मुख्यमंत्री ने पुलिस स्मृति दिवस पर शहीद जवानों को दी श्रद्धांजलि, परिजनों को किया सम्मानित

*मुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग के सुदृढ़ीकरण और कार्मिकों के कल्याण के लिए की आठ घोषणाएं*
*पुलिस में करीब 1,600 रिक्त पदों पर जल्द शुरू होगी भर्ती प्रक्रिया, थानों का वार्षिक बजट होगा दोगुना*
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को पुलिस लाइन, देहरादून में पुलिस स्मृति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने पुलिस एवं अर्धसैनिक बलों के शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा शहीद पुलिसकर्मियों के परिजनों को सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा में पुलिस एवं अर्धसैनिक बलों की महत्वपूर्ण भूमिका है। पिछले एक वर्ष में देशभर में 154 जवानों ने कर्तव्य पालन के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया, जिनमें उत्तराखण्ड पुलिस के उपनिरीक्षक स्वर्गीय विनोद कुमार भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि शहीद पूरे देश का गौरव होते हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में नई दिल्ली में राष्ट्र को समर्पित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक वीर जवानों के त्याग और साहस का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने पुलिस व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण और पुलिसकर्मियों के कल्याण के लिए आठ महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने उत्तराखण्ड पुलिस की विभिन्न इकाइयों में करीब 1,600 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू करने, थानों एवं चौकियों में कार्मिकों की आवश्यकता के अनुसार पदों की संख्या और व्यवस्था की समीक्षा करने तथा विवेचकों को आधुनिक जांच किट उपलब्ध कराने की घोषणा की। साथ ही थानों के आवश्यक कार्यों के लिए वार्षिक बजट 4 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 8 करोड़ रुपये किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी पुलिस मॉडर्न स्कूलों को बेहतर बनाने, देहरादून में पुलिसकर्मियों के लिए ट्रांजिट हॉस्टल और मल्टी स्टोरी बैरक का निर्माण कराने तथा देहरादून स्थित पुलिस अस्पताल के उच्चीकरण की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खाकी वर्दी साहस, अनुशासन और राष्ट्रसेवा का प्रतीक है। पुलिसकर्मी त्योहारों पर भी परिवारों से दूर रहकर जनता की सुरक्षा करते हैं। उत्तराखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियों और आपदाओं के बीच उनकी भूमिका अधिक महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नशा और साइबर अपराध आज गंभीर चुनौतियां हैं। नशे की रोकथाम के लिए त्रिस्तरीय एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स गठित की गई है। ड्रग फ्री उत्तराखण्ड के संकल्प को साकार करने के लिए नशा तस्करों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में पुलिस को आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और अन्य एजेंसियों के समन्वय से साइबर अपराधियों से दो कदम आगे रहना होगा। करीब 32 करोड़ रुपये की लागत से स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर का निर्माण गतिमान है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रत्येक थाने में महिला हेल्प डेस्क के अंतर्गत क्विक रिस्पॉन्स टीम गठित की गई है।
मुख्यमंत्री ने इस वर्ष लगभग 5 करोड़ कांवड़ यात्रियों तथा चारधाम यात्रा में अब तक 60 लाख से अधिक श्रद्धालुओं की सुरक्षित एवं सुगम यात्रा सुनिश्चित करने में उत्तराखण्ड पुलिस के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस वर्ष उत्कृष्ट सेवाओं के लिए 319 पुलिसकर्मियों को विभिन्न पदकों एवं सम्मान चिह्नों से अलंकृत किया गया है। उत्तराखण्ड पुलिस का प्रतिष्ठित ‘प्रेसिडेंट्स पुलिस कलर्स’ के लिए नामित होना प्रदेश के लिए गौरव की बात है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस आवास संतुष्टि दर 18 प्रतिशत से बढ़कर 22 प्रतिशत हुई है और लक्ष्य इसे 30 प्रतिशत तक पहुंचाने का