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विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत हों तो किसी भी जांच के लिए तैयार है सरकार : सुबोध उनियाल

Pahado Ki Goonj

विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत हों तो किसी भी जांच के लिए तैयार है सरकार : सुबोध उनियाल
देहरादून।
कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर चल रहे विवाद पर स्पष्ट किया कि यदि कोई भी व्यक्ति या पक्ष विश्वसनीय और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करता है, तो उत्तराखंड सरकार किसी भी स्तर की जांच के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि केवल अपुष्ट आरोपों के आधार पर निर्णय लेना कानूनी प्रक्रिया को कमजोर कर सकता है और इससे सजायाफ्ता दोषियों को लाभ मिल सकता है।
पार्टी मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में मंत्री उनियाल ने कहा कि इस हृदयविदारक घटना से समूची देवभूमि आहत हुई थी। धामी सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल महिला डीआईजी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया, आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और सभी फोरेंसिक व व्यवहारिक साक्ष्य एकत्र कर न्यायालय में सशक्त पैरवी की गई। पीड़ित परिवार की सहमति से की गई कार्यवाही के चलते आरोपियों को जमानत तक नहीं मिल सकी और अंततः न्यायालय द्वारा उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
उन्होंने बताया कि प्रकरण को लेकर सीबीआई जांच की मांग न्यायालय में उठाई गई थी, लेकिन ट्रायल कोर्ट, उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय—तीनों ने एसआईटी जांच को सही, सक्षम और निष्पक्ष मानते हुए किसी अन्य जांच की आवश्यकता नहीं मानी। न्यायालयों ने यह भी स्पष्ट किया कि विवेचना में किसी वीआईपी को बचाने का कोई प्रयास नहीं किया गया।
क्राइम सीन पर बुल्डोजर चलाने के आरोपों पर मंत्री ने कहा कि न्यायालय ने स्वयं माना है कि एफएसएल टीम द्वारा सभी आवश्यक साक्ष्य पहले ही एकत्र कर लिए गए थे। इसके बावजूद कुछ लोग एक विशेष नैरेटिव गढ़ने के उद्देश्य से दुष्प्रचार कर रहे हैं।
सुबोध उनियाल ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को संदिग्ध बताते हुए कहा कि उनमें न तो समय और न ही तिथि स्पष्ट है। रिकॉर्डिंग में अंकिता की मौत को आत्महत्या बताने जैसी बातें सामने आना अभियुक्तों को लाभ पहुंचाने की मंशा को दर्शाता है, जबकि वे पहले ही हत्या के आरोप में दोषी ठहराए जा चुके हैं और मामला अपील में विचाराधीन है।
उन्होंने आशंका जताई कि उक्त रिकॉर्डिंग सुनियोजित तरीके से तैयार और लीक की गई है, जिसमें बिना किसी प्रमाण के कुछ व्यक्तियों के नाम लिए जा रहे हैं, जिससे उनकी व्यक्तिगत छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास प्रतीत होता है।
मंत्री ने दोहराया कि यह अत्यंत संवेदनशील मामला है और बिना ठोस साक्ष्यों के जल्दबाजी में लिया गया कोई भी निर्णय न्यायिक प्रक्रिया को कमजोर कर सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना प्रमाण के जांच की मांग करने वाले तत्व कहीं न कहीं सजायाफ्ता अपराधियों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।
पत्रकार वार्ता में प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार, प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान, सह मीडिया प्रभारी राजेंद्र नेगी तथा प्रदेश प्रवक्ता श्रीमती कमलेश रमन उपस्थित रहे।

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