अधिक गति देते हुए समाज के सर्वांगीण उत्थान में सहभागी बने।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि महंत रविंद्र पुरी जी ने अपने उद्बोधन में आदिवासी समाज की प्रकृति-संलग्न जीवनशैली, सांस्कृतिक मूल्यों तथा सनातन ऋषि परंपरा के संरक्षण में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

इस अवसर पर ब्रिटिश संसद के हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स के वरिष्ठ सदस्य लॉर्ड जोनाथन मंडेलसन, लॉर्ड कृष रावल एवं हरियाणा से राजसभा संसद श्री राम चंदर जांगड़ा जी की गरिमामयी उपस्थिति रही।

इस अवसर पर परम् पूज्य गुरुदेव द्वारा 21वीं सदी में मानवीय मूल्यों की स्थापना हेतु दिए गए 18 युग निर्माण सत्संकल्पों का आदिवासी भाषा में विमोचन एवं वाचन किया गया। कार्यक्रम के दौरान भूमिपुत्र आदिवासी जनों द्वारा लोकरंजन से लोक-शिक्षण का संदेश देने वाले पारंपरिक आदिवासी संगीत एवं नृत्य भी प्रस्तुत किए गए। इस अवसर पर झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, गुजरात, असम सहित देश के विभिन्न भागों से हजारों की संख्या में पधारे आदिवासी भाई-बहन एवं 80 से अधिक देशों से आए गायत्री परिजन उपस्थित रहे ।

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