है। इस वर्ष 785 पुलिसकर्मियों को पदोन्नति दी गई, नागरिक पुलिस में 1,573 तथा पीएसी में 370 आरक्षियों की सीधी भर्ती हुई। उपनिरीक्षक, प्लाटून कमांडर एवं अग्निशमन द्वितीय अधिकारी के 222 पदों की भर्ती प्रक्रिया पूरी हुई है। मृतक पुलिसकर्मियों के 24 आश्रितों को नियुक्तियां दी गई हैं। इस वित्तीय वर्ष में थानों, अग्निशमन केंद्रों, बैरकों, मैस तथा अन्य कार्यस्थलों के लिए 58 करोड़ रुपये से अधिक जारी किए गए हैं। पुलिसकर्मियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री ने पुलिसकर्मियों के तनाव प्रबंधन के लिए नियमित कार्यक्रम आयोजित करने पर भी जोर दिया।
पुलिस महानिदेशक श्री दीपम सेठ ने जानकारी दी कि राज्य गठन से अब तक उत्तराखण्ड पुलिस के 206 कार्मिकों ने कर्तव्य पालन के दौरान प्राण न्योछावर किए हैं। इस वर्ष पुलिस शहीद कोष से आश्रित परिवारों को लगभग 50 लाख रुपये की सहायता दी गई, जबकि पुलिस सैलरी पैकेज के अंतर्गत अब तक करीब 31 करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान की गई है। एम्स ऋषिकेश में चौबीसों घंटे संचालित पुलिस हेल्प डेस्क स्थापित की जा रही है। इस वर्ष जीवन रक्षक निधि से 25 कार्मिकों को 1 करोड़ 16 लाख रुपये की सहायता तथा 446 मेधावी बच्चों को 34 लाख रुपये की छात्रवृत्ति दी गई।
इस अवसर पर हरिद्वार सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, कैबिनेट मंत्री श्री खजान दास, राज्यसभा सांसद श्री नरेश बंसल, विधायक श्रीमती सविता कपूर, जिला पंचायत अध्यक्ष देहरादून श्रीमती सुखविंदर कौर, ऋषिकेश के महापौर श्री शंभू पासवान, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती कुसुम कंडवाल, मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन, मुख्य सूचना आयुक्त श्रीमती राधा रतूड़ी, सचिव गृह श्री शैलेश बगोली, पुलिस महानिदेशक श्री दीपम सेठ, पूर्व पुलिस महानिदेशक श्री अनिल रतूड़ी, जिलाधिकारी देहरादून डॉ. आशीष चौहान, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
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*राजीव गांधी नवोदय विद्यालयों का होगा संपूर्ण कायाकल्प*
*उत्कृष्टता केंद्र के रूप में किए जाएँगे विकसित*
*मुख्य सचिव ने ली इस संबंध में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक*
*विद्यालयों में हो स्थायी शिक्षक और सुदृढ़ शैक्षणिक व्यवस्थाः मुख्य सचिव*
मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने बुधवार को सचिवालय में राजीव गांधी नवोदय विद्यालयों को उत्कृष्टता केंद्र (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) के रूप में विकसित करने हेतु इनकी सम्पूर्ण कायाकल्प की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केंद्र और बेहतर आवासीय सुविधायुक्त संस्थानों के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने इसके लिए अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करते हुए शिक्षकों, प्रधानाचार्यों, आधारभूत सुविधाओं से युक्त किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यालयों के संचालन में व्यापक सुधार किए जाने की आवश्यकता है।
*सोसाइटी के माध्यम से संचालित किए जाएं राजीव नवोदय विद्यालयः मुख्य सचिव*
मुख्य सचिव ने राजीव गांधी नवोदय विद्यालयों का संचालन सोसाइटी के माध्यम से कराए जाने पर जोर दिया। कहा कि इसके लिए राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में शासी निकाय एवं जिला स्तर पर जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में समिति के गठन की व्यवस्था की जाए। उन्होंने सरकारी आवासीय विद्यालयों के संचालन के लिए एक लीगल फ्रेमवर्क तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि विद्यालयों के प्रभावी संचालन, उत्तरदायित्व निर्धारण और नियमित निगरानी में सहायता मिल सके।
*स्थायी प्रधानाचार्यों एवं समर्पित शिक्षकों की व्यवस्था हो सुनिश्चित*
