हल्द्वानी। मोटाहल्दू में गौला नदी के किनारे बसे मजदूरों की झोपड़ियों में आग लग गई। मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल इसकी सूचना पुलिस और फायर ब्रिगेड को दी। करीब एक घंटे बाद फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। जिसके बाद उन्होंने आग पर काबू पाया, लेकिन तबतक मजदूरों की लगभग 200 झोपड़ियां चल राख हो गई थी। इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। अभी तक आग लगने के कारणों का भी पता नहीं चल पाया है। जानकारी के मुताबिक इन झोपड़ियों में गौली नदी में खनन करने वाले मजदूर रहते थे। संदिग्ध परिस्थितियों में लगी आग से 200 झोपड़ियां जलकर राख हो गई है। राजस्व विभाग और वन विभाग के अधिकारी नुकसान का आकलन कर रहे हैं। साथ ही मामले की जांच भी जा रही है कि इन झोपड़ियों में आग कैसी लगी।
सीएम तीरथ की मानसिकता नाकारात्मकःप्रीतम सिंह
Fri Mar 19 , 2021
देहरादून। 18 मार्च को उत्तराखंड में बीजेपी सरकार ने चार साल पूरे हो चुके हैं। हालांकि चार साल पूरे होने से नौ दिन पहले ही बीजेपी ने पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को कुर्सी से हटाकर नए मुख्यमंत्री के तौर पर तीरथ सिंह रावत की ताजपोशी की थी। ऐसे में […]

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ब्रेकिंग न्यूज़ उत्तरकाशी के पुरोला को जिला बनाओजिला मुख्यालय पुरोला से 150 से 200 किमी की दूरी में होने से उन्हें काफी सारी परेशानीयों का सामना करना पड़ता है। -स्थानीय लोगों को हर छोटी या बड़ी समस्या के लिये इतना लम्बा सफर तय करना पड़ता है। -जिला मुख्यालय से दूर होने के कारण वहां के विकास पर ध्यान नहीं दिया जाता है। -उनका कहना है कि पुरोला को जिला बनाने से यह सारी परेशानी खत्म हो जाएंगी। अलग जिला बनाने की मांग क्षेत्रवासियों ने बताया कि 24 फरवरी 1960 में उत्तरकाशी जिला टिहरी से अलग हुआ था। उस समय रवांई परगना उत्तरकाशी जिले में शामिल किया गया था। यह क्षेत्र बड़कोट, पुरोला, नो गांव, मोरी तहसील के अंदर आता है। 1960 में रवांई के लोगों ने अलग जिले की मांग शुरू कर दी थी। उसके बाद उत्तराखंड राज्य बनने के बाद पृथक जिले की मांग और तेज हुई, जिसके चलते सरकार ने राज्य के 4 नए जिलों की घोषणा में यमुनोत्री को जिला बनाने की बात कही थी। जिससे पुरोला के लोग भड़क गए और तब से लगातार पुरोला को जिला बनाने की मांग की जा रही है।
Pahado Ki Goonj July 31, 2018