मुख्य सचिव ने विद्यालयों में नियमित एवं समर्पित शिक्षकों की नियुक्ति के साथ ही, स्थायी प्रधानाचार्यों की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में उच्च शैक्षणिक गुणवत्ता के अनुरूप योग्य एवं अनुभवी शिक्षकों की उपलब्धता होनी चाहिए। शिक्षकों की नियुक्ति के लिए निर्धारित शैक्षणिक एवं व्यावसायिक अर्हताओं के साथ उच्च शिक्षा और शोध की पृष्ठभूमि वाले अभ्यर्थियों को प्राथमिकता देने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि स्थायी नियुक्तियों की प्रक्रिया पूरी होने तक शिक्षण कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक एवं अस्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। विद्यालयों के कार्मिक ढांचे को भी आवश्यकता के अनुरूप मजबूत किया जाए।
*प्रवेश प्रक्रिया नया सत्र प्रारम्भ होने से एक माह पूर्व हो जाए पूर्ण*
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रवेश परीक्षा और प्रवेश प्रक्रिया का समयबद्ध निर्धारण किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रवेश प्रक्रिया ऐसी हो कि नए शैक्षणिक सत्र के आरंभ होने से कम से कम एक माह पहले विद्यार्थियों के प्रवेश सुनिश्चित कर लिए जाएं।
*शिक्षा के साथ एक्स्ट्रा करिकुलम और को-करिकुलम गतिविधियों पर भी जोर*
मुख्य सचिव ने कहा कि विद्यालयों में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा अन्य पाठ्य-सहगामी एवं पाठ्येतर गतिविधियों के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए जाएं। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए सभी आवश्यक शैक्षणिक एवं आवासीय सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों को सभी आवश्यक सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
*चिकित्सा सुविधा के लिए वाहन सहित आवश्यक व्यवस्थाएं विकसित हों*
मुख्य सचिव ने विद्यालयों में विद्यार्थियों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आपातकालीन चिकित्सा आवश्यकताओं के लिए वाहन की व्यवस्था सहित अन्य जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही, विद्यालयों के लिए आवश्यक बजट का निर्धारण भी प्रस्तावित सुविधाओं, कार्मिकों और संचालन संबंधी जरूरतों के अनुरूप किया जाए।
*शिक्षकों की नियुक्ति के लिए पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए*
मुख्य सचिव ने शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धात्मक चयन प्रक्रिया अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि स्थायी भर्ती होने तक शिक्षण व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला स्तर पर वैकल्पिक प्रबन्ध किए जाएं। उन्होंने इस सम्बन्ध में जिलाधिकारियों को आवश्यकतानुसार शिक्षकों की अस्थायी व्यवस्था करने हेतु अधिकृत किए जाने के भी निर्देश दिए।
इस अवसर पर सचिव शि़क्षा सुश्री ज्योति यादव, अपर सचिव श्री नवनीत पाण्डेय एवं महानिदेशक श्रीमती आकांक्षा कोंडे सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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LIVE: देहरादून में द टोंसब्रिज स्कूल के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम*
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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने द टॉसब्रिज स्कूल के संस्कार दिवस समारोह में विद्यार्थियों को संस्कारों, अनुशासन और जीवन मूल्यों का महत्व समझाया।*

– **आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं का ज्ञान भी आवश्यक: मुख्यमंत्री*
– *डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के जीवन से प्रेरणा लेकर बड़े सपने देखें और उन्हें साकार करने के लिए निरंतर प्रयास करें विद्यार्थी: मुख्यमंत्री*
– *प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा भारत: मुख्यमंत्री*
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– *पारदर्शी भर्ती व्यवस्था के माध्यम से पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को मिली सरकारी नौकरी: मुख्यमंत्री*
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को देहरादून स्थित द टॉसब्रिज स्कूल में आयोजित संस्कार दिवस एवं स्थापना दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने विद्यालय के विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों एवं उपस्थित अतिथियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संस्कार दिवस केवल विद्यालय की स्थापना का उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराने का अवसर भी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक और व्यावसायिक रूप से सफल बनाना नहीं, बल्कि उन्हें एक अच्छा इंसान बनाना भी है। ज्ञान व्यक्ति को आगे बढ़ने का मार्ग दिखाता है, जबकि संस्कार उसे सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। जीवन में चरित्र, अनुशासन, ईमानदारी और नैतिक मूल्यों का विशेष महत्व है। उन्होंने विद्यालय द्वारा आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं को महत्व दिए जाने की सराहना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि द टॉसब्रिज स्कूल का उद्घाटन वर्ष 2015 में भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वारा किया गया था। डॉ. कलाम का जीवन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि बड़े सपने देखने के साथ उन्हें साकार करने के लिए निरंतर परिश्रम और दृढ़ संकल्प भी आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को डॉ. कलाम की आत्मकथा *‘Wings of Fire’ (अग्नि की उड़ान)* पढ़ने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि उनके जीवन के अनुभव विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य निर्धारित करने और चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा देंगे।
मुख्यमंत्री ने भारतीय संस्कृति की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की परंपरा ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना पर आधारित है। सभी के प्रति सम्मान, बड़ों का आदर, विविधताओं को स्वीकार करना और जरूरतमंदों की सहायता करना भारतीय संस्कारों के अभिन्न अंग हैं। यही जीवन मूल्य हमारी सांस्कृतिक पहचान को विशिष्ट बनाते हैं और समाज में आपसी सद्भाव एवं सहयोग की भावना को मजबूत करते हैं।
उन्होंने विद्यालय के ध्येय वाक्य *‘ज्ञानं भारः क्रियां बिना’* का उल्लेख करते हुए कहा कि कर्म के बिना ज्ञान अधूरा है। ज्ञान की सार्थकता तभी है, जब उसे व्यवहार में उतारकर समाज और राष्ट्र के हित में उपयोग किया जाए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विद्यालय के विद्यार्थी इस विचार को अपने जीवन में अपनाते हुए ज्ञान के साथ कर्म, जिम्मेदारी और सेवा की भावना को भी महत्व देंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत प्रौद्योगिकी, नवाचार और आधुनिक विज्ञान के क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाला समय नई तकनीकों, कौशल और रचनात्मकता का है। ऐसे में विद्यार्थियों को आधुनिक विषयों में दक्षता हासिल करने के साथ योग, ध्यान, अनुशासन और संस्कारों को भी अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक ज्ञान और भारतीय जीवन मूल्यों का समन्वय ही विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को मजबूत बनाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, कौशल विकास और रचनात्मकता को विशेष महत्व दिया गया है। राज्य सरकार भी उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। सरकार का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को रोजगार प्राप्त करने तक सीमित न रखते हुए उन्हें स्वरोजगार और उद्यमिता के माध्यम से रोजगार सृजन करने के लिए भी प्रोत्साहित करना है, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर प्रदेश और देश की आर्थिक प्रगति में योगदान दे सकें।
मुख्यमंत्री ने युवाओं के भविष्य और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल पर अंकुश लगाने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। पारदर्शी भर्ती व्यवस्था के माध्यम से पिछले पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां प्रदान की गई हैं। यह उपलब्धि युवाओं को निष्पक्ष अवसर उपलब्ध कराने और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने का कोई शॉर्टकट नहीं होता। मेहनत, अनुशासन, ईमानदारी और निरंतर सीखने की इच्छा ही सफलता का वास्तविक आधार हैं। विद्यार्थियों को असफलताओं से निराश होने के बजाय उनसे सीख लेकर आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी में अपनी प्रतिभा और क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं। आवश्यकता केवल उन्हें पहचानने, सही दिशा देने और निरंतर प्रयास करने की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के अपने ‘विकल्प रहित संकल्प’ को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस लक्ष्य की प्राप्ति में शिक्षित, संस्कारित, कुशल और आत्मनिर्भर युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विद्यालय के विद्यार्थी अपने ज्ञान, प्रतिभा और अच्छे संस्कारों के बल पर प्रदेश और देश का नाम रोशन करेंगे।
**इस अवसर पर द टॉसब्रिज स्कूल के प्रबंधन एवं प्रशासन से जुड़े पदाधिकारी, शिक्षकगण, अभिभावक, विद्यार्थी तथा अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
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ग्रीन इण्डिया मिशन के तहत आजीविका संवर्धन एवं रोजगार सृजन पर विशेष जोर: प्रमुख सचिव*
*वर्ष 2031 तक की कार्ययोजना में स्थानीय समुदायों की आजीविका से जुड़ी गतिविधियों को प्राथमिकता देने के निर्देश*
प्रमुख सचिव, वन एवं पर्यावरण श्री आर.के. सुधांशु की अध्यक्षता में बुधवार को सचिवालय में राज्य वन विकास अभिकरण की 7वीं राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य में ग्रीन इण्डिया मिशन (GIM) योजना के अगले पांच वर्षों (वर्ष 2031 तक) के पर्सपेक्टिव प्लान की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
प्रमुख सचिव ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रदेश में रोजगार के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने ग्रीन इण्डिया मिशन के तहत आजीविका संवर्धन से जुड़ी गतिविधियों को प्राथमिकता देने तथा इस संबंध में विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने वन पंचायतों में भी सी-बकथोर्न का पौधरोपण करने तथा आजीविका संवर्धन से संबंधित विषयों पर शीघ्र बैठक आयोजित करने को कहा।
बैठक में अवगत कराया गया कि राज्य वन विकास अभिकरण के अंतर्गत वर्तमान में ग्रीन इण्डिया मिशन, नगर वन योजना एवं स्कूल नर्सरी योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। राज्य वन विकास अभिकरण (SFDA) का अगले पांच वर्षों यानी वर्ष 2031 तक के लिए नवीनीकरण किया गया है। बैठक में ग्रीन इण्डिया मिशन की परिप्रेक्ष्य योजना, राज्य वन विकास अभिकरण की कार्यकारिणी समिति तथा मिशन के क्रियान्वयन के लिए केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों एवं दस्तावेजों की जानकारी दी गई। बताया गया कि मिशन के अंतर्गत तीन सब-मिशन में कार्य किए जाने हैं। वर्तमान परिप्रेक्ष्य योजना के क्रियान्वयन के लिए ₹559.16 करोड़ की वित्तीय आवश्यकता आकलित की गई है।
इससे पूर्व आयोजित छठी राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति की बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा के दौरान बताया गया कि सभी जिलों में वन विकास अभिकरण की बैठकें आयोजित की जा रही हैं। ग्रीन इण्डिया मिशन एवं अन्य योजनाओं के अंतर्गत सफल पौधरोपण के संबंध में नोडल अधिकारी द्वारा दिए गए सुझाव सभी प्रभागीय वनाधिकारियों (DFO) को भेजे गए हैं।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि ग्रीन इण्डिया मिशन के नए कार्यों को छोड़कर जुलाई 2025 एवं मई 2026 में कुल ₹31.45 करोड़ की वार्षिक परिचालन योजना (APO) भारत सरकार को भेजी गई है। धनराशि स्वीकृत एवं अवमुक्त होने के बाद स्थानीय समुदायों की आजीविका के विकास के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए जाएंगे।
बैठक में प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) श्री कपिल लाल, पीसीसीएफ (वन्यजीव) श्रीमती नीना ग्रेवाल, एपीसीसीएफ (प्रोजेक्ट) श्री विवेक पांडेय, अपर प्रमुख वन संरक्षक एवं नोडल अधिकारी (वन संरक्षण) श्रीमती मीनाक्षी जोशी, अपर सचिव श्री नवनीत पांडेय, श्री विक्रम सिंह यादव सहित अन्य संबंधित अधिकारी भौतिक एवं वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे।
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31 दिसंबर तक ग्राम पंचायतों में लगेंगे वित्तीय समावेशन शिविर*
*पात्र लाभार्थियों को बैंकिंग योजनाओं से जोड़ने के साथ निष्क्रिय खातों की केवाईसी का होगा पुनः सत्यापन*
*सूचना/टिहरी/21 अक्टूबर, 2026* राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी के निर्देशों के क्रम में जनपद टिहरी गढ़वाल की सभी ग्राम पंचायतों में 21 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक बैंकों द्वारा वित्तीय समावेशन शिविरों का आयोजन किया जा रहा है।
प्रबंधक जिला अग्रणी बैंक मनीष मिश्रा ने बताया कि शिविरों के माध्यम से पात्र लाभार्थियों को विभिन्न बैंकिंग योजनाओं से जोड़ने के साथ ही सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि शिविरों में प्रधानमंत्री जनधन योजना (पीएमजेडीवाई), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई), प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई), अटल पेंशन योजना (एपीवाई) तथा किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) से संबंधित लाभार्थियों को कवर किया जाएगा।
इसके साथ ही निष्क्रिय जनधन खातों की केवाईसी का पुनः सत्यापन किया जाएगा तथा बिना दावे वाली वित्तीय परिसंपत्तियों (अनक्लेम्ड फाइनेंशियल एसेट्स) से संबंधित मामलों के निस्तारण के लिए भी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक ने पात्र लाभार्थियों से अपील की कि वे संबंधित बैंक द्वारा आयोजित शिविरों में पहुंचकर योजनाओं का लाभ उठाएं तथा आवश्यक बैंकिंग औपचारिकताएं पूरी करें।
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*महिला मंगल दलों के माध्यम से मतदाता जागरूकता अभियान जारी*
*विभिन्न विकासखंडों में महिलाओं ने ली मतदान की शपथ, आमजन से मतदान की अपील*
टिहरी/21 अक्टूबर, 2026;* आगामी विधानसभा सामान्य निर्वाचन-2027 के दृष्टिगत मुख्य विकास अधिकारी एवं नोडल अधिकारी स्वीप वरुणा अग्रवाल के निर्देशों के क्रम में जनपद में मतदाता जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत विभिन्न विकासखंडों में महिला मंगल दलों के माध्यम से ग्रामीणों को मतदान के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
इसी क्रम में विकासखंड थौलधार के कंडारगांव व सुनारगांव, चंबा के पस्सी गांव और जौनपुर के खेड़ा गांव सहित जनपद के अन्य विकासखंडों में महिला मंगल दलों की सदस्यों ने स्वीप (व्यवस्थित मतदाता शिक्षा एवं निर्वाचक सहभागिता) कार्यक्रम के तहत निर्वाचन एवं मतदान संबंधी शपथ ली। इस दौरान महिलाओं ने ग्रामीणों को मतदान के महत्व की जानकारी देते हुए लोकतंत्र में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।
अभियान के तहत लोगों को मतदाता सूची में अपना नाम सुनिश्चित कराने तथा आगामी विधानसभा निर्वाचन में अपने मताधिकार का स्वतंत्र एवं निर्भीक होकर प्रयोग करने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
जिला प्रशासन की ओर से आमजन से अपील की गई है कि वे आगामी विधानसभा निर्वाचन में अनिवार्य रूप से मतदान करें और अपने परिवार, आस-पड़ोस तथा अन्य लोगों को भी मतदान के लिए प्रेरित करें, ताकि लोकतंत्र में प्रत्येक पात्र मतदाता की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
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: *स्वीप कार्यक्रम के अन्तर्गत मतदाता जागरूकता अभियान एवं शपथ लेते हुए महिला मंगल दल*
*ब्लॉक थौलधार टिहरी गढ़वाल*
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स्वीप कार्यक्रम के अंतर्गत मतदाता जागरूकता अभियान एवं शपथ ग्रहण महिला मंगल दल खेड़ा जौनपुर*
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वोट चोरी को लेकर पत्रकार रोज आन्दोलनकारीयों के साथ उतरते हैं, पुलिस के दमन को झेलते हैं| सरकार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जाकर उनके दबाव को भुगतते हैं| वोट चोरी के मामले में सत्ता में बैठे दलों को सत्ता का सुख मिल रहा है | भविष्य में विपक्ष के लिए सत्ता का द्वार खुल रहा है| वोट चोरी पर रोक लगी तो जिनके नाम कटे वो जुड़ जायेंगे परन्तु पत्रकारों को क्या मिलेगा ?
अब मीडिया के संवैधानिक अधिकार को लेकर तरीका बदलेगा| अब तक मीडियाकर्मियों का अधिकार बताकर मांगा जा रहा था लेकिन अब लोकतन्त्र और संविधान को खत्म होने से बचाने और सड़कों पर जनता के प्रदर्शन में पुलिसिया दमन से बचने के लिए मांगा जायेगा|
मैंने अपने स्तर पर पुरा साइंटिफिक-एनालिसिस रखा हैं| आप व कोई भी प्रकाशन करने वाला पत्रकार इसे बदलकर और भी प्रभावी बना सकता हैं|
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साइंटिफिक-एनालिसिस
मीडिया के संवैधानिक चेहरे का अभाव भारतीय लोकतंत्र व चुनावी प्रक्रिया के लिए भस्मासुर बना
वर्तमान में वोट चोरी देश का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है| इसके माध्यम से चुनावी प्रक्रिया और देश के लोकतन्त्र के खत्म होने की चर्चा जोरों पर हैं| साइंटिफिक-एनालिसिस के विज्ञान वाले तकनीकी आधार से समझे तो लोकतन्त्र के खत्म होने का मुख्य कारण मीडिया का संवैधानिक चेहरा व जवाबदेही वाले अधिकार न होना हैं जो इसके लिए भस्मासुर बन गया|
यह सच्चाई हम वर्षों से बता रहे हैं और राष्ट्रपति, उच्चतम न्यायालय सहित कहीं संस्थानों को विधिवत रूप से भेज चूके हैं परन्तु संवैधानिक पदों पर बैठे सभी लोग इस भस्मासुर के सहभागी बन लोकतन्त्र को खत्म कर रहे हैं|
भारतीय लोकतंत्र संविधान के आधार पर चलता हैं परन्तु एक संविधान की अलग-अलग मर्यादा बताकर सही पदासीन लोकतन्त्र की जड़ें खोदने में सबसे आगे बना रहना चाहते हैं| वोट चोरी को लेकर इंडिया गठबंधन ने मुख्य न्यायाधीश को मीलकर ज्ञापन देने की बात कही तो उन्होंने ईमेल से जवाब देकर संवैधानिक मर्यादा को पुरा नहीं माना और मीडीयाकर्मियों के सामने आकर सार्वजनिक रूप से बयान दिया | इसके विपरित संवैधानिक रूप से मुख्य न्यायाधीश से नीचे मुख्य चुनाव आयुक्त पर वोट चोरी का आरोप लगता हैं तो वो उसी संविधान की मर्यादा बता न तो प्रेस-कान्फ्रेस करते हैं और न ही मीडीयाकर्मियों के सामने आकर बयान देते हैं|
लोकसभा में विपक्ष के नेता कहीं सांसदों के साथ जब मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलने चुनाव आयोग जाते हैं तो उन्हें रस्ते में रोक दिया जाता हैं| यह काम तथाकथित भारत सरकार ने करा या चुनाव आयुक्त ने करवाया| इसके बाद चुनाव आयुक्त शाम को प्रेस-नोट जारी करता हैं| जब न्यूज़ चैनल और मीडिया के माध्यम सिर्फ मनोरंजन का माध्यम है और इनका संवैधानिक प्रारूप नहीं तो चुनाव आयोग के कर्मचारी और चुनाव आयुक्त ड्यूटी के समय टेलिविजन व इंटरनेट देखकर मनोरंजन क्यों कर रहे थे|
इंडियन एक्सप्रेस की खबर पर देशभर में विपक्ष का प्रतिरोध शुरू हो जाता हैं और जब यह बात उच्चतम न्यायालय के सामने आती हैं तो न्यायाधीश क्यों कहते हैं कि यह आधा सत्य भी हो सकता है अर्थात् मीडिया का कोई भी चैनल, प्रकाशन, रेडियो, आनलाईन न्यूज़ पोर्टल कहीं से भी झूठ बताकर देश में बवाल और जनता को प्रदर्शन के लिए सड़कों पर लाकर आम लोगों का दैनिक जीवन दुर्भर व बर्बाद कर सकता हैं| इसके बाद जांचा और परखा जायेगा की यह सच था या झूठ | समय रहते मीडिया की एक रिपोर्ट बनने व संवैधानिक कार्यवाही शुरू होने के लिए उसका संवैधानिक चेहरा चाहिए|
चुनें हुए सांसदों के माध्यम से देश की आधी जनता सड़कों पर थी तो राष्ट्रपति का राष्ट्रीय सम्बोधन क्यों नहीं आया | यह सिर्फ़ राष्ट्रीय पर्वों पर मीया मीट्ठू बनने के लिए होता हैं| प्रधानमंत्री असंवैधानिक रूप से या झूठ की बिसात पर राष्ट्रपति का राष्ट्रीय सम्बोधन का अधिकार हड़प कहीं बार सम्बोधित कर चुके हैं तो ये जनता के वोटिंग अधिकार यानि लोकतन्त्र की मूल आत्मा के लिए क्यों नहीं सामने आये | राष्ट्रपति ने जब इंडिया गठबंधन से मुलाकात करी और वोट चोरी के सबूत मांगे तो प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मीडिया में जो भी सच्चाई बताई और मरे लोगों को जिंदा होने के सबूत पर बात कराई वो सभी बेईमानी निकला | फोर्म 6 को लेकर प्रेम विज्ञप्ति में दिया आधिकारिक कागज व मुख्य न्यायाधीश का बयान सबकुछ संविधान के लिए कोरे कागज हो गये |
उच्चतम न्यायालय के तीन न्यायाधीश न्यायपालिका को बचाने जब हाथ जोड़कर मीडिया के माध्यम से जनता के सामने आये थे | ये लोग मीडिया की रिपोर्ट को झूठ के नज़रिए से देखते हैं और संवैधानिक रूप से कानूनी नहीं मानते तो यह सब सड़कों पर रायता फैलाना ही माना जायेगा |
देश में कोई भी भारतीय मीडिया नहीं है जो हैं वो प्राइवेट कंपनी और सरकारी तौर पर ट्रस्ट हैं| इसलिए चुनाव से पहले चुनाव आयोग का प्रेस कॉन्फ्रेंस, राष्ट्रपति का सम्बोद्धन, मुख्य न्यायाधीश की मीडिया में व्यक्तव्य व बयान देना, यह सब एक दिखावा है ताकि देश व देशवासी झूठ के गुब्बार में उलझकर, फंसकर, चिल्ला-चिल्ला कर बर्बाद होते रहे और पदासीन लोग ऐश आराम की जिन्दगी जीते रहे| मीडिया के माध्यम से स्वत कोई कानूनी व संवैधानिक प्रक्रिया शुरू नहीं होती हैं तो बुद्धिजीवीयों, सेवानिवृत्त कर्मचारियों व अनुभवी और सम्मानित लोगों का मीडिया में आकर बोलना व लिखना सबकुछ नौटंकी और तमाशा है|
मीडिया को भारतीय नाम संवैधानिक चेहरा, जवाबदेही वाले अधिकार दिये जाये तो वोट चोरी जैसे गम्भीर आरोप के बाद भी देश की सड़कों की रफ्तार, करोड़ों-अरबों रूपये के बाजार नुकसान, मेट्रो-ट्रैनों जैसी मूलभूत सुविधाएं बाधित व पंगू नहीं हो सकती| इससे कोई भी संवैधानिक मर्यादा का चोल ओढ़ मीडिया के माध्यम से जनता के सवालों से नहीं बच सकता|
मीडिया का संवैधानिक चेहरा क्या है? वो किस तरह से गठित होता हैं, काम कैसे करेगा यह सब हम पहले ही विस्तार से स्टेप वाईज स्टेप बता चुके हैं| समय रहते तुरन्त यह नहीं करा गया तो भारतवासी झूठ के गुब्बार में उलझकर, लड़कर, सड़कों पर संघर्ष, सार्वजनिक माध्यमों के अवरूद्ध होने से खत्म हो जायेंगे और देश का लोकतन्त्र खत्म हो जायेगा|
कई न्यूज चैनल व प्लेटफार्म पहले दिन से मुख्य चुनाव आयुक्त से प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की बात कर रहे हैं ताकि सारी समस्याएं खत्म हो जाये | मीडिया से जुड़े लोग मानसिक रूप से गुलाम है| ये आपस में मैं पहले, मैं पहले के नाम पर एक दूसरे की टांग खिंचकर गिरा सकने के अलावा कुछ नहीं कर सकते| इनमें राष्ट्रीयता, पत्रकारिता के प्रति समर्पण, संविधान व लोकतन्त्र के प्रति श्रृद्धा होती और अपने साथी लोगों के प्रति इंसानियत होती तो उन्हें पुलिस के अत्याचार का भोग न बनाकर संगठित होकर कहते कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करते तो वो आगे भविष्य में चुनाव आयोग की किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस को कवर नहीं करेंगे और दिखायेंगे| चाहे वो किसी चुनाव से ही सम्बन्धित क्यों ना हो| मीडिया के संवैधानिक चेहरे के बाद इस तरह के बायकाट की जरूरत नहीं पड़ेगी| जब राष्ट्रीयता व मानवता ही नहीं हो तो यह मीडिया का संवैधानिक चेहरा व जवाबदेही का अधिकार लेकर भी देश, लोकतन्त्र, संविधान, आजादी बनी रहने के लिए कुछ नहीं कर सकते|
शैलेन्द्र कुमार बिराणी
युवा वैज्ञानिक